बड़े चूचों वाली स्टूडेंट की चुदाई

मेरा नाम सन्दीप सिंह है. मैं भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले का रहने वाला हूं। मेरी हाइट करीब 5.7 फीट है। मैं सदैव व्यायाम करता हूं। जिससे मेरा शरीर बिल्कुल फिट है। मेरे लंड का साईज करीब 7 इंच लम्बा और करीब 2.5 इंच मोटा है। हमारी ज्वाइंट फैमिली है.

मैं सन् 2012 से ही इस साइट का नियमित पाठक हूं। अन्तर्वसना के बारे में मुझे तब पता चला जब मैं ट्रेनिंग ले रहा था। ट्रेनिंग के दौरान मेरी मुलाकत एक व्यक्ति से हुई जो हमारे साथ ही ट्रेनिंग ले रहा था। वह राजस्थान के किसी जिले का रहने वाला था। आज मैं सेंट्रल गवर्नमेंट में एम्प्लोई हूं और अच्छी पोस्ट पर काम कर रहा हूं.

यूं तो मेरी जिन्दगी में बहुत से ऐसे वाकये हुए हैं जो मैं आप लोगों के साथ साझा करना चाहता हूँ लेकिन शुरूआत सबसे दिलचस्प किस्से के साथ करते हैं. यह किस्सा उस वक्त का है जब मैं इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी होने के बाद कॉलेज में गया था. चूंकि मैं अपनी कॉलेज की फीस और पढ़ाई का खर्च खुद ही उठाना चाहता था इसलिए मैंने एक स्कूल में टीचर की जॉब भी कर ली थी.

वह स्कूल बाहरवीं कक्षा तक था, मगर मुझे पढ़ाने के लिए नवीं और दसवीं कक्षाएं दी गईं. मुझे स्कूल में गणित और विज्ञान पढ़ाना था. शुरूआत में तो बड़ा ही अजीब लगता था और शर्म-सी भी आती थी. इसलिए मैं थोड़ा घबराता था. क्लास खत्म होने के बाद मैं ऑफिस में आकर बैठ जाता था.

स्कूल में हफ्ता भर आराम से निकल जाता था. फिर वीकेंड पर मेरी कॉलेज की क्लास होती थी. इस तरह से मैं काफी व्यस्त रहने लगा था. समय जल्दी से निकल रहा था और कब मुझे स्कूल में पढ़ाते हुए दो महीने बीत गये, कुछ पता ही नहीं चला.

तीन महीने बाद सर्दियां शुरू हो गईं. मीठी-मीठी ठंड लगने लगी थी. सुबह-शाम स्वेटर पहनना पड़ता था. मगर दिन में गर्मी लगती थी तो उसको निकालने का दिल भी कर जाता था.

स्कूल में एक लड़की थी जिसका नाम प्रिया था. वह अक्सर मेरी तरफ देखती रहती थी मगर मैंने कभी उस पर ध्यान नहीं दिया था. चूंकि मैं देखने में अच्छा था और मेरी बॉडी भी काफी फिट थी इसलिए लड़कियां जल्दी ही मुझे पसंद कर लेती थीं.

मगर प्रिया में मेरी कोई रूचि नहीं थी. उसकी फीगर तो अच्छी थी लेकिन वह देखने में अच्छी नहीं लगती थी. मैंने धीरे-धीरे उसकी तरफ ध्यान देना शुरू किया. वह मुझसे बात करने के बहाने खोजती रहती थी. कभी साइंस का कोई सवाल लेकर आ जाती थी तो कभी मैथ्स का. कई बार तो वो एक ही सवाल को दो बार ले आती थी जिससे मुझे उसकी चोरी के बारे में पता लगने लगा था कि यह जान-बूझकर ऐसा करती है. मगर फिर भी मैं उसकी तरफ कोई ऐसा भाव नहीं रखता था जिससे उसको लगे कि मैं भी उसमें रूचि रखता हूं.

उसने मुझ पर लाइन मारने की बहुत कोशिश की लेकिन मैं उसको इग्नोर कर देता था. ऐसा भी नहीं था कि मुझे लड़कियों में कोई रूचि ही नहीं थी मगर प्रिया जैसी लड़कियों की तरफ मैं कम ही ध्यान देता था.

फिर एक दिन प्रिया स्कूल के लॉन में बैठी हुई लंच कर रही थी. मैं भी स्टाफ रूम से लंच करके बाहर पानी की टंकी के पास हाथ धोने के लिए जा रहा था.
मेरी नजर प्रिया पर पड़ गई. उसके साथ दो-तीन लड़कियां और भी बैठी हुई थीं. वे सब की सब आपस में खिल-खिलाकर हंस रही थी. मेरा ध्यान उनकी तरफ गया. मैंने देखा कि एक लड़की उनमें बहुत खूबसूरत थी. उसको देख कर ऐसा लग रहा था जैसे खेत में खरपतवार के बीच में कोई सूरजमुखी का फूल खिला हुआ है. हंसती हुई बहुत ही प्यारी लग रही थी.

नजर उसकी छाती पर गई तो आसमानी रंग के नीले सूट में उसकी चूचिचों के उभार भी काफी सुडौल व गोल लग रहे थे. उन पर उसने सफेद रंग का दुपट्टा डाला हुआ था जो उसके गले पर वी-शेप बनाता हुआ उसके चूचों पर होता हुआ नीचे की तरफ नुकीला होकर उसके पेट तक पहुंच रहा था. रेशमी से बाल थे उसके जो धूप में चमक रहे थे. लाल होंठ और गोरे गाल. एक बार उस पर नजर गई तो बार-बार जाने लगी.

उस दिन पहली बार मुझे स्कूल में कोई लड़की पसंद आई थी और मेरे मन में कुछ-कुछ होने लगा था. मगर मैं टीचर था इसलिए इस तरह की बातें नहीं कर सकता था. उस दिन मैं हाथ धोकर वापस आकर स्टाफ रूम में आ बैठा.

अगले दिन लंच के टाइम में फिर प्रिया के साथ मैंने उसी लड़की को बैठे हुए देखा. अब प्रिया मुझे काम की स्टूडेंट लगने लगी थी. मगर अभी तक ये पता नहीं था कि प्रिया की उस लड़की से बात होती है या नहीं. अगर होती है तो वो दोनों कितनी अच्छी दोस्त हैं इस बारे में मुझे कुछ खास अंदाजा नहीं था.

मगर उस दिन के बाद से लंच के समय मैं जान-बूझकर बाहर निकलता था. हफ्ते भर में मुझे पता लग गया कि वो प्रिया की सहेलियों में से एक है. अब प्रिया की तरफ मैंने ध्यान देना शुरू कर दिया क्योंकि प्रिया ही एक ऐसी लड़की थी जो मेरी बात उससे करवा सकती थी. इसलिए प्रिया को घास डालना शुरू कर दिया मैंने और जल्दी ही उसके नतीजे भी दिखाई देने लगे.

अब जब भी मैं लंच टाइम में बाहर जाता तो वो खूबसूरत लड़की भी एक बार नज़र भर कर मेरी तरफ देख कर नज़र फेर लेती थी. दिल पर कटारी चल जाती थी उसकी मुस्कान से. अब रात को उसके ख्याल आने शुरू हो गये थे और एक दिन मैंने उसके बारे में सोच कर मुट्ठ भी मार डाली.

जैसे-जैसे दिन गुजर रहे थे उसकी तरफ मेरा आकर्षण बढ़ता ही जा रहा था. इधर प्रिया भी समझ चुकी थी कि मैं उसकी दोस्त को पसंद करता हूँ. इसलिए पहले प्रिया को अपने झांसे में लेना जरूरी था.

एक दिन ऐसे ही छुट्टी के वक्त मैंने प्रिया से पूछ लिया कि वह लंच में किनके साथ बैठी रहती है तो उसने बताया कि वह बाहरवीं कक्षा की लड़कियों के साथ लंच करती है.

फिर मैंने बहाने से उन सब का नाम पूछा तो पता चला उस खूबसूरत सी लड़की का नाम मनमीता (बदला हुआ) था. वह बाहरवीं कक्षा की ही छात्रा थी और प्रिया से उसकी अच्छी पटती थी. अब अगला टारगेट मनमीता तक पहुंचना हो गया था. मगर इसके लिए प्रिया की मदद की जरूरत थी. प्रिया भी मेरे दिल की बात जान चुकी थी. इसलिए जब मैं प्रिया से मनमीता के बारे में बात करता था तो उसके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान फैल जाती थी.

फिर मैंने प्रिया से कहा- अगर तुम परीक्षा में अच्छे नम्बर लाना चाहती हो तो मेरे पास तुम्हारे लिए एक अच्छा उपाय है.
चूंकि प्रिया मैथ्स में बहुत कमजोर थी इसलिए उसको लालच आ गया और वो पूछ बैठी- मुझे क्या करना होगा सर?
मैंने कहा- अगर तुम मनमीता से मेरी बात करवा दो तो मैं तुम्हें मैथ्स में आसानी से पास करवा सकता हूँ.
प्रिया बोली- आपका काम हो जायेगा.

उसका जवाब सुनकर मन कर रहा था कि प्रिया के चूचे दबा दूं लेकिन वो अभी छोटी थी और मुझे उसमें कोई रूचि भी नहीं थी इसलिए मैं मन ही मन खुश होकर रह गया. मेरा आधा काम हो गया था.
अब बाकी का आधा काम प्रिया को करना था जिसके लिये वो पूरी तरह से तैयार थी क्योंकि मैं उसको शुरू से ही नोटिस करता आ रहा था कि यह लड़की बहुत तेज है. मुझे पूरा यकीन था कि प्रिया मेरा टांका मनमीता के साथ फिट करवा देगी.

फिर एक दिन शाम को जब मैं लेटा हुआ था तो मेरे फोन पर एक अन्जान नम्बर से कॉल आया.
मैंने हैलो किया तो वहाँ से आवाज आई- सर, मैं मनमीता बोल रही हूँ, प्रिया की सहेली.
मनमीता नाम सुनते ही मेरे मन में लड्डू से फूट पड़े और मैंने फटाक से उठ कर दरवाजा बंद कर लिया और उससे बात करने लगा. उसकी आवाज बहुत ही प्यारी थी.

उस दिन उससे बात होने के बाद फिर तो रोज ही उससे बात होने लगी. रात को घंटों तक हम बातें करते रहते थे. वो फोन पर बात करती रहती थी और मैं दरवाजा बंद करके रजाई के अंदर लंड को सहलाता रहता था.
अब उसको चोदने के लिए इंतजार करना मुश्किल हो रहा था.

बातें होते-होते मनमीता मुझसे काफी खुल गई थी. अब बस उसकी चुदाई के लिए मुहूर्त निकलना बाकी रह गया था. एक दिन वो पल भी आ गया. स्कूल में एक्सट्रा क्लास लगने लगी थी और कमजोर बच्चों को अलग से टाइम देने के लिए कहा गया था. सिर्फ मैथ्स की क्लास लगती थी.
क्लास में तीन-चार बच्चे ही थे जिनको एक्सट्रा क्लास देनी होती थी.

उस दिन क्लास शुरू होते ही प्रिया मेरे पास आई और उसने अपनी नोटबुक में एक सवाल लिखा हुआ था. सवाल समझाते हुए मैंने देखा कि उसने किताब में एक पर्ची मेरे पास छोड़ दी थी.
बाकी बच्चों से नजर बचाकर मैंने पर्ची खोलकर पढ़ी जिसमें लिखा हुआ था- मनमीता आपका इंतजार ऊपर वाली मंजिल में कर रही है.

मेरे दिल धक् से रह गया. मैंने प्रिया की तरफ देखा तो वो मुस्करा रही थी. मैंने बच्चों से कहा- तुम लोग दिए गये सवालों को मेरे बताए अनुसार हल करने की कोशिश करो, मैं थोड़ी देर में आता हूँ.

मैं जल्दी से ऊपर वाली मंजिल पर गया तो वहां आखिरी कोने वाले कमरे के दरवाजे पर मनमीता खड़ी हुई मेरा इंतजार कर रही थी. मैं नजर बचाते हुए उसके पास पहुंचा और अंदर साइड में होकर मैंने उससे पूछा- क्या बात है? आज तुम यहां कैसे रुकी हुई हो?

मनमीता ने मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर हाथ फिराते हुए उसको सहला दिया और मेरे सीने से लिपट गई. मेरा लौड़ा तुरंत खड़ा हो गया और मैंने उसके होंठों को वहीं पर चूसना शुरू कर दिया. मैंने उसके दुपट्टे को उतार कर डेस्क पर डाल दिया और उसके सूट के ऊपर से उसके चूचों को दबाने लगा.

मैंने दरवाजा हल्का सा ढाल दिया ताकि किसी को बाहर से कुछ दिखाई न दे. उसको दीवार के सहारे लगाकर मैंने उसके चूचों को जोर से मसलते हुए उसके होंठों को चूस डाला और वह भी मेरे होंठों को वैसी ही बेरहमी से चूसने-काटने लगी.
मैं उसके शर्ट को निकालना चाहता था मगर स्कूल में उसको नंगी करने में खतरा था इसलिए उसके कमीज को उसके चूचों के ऊपर करके मैंने उसकी ब्रा को भी ऊपर सरका दिया.

उसके गोरे चूचे जिनके गुलाबी निप्पल थे, मैंने अपने मुंह में भर लिये. उसकी गांड को दबाते-सहलाते हुए मैं उसके चूचों को चूसने लगा. उसके चूचे ब्रा से नीचे बाहर आने के बाद काफी मोटे लग रहे थे.

मनमीता मेरे तने हुए लौड़े को मेरी पैंट के ऊपर से सहला रही थी. उसने मेरी पैंट की जिप खोल ली और मेरे लंड को अंडरवियर की इलास्टिक से बाहर निकालते हुए चेन से बाहर करके उसको अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी.

मेरा लौड़ा आग उगल रहा था और बिल्कुल गर्म हो गया था. उसके कोमल हाथों में जाकर बात मेरे लौड़े के काबू से बाहर हो गयी और मैंने उसकी सलवार को खोलकर नीचे गिरा दिया, घुटनों के बल मैं मनमीता की टांगों के बीच में बैठ गया.
मनमीता ने अपने कमीज को ऊपर उठा लिया. उसकी सफेद पैंटी के बीच में गीला सा धब्बा हो गया था. मैंने उसकी कमर से उसकी पैंटी को खींच कर नीचे करना शुरू किया और उसकी भूरे रंग के हल्के बालों वाली चूत मेरे आंखों के सामने बेपर्दा होने लगी. उसकी चूत के दर्शन भर से ही आंखें धन्य हो गईं. चिपकी हुई गुलाबी होंठों वाली चूत थी उसकी.

मैंने उसकी जांघों पर हाथ रख कर उनको थोड़ी चौड़ी सी फैलाते हुए उसकी कमसिन कोमल चूत पर मैंने अपने प्यासे होंठ रखे तो मनमीता ने मेरे बालों में हाथ फिरा कर अपने आनंदमयी अनुभव का इशारा दे दिया. मैंने उसकी टपकती चूत के अंदर अपनी गर्म जीभ डाली और मनमीता अपनी गांड को दीवार से सटाए हुए थोड़ी और नीचे की तरफ आकर टांगें फैलाने लगी ताकि मेरी जीभ उसकी चूत में अंदर तक चली जाये.

मैंने उसकी चूत में तेजी से जीभ को तीन-चार बार अंदर-बाहर किया तो वह अपने चूचों को मसलते हुए सिसकारने लगी. कमरा खाली था और उसकी आनंद भरी कामुक सिसकारी कमरे में गूंज उठी. स्स्स … सर … आइ लव यू … अम्म … स्स्स … इस्स्स …आह …

वो अपनी चूत को मेरे होंठों पर फेंकने लगी. मैं भी उसकी चुदाई के लिए अब पल भर का इंतजार नहीं कर पा रहा था. मैंने अपने लंड को नीचे बैठे हुए ही एक हाथ से हिलाया तो लंड ने जैसे कह दिया हो- बहनचोद! अब तो डाल दे मुझे इस माल के अंदर …
मैंने जीभ को मनमीता की चूत से बाहर निकाल कर उसको यहां-वहां से चूसा चाटा और मनमीता मुझे ऊपर उठाने लगी. मैं समझ गया अब यह भी लंड लेने के लिए मरी जा रही है.

मैंने उसकी चूत पर एक पप्पी दी और फिर उसको दीवार से सटा कर उसकी टांग को उठाते हुए उसकी चूत पर लंड को लगा दिया.

उसके हाथों को दीवार पर ऊपर दबाते हुए मैंने एक धक्का उसकी चूत में मारा और आधा लंड मनमीता की गीली चूत में गच्च से फंस गया.
“उम्म्ह… अहह… हय… याह…स्स्स … सर … दर्द हो रहा है!” वह कसमसाते हुए कहने लगी. मैंने उसके चूचों को कस कर दबाया और सहलाया तथा साथ ही उसके मुंह में अपनी जीभ डाल दी.

फिर दोबारा से एक धक्का मारा तो पूरा लंड उसकी चूत में जा फंसा. आह्ह … क्या चूत थी उसकी. उसके मोटे चूचे मेरी छाती से सट गये थे. मैं उसकी गर्दन को चूमने लगा और मेरी गांड दीवार की तरफ धक्के लगाती हुई उसकी चूत में लंड को अंदर-बाहर करने लगी.

दो मिनट बाद मनमीता के मुंह से कामुक सीत्कार फूटने लगे और वो मुझे बांहों में भर कर प्यार करने लगी. मेरा जोश हर पल उबलता हुआ मेरे लंड के धक्कों को उसकी चूत फाड़ने के लिए उकसा रहा था. उसकी चूत की चुदाई करते हुए मैं तो सातवें आसमान में उड़ने लगा. बीच-बीच में उसके मोटे चूचों को भी मसल देता था.

दो-तीन मिनट तक मैंने उसकी चूत को दीवार से सटा कर चोदा. फिर पास ही पड़ी मेज पर उसको लेटा लिया और उसकी एक टांग से सलवार को निकाल कर अपने हाथ में उसकी टांग को उठाकर फैला दिया. उसकी चूत मेज के किनारे पर थी. मैंने अपने चिकने हो चुके लंड को उसकी चूत पर लगाया और उसकी चूत में लंड को धकेलते हुए उसके ऊपर लेट कर उसके चूचों को पीने लगा.

मनमीता ने मुझे बांहों में जकड़ लिया और मैंने मेज के ऊपर ही उसकी चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिये. उसकी गोरी और मोटी चूचियों को दबाते हुए उसकी चूत में लंड के धक्के लगाते हुए जो आनंद आया मैं उसको कैसे बताऊं दोस्तो, ऐसी किस्मत बहुत कम लोगों की चमकती है जिनको ऐसी चूत नसीब होती है.
तेजी से उसकी चूत को चोदते हुए मैं उसके जिस्म को भोगने लगा, उसके चूचों को पीता और दबाता रहा. चर्र … चर्र … चूं … चूं की आवाज के साथ हमारे मुंह से दबे हुए सीत्कार कमरे में गूंजने लगे. हाय … आस्स् .. ओह्ह … उफ्फ … हम्म …. स्स्स … आह आह अह्ह … हय … !

उसकी गोरी, चिकनी, मखमली चूत को चोदते हुए इतना मजा आया कि पांच-सात मिनट में ही मेरे अंदर का जोश मेरे लंड के वीर्य में उबाल ले आया और मैंने उसकी चूत में वीर्य की पिचकारी मार दी. पूरा लंड उसकी चूत में खाली कर दिया. धीरे-धीरे मैं शांत हो गया और दो मिनट तक ऐसे ही उसको मेज पर लेटा कर उसके चूचों से चिपका रहा.

मनमीता की चूत मार कर सच में मजा आ गया था. इतना सुखद अनुभव मुझे कभी नहीं हुआ था. फिर हम दोनों अलग हुए और जल्दी से मैंने अपने अध-सोये लंड को अपने अंडरवियर में वापस से अंदर डाला और चेन बंद करके दरवाजे के बाहर झांका.

तब तक मनमीता ने भी अपने कपड़े ठीक कर लिये थे. कपड़े व्यवस्थित करने के बाद पहले मैं कमरे से बाहर गया. मैंने मनमीता को थोड़ी देर बाद में आने के लिए बोला था. वैसे तो स्कूल में कोई नहीं था मगर चपरासी तक की निगाह से बचने के लिए एहतियात बरतना जरूरी था.

जब मैं क्लास में पहुंचा तो प्रिया मेरी तरफ देख कर मुस्करा रही थी. मैंने छुट्टी में जाते हुए उसको थैंक्स बोला तो वो कहने लगी- सर … मेरे एग्जाम का ध्यान रखना!

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया के ज़रिये अपना प्यार देना न भूलें. अपनी जिन्दगी के कुछ और भी हसीन किस्से आपके साथ शेयर करने की अभिलाषा के साथ फिलहाल के लिए अलविदा कहना चाहता हूँ. धन्यवाद!

ममेरे भाई ने मेरी कुंवारी चूत की चुदाई की-2

में अब तक आपने पढ़ा कि मेरे ममेरे भाई अर्पित ने मेरे मामा मामी की गैरमौजूदगी में मुझे सेक्स के लिए पटा लिया था. इस वक्त मैं उसके साथ बिस्तर पर लगभग नंगी पड़ी थी.
अब आगे:

मेरे मम्मों को दबाते दबाते उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था, वो बोला- आशना, कैसा लग रहा है?
मैं कुछ नहीं बोली और बस ‘उन्नह..’ बोल कर शर्मा गई. वो समझ गया कि मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है. अब वो कुछ सख्त होने लगा था और अपने दोनों हाथों से मेरे मम्मों को बेदर्दी से मसलने लगा था.

थोड़ी देर बाद उसने मुझे बेड पर सीधा लेटा दिया. उसने जैसे ही मुझे सीधा लेटाया, तो मेरे दोनों तने हुए मम्मों को देखकर वो बहुत ही उत्तेजित हो गया. अगले ही पल उसने मेरी दोनों चुचियों को हाथों से दबोच लिया. मेरे एक दूध को मेरा भाई अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरी चूची को मसलने लगा. वो अपने हाथ से मेरे चुची के निप्पल को मींजने लगा. फिर उसने मेरे दोनों मम्मों को एक साथ किया और एक साथ ही मेरे दोनों दूध अपने मुँह से चूसने लगा. मेरी दोनों चुचियां एक साथ उसके मुँह में जाने से और दोनों होंठ से दबाने से में भी बहुत उत्तेजित हो गई.

थोड़ी देर यूं ही मेरी चुचियों से खेलने के बाद वो बेड पर उठा. फिर धीरे से वो मेरी पेंटी को निकालने लगा.
मैंने कहा- अर्पित बस बस … यहीं तक ठीक है … और आगे नहीं प्लीज़.

यह सुनते ही वो मेरे सामने हंसने लगा, उसने कहा- क्या बोल रही हो यार … इतना सब कुछ होने के बाद तुम ना बोल रही हो. अभी हमने शुरुआत ही तो की है. तुमको जो देखना था, वो तो अभी तुमने देखा ही नहीं.
ये सुनते ही मैं बहुत शरमा गई और मैं भी उसके साथ हंसने लगी.

जैसे ही उसे समझ आया कि मैं भी तैयार हूँ, तो तुरंत ही उसने अपने हाथों से मेरी पेंटी को नीचे की ओर खींच दिया.
आअहह … अब मैं उसके सामने पूरी नंगी पड़ी थी. उसने मेरी कोमल सी भीगी सी चूत को देखा.

वो बोला- आशना, तेरी चूत बहुत ही जवान है यार. आज तेरी चूत मारने में मुझे बहुत ही मज़ा आने वाला है.
ऐसा बोल कर उसने मेरी चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.

ओह माँ … मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं अपनी आंखें बंद करके बस उसके मज़े ले रही थी. थोड़ी देर बाद चूत पर हाथ फेरते फेरते उसने अपनी एक उंगली धीरे से मेरी चूत के अन्दर डाल दी. आहह … मैं और उत्तेजित हो गई और मेरी चूत पूरी गीली हो गई.

उसकी उंगली मेरी चूत के अन्दर घूमने से मैं थोड़ी ही देर में ही अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई. मुझे मेरी चूत के अन्दर इतनी गुदगुदी हुई कि मैं अंगड़ाई लेने लगी. उसको पता चल गया कि मैं अब अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई हूँ.

तब उसने धीरे से अपनी उंगली मेरी चूत में से बाहर निकाली और वो अपनी उंगली चाटने लगा.
मैंने कहा- ये क्या कर रहे हो?
तो उसने कहा- इसमें जो मज़ा है, तुम्हें नहीं पता.
उसकी इस बात से मैं शरमा गई.

फिर वो धीरे धीरे मेरे पूरे बदन को चूमते चूमते अपना मुँह मेरी चूत के पास ले गया. मेरे भाई ने मेरी चूत पर अपनी जीभ लगा दी और मेरी चूत की फांकों में ऊपर से नीचे तक जीभ फेरते हुए चूत चाटने लगा.
मेरी चूत पर उसकी जीभ फिरते ही मैं बहुत ही गर्म हो गई. मैंने अपने हाथ उसके सिर पर रख दिए. मैं भी पूरा आनन्द लेने लगी ‘आअहह … अहह …’ मुझे अपने भाई से अपनी चुत चटवाने में बहुत मज़ा आ रहा था. वो ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत को चाट रहा था.

थोड़ी देर बाद मेरी चूत बहुत गीली हो गई. तभी उसने मुझे बेड पर उल्टा लेटा दिया और मेरी गांड पर हाथ फेरने लगा. वो मुझे लेटा कर वो थोड़ी देर बेड से उठ गया. मैं औंधी लेटी थी, इसलिए मुझे पता नहीं चल रहा था कि वो क्या कर रहा है, पर थोड़ी देर बाद मुझे मेरी गांड पर कुछ गर्म गर्म एहसास हुआ.

आअहह जैसे ही उसने मेरी गांड को छुआ, तो मुझे पता चल गया कि ये तो मेरे भाई अर्पित का लंड था. उसका लंड बड़ा ही सख़्त और बेहद गर्म था. मैं बहुत ही उत्तेजित हो गई. क्योंकि आज मैं किसी लड़के का लंड पहली बार देखने वाली थी.

वो मेरी पीठ पर चढ़ कर मेरे बदन पर लेट गया. उसका लंड मेरी गांड से टकरा रहा था. उसने कहा- आशना आगे की ओर घूम जाओ … पर अपनी आंखें बंद रखना … ठीक है!
वो मेरे ऊपर से हट गया.
मैंने कहा- ठीक है.

मैं अपनी आंखें बंद रखकर आगे की ओर घूम गई. मैं आंखें बंद करके महसूस कर रही थी कि वो अपना लंड लेकर मेरे सामने ही खड़ा है. पर मैंने अपनी आंखें बंद ही रखीं. उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने मूसल लंड पर रख दिया.
आआअहह … आज मैंने किसी लंड को पहली बार अपने हाथों में लिया था.

तभी उसने थरथराती आवाज में कहा- आशना … अब आंखें खोलो.
मैंने अपनी आंखें खोल दीं. मैंने जैसे ही आंखें खोलीं कि सामने अर्पित का बहुत लंबा लंड मेरे हाथ में था. पहले तो मैं थोड़ी डर गई और मेरे हाथ से लंड छूट गया.
अर्पित हंस पड़ा और बोला- अरे तुम तो लंड देखकर ही डर गईं.
मैंने कहा- नहीं नहीं ऐसा नहीं.

मैं शर्मा गई.
उसने कहा- आशना शरमाओ मत … बस इसके मज़े लो.
मैंने भी हंसते हुए उसको ज़ोर से किस किया और उसके साथ साथ अपने हाथ से फिर से उसके लंड को पकड़ लिया. मैं अपने भाई के मूसल से लंड को ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी. उसको भी मज़ा आने लगा. मैं भी उसके पूरे बदन को चूमने लगी. धीरे धीरे चूमते चूमते में उसके लंड के पास चूमने लगी.

उसने कहा- आशना यस आशना यस …

मुझे पता चल गया कि वो लंड चूसने के लिए कह रहा है … पर मैंने पहले कभी लंड नहीं चूसा था, तो मुझे पसंद नहीं था.
मैंने ना बोला.
उसने कहा- ठीक है, कोई बात नहीं.

थोड़ी देर बाद उसने मेरी आंखों पर मेरी ही ब्रा की पट्टी बनाकर बांध दी और मुझे बेड पर बिठा दिया.

फिर उसने कहा- आशना अपना मुँह नहीं खोलोगी?

उसके यह कहने पर मैंने अपना मुँह खोल दिया. मेरे मुँह खोलते ही उसने अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया. मैंने हटने की कोशिश की पर उसने थोड़ी देर के लिए मेरे सिर को ज़ोर से पकड़ लिया. अब मेरी आंखें बंद थीं और मेरे मुँह में अर्पित का लंड था. मैं उसका लंड बाहर भी नहीं निकाल सकती थी … क्योंकि उसने मेरा सिर अपने हाथों से ज़ोर से पकड़ रखा था.

थोड़ी देर बाद मेरे मुँह में उसका लंड रहने से मुझे भी मज़ा आने लगा और मैं उसका लंड चूसने लगी.
अब अर्पित ने मुझसे पूछा- क्यों आशना, तुमको तो लंड पसंद नहीं था ना … मुँह में लेना?

मैंने कुछ नहीं कहा और बस लंड को चूसने का मज़ा लेती रही. एक ओर मुझे ऐसा लग रहा था कि ये सब ग़लत है और एक तरफ लग रहा था कि अब पूरे मज़े कर ही लूँ. न जाने फिर कब ऐसा मौका मिले. ये सोचकर उसका लंड में चाटती रही.

जब मेरे मुँह में उसका लंड था और मैं जब उसका लंड ज़ोर ज़ोर से चूस रही थी, तब अचानक मेरे मुँह के अन्दर कुछ हुआ. जब तक मैं उसका लंड मुँह से निकाल पाती कि उसके पहले ही मेरा मुँह उसके वीर्य से पूरा भर गया. भाई का लंड मेरे मुँह के अन्दर होने की वजह से उसकी पिचकारी बहुत अन्दर तक चली गई. उसके लंड का आधा वीर्य मेरे गले के अन्दर भी चला गया.

आअहह … मैंने तुरंत ही अपने मुँह से उसका लंड बाहर निकाला. मैं पूरी डर गई थी.
उसने हंसते हुए कहा- क्या हुआ?
मैंने कहा- तुम्हारा वीर्य मेरे अन्दर भी चला गया है … कुछ हुआ तो?

ये सुनते ही वो ज़ोर से हंस पड़ा. उसने कहा- इस मुँह से निगलने से कुछ नहीं होता … मेरी रानी … नीचे के मुँह से निगलोगी तो कुछ होगा समझी. फिर कुछ कैसे होता है, तुम्हें पता ही होगा.
मैं हंस दी. चूंकि मुझे उसके लंड का स्वाद मजेदार लगा था इसलिए मैं अपने मुँह में बचे वीर्य का स्वाद लेने लगी.

कुछ देर तक हम दोनों यूं ही ऐसे पड़े रहे.

फिर मेरे भाई ने कहा- आशना बस अब तुम मेरा लंड फिर से चूसो और खड़ा कर दो.
मुझे उसका लंड चूसने में बहुत मज़ा आया था. इसलिए मैंने फिर से उसका लंड मेरे मुँह में लिया और बहुत ही शांति से लंड को चूसने लगी. अबकी बार मैं उसके लंड को ऐसे प्यार से चूस रही थी, जिससे उसे भी मज़ा आए. मैंने पूरे लंड को गले गले तक लेकर बड़ी मस्ती से चूसा.

उसने मेरे दूध मसलते हुए कहा- आशना, तुम बहुत ही मस्त लंड चूसती हो यार.
यह सुनते ही मुझे भी मजा आ गया और बहुत ही प्रेम से उसका लंड चूसा. थोड़ी देर में उसका लंड एकदम लंबा और कड़क हो गया. उसने मुझे बेड पर लेटा दिया.
अब उसने कहा- आशना अब तुम ज़न्नत के नज़ारे देखने के लिए तैयार हो जाओ.

यह सुनकर मैं बहुत शर्मा गई, मैं समझ गई थी कि भाई का लंड अब मेरी चूत फाड़ेगा.

भाई ने ये कहते कहते मेरी टांगें फैला दीं और अपना लंड सैट करके मेरी चूत में डाल दिया.

‘आहह … उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओओओ उहह.’ उसका लंड जैसे ही मेरी चूत के अन्दर गया, तो मेरे मुँह से चीख निकल गई. मुझे बहुत ही दर्द हो रहा था.
मैंने अर्पित से कहा- बहुत दर्द हो रहा है … प्लीज़ निकाल लो … मुझे नहीं चुदवाना. प्लीज़ अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लो.
वो बोला- अरे डार्लिंग … अभी तो मेरा लंड सिर्फ़ आधा ही अन्दर गया है. अगर तुमको बहुत दर्द हो रहा है, तो निकाल देता हूँ.

ऐसा बोल कर वो थोड़ी देर मुझे किस करता रहा. उसका आधा लंड मेरी चूत में घुसा हुआ था. उसके एक ही वार ने मेरा चूत का परदा तोड़ दिया था.
कुछ पल बाद मेरा दर्द कुछ कम हो गया. तो मैंने उससे पूछा- मुझे इतना दर्द क्यों हो रहा है?
वो बोला- तुम्हारी सील मेरे एक ही झटके से टूट गई है इसलिए … पर अब दर्द नहीं होगा.

थोड़ी देर वो अपना लंड मेरी चूत में डालकर मेरे साथ बातें करता रहा. थोड़ी देर बाद मेरा दर्द कम होते ही उसने बातों ही बातों में मेरी चूत में अपने लंड से और एक ज़ोर से धक्का दे दिया.
इस बार उसने अपना पूरा छह इंच का लंड मेरी चूत को चीरते हुए अन्दर तक डाल दिया. मेरे मुँह से फिर से सिसकारी निकल गई- आआअहह … मर गई अर्पित … मर गई मैं तो!

पर वो अपने लंड से मेरी चूत में धक्के देता ही रहा और मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदता रहा. मुझे बहुत दर्द हो रहा था, पर वो मुझे बेरहमी से चोदता ही रहा.
‘आआहह … आअहह … आआअहह … उउइई माँआअ … मैं मर गई … आअहह…’

थोड़ी देर बाद उसने मेरे होंठ पर होंठ जमा दिए. उसने मुझे किस करते करते चोदना चालू रखा. उसके किस करते ही मेरे मुँह से आवाज़ निकलना बंद हो गई और मैं भी चुदाई का मज़ा लेने लगी.

उस दिन अर्पित ने मुझे पूरा एक घंटा चोदा. उस दौरान मैं न जाने कितनी बार पिघली होऊंगी, मुझे होश ही नहीं है.

काफी देर बाद अपनी कुंवारी चूत चुदाई का मज़ा लेते लेते मुझे मेरी चूत के अन्दर कुछ अहसास हुआ. मैंने अर्पित को देखा, तो वो अपना वीर्य मेरी चूत में छोड़ चुका था. वीर्य छोड़ते ही वो ओर ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदने लगा. ये उसके लंड के अंतिम धक्के थे.

थोड़ी देर बाद वो निढाल होकर मेरे बदन पर ही ढेर हो गया. उसने मेरे होंठ पर अपने होंठ जमा दिए और मुझे किस करने लगा. मैं भी उसको किस करने लगी.

थोड़ी देर बाद वो मेरे बदन से उतर कर मेरे बाजू में बेड पर लेट गया. फिर उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया. वो बोला- आशना आज तुमको चोदकर मुझे बहुत मज़ा आया.
मैंने भी कहा- आज मैंने अपनी लाइफ की पहली चुदाई अपने ही भाई से करवा ली.
उसने कहा- आशना अब फिर से कब? मैंने हंस कर कहा- मम्मी पापा बाहर जाएंगे तब!

हम दोनों हंस कर एक दूसरे से चिपक गए. मेरी चुदाई न जाने कितनी बार हुई होगी. मैं अपने भैया के लंड की शैदाई हो चुकी थी.

आपको मेरी कुंवारी चूत की चुदाई की कहानी कैसी लगी … प्लीज़ मुझे मेल जरूर कीजिएगा.

टीचर की यौन वासना की तृप्ति-12

इस पोर्न स्टोरी में अब तक आपने पढ़ा कि मैं नम्रता को अपने घर की खिड़की से घोड़ी जैसी बना कर उसकी गांड में लंड पेल रहा था.
अब आगे:

नम्रता ने अपने हाथों को खिड़की से टिकाकर अपने जिस्म का वजन टिका दिया.

आह-आह, ऊ ऊ ओह-ओह.. की मादक आवाज के साथ अपनी गांड चुदवा रही थी. जैसे-जैसे मेरे धक्के मारने की स्पीड बढ़ती जा रही थी, मेरी जांघ और उसके कूल्हे के टकराने की थप-थप की आवाज मेरे उन्मादों को बढ़ा रही थी.

गांड चुदाई चालू थी.. साथ ही आह-आह, ओह-ओह, थप-थप की आवाज भी आपस में सुर ताल मिला रहे थे.

नम्रता बोली- शरद, मेरी गांड का बाजा तुमने अच्छे से बजा लिया, मेरी चूत भी तुम्हारे लंड के लिए मरी जा रही है. तब से अपनी चूत की आग को शांत करने के लिए खुद ही सहला रही हूं, अगर तुम अपना लंड की कृपा मेरी चूत पर भी कर दो, तो वो भी थोड़ी खुश हो जाएगी.

उसकी इस बात को सुनकर, मैंने लंड को उसकी गांड से बाहर निकाल कर नम्रता को गोद में उठाया और डायनिंग टेबिल पर लेटाते हुए उसके मम्मों को पीने लगा. फिर उसकी टांगों को अपनी गर्दन पर रखकर ढेर सारा थूक अपनी हथेली में लेकर उसकी चूत के मुहाने को अच्छे से गीला किया और लंड से थोड़ी देर तक उसकी चूत को सहलाता भी रहा. जब नम्रता को बर्दाश्त नहीं हुआ, तो उसने लंड को पकड़ा और थोड़ा आगे की तरफ खिसककर लंड को अन्दर ले लिया और अपनी कमर को चलाने लगी.

बस एक बार धक्का लगना क्या शुरू हुआ कि फट-फट, फक-फक की आवाज सुनाई पड़ने लगी. नम्रता भी आह-ओह के साथ अपने फांकों के अन्दर उंगली चलाती जा रही थी.

जब मैं उसकी गांड की चुदाई करने लगता था, तो वो अपनी पुत्तियों को मसलने लगती, या फिर उंगली चूत के अन्दर डालने लगती.

मेरा निकलने वाला था और मेरा गीला लंड मुझे बता चुका था कि नम्रता फारिग हो चुकी है.

मैंने नम्रता से कहा- मेरा निकलने वाला है, अन्दर निकालूँ या फिर?
नम्रता- नहीं अन्दर मत निकालो, मेरे मुँह को भी चोद दो और अपना स्वादिष्ट वीर्य मुझे पिला दो, फिर पता नहीं कब मौका मिले.

मैंने तुरन्त लंड बाहर निकाला, नम्रता टेबिल से नीचे उतरी और घुटने के बल बैठकर मेरे लंड को मुँह में लेकर उसकी चुदाई करने लगी. जैसे ही मेरे लंड ने माल छोड़ना शुरू किया, वो रूक गयी और मुँह के ही अन्दर लंड लिए हुए माल को लेने लगी. जब तक मेरे लंड का माल पूरा पी नहीं लिया, तब तक उसने लंड को मुँह से बाहर नहीं निकाला.

ढीला पड़ने पर जब लंड बाहर आ गया, तो सुपाड़े पर लगी हुई एक दो बूंद को उसने जीभ से चाट कर साफ कर दिया.

थोड़ी देर तक हम दोनों वहीं जमीन पर बैठ गए. इस बीच टाईम अपनी गति से बढ़ता जा रहा था, जब हमारी नजर टिक-टिक करती हुई घड़ी पर पड़ी, तो दोनों के ही चेहरे उदास हो गए. क्योंकि इन दो-तीन या ढाई दिन, जो भी आप लोग कहना चाहें एक-दूसरे के काफी करीब आ गए थे. हम दोनों के ही दिल कह रहे थे कि समय ठहर जाए, पर वो मानने वाला नहीं था.

खैर, नम्रता खड़ी हुई और अपनी साड़ी उतारने लगी.

मैंने कहा- ये क्या कर रही हो?
वो बोली- रात को मियां जी, जब मेरी चूत सूंघेगा, तो इसमें से तुम्हारी महक आएगी, जो मैं नहीं चाहती, इसलिए मैं नहाना चाहती हूँ.
मैं- हां तुम्हारी बात सही है, अपना प्यार हमें अपने पास ही रखना चाहिये, आओ चलो, दोनों साथ ही नहा लेते हैं.

फिर हम दोनों बाथरूम में घुस गए और दोनों अच्छे से रगड़-रगड़ के नहाये. उसके बाद नम्रता ने अच्छे से श्रृंगार किया. मैंने भी अपने हिसाब से अपने को तैयार किया.

एक बार फिर लोगों की नजर से बचते हुए हम मेरे घर से बाहर निकले. हमने रास्ते में एक अच्छे से रेस्टोरेन्ट में नाश्ता किया और फिर नम्र्ता को उसके घर छोड़ कर अपने घर आ गया.

काश नम्रता का परिवार भी एक दिन बाद आता, तो आज रात भी मेरे लंड को नम्रता की चूत चोदने का मजा मिल जाता. मैं अपने ख्यालों में ही खोया रहा कि मेरे फोन की घंटी बजी.

नम्रता का फोन था, बोली- शरद, क्या कर रहे हो?
मैं- कुछ नहीं. अपने लंड को अपने हाथ में लेकर तुम्हें याद कर रहा हूं. तुमने कैसे फोन किया?
नम्रता- कुछ नहीं, तुम्हारी याद आ रही थी. अभी इन सबके आने में समय था, तो सोचा तुमसे फोन पर बातें करके मन को बहला लूं.
मैं- थैक्स यार, अच्छा याद है न तुम मुझे अपनी चुदाई का किस्सा सुनाओगी न. नम्रता- बिल्कुल मेरी जान, मुझे भी तो देखना है कि मेरा शेर, कैसे मेरी चूत मारता है.
मैं- अगर तुम्हारे शेर ने तुम्हारी चूत के साथ-साथ तुम्हारी गांड में भी लंड पेला तो?
नम्रता- मैं कोशिश करूँगी कि अभी कुछ दिन वो मेरी गांड में हाथ भी न लगाये, फिर भी अगर उसने मेरी गांड मारने का मन बना लिया, तो जो होगा देखा जाएगा.

इसी तरह मेरे और उसके बीच बातें चलती रही.

फिर वो बोली- अब फोन काट रही हूं लगता है, सभी लोग आ गए हैं.

ये कहकर उसने फोन काट दिया. मैं अपना ध्यान भटकाने के लिए टीवी देखने लगा.. पर समय जो थोड़ी देर पहले तक तेजी से भागा जा रहा था, उसकी गति अब काफी कम हो चुकी थी. फिर भी मैं कभी लेटता, तो कभी उठकर बैठ जाता, तो कभी बारजे में टहलने के लिए चला जाता. मुझे बड़ी मुश्किल से नींद आयी.

सुबह मेरी नींद अपने समय पर खुल गयी और घड़ी की तरफ देखते हुए मैं जल्दी जल्दी तैयार होने लगा, क्योंकि स्कूल में नम्रता से मुलाकत होगी.

मैं जल्दी-जल्दी स्कूल पहुंचा, लेकिन तब तक नम्रता स्कूल नहीं आयी थी, पर उसका मैसेज जरूर आ गया. जिसमें लिखा था कि मैं नहीं आ पाऊंगी, मैनेज करवा दीजिएगा.

मतलब आज बेमन से काम करना होगा. स्कूल की छुट्टी होने तक मैं अपना काम करता रहा और फिर घर आ कर सो गया.

करीब 7 बजे नींद खुली तो मेरी फैमिली के भी आने का समय हो चला था. मैं झटपट उठा, मार्केट गया, कल के लिए सब्जी वगैरह खरीद कर, होटल से सभी के लिए खाना ले आया. फिर स्टेशन की तरफ चल दिया. सभी लोग घर आ चुके थे. सब कुछ निपटा कर मेरी श्रीमती कमरे में आ गयी. वो नाईटी पहन कर मेरे सीने पर अपना सिर रख कर, उंगलियों के बीच मेरे सीने के बालों को फंसा कर मरोड़ने लगी.

फिर बोली- सुनिये!
मैं- हां बोलो क्या बात है?
बीवी- तुम्हारे बिना वहां मन नहीं लग रहा था.

इतना कहते ही उसने मेरे सीने में एक गहरा चुम्बन जड़ दिया.

दोस्तों, सामान्यत: मैं रात को घर में केवल लुंगी पहन कर ही सोता हूँ. पिछले 36 घंटे के बाद मेरे सीने में एक बार फिर से उंगली चली, तो स्वाभाविक रूप से मेरे लंड महराज फुदकना शुरू हो गए. इस बीच मेरी बीवी रेखा ने अपनी टांगें मेरी टांगों पर चढ़ा दीं.

अब मैं भी उसकी पीठ और चूतड़ को सहला रहा था. रेखा का हाथ मेरी छाती से फिसलता हुए नाभि के पास थोड़ी देर रूका और फिर लुंगी के अन्दर चला गया और मेरे फुदकते हुए लंड को ढूंढने लगा. जब उसके हाथ में मेरे फुदकता हुआ लंड पकड़ में आ गया, तो रेखा उसे उमेठने लगी और मेरे चूचुक को दांतों से काटने लगी. मेरा हाथ भी कहां रूकने वाला था, मैं रेखा की नाईटी उठाकर उसकी चूतड़ को सहलाते हुए उंगली उसकी दरारों के बीच चलाने लगा.

नम्रता ने मेरी लुंगी खोल दी और साथ ही साथ अपनी नाईटी भी उतार फेंकी. फिर थोड़ा ऊपर मेरे मुँह की तरफ खिसकते हुए अपने मम्मे को मेरे होंठों से टच कराने लगी. एक पल बाद दूर हटा दिया. फिर मम्मों को अपने हाथ में लेकर मेरे मुँह में निप्पल डालने लगी. मैं भी उसके निप्पल पर अपनी जीभ फेरता और होंठों के बीच ले लेता हुआ चूसने लगा.

इस क्रियाओं के बीच मेरा लंड एकदम से लोहे की राड की तरह से तन चुका था, मैंने रेखा को अपने नीचे लिया और उसके साथ फोरप्ले करने के लिए उसके निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा. साथ ही उसकी चूत में हाथ फिराने लगा. लेकिन रेखा ने लंड पकड़ लिया और चूत के मुहाने से रगड़ने लगी और अपनी कमर उचकाकर लंड को अन्दर लेने का प्रयास करने लगी.

मेरे सामने उसकी चूत में लंड डालने के अलावा कोई रास्ता नहीं था, सो मैंने भी अपने आपको उसकी तरफ पुश किया ताकि लंड आसानी से अन्दर चला जाए.

बस फिर क्या था, तने हुए लंड को होल को और खोदना था, सो लंड अपनी स्पीड से बुर चोदने लगा.

थोड़े समय के बाद मेरा लंड गीला होने लगा था, मतलब साफ था कि रेखा पानी छोड़ रही थी. फच-फच की आवाज तेज हो चुकी थी, मेरे धक्के के कारण रेखा का जिस्म हिल रहा था और साथ ही उसकी चुचियां भी हिल-डुल रही थीं.

रेखा से थोड़ी देर ज्यादा मेरी ट्रेन दौड़ी और फिर रेखा की चूत के ही अन्दर मेरे लंड ने उल्टी करनी शुरू कर दी.

जब लंड से पूरा माल निकल गया, तो मैं निढाल होकर रेखा के ही ऊपर गिर पड़ा. थोड़ी देर बाद लंड चूत के बाहर निकल गया और मैं रेखा के ऊपर से उतरकर बगल में लेट गया. मैंने आंखें मूंद लीं, पर रेखा ने करवट ली और एक बार फिर मेरी जांघ पर अपने पैर चढ़ा दिए.

थोड़ी देर तक तो वो मुझसे खूब कस कर चिपकी हुई थी, पर यही कोई पंद्रह-बीस मिनट बीते होंगे कि उसके उंगलियां एक बार फिर मेरे सीने के बालों से, मेरे निप्पल से खेलने लगीं. और तो और इस बार वो अपनी हथेलियों को मेरी जांघों पर कस कस कर रगड़ रही थी और लंड को उमेठ रही थी.

मैंने अपनी आंखें मूंदी रखीं और रेखा से पूछा कि क्या बात है.. आज बड़ा प्यार उमड़ रहा है मेरे ऊपर?

उसने एक हल्का सा मुक्का मेरे सीने पर ठोकते हुए कहा- आप बड़े वो हैं?

फिर वो शिथिल हो गयी, उसके शिथिल होने से मैं उसकी पीठ सहलाते हुए बोला- अरे नराज हो गयी क्या?

रेखा- अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं है.

इतना कहने के साथ ही रेखा ने एक बार फिर अपने होंठों का, अपनी उंगलियों का कमाल दिखाना शुरू कर दिया.

मैं जानता था कि रेखा खुलकर सेक्स नहीं करेगी, फिर भी वो जैसा प्यार कर रही थी, वो ही बहुत था. पर थोड़ा परिवर्तन था इस बार, वो मेरे लंड को पहले बड़ी मुश्किल से पकड़ती थी, लेकिन आज वो न सिर्फ मेरे लंड को पकड़ रही थी बल्कि सुपाड़े को अपने अंगूठे से अच्छे से रगड़ रही थी, बीच-बीच में मेरे अंडकोष से भी खेल रही थी. रेखा के साथ यह मेरा नया एक्सपीरिएंस था. सामान्यत: थोड़ा चूमा-चाटी के बाद.. वो भी उसके मम्मे और होंठ तक ही सीमित रहता था, फिर वो अपनी टांगें फैला देती थी और मैं अपने लंड को उसकी चूत में डालकर धक्के देना शुरू कर देता था. फिर उसके अन्दर ही मैं माल छोड़ देता था और फिर दोनों मियां बीवी करवट बदलकर सो जाते थे.

पर आज ऐसा कुछ नहीं था, इतनी देर में रेखा ने तो मेरे निप्पल को अच्छा खासा गीला कर दिया था और मेरे चूचुक भी तन गए थे.

यही नहीं रेखा भी अपने हाथों से अपनी चूची को पकड़कर मेरे मुँह में ठूंस रही थी.

बस मेरे मुँह से यही निकला- आज तो मजा आ गया.

मेरे इस शब्द ‘मजा आ गया..’ का असर रेखा को कर गया था. उसने मेरी तरफ नशीली आंखों से देखा, मुस्कुराई और फिर अपने होंठ को मेरे होंठों से चिपका दिए. मन भर कर उसने मेरे होंठों को चूसा.

फिर मेरे पूरे जिस्म को चूमते हुए नीचे की तरफ आयी और मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया और मुठ मारने लगी. मैंने एक बार फिर अपनी आंखें बन्द कर लीं और जो भी कुछ रेखा मेरे साथ कर रही थी, उसी आनन्द में मैं सरोबार होने लगा. अचानक मुझे मेरे लंड पर कुछ गर्म भाप और गीलेपन का अहसास हुआ, जिससे मेरी आंखें खुल गईं. मैंने देखा तो रेखा मेरे लंड को अपने मुँह के अन्दर लिए हुए थे.

वाओ.. मेरी जान.. आज तुमने मैदान मार लिया. मैंने मन ही मन खुद से कहा और फिर रेखा से कहा- अगर तुम अपनी कमर मेरे तरफ घुमा दो, तो मैं भी तुम्हारे जन्नत का मजा ले लूं.

मेरे अचानक इस तरह बोलने से उसने झट से मेरे लंड को मुँह से बाहर निकाला और मुझे देखने लगी. दो मिनट तक वो कुछ सोचती रही. फिर उसने अपनी चूत का मुँह मेरे तरफ कर दिया. हम लोगों की पोजिशन 69 की हो गयी थी.

यह फोर प्ले बहुत ज्यादा लंबा नहीं खींचा, पर 3-4 मिनट के बाद ही रेखा मेरे ऊपर से उतर गयी और मेरी तरफ अपना मुँह करके मेरे ऊपर एक बार फिर लेट गयी. रेखा मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत से मिलाने लगी. फिर सीधे बैठते हुए उसने लंड को अपनी चूत के अन्दर गप्प से गपक लिया और फिर उछाल भरने लगी. रेखा जब तक उछाल भरती रही, जब तक कि एक बार फिर से मेरे लंड ने अपनी पिचकारी का मुँह उसकी चूत के अन्दर न खोल दिया.

फिर वो मेरे ऊपर तब तक लेटी रही, जब तक मेरा लंड चूत से बाहर नहीं आ गया उसके बाद वो मुझसे चिपककर सो गयी और सुबह नींद खुलने पर भी वो मुझसे नंगी ही चिपकी रही.

नींद खुलने के बाद जल्दी से उसने अलमारी से निकालकर पैन्टी-ब्रा, पेटीकोट ब्लाउज और साड़ी पहनी. अपने बालों को सही करते हुए मेरे गालों में एक प्यारी से पप्पी दी. इसके बाद वो कमरे से बाहर निकल गयी.

थोड़ी देर बाद मैं भी उठा और स्कूल जाने के लिए तैयार होने लगा. इधर रेखा भी आज अच्छे मूड में दिख रही थी और गुनगुनाते हुए अपने काम को अंजाम दे रही थी. जब भी उसकी नजर मुझसे मिलती, तो वो एक हल्की और प्यारी मुस्कान छोड़ देती.

फिर मैं तैयार होकर स्कूल के लिए निकल गया. स्कूल पहुंचने पर मेरी नम्रता से मुलाकात हुई. उसने सबकी नजर बचाते हुए मुझे फ्लाईंग किस दी, वैसा ही जवाब मैंने भी दिया. हम दोनों अपने काम पर लग गए, क्योंकि हमारे मिलन को दो घंटे खाली मिले हुए थे. खैर काम निपटाते हुए वो समय भी आ गया, जब मैं और नम्रता दोनों ही एक दूसरे के आमने-सामने हुए.

हाय-हैलो के बाद मैंने झट से पूछा- कल नहीं आयी थी.. और कैसा रहा तुम्हारे आदमी का मिजाज.
नम्रता चहकते हुए बोली- बहुत अच्छा.. फिर थोड़ा रूककर और दार्शनिक अंदाज में बोली- कभी-कभी एक दूसरे को पाने के लिए कुछ दिन तक एक-दूसरे से दूर भी होना जरूरी होता है.

बात तो नम्रता बिल्कुल सही कह रही थी, क्योंकि भले ही तीन दिन ही सही, रेखा ने जो कल रात मेरे साथ किया था, वो भी बिछड़ने के बाद का मिलन था.

मैंने फिर पूछा- कल क्यों नहीं आयी?
नम्रता- कल मुझे राजेश अपने साथ घुमाने के लिए ले गए थे, दिन भर हम लोग मौज मस्ती करते रहे और चुदाई भी की.
मैंने नम्रता की बात काटते हुए पूछा- हां.. मगर..
पर नम्रता ने भी मेरी बात कट कर अपनी बात पूरी की- वो भी परसों पूरी रात और कल पूरी रात सोने नहीं दिया.
मैं फिर से बोला- अच्छा तुमने वो कपड़े पहने थे?
नम्रता- हां बता रही हूँ.

मेरी उत्सुक्ता बढ़ रही थी. जैसे मैंने नम्रता की बात सुनी ही नहीं.
फिर पूछ बैठा- यार, तुम्हारी गांड मारी?
नम्रता- अरे यार सुनो तो, मैं सब कुछ बताऊंगी. आने के बाद हम लोगों को बातें करते हुए काफी देर हो चुकी थी, करीब 2 बजे रात मैं सब काम निपटाकर कमरे में पहुंची, तो देखा महराज नंग धड़ंग, अपने लंड को हाथ में लिए मुठ मार रहे थे. मैं मुस्कुराती हुई बाथरूम में घुस गयी और तुम्हारी दी हुई नाईटी पहनकर बाहर आकर ड्रेसिंग टेबिल के पास थोड़ा झुककर अपने होंठों को लिपिस्टक से धीरे-धीरे सजाते हुए शीशे से अपने मर्द को देख रही थी. वो मुठ मारते हुए मेरी तरफ देख रहे थे.

मामा की बेटी की रस भरी चुदाई

दोस्तो, मेरा नाम परम है और मैं दिल्ली में रहता हूं। मैं हमेशा से ही हिन्दी सेक्स स्टोरी पढ़ा करता था। आज मैं भी आपको अपने साथ हुई एक सच्ची घटना बताना चाहता हूं। यह कहानी एकदम सच है। ये मेरी पहली स्टोरी है. मैंने अन्तर्वासना की बहुत सारी कहानियां पढ़ी हैं. सारी कहानियां एक से बढ़कर एक हैं. मैं वैसी कहानी तो आपको पेश नहीं कर पाऊंगा क्योंकि इस साइट पर उच्च कोटि के लेखक कहानी लिखते हैं.
फिर भी मैं कोशिश करूंगा कि मेरी कहानी में आपको कोई गलती न मिले और आप मेरी कहानी को पूरी तरह से इंजॉय करें. उसके बावजूद भी अगर कोई गलती मिल जाए तो माफ़ कर देना।

अब मैं कहानी पर आता हूँ। मेरी फैमिली में हम 4 लोग हैं। मम्मी-पापा, मैं और एक भाई।

चूंकि कहानी मेरे बारे में ही है इसलिए मैं अपने शरीर के बारे में जरा विस्तार से आपको बताना चाहता हूँ. मैं 28 साल का जवान लड़का हूँ. मेरी हाइट 5.7 इंच है. शरीर बिल्कुल गठीला है और लंड भी काफी दमदार है जो किसी की भी प्यास बुझा सकता है.
यह बात 4 साल पहले की है जब मैं अपने मामा जी के यहाँ घूमने गया था। मेरे मामा जी की फैमिली में 5 मेम्बर हैं. मामा-मामी, उनके 2 बड़े बेटे और एक बेटी जिसका नाम पुष्पिका है. पुष्पिका इस कहानी की मुख्य नायिका है।

पुष्पिका की उम्र उस समय 21 वर्ष थी। उसका फिगर कयामत था. देखने में बिल्कुल ऐश्वर्या राय जैसी लगती है। गुलाबी सा बदन, नीली सी आंखें, भूरे मगर चमकदार बाल (सिर के). चूत के बारे में कहानी में आगे आपको पता लग जाएगा. उसका साइज 32-28-32 के करीब था उस वक्त। जब वो चलती थी तो उसकी गांड की अलग ही शेप दिखती थी।

मेरे मामा हरियाणा में रहते हैं. दिल्ली में रहने वाले ज्यादातर लोगों की रिश्तेदारी हरियाणा में है. मैं नॉर्थ और वेस्ट दिल्ली की बात कर रहा हूं. ईस्ट वाले तो यू.पी. से आकर बसे हुए हैं. तो मुझे हरियाणा में अपने मामा के घर पहुंचते-पहुंचते शाम हो गयी थी. चूंकि दिल्ली में ट्रैफिक बहुत होता है इसलिए जितना टाइम दिल्ली से निकलने में लग जाता है उतने टाइम में तो आदमी चंढीगढ़ पहुंच जाता है.

खैर, जब मैं वहां पहुंचा तो सभी लोग मुझे देख कर बहुत खुश हुए. तभी अन्दर से पुष्पिका भी आ गयी. मैंने आज से पहले उसे कभी गलत नजरों से नहीं देखा था, लेकिन आज उसे देख कर मेरा मन ही बदल गया. अभी तक मैंने उसके खूबसूरत चेहरे को ही देखा था. फिर एक ही बार में उसके पूरे बदन को अपनी नजरों के स्कैनर से स्कैन कर लिया.
एक बार को तो मैं भूल ही गया कि वो मेरी बहन है. मन कर रहा था कि बस यहीं इसको चूस लूं। लेकिन मैंने किसी तरह अपने आप को संभाला।

काफी रात हो गयी थी. सबने खाना खाया, फिर सोने की तैयारी करने लगे. मुझे मेरे बड़े भाई के साथ उनके रूम में ही बिस्तर लगा कर सोने के लिए बोला गया। हल्की ठंड के दिन थे तो मैं और बड़े भाई नीरज एक ही रजाई में लेट गए. हमने नॉर्मली एक दूसरे से बातें की. थोड़ी देर के बाद ही भैया सो गए। लेकिन मेरी नींद तो पुष्पिका के बारे में सोच-सोच कर पता नहीं कहां गायब हो गयी थी.

मुझे उसमें अपनी बहन नहीं बल्कि एक जवान और सेक्सी लड़की नजर आ रही थी। मैं पूरी रात यही सोचता रहा कि कैसे उसे चोदा जाए … उसके बारे में सोच कर लंड ताव में आ गया था. मेरा हाथ मेरी लोअर के अंदर अपने आप ही जाकर उसको खुजलाने और सहलाने लगा. अब आप तो समझ ही सकते हो कि एक बार हाथ लंड पर खुजलाने भर के लिये भी चला जाये तो लंड को खड़ा करके ही छोड़ता है.

लंड खड़ा हो गया तो मैंने लौड़े के टोपे को भी आगे-पीछे करना शुरू कर दिया. पुष्पिका का सेक्सी बदन मेरे ख्यालों में घूम रहा था. तेजी के साथ मैं लंड को हिलाने लगा. जल्दी ही मेरे लंड ने मेरी बहन की कमसिन जवानी के सामने ख्यालों में ही घुटने टेक दिये. उसके चूचों को ख्यालों में चूसा और जब चूत को ख्यालों में नंगी किया तो मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी छूट पड़ी. अंडरवियर गीला हो गया. चूंकि साथ में भैया सो रहे थे इसलिए मैं चुपचाप वैसे ही पड़ा रहा. पुष्पिका की चूत चोदने की प्लानिंग दिमाग में चल रही थी मगर समझ नहीं आ रहा था कि यह सब होगा कैसे? यही सोचते-सोचते मैं कब सो गया, पता ही नहीं चला।

सुबह मेरी बहन पुष्पिका की आवाज से ही मेरी आँखें खुलीं.

पुष्पिका- परम भाई, चाय पी लो, कब तक सोते रहोगे? रात में ठंड लगी क्या आपको जो अब तक सो रहे हो?
मेरी आँखें जैसे ही खुली मैं उसे देखता ही रह गया. वो तभी नहा कर आई थी. उसके बाल गीले और खुले हुए थे. उसने ब्लू कलर का पंजाबी सूट पहन रखा था जिसमें वो बहुत ही मस्त माल लग रही थी. मैं बस उसे देखे जा रहा था. इतने में उसने मुझे दोबारा टोका.

पुष्पिका- क्या हुआ भाई? कहां ध्यान है आपका? इतनी देर से मुझे ही देखे जा रहे हो. लो चाय पी लो वर्ना ये ठंडी हो जाएगी।
मैं- पुष्पिका, भाई कहां है?
पुष्पिका- वो दोनों तो कॉलेज चले गए. आपको जगाया भी था उन्होंने लेकिन आप जागे ही नहीं।
मैं- अच्छा … किसने जगाया था मुझे?
पुष्पिका- भाई ने। अच्छा चलो, आप जल्दी से फ्रेश हो जाओ मैं ब्रेकफास्ट तैयार कर देती हूं आपका. इतना कहकर वो रूम से बाहर जाने लगी.

उसकी गांड का मटकना मुझे पागल कर गया. मैंने चाय पी और फिर बाथरूम में जाकर उसके नाम की मुट्ठ मारी. जिंदगी में पहली बार मुट्ठ मारने में इतना मजा आया मुझे क्योंकि रात को तो मैं थका हुआ था लेकिन रात भर नींद लेने के बाद लंड में एक अलग ही जोश भर गया था और सुबह-सुबह की एनर्जी थी लौड़े में।

तभी मेरी नज़र वहां पड़ी हुई ब्रा और पैंटी पर पड़ी. शायद पुष्पिका नहाने के बाद उन्हें रखना भूल गयी। मैंने पैंटी को उठाया तो उसमें से मुझे मेरी बहन की चूत की मनमोहक खुशबू आ रही थी। मैंने उसकी पैंटी से ही अपने लंड महाराज को रगड़ना चालू कर दिया फिर उसी पर अपना सारा लावा गिरा दिया.

नहा कर मैं बाहर आया तो देखा कि पुष्पिका ने ब्रेकफास्ट बना कर तैयार किया हुआ था।
मैंने घर में देखा कि कोई भी नजर नहीं आ रहा था तो मैंने पुष्पिका से पूछा कि मामा-मामी कहां गये हैं?
पूछने पर उसने बताया कि वो दोनों किसी काम से बराबर वाले गांव गए हैं, शाम तक ही लौटेंगे।
यह सुनकर मेरे मन में बैठा शैतान जाग गया। शैतान वैसे कल रात को ही जाग गया था मगर वह घर वालों के डर से बैठा हुआ था.

अब जब उसको पता चला कि मेरी सेक्सी बहन घर में अकेली है तो वो फिर से खड़ा हो गया. मैंने मन ही मन में सोचा- बेटा परम, यही अच्छा मौका है अगर कुछ करना है तो …
मेरी बहन मुझसे ज्यादा खुली हुई नहीं थी. मगर किसी न किसी तरह बात तो शुरू करनी ही थी. यही सोच रहा था कि बात करूं तो करूं कैसे. फिर अगर बात शुरू हो भी गयी तो बात को सेक्स तक कैसे लेकर जाऊं.

मैंने पुष्पिका से उसकी पढ़ाई के बारे में नॉर्मली पूछा. बात शुरू करने के लिए पढ़ाई की बात करना ही सबसे बेहतर तरीका होता है क्योंकि इससे सामने वाला मना भी नहीं कर पाता है.
मैंने पूछा- तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है और आज क्यों नही गयी कॉलेज?
इस तरह की बोरिंग सी बातें करता रहा मैं पुष्पिका के साथ और उसको मेरी बातों का जवाब देना पड़ रहा था. हम दोनों में बीस मिनट तक बातें चलती रहीं जो बस फालतू ही थी.

फिर मैंने हिम्मत करके उससे पूछा- अच्छा एक बात बता, तू इतनी खूबसूरत कैसे होती जा रही है? कोई बॉयफ़्रेंड है क्या तेरा जो उसकी वजह से इतनी खूबसूरत दिखने लगी?
पुष्पिका- क्या भाई … आप दिल्ली में रह कर भी ये सब पूछोगे? मेरे फ़्रेंड तो हैं लेकिन बॉयफ्रेंड कोई नहीं है. मुझे कोई बनाना भी नहीं है क्योंकि सब मतलबी होते हैं।
उसका जवाब सुनकर मैं मन ही मन खुश हो रहा था कि चलो इस बारे में बात तो स्टार्ट हुई हमारी।

मैं- किस तरह से मतलबी होते हैं, मैं समझा नहीं कुछ?
पुष्पिका- भाई, आपकी गर्लफ्रैंड है?
मैं- पहले थी, अब तो कोई नहीं है? क्यों, तुमने ऐसा क्यों पूछा?
पुष्पिका- बस वैसे ही पूछ लिया. नहीं पूछ सकती क्या मैं अपने भाई से उसके बारे में कुछ? वैसे जब आपकी गर्लफ्रैंड थी तो आपको मेरी बातों का मतलब भी पता होना चाहिए था।
मैं- वैसे पुष्पिका, मैं नहीं समझ पाया इसलिए ही पूछ लिया था मैंने। (मैं समझ गया था कि ये मुझसे अब खुलकर बात कर सकती है बस थोड़ी सी कोशिश करनी होगी)

पुष्पिका- छोड़ो भाई, कहां की बातें ले कर बैठ गए तुम भी।
मैं- अरे बाबा बताओ तो मुझे, तुम्हारी बात का मतलब सच में मुझे समझ नहीं आया. इसलिए पूछ रहा हूँ.

अब वो मेरी तरफ घूर-घूर कर देखने लगी थी. शायद वो भी समझ गयी थी कि मैं उसके साथ ओपन होना चाहता हूँ.
पुष्पिका- आजकल के लड़कों को सिर्फ लड़की के साथ कुछ टाइम बिताना होता है. जब उससे मन भर जाता है तो दूसरी को पकड़ लेते हैं।
मैं- लेकिन मेरी गर्लफ्रैंड के बाद तो मैंने किसी को नहीं देखा।
पुष्पिका- कोशिश तो अपने भी की होगी भाई, ऐसी बात पर मैं तो विश्वास कर ही नहीं सकती कि लड़के की नजर किसी और लड़की पर न जाए.
मैं- हां ये तो तुम सही बोल रही हो, लेकिन मुझे कोई वैसी मिली ही नहीं उसके अलावा।
पुष्पिका- एक बात पूछूँ … बुरा तो नहीं मानोगे?
मैं- पूछो, तुम्हारी बातों का बुरा क्यों मानूँगा?
पुष्पिका- ऐसी कौन सी हूर की परी थी वो वो जो उसके जैसी आपको अब तक नहीं मिली?

मैंने हिम्मत करके पुष्पिका की आँखों में देख कर बोला- तुम्हारे जैसी थी बिल्कुल.
पुष्पिका- क्या मतलब है भाई आपका?
मैं- पुष्पिका वो बिल्कुल तुम्हारी तरह ही सेक्सी थी.
पुष्पिका- मैं बहन हूं आपकी और आप इस तरह के शब्द यूज़ कर रहे हो अपनी बहन के लिए?
मैं- सॉरी अगर तुम्हें बुरा लगा हो तो. लेकिन मैं सिर्फ़ सच बता रहा था. तुम बहुत सुंदर और सेक्सी हो गयी हो पुष्पिका.

लड़की का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने का ये सबसे अच्छा तरीका होता है. उसके हुस्न की तारीफ करते रहो और किसी दूसरी लड़की से उसकी तुलना करते रहो. मैं उन सब बातों में माहिर था. मगर मेरी बातों का असर फिलहाल कुछ उल्टा सा हो गया था.
पुष्पिका गुस्से में- ये बातें भाई-बहन के बीच अच्छी नहीं लगती.
मैं- अगर कोई और बोलता तो क्या तुम्हें तब भी बुरा लगता?

पुष्पिका वहां से उठ कर जाने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. मुझे पता नहीं क्या होने लगा था. मेरे अंदर की हिम्मत अपने आप ही बढ़ने लगी थी. वैसे ऐसा करने के लिए बहुत हिम्मत की जरूरत होती है. एक तरफ पुष्पिका इसके लिए तैयार नहीं थी मगर फिर भी मैंने उसका हाथ पकड़ लिया था.
मैं बस उसके साथ आज सेक्स करना ही चाहता था किसी भी हालत में। पुष्पिका ने मेरा हाथ छुड़ाने की कोशिश की तो मैं कुर्सी से उठा और अपने हाथों से उसके गालों को पकड़ लिया. वो बस गुस्से से मेरी तरफ देखे जा रही थी.

मैं- पुष्पिका, अगर मैं तुम्हें पसंद करता हूं तो गलत क्या है? अभी थोड़ी देर पहले तुमने ही कहा था कि सब मतलबी होते हैं लेकिन मैं तो तुम्हारा ही भाई हूँ. मैं क्या मतलब निकालूंगा तुमसे! क्या तुम अपनी जवानी को यूं ही बेकार करना चाहती हो? अगर तुम मुझसे नाराज हो तो सॉरी. मैं अभी वापस दिल्ली चला जाता हूं.

ये सुनकर वो कुछ समय के लिए बिल्कुल चुप हो गयी. थोड़ी देर बाद मेरे कान के पास आकर बोली- भाई मेरा भी मन करता है लेकिन किसी को पता न चल जाये इसलिए ख़ानदान की इज्जत की वजह से मैं हमेशा अपने ऊपर कंट्रोल कर लेती हूं। आप मेरे भाई हो इसलिए मैंने आपको ये सब बात बता दी। लेकिन हमारे बीच में ऐसा कुछ नहीं हो सकता. आप मेरे भाई हो और मैं बहन हूं आपकी।

मैंने उसके गाल पर एक किस किया और बोला- अगर तुम कहीं बाहर कुछ करती तो पता भी चल सकता था लेकिन मेरे साथ करने के बारे में किसी को पता भी नहीं चलेगा. सबकी नजरों में हम भाई-बहन हैं. कोई शक भी नहीं करेगा हमारे ऊपर और मैं तुम्हें बहुत खुश रखूंगा।
इतना कहते ही मैं मेन गेट बंद कर आया।

चलते हुए मुझे महसूस हो रहा था कि मेरा लंड मेरी लोअर में तनने लगा है. तनाव में आते हुए लंड के साथ हवस भी बढ़ने लगी थी.

वापस आते ही मैंने उसको अपनी बांहों में भर लिया। वो भी मुझसे एकदम से चिपक गयी जैसे बहुत दिनों की प्यासी हो.
मैंने उसके लिप्स पर अपने लिप्स रख दिये. वो स्मूच करने लगी. अब हम भाई बहन नहीं रह गये थे. लग रहा था कि एक-दूसरे में समा जाएंगे। वो मेरे होंठों को ऐसे पी रही थी जैसे कि खा ही जाएगी. हम दोनों की जीभ एक-दूसरे के मुंह में घूमने लगी. कभी वो मेरे होंठों को चूस लेती तो कभी मेरे गालों पर चूम लेती. वह मुझसे भी ज्यादा गर्म हो गई थी.

15 मिनट तक हम किस करते रहे. उसके बाद हम अलग हुए. अब पुष्पिका के चहरे पर एक अलग ही खुशी झलक रही थी. बिल्कुल भी टाइम खराब न करते हुए वह मुझे खींच कर अपने बेडरूम में ले गयी. अंदर जाकर हमने फिर से एक-दूसरे को किस किया. उसने मेरी टी-शर्ट उतार दी. नीचे से मैंने बनियान पहनी हुई थी जिसको मैंने खुद निकाल दिया. बनियान उतारते ही मेरी चेस्ट नंगी हो गई. फिर मैंने लोअर भी खींच कर नीचे गिरा दिया और अपनी टांगों से निकालते हुए जमीन पर ही छोड़ दिया.
मेरे अंडरवियर में मेरा लौड़ा तन कर पागल हो चुका था. पुष्पिका के नाम की दो बार मुट्ठ मारने के बाद भी उसका जोश आसमान छू रहा था. पुष्पिका थी ही इतनी सेक्सी. मैंने फिर से उसको अपनी बांहों में पकड़ा और उसकी गर्दन को चूमने लगा. मेरा तना हुआ लौड़ा उसकी जांघों के बीच में छिपने का रास्ता ढूंढ रहा था.

कुछ देर तक उसको चूसने के बाद मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किये. उसके शर्ट को उतारा तो नीचे से उसने काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी. हाय … क्या बताऊं … उसके गोरे बदन पर काले रंग की ब्रा में खड़े हुए उसके चूचे देखकर मैं तो पगला गया. मैंने जल्दी से उसकी सलवार का नाड़ा खुलवाकर उसकी सलवार भी उतरवा दी. अब वो केवल ब्रा और पैंटी में रह गई थी.

मैंने उसको अपनी बांहों में कस कर भींचा और उसकी गर्दन को चूमते हुए उसको बेड पर धकेल दिया. उसके ऊपर चढ़ कर उसकी ब्रा के ऊपर से मैंने उसके चूचों को दबाया और फिर उसको पलटी मार कर पेट के बल लेटा दिया. उसकी ब्रा के हुक खोले और उसकी गोरी पीठ को नंगी कर दिया. उसके बालों को हटा कर उसकी पीठ पर अपने गर्म होंठ रख कर उसको चूमा और फिर से उसको सीधी करते हुए उसकी ब्रा को उसके कंधों से निकाल कर अलग कर दिया. उसके गुलाबी रंग लिये निप्पलों का तनाव देख कर मैं उसके चूचों पर टूट पड़ा.

पुष्पिका की चूचियों को जोर से पीने लगा. वो मुझे बांहों में लेकर प्यार करने लगी. मेरा लंड उसकी पैंटी पर रगड़ खा रहा था. उसके बाद मैंने उसके चूचों को चूस कर लाल कर दिया और उसके पेट को चूमते हुए उसकी पैंटी को खींच दिया. उसकी गोरी जांघों से जब उसकी पैंटी निकली तो उसकी हल्के बालों वाली चूत देख कर मैं धन्य हो गया.

मैंने उसकी टांगों को थोड़ी फैलाया और उसकी चूत पर अपने होंठ रख दिये. वो तड़प उठी.
उसकी चूत को चूसते ही बात मेरे काबू से बाहर हो गई. मैंने अपनी गांड उसकी तरफ घुमाई और कच्छे को उतार कर अपना तना हुआ औजार उसके होंठों पर लगा दिया. उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगी. 69 की पोजीशन में वो मेरे ऊपर आ गयी. उसने अपनी चूत को मेरे होंठों पर रख दिया और खुद मेरा लौड़ा अपने मुंह में ले कर आइसक्रीम की तरह चूसने लगी. मुझे तो मानो जन्नत का स्वाद आ रहा था।

इधर मैं उसकी चूत को पागलों की तरह चूस रहा था, उसकी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था. कुछ ही देर में वो झड़ गयी. उसकी चूत से गर्म-गर्म लावा बह चला. मैंने उसका जलता हुआ सारा लावा पी लिया. वो शांत हो गई मगर मेरे लंड को चैन कहां था. मैंने उसकी चूत में उंगली चलानी शुरू कर दी.

वो कुछ देर तो आराम से लेट कर मेरी उंगलियों से चुदती रही. फिर पांच मिनट के बाद उसके बदन में फिर से हरकत होने लगी. वो बोली- परम भाई, अब मुझे चोद दो प्लीज … अब मैं आपका लंड अपनी चूत में लेना चाहती हूँ।

मैंने अपना ‘सामान’ उसकी चूत पर रखा और उसके चूचों को पीने लगा. उसकी चूत पर लंड टच होते ही उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया. वो मेरी पीठ को सहलाने लगी. मैं हल्के से उसकी चूत पर अपने लंड का टोपा रगड़ रहा था. मेरे लंड का बुरा हाल हो गया था पानी छोड़कर. पूरा लंड पच-पच करने लगा था. फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे और उसकी चूत में एक धक्का दे दिया.

आधा लंड ही गया था कि वो चीख पड़ी. उसने मेरे होंठों को काट लिया मगर मैंने शरीर का भार उस पर डालते हुए उसकी चूत में लंड को घुसाना जारी रखा. धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया. वो मेरी पीठ को नोंचने लगी. शायद पुष्पिका को दर्द हो रहा था. लेकिन वो मेरे लंड को अपनी चूत में एडजस्ट करने की कोशिश कर रही थी.

जब वो थोड़ी नॉर्मल हुई तो मैंने धीरे-धीरे धक्के देने शुरू कर दिए. अब वो मेरा पूरा साथ दे रही थी. उसके मुंह से आनंद की आवाजें निकलने लगीं थीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… भाई … मेरे भाई … मेरी चूत को चोद दे … आह … मजा आ रहा है. फक मी हार्ड भैया.

पूरा कमरा उसकी सीत्कारों से गूंजने लगा. मेरे आनंद का तो कोई ठिकाना ही न था. उसकी टाइट चूत में लंड को पेलता हुआ मैं स्वर्ग में पहुंच चुका था. मेरे धक्के पर उसकी गांड उछल कर मेरी तरफ आती और फत्थ की आवाज हो जाती. ऐसे बीस मिनट तक वो चूत को धकेलती रही और मैं लंड को.
मैंने कहा- मेरा निकलने वाला है, कहां निकालूँ?
उसने बोला- भैया मेरे अंदर ही निकाल दो. आपका माल मुझे अपने अंदर लेना है. आज आप पूरा सुख दे दो मुझे.

दो-तीन जोरदार धक्कों के बाद मैंने सारा लावा उसकी चूत में ही निकाल दिया।
हम काफी देर तक एक-दूसरे के उपर नंगे ही पड़े रहे.

10 मिनट हुए थे कि इतने में ही गेट पर किसी के आने की आवाज आई. हमने जल्दी से कपड़े पहने. पुष्पिका ने कपड़े अपने बदन पर पहनने में मुझसे से भी ज्यादा फुर्ती दिखाई और फटाफट गेट खोलने के लिए चली. तब तक मैंने भी अपनी लोअर और टी-शर्ट डाल ली थी. अंडरवियर को जेब में ठूंस लिया और बाथरूम में घुस गया.
बाहर आकर देखा तो भैया कॉलेज से आ गए थे. मैं वहीं बेड पर बैठ गया और वो फ्रेश होने बाथरूम में चले गए. पुष्पिका ने उठते हुए मेरे लंड पर हाथ फेरा और मेरी गर्दन पर किस करते हुए किचन में चली गई. उसके बदन में आज खुशी की अलग ही लहर दिखाई दे रही थी.

फिर उसके बाद जब भी मैं मामा के घर जाता और हमें मौका मिलता तो हम दोनों एक-दूसरे को खुश कर दिया करते थे. यह सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा और आज भी चल रहा है.

आप सबको यह कहानी पसंद आई हो तो कमेंट करके बताना और मुझे मेल भी करना. यह मेरी पहली स्टोरी थी. अगर कोई गलती हो गई हो तो मैं फिर से आप लोगों से माफी चाहूंगा. धन्यवाद.

दोस्त की जुगाड़ भाभी की डबल चुदाई

मेरे प्यारे दोस्तो, कैसे हो आप सब … मैं आपका दोस्त शिवराज एक बार फिर से एक सच्ची घटना लेकर आया हूँ. आप सबका जो प्यार मुझे मिला, वो ऐसे ही देते रहना.

इस बार मैं आपको एक हसीन हादसा, जो मेरे साथ हुआ, उसके बारे में बताना चाहता हूँ. ये बात इसी साल दिसंबर के आखिरी की है. मेरी बीवी सर्दियों की छुट्टियों में अपनी माँ के घर गयी हुई थी. मैं घर पे अकेला था. दस दिनों तक मुझे अकेला ही रहना था.

मैं रात को खाना खाने के बाद फेसबुक सर्फ कर रहा था, तो एक दोस्त मुझे ऑनलाइन देख कर मुझसे चैट करने लगा.
उसका मैसेज आया- कैसे हो भाई? क्या हो रहा है? इतनी रात को ऑनलाइन क्या कर रहे हो?

उससे ऐसे ही नॉर्मली बात होने लगी, तो मैंने बताया कि यार तेरी भाभी मायके गई हुई है, सो कोई शिकार फंसाने की कोशिश कर रहा हूँ … हाहाहा.
वो भी हंसने लगा और बोला- यार मैं भी अकेला हूँ.
फिर वो बोला- मैं कॉल करता हूँ.

हम दोनों फ़ोन पे बात करने लगे कि न्यू ईयर का क्या प्लान है, पार्टी करते हैं.
मैं बोला- ठीक है … पार्टी साथ में कर लेते हैं. इस बार चुदाई वाली पार्टी रखो, कोई लौंडिया हो, तो बुला लो, उसी के साथ दोनों भाई मस्त दारू पी पी कर रात भर चुदाई करेंगे.
वो बोला- यार बात तो सही है, चलो देखते हैं कोई जुगाड़ मिलती है तो बताता हूँ. तुम भी देखो कोई तुम्हारी जुगाड़ हो, जो दोनों के साथ चुदाई कर सके.

थोड़ी देर बात कर के हम लोग सो गए.

अगले दिन शाम को फ़ोन आया. उसने पूछा- कहां हो … किदवई नगर आ जाओ … कुछ बात करनी है.
मैंने बोला- ठीक सात बजे तक मिलता हूँ.

मैं सात बजे उधर पहुंचा, तो वो कार में बैठा था. उसके साथ एक भाभी भी बैठी थी, जिसकी उम्र करीब तीस साल की रही होगी. वो ग्रीन साड़ी और जैकेट में थी. मैं उसकी पीछे वाली सीट पर बैठ गया.

उसने मेरा परिचय करवाया. उसका नाम मिशी था. उसने हाथ मिलाया तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर हैलो बोला और कहा- आप तो बहुत खूबसूरत हैं.

उसने थैंक्स कहा और बोली- आपका दोस्त अभी आपकी बहुत तारीफ कर रहा था.
मैंने बोला- अच्छा जी … सही है और बताइये क्या प्लान है?
वो बोली- मेरा कोई प्लान नहीं है, मैं तो फ्री हूँ. आप लोग बताओ.
मैंने कहा चलो- फिर पार्टी करते हैं.
भाभी बोली- ठीक है.

हम लोगों ने रम की दो बोतल खरीद लीं.

भाभी बोली- रम ठीक ले ली, ठण्ड है इसमें मजा आएगा.
फिर मैंने पूछा- यार आपकी कोई सहेली नहीं है, उसको भी बुला लो, फिर ज्यादा मजा आएगा.
इस पर वो बोली- अब इस टाइम तो कोई नहीं होगी, मैं फिर कभी बुलवा लूँगी. आज मैं अकेली ही तुम दोनों के लिए काफी हूँ.

इतना कह कर वो अश्लील हंसी हंसने लगी. हमने खाना पैक करवाया और दोस्त के घर की तरफ चल दिए.

करीब नौ बज गए थे. सर्दी के कारण मस्त कोहरा पड़ रहा था, ठण्ड भी जबरदस्त थी. हम लोग घर पहुंचे, तो दोस्त ने फटाफट एक एक पैग बनाया और हम लोग पीने लगे.

एक टाईट सा पैग पी कर थोड़ा राहत मिली और हम लोग रजाई लेकर बेड पर बैठ गए. मेरा दोस्त उस भाभी को किस करने लगा. वो भी पूरा साथ दे रही थी. वे दोनों एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे. मेरा दोस्त उसकी जीभ को अपने मुँह में पकड़ कर चूस रहा था, जिसे देख कर मेरा भी लंड खड़ा होने लगा. मैंने भी पीछे से उसे पकड़ लिया और उसके बूब्स दबाते हुए उसकी गर्दन में किस करने लगा.

वो भी दारू के एक पैग से मस्त होने लगी थी और धीरे धीरे पूरी तरह से गर्म होना शुरू हो गई थी.

तभी वो अचानक से पलटी और मेरे होंठों को चूसने लगी. कसम से जन्नत का मजा आ रहा था, करीब दस मिनट तक हम लोग उसको बारी बारी से किस करते रहे. उसके मम्मों को रगड़ते रहे.
अब मेरा दोस्त खड़ा हुआ और पैग बनाने लगा. हम दोनों को पैग देते हुए बोला- लो खींचो … इससे और मजा आएगा.

हम दोनों अपना अपना पैग खत्म करने लगे. मेरा दोस्त बोला- पहले एक एक राउंड चुदाई कर लेते हैं, फिर खाना खाया जाएगा.

चूंकि वो भाभी भी बहुत गर्म हो चुकी थी और हम दोनों भी बिना चुदाई किए रह नहीं सकते थे. हम लोग एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे.

तब तक मेरे दोस्त ने एक एक पैग और बना दिया और बोला- चुदाई करते हुए ये पैग खत्म करना है.

उसकी बात मान कर भाभी और मैंने पैग उठाया और एक एक सिप लेकर हम लोग काम पे लग गए.

भाभी तो मानो सदियों से चुदाई के लिए प्यासी थी. वो नशीली आवाज में बोली- मैंने जिंदगी में बहुत चुदवाया है, पर आज जो मजा चुदाई से पहले आ रहा है, वो कभी नहीं आया.
मैंने बोला- मैडम अभी तो प्रोग्राम शुरू हुआ है … सुबह हमारी चुदाई के नंबर देना. अभी तो बस लंड से मजे करो.

मेरे दोस्त ने अपना लंड उसके मुँह के सामने रख दिया. उसने तुरंत लंड को हाथ में लिया और मुँह से लंड चूसना आरम्भ कर दिया.

अब तक मैं भी नंगा हो चुका था तो मैंने भी अपना लंड उसके मुँह के पास किया. उसने मेरा लंड भी पकड़ लिया और सुपारे पर जीभ फेरते हुए चूसने लगी. वो मस्त रांड थी … साली हम दोनों के लंड एक साथ और बारी बारी से चूसने लगी.

तभी मैं नीचे को हुआ और उसकी मस्त चिकनी चुत को चाटने लगा. जैसे ही मैंने चूत चाटना शुरू किया, वो मेरे सर को जोर जोर से अपनी चुत पे दबाने लगी. उसने अपनी टांगें पूरी तरह से खोल कर मेरी जीभ को चूत चाटने की आजादी दे दी थी. वो मस्ती में अपनी आंखें बंद किए हुए चुत चटवा रही थी. साथ ही मेरे दोस्त का लंड भी चूस रही थी.

बड़ा मादक नजारा था दोस्तो … मैं उस मजे को शब्दों में बयां नहीं कर सकता.
जब मेरे दोस्त से बर्दाश्त नहीं हुआ, तो मुझसे बोला- अबे तू हट … मुझे इसकी चुदाई शुरू करने दे.

मैं हट गया और दोस्त ने उसकी टांगों को खींच कर उसे चित लिटा दिया. उसने भी अपनी चूत लंड के लिए खोल दी. दोस्त ने उसकी चुत में अपना लंड लगाया और फांकों में सुपारा रगड़ने लगा.

उसकी चूत तो एकदम से जलेबी के शीरा जैसी टपक रही थी. इतनी गीली चुत मैंने कभी किसी औरत की नहीं देखी. शायद वो चूत चुसाई से झड़ चुकी थी.

पर उसका मन नहीं मान रहा था. वो चुत में लंड लेने के लिए मचलने लगी थी. मेरे दोस्त ने एक ही बार में पूरा लंड उसकी चुत में घुसा दिया. वो चीख निकालती, इससे पहले मैंने उसके मुँह की तरफ जाकर अपना लंड उसके मुँह में अड़ा दिया. वो मजे से मेरा लंड चूसने लगी. कभी मैं उसके होंठ चूसने लगता कभी लंड चुसवाने लगता. मेरा दोस्त मस्ती से उछल उछल कर उसकी चूत चोद रहा था.

भाभी ने चूत में लंड की ठोकर लेते हुए मुझसे कहा- आज पहली बार मुझे औरत होने का मजा आ रहा है. अभी तक पता नहीं था मुझे कि औरत होने का सुख क्या होता है. आज तुम लोगों ने मेरी जिंदगी को तृप्त कर दिया.

मेरा दोस्त गाली बकने लगा. वो नशे में टुन्न हो गया था. वो बोला- क्या बोल रही है मादरचोदी … आज तो तुझे चोद चोद कर मस्त कर देंगे … साली रांड.
उसने भी गाली बकी- अबे गांडू साले चोद दे आज … तेरा मस्त लौड़ा मेरी चूत की खुजली मिटा रहा है … अन्दर तक पेल आह … भैन के लौड़े..

तभी मेरे दोस्त ने मुझे आने का इशारा किया. वो हट गया, अब मैं भाभी की चुदाई करने लगा. मेरा दोस्त लंड चुसवाने लगा.

इस तरह हम दोनों काफी देर तक बदल बदल कर उसकी चुदाई करते रहे. कभी मैं उसकी चूत में लंड पेलता, वो लंड चुसवाने लगता. कभी वो अपनी जगह बदल लेता और उसे चोदता. वो भी दोनों के लंड से बारी बारी से चुदवा कर मस्त मजे ले रही थी.

हम लोगों को चुदाई करते हुए करीब डेढ़ घंटे हो चुके थे. न जाने कितनी बार वो झड़ी होगी, पर फिर भी गांड उछाल उछाल के चुत चुदवा रही थी. उसके और हमारे जोश में कोई कमी नहीं थी. हम लोग चुदाई करते करते हुए तीन पैग खत्म कर चुके थे, पर चुदाई खत्म नहीं हो रही थी. न वो चूत देने से मना कर रही थी, न हम लंड पेलना रोक रहे थे.

मेरे दोस्त ने एक एक पैग और बना दिया. अब हम लोगों का दिमाग काम नहीं कर रहा था, बस चुदाई किए जा रहे थे.

तभी मेरे दोस्त ने उससे पूछा- पीछे से करें?
वो मना करने लगी तो मेरे दोस्त ने बोला- यार प्लीज एक बार करने दे. एक काम करते हैं, एक साथ दोनों एक आगे से पीछे से चुदाई का मजा लेते हैं. जैसे ब्लू फिल्म में चुदाई करते है.

वो मूक निगाहों से देखे लगी थी. उसको नशा चढ़ गया था. वो डबल मजा लेना तो चाहती थी, पर हिम्मत नहीं कर पा रही थी.

दोस्त ने कहा- चल ट्राई करते हैं, तुमको दर्द हो, तो रुक जाएंगे.
उसने गांड तो पहले मरवाई थी, मगर डबल ड्रिल कभी नहीं करवाया था.

खैर आगे पीछे दोनों तरफ से लंड पेलने का तय हो गया. अब हम लोगों ने पोजीशन बदल ली. मैं नीचे लेट गया, भाभी अपनी चूत फंसा कर मेरे ऊपर मेरे लंड पर बैठ गयी. उसने एक बार लंड आगे पीछे किया और लंड चूत में सैट कर लिया.

अब मैंने उसको अपनी छाती पर दबाया, तो मेरे दोस्त ने पीछे से उसकी गांड में धीरे धीरे लंड डालना चालू कर दिया. उसकी चुत से पानी निकल निकल कर पूरी गांड को भीगा रहा था.

उसकी गांड एकदम चिकनी थी. ऊपर से दारू के नशे में उसे भी ज्यादा प्रॉब्लम नहीं हुई. थोड़ी बहुत आह कराह के बाद उसने दोनों लंड ले लिए. अब भाभी की एक साथ दो लंड से चुदाई हो रही थी.

मिशी भाभी की चुदाई का क्या कामुक नजारा था. हम लोग बहुत मस्त चुदाई कर रहे थे.

हम तीनों को एक घंटे से ऊपर हो चुका था. जिंदगी में पहली बार हम तीनों ने लगातार एक घंटे से ऊपर चुदाई की थी. हम सब थक चुके थे. मेरे दोस्त का लंड मिशी भाभी के गांड में फंसा था.

दोस्त बोला- मैं अपना खेल खत्म कर रहा हूँ.

हम दोनों ने जबरदस्त धक्के लगाने शुरू कर दिए. करीब पांच मिनट में मेरे दोस्त का लंड झड़ गया. इसके बाद मैंने मिशी भाभी को पलटा और ऊपर आ कर धक्के देते हुए उसकी चुत में झड़ने लगा.

आज जिंदगी में पहली बार झड़ने का अलग आनन्द मिल रहा था.

लंड का पानी झड़ जाने के बाद करीब आधा घंटे हम लोग ऐसे ही लेटे रहे. फिर तीनों उठे. रात के साढ़े ग्यारह बज चुके थे. हम लोगों ने खाना खाया, साथ में एक एक पैग भी पिया और फिर से चुदाई की तैयारी करने लगे.

उस रात हमने चार बजे के आस पास तक चुदाई की. हम लोग तो दो बार ही झड़े, पर वो न जाने कितनी बार झड़ी होगी.

सुबह हम तीनों एकदम निढाल होकर सो गए थे. हैप्पी न्यू इयर का उत्सव मिशी भाभी की चूत में लंड पेल कर मना लिया गया था.

इसके बाद मिशी भाभी हम दोनों के लंड से जब तब चुदने आने लगी थी.

तो दोस्तो … कैसी लगी ये रियल चुदाई की घटना … सच में ग्रुप सेक्स में अलग ही मजा है. कभी मौका मिले, तो ट्राई जरूर करना और जिसने भी कभी ट्राई किया हो या ट्राई करने की इच्छा हो, मेल करके मुझे जरूर बताना.
मैं आपके ईमेल का इंतजार कर रहा हूँ.

A FRIEND OF MY HUSBAND Sex

Let me describe first of all myself first, my name is Sabitri. I am a married woman of 36 years but have a nice body shape. No one can say at first glance that I am 36 years because I have got very nice and attractive features and a figure from heaven. I am tall. My height is more than 5′ 6” with a slim body as I take very good care of my body. I have a great, praiseworthy, and an attractive figure. My waist is still 34” while my breasts and hips are 36” though I am a mother of three children and my first child is nearly 14 years old. And all of them have my complexion which is white reddish. My lips are thin with small-mouthed and my eyes are wide big black colored and have long black hairs.
I am living with my family and my husband very happily. I think my husband loves me that very rare husband love their wives. My marital life was nice. 

Since we are not newly married, we don’t have a continuous sexual relationship but we follow a routine twice or thrice a month. May be this is enough for other woman but I don’t think why I think that this is not enough for me, but I have never thought about it seriously. I loved my husband and this is fact that I had only given myself to my husband but as I got older I sometimes wondered what another man would be like. I had no thoughts of finding out but it was interesting to think about it.

My husband has a friend named Rajiv from his childhood who living near our house. We have very good relation between the two families of us. We use to go each other houses without any hesitation on every occasion. Rajiv’s wife Dipika didi and I have very good friendship as our hubbies had. Rajiv is very nice and well-mannered man. He keeps track of all our small needs. He has a very charming personality. I must admit that he was very attractive. But I never think about him in this point of view, I mean sex with him not that he has shown me that he sees me in that point. We ever meet like a sister and brother. Although we have met so many time in solitude. My husband had never objected whenever I met him nor he objected met his wife with my husband. We were like one family and we don’t care that we have no blood relation

Once it was noon and my husband was out of station while children were sleeping and I have nothing to do so I went to Rajiv home to meet his wife as usual we meet once or twice in a week. When I entered the home Rajiv’s wife Dipika di was not at neither home nor the kids were there. I called so many times to Dipika di but there was not any response. I kept wondering what the problem was and why nobody’s responding me. I stood there for a while and after few seconds Rajiv shouted from the bathroom that he is coming out. “Bhabi please wait a minute for me. And after few minutes he came out from the bathroom. His hair was wet as he recently took the bath. He became very pleased to see me and asked me to sit. I asked from Rajiv that where is Dipika di, I mean bhabi and kids. He told me that they have left just an hour for her native city as her mother is ill and that she called her in hurry so she couldn’t meet you. He asked me for some drink and tea. I laughed and said that now you will make tea for me? Then he told me ok if you don’t want to make it by me then you should made it, as I need it. So I went to the kitchen and that was not unknown place for me. I don’t know but I was too nervous today to feeling alone with him, as it was not the first time alone with him for me. When I was fumbled around in the kitchen I was thinking about an excuse to leave, but couldn’t. So I prepared the tea both for us. He was in lounge when I brought the tea and I sat with him in one sofa and put the try on the table near the sofa. We started talking and I inquired that why he is at home at this time, he said that he was not feeling well. I asked him about his sickness but he didn’t tell anything. I offered her to take her to doctor but he refused and said that he has already taking medicine. We were talking on every topic. He was looking me today very strange and I was thinking that what is the new and soon I realized that there is something new. I felt some new thing and it could lust in his eyes.

He started talking about my cloth and said that I wore very nice cloths today and that it looking so nice and gives extra charming to my personality which has already extra grace full. I was wearing the red color salwar kameez as I usually wear. I felt shy for a while and then said thanks to him. Then he said how my husband is lucky that he has found so nice, beautiful, gorgeous and so sexy wife. I found myself once again in an embarrassing position and told him “Rajiv ji what are you talking today, you have never talked like this before.” Then he said you mean that I should have talked it before. No I don’t mean like this but I consider you as my brother, and Mr. Rajiv you have so nice and beautiful wife. “But not like you”-he replied. Then he turned his conversation towards his martial life and told me that his martial life is not so satisfied and that his wife doesn’t care about his desires. I was surprised that how Rajiv is talking today? He proceed his conversation and told me that he wants to talked with me on this topic from long but he had not get chance for it.
I was now fully confused and want to leave. So said him that I should go now as the children were expected to awake but he request me not to leave him alone and I stayed there I don’t know why? He started state away about his sexual life and I started to feel nervous as Rajiv was talking about sex and I was feeling lightheaded. I felt for the first time that something might happen that noon. Suddenly he moved near to me as we seated on one sofa, and I became astonished when he grabbed me from my waist and put his mouth on mine. My whole body tensed as Rajiv warm lips touched mine. I followed my marital life and was going to get out of there. As I started to turn around, Rajiv grabbed me in a powerful embrace. I was trying to escape from his grip but truly not from my heart. His body was tight against mine and I couldn’t help but be turned on by how well my breasts fit under his massive chest. He was kissing my lips passionately and his hands were on my breast rubbing them gently. I was really in double minded at that time, that what should I do? I was feeling this rush of sexual tension like I never felt in my life but at the same time I knew it was wrong. At first I resisted but it was surprisingly feeling good. I tried to pull back but the empowering embrace made it impossible and Rajiv’s warm love was not more ignore able for me, As Rajiv lips were pressed tight against mine, I started to feel a hot sensation deep within…..

Our lips melted together as if they were becoming one. I responded him unintentionally. Then he parted his lips and wanted to slide his tongue against my mouth. First I resisted but then I parted my lips and allowed his tongue deep inside me. His warm tongue slowly entered my mouth. We were motionless. He warmly licked my mouth as I was fighting for some sort of control. I didn’t kissing back but I was not stopping him either. He was passionately sucking and licking inside my mouth as I was losing control. I always liked Rajiv, and maybe there was this passion. I was feeling nice so I raised my tongue. When our tongues met it sent a shock wave shivering through my body. I was beginning to lose control of my inner sexual power. I passionately licked his tongue back as we started to deeply kiss each other and I forgot all about my husband or anything else as I was so turned on by this incredible sensation. . Nothing else was on my mind but this powerful kiss. As he pulled his tongue from my lips and started to lick my neck forehead nose and neck. I was too excited at this time but I muttered to him that we are married and shouldn’t do this. But he was not hearing me. I wanted to stop him but couldn’t, and he re-entered his tongue into my mouth as we started to kiss wildly again. After some time he again made his way down my neck. I again told Rajiv to stop. Rajiv magically licked my neck and ears, and the warmth of his mouth on my erogenous zone did not allow me to notice his hands on my breast this time. His hands were now on my impressively inviting breast and he was rubbing and massaging them. Now this was out of my control.

I again tried to pull myself from this carnal spell but by this time he had moved his hand in my neck as it was too low cut, I asked him once again that Mr. Rajiv this is sufficient, and we should stop it. He was very expert and well known about the woman psychology. Within flash he released me from my kameez and left only in my bra. He unhooked it releasing my tight tits. My ripe breasts were beautiful and inviting. He knelt down and took one of my erected nipples into his mouth. His warm tongue licked across my swollen nipples, and was sucking my tits like they were his lifeline, which was sending me into a sexual confusion my body was so filled with passion that I became weak. Rajiv lifted me off the ground and held me as he continued to suck my tits. Rajiv licked my tits up and down. He laid me on couch. I felt like this was a chance to stop this erotic heat. I laid there half naked wanting him on me. I thought about how I secretly wanted another man at least once in my life. I wanted him now really, as I probably couldn’t have found my husband as hot as Rajiv. He was now trying to take my salwar off. I whispered once again not to do like this. But I was wondering how it would feel to have another man taste my love and that thought sent my mind in a naughty fit of desire. He took off my salwar which slid from my legs. As Rajiv took off my salwar, the exotic feeling of being totally nude in front of another man sent a shiver up my spine as instinctively my legs spread open. He leaned and put his mouth on my pussy lips and kissed, licked it.

I could not believe I was letting Rajiv to suck my pussy. I was powerless to stop his oral attack, I again whispered out in a frantic but orgasmic way that I couldn’t do this I am married. He told me married can do this very easily, don’t worry you will feel well. But I will never forgive myself for this entire my life. I replied. How can you say your husband so loyal to you? Doesn’t he go to other women?. He said to me. But I don’t care what he does but I couldn’t. Without reply me he took my swollen cunt lips against his mouth and let his tongue in to probe. Rajiv sucked and licked inside of me. Rajiv licked me deeply as my pussy was on fire. It was too incredible, and pleasurable, which I had never felt like this before in all my sexual life. Now it was not in my control and my tight little cunt and whole body was burning and I grabbed Rajiv head and was burying his face into my wet cave and I started moaning and bucking wildly. Rajiv was licking my clit as I moaned like an animal. Sweat was pouring from my body as I was yearning to be entered. Would I let another man’s rock hard cock enter my cunt where I have never imagined letting any other man cock? But Rajiv was sending my body into a sexual frenzy as his face was buried into my drenched pussy. Rajiv was relentless and experienced, as he knew exactly what a woman wanted. He was really aroused me and I felt his cock in my cunt madly. I felt nervous excitement as I knew exactly where this was leading and I realized I was losing the battle……. 

After a long time, Rajiv whispered that he desired that I should take his cock my innocent married mouth. First I refused that I have never done it, and that I don’t know how one can take this in one mouth. But he insisted very. As the passion filled my body to the point of thrusting, explosion I argued within myself. If I were to suck Rajiv’s cock I might be able to quench my thirst and satisfy this stud without allowing him to put his cock into my cunt as I wanted still to stay true to my husband. I wanted him to be the only man who I tasted. Rajiv was fully erected and he had the biggest dick I could ever imagine. It was a good eight inches long and thick twice then my husband. After some argument, I leaned in and put my mouth on his cock. I kissed and licked his cock for a while and then I opened my mouth as far as I could and took in his head. The swollen head of this prick needed more space. I opened my mouth as far as I could and took in his head. Rajiv moaned in delight as I was fulfilling his desire. I bobbed my head back and forth trying to mouth fuck this man. I hadn’t had much experience in this area. As I continued to slide his huge cock in and out of my mouth Rajiv continued to tell me to suck his dick. I was sucking his dick which was now so excited and pleasurable experience for me and my hand went to my cunt which stuck up my cunt. It was gushing with juice and was begging for more. I knew now the obvious, I was going to get fucked by Rajiv it was really totally a new experience for me, as I have never sucked my husband’s cock as he never asked for it.

My husband had not given me what Rajiv is giving me now, and if my husband were here I would tell him this is real sex. I needed to be fucked now and Rajiv sensed my urgency and pulled his monstrous crank from my mouth. He had really the big one, twice than in thickens and long from my unaware husband. Who never think that his loyal wife will suck his best friend cock, and she was going to take his fiend dick in her lovely pot. The thought of this huge cock inside of me sent my body into a shiver. But I my inner core was begging for his dick to ram me. By this time I couldn’t control the passion.

And I fell back and eagerly spread my legs. He was rubbing his over powering cock against my pussy lips. I knew what he was doing. He was not giving it to me unless I begged. He was rubbing it to my clitoris and I had a fire inside my cunt that only a long, hard cock could extinguish. He knew that well. So I started to beg and cry for his cock. I took his cock and put it on my pussy hole saying stop it and insert this in me. I was so swollen and wet. So Rajiv had very easily his cock head inserted in my cunt as it was too wet but due to his bigger cock I felt little pain. Aaaaa aahhhh! ..big and loud noises poured out of my lips but as no one was at home, it was safe. Rajiv then grabbed my legs and held them up as he slid his dick further in my cunt. He had to pull back and push forward a couple of times to stretch my tight cunt. He had really big cock, which made my pussy hole resized more my husband’s custom fit hole. I was screaming with ecstasy as Rajiv vibrating eight inches cock easily deeper into my love hole. My legs were straight up in the air and my fingernails dug into Rajiv’s hips. As he pumping all of his 8 inches rock hard into my cunt hole. He was slowly pulling his dick back and forth. He was fucking me in very sophisticated manner, which I appreciated very much, and I wanted him to fuck me in this way forever

Rajiv was giving me what I was mercifully begging for. He was fucking me strongly, and I was feeling his hard rock cock in my depth of my cunt flesh. I also start having pleasure and started jumping under him to accompany his moves. His testis starts making noises with every hit to my buttocks. I was not in this world but I felt I was going in and out of conscience as he fucked me. I was numb to the world as I was being fucked like a wild animal. Rajiv opened my cunt with his rock solid wide eight-inch cock. He pumped me fast and hard. Rajiv fucked for a long time and was now looking tired, so he could not control my legs anymore. As we were doing all this in the couch so my feet were planted on the ground and I was bucking like a bronco. Rajiv was ripping me in half with his huge package and couldn’t get enough. I was now in full control of him so he asked me to ride on him now. And this was the last desire of mine that I want ride on him. He pulled out his cock from my pussy and lay on his back, and I climbed on top of him. By now my shyness and loyalty to my husband was gone. I caught his 8” cock in my hand and guided it on my pussy hole. My proud pussy took in his eight-inch pole in one stroke. His long cock went in my pussy like a fish in water cave as I needed it so bad. I bounced and bucked so hard, I thought this thick prick was going to tear me in half. I was jumping on him; I took him in even farther than when he was on top on me. I couldn’t keep up anymore, the massive size of his cock was getting the best of me and I was slowing down. Rajiv put his hands on my butt and started to pull me down deep onto his dick. That was very nice and I was crying for deep and hard fuck from Rajiv. My breasts were jumping up and down which he caught by his hand and squeezed them.

That was my thrust for fuck as I have been not fuck like this from long, and I was wonder how a conservative woman like me begged to be fucked like this. I needed to get fucked and begged Rajiv to finish me off. Then he asked me to turn I wonder that what he want but without any question I turned and he came just behind me and put his dick in my wet pussy he inserted his cock in my pussy from my ass side. Now he was fucking me from behind with his full power and I was bearing his all-powerful stroke very happily as he was really giving me the nicest pleasure of my life. And I gave him all I had. Now we both were too exhausted and I asked him to finish it. And he increased his rhythm of stroking. After few minutes he and I both came together. He filled my pussy with his heavy load, while this was my third cum. I came so hard I felt like someone let the air out of me, we lay there for a while and were kissing each other. This time I was kissing him with lot of love, because he gave me lot of pleasure, the pleasure that my husband had nerved give me in my whole martial life. We talked and I said him compiled an innocent married women, beg you to fuck. He laughed and said your fucking was my dream from the beginning. But you have never showed it to me. I replied. He said I know that you were not that type of woman who can do this so easily. After some I asked him to leave now and He helped me dress for, as I was hardly able to move due to hard fuck.

When I was leaving him he hugged me tight and kissed me, he asked me that when we meet next. I said to him that I can’t promise anything right now but if I get any chance I will definitely inform you. He started insisting me for more after that encounter of ours. It was hard for me to say no again and again to him all the time. So whenever I get any chance I call him and allow him to make love to me. I never take risks. I call him only when I fill its really safe. I never ignored my husbands or my children’s needs till now. I know I will never do that in future too. Yes I cheat my husband sometimes but this occasional cheating and hot sex with Rajiv helps me to stay happy and fulfilled. You won’t believe that after I started fooling my husband, I have started to love him more intensely. Now I can’t tolerate a simplest problem of my innocent husband and became very attentive to him. I try to fulfill my innocent husbands every needs. I must admit that he also started responding very well to my changed behavior. Now I can openly say that he is madly in love with me also.

An Unexpected Erotic Surprise

One day a friend of mine by the name of Rohit came over. He is a very old and dear friend. Unfortunately recently he was going through certain problems with his wife. He was genuinely unhappy and I decided to invite him over for dinner. Rohit is about one or two inches taller than me at 6 feet 2 inches and has a muscular build. That he was having problems with his wife was indeed a surprise because during our university days he had a way with girls and was one of the more envied people.

My wife Anjali was wearing a blue sari with matching sleeveless blouse. With her subtle makeup and silver jewellery she looked stunning. As the meal progressed I noticed that she took a keen interest in Rohit’s problem. At one time it appeared that Rohit was to tell me something in confidence and alone but Anjali refused to leave. After a couple of drinks even I was in a couldn’t care less mood and so insisted that she stay. It transpired that Rohit’s wife was not at all responsive sexually. For her it was a chore that had to be performed. Not the ecstatic experience that it was for Anjali. Both Anjali and I were very sad for Rohit. After the meal Rohit wanted to go back but we insisted that he stay over. 

Anjali saw to it that his room had everything that was could be required. Bed, quilt, water, AC, everything was in place. Anjali too changed into a nightie and we retired to our respective rooms. 

Just as we were about to turn in, there was some electrical fault and what followed was complete darkness in the building. After a while it became clear that a phase had short circuited and there was now no electricity in any room. The only thing that was working was the AC of our room since that took its current from another phase. Anjali was apparently quite tired after having prepared all the delicacies that we had enjoyed at dinner and within no time she was asleep.

It was very hot and I felt bad that I had or rather we had asked Rohit to stay over. It would have been indecent on our part to have carried on sleeping while he sweated it out. I therefore got out of the bed and tiptoed to his room. There was nothing but sheer darkness everywhere. Then I noticed that the door of the balcony was open and he was standing there getting some respite from the fresh air.

“Rohit,” I whispered to him. “ Come inside. To our room. The AC there is working.”

“No, you carry on.” He whispered back.” Why spoil your sleep because of me?”

“Anjali is already asleep; so the question of her sleep being spoilt does not arise. And I, as you can still see am wide awake. ”I replied.

“ But there is only one bed there?” Rohit was still hesitant.

“Aw, come on now.” I insisted.” Don’t be shy. Anjali is not sleeping naked.”

I could see Rohit’s silhoutte shrugging his shoulders and following me to the room. In addition to the darkness there was just the silent humming of the AC. Both Rohit and I were in T shirts and shorts. I lay down in the middle and Rohit occupied the place that I usually occupy. Within five minutes even Rohit fell asleep. It seemed that either I had had too much to eat or perhaps there was some other problem but I couldn’t fall asleep. After tossing around for a while I decided to do what Rohit had been doing; i.e.to take some fresh air from the balcony the door of which was still open.
I got out of the bed and very slowly proceeded to the balcony leaving behind on the same bed two people: my wife clad in virtually nothing but her bangles, necklace, anklets and a very thin nightie and my best friend, muscular and well built, a ladies’ man and one who had not been getting along with his wife recently.

The fresh air was soothing and balmy. Somewhere in the distance I could hear the barking of dogs. Gradually I found myself going over the day’s events( a completely boring and useless exercise ) and I think that is when I dozed off.

When I woke up with a start I think I had already been dozing off for almost two hours. The electricity had been restored and the fans were whirring. The lights were naturally off since they had been put off before we had turned in. I thought of entering my bedroom to wake up Rohit and to tell him that he could go back to his room since the electricity had been restored. However I was quite surprised to find that both Rohit and Anjali were awake. This surprised me no end. After all with the Air conditioner on there was no reason why their sleep should have been disturbed. When I entered, it appeared to me as if they had been expecting me. Somehow their behavior seemed strange I put on the light also and I saw Rohit feeling somewhat sheepish. I told him that he could go to his room. He smiled at Anjali who smiled back at him and Rohit left the room. The rest of the night passed off uneventfully except for the fact that after Rohit’s departure Anjali was even more sexually active and we made absolutely mind blowing love. In my heart of hearts I was happy that due to Rohit’s visit my wife had become even more uninhibited. However deep inside me something rankled. Why were these two awake when I was dozing in the balcony? What had transpired between them? She had started wearing sexier and more revealing clothes. She was in remarkably good shape. With a height of 5 feet and 5 inches in bare feet she had a firm bust of 34 B. Not only that she had a flair for carrying off both Indian and Western attire and looked incredibly stunning in both of them.

There had never been any discussion regarding actual sexual intercourse with someone else. I decidedly found her behavior lost and somewhat strange for a couple of days after Rohit’s departure. The only time when she came into her element was when we were in bed. At that time I found her to be even more active than what she had hitherto been. 

However one day (few weeks after Rohit’s departure) I came home very early. I had an appointment to one of my client who lives very near to my house. But he cancelled it at the last moment. So I decided to come home early because there was no point to returning back to office at that time. She was in the kitchen and I sat on the sofa after cleaning my self in the bathroom. I was waiting for her to serve me a cup of coffee. She came to me with the coffee and said to me. ”Promise me that you will not be angry if I tell you something.”

Thinking that it had something to do with domestic affairs I asked her to go ahead.

“It has something to do with the night when Rohit stayed over.” She said looking me straight in the eyes.

I was surprised and frankly a bit apprehensive.” What about it? Tell me!”

“First promise me that you won’t be angry.” She repeated.

“What is all this? You are driving me nuts. Okay I won’t be angry. What’s it?” My patience was running out.

“Listen patiently. That night I was feeling very bad for Rohit. Sexual satisfaction is such an integral part of one’s life and Rohit was being denied that pleasure by his wife. Frankly I did not know that you had called him over and promptly left me lying there with him. You know that I like to sleep naked. It was because of his presence in the house that I was wearing a nightie. After an initial spell of sleep I decided to, well, make love to you.” Anjali fell silent.

“Well, go on and don’t stop.” I said.

“I think I will complete it tomorrow.” she teased me.

“If you won’t complete that you won’t live to see tomorrow.” I replied.

“My, my! How impatient you are. To complete it. I took off the nightie and directed his hand to my breasts thinking it to be your hand. I did think it to be a bit different but I couldn’t ever imagine that it was Rohit. Soon he cupped both my breasts. I don’t even know when he took off all his clothes; he was as swift as that. I felt his tongue at the sole of my feet gradually tickling my inner thighs until I found his tongue exploring my pussy. You do it in a more gentler way but his tongue was literally pushing its way inside the pussy. It was at that moment that I realized that it was not you. You tell me what could I have done?” Anjali stopped speaking.

“What happened?” I was breathless.

“Now you are being silly! What could have happened?” she asked me.

“Complete it. I want to know everything.
“His tongue found its way inside and he sucked at it like a man deprived for a very long time. To be frank even I felt nice giving him the satisfaction that he should have got from his wife. I don’t know what came over me but I bent down, found his cock which was by then hard as a rock and slowly, very slowly took him in my mouth. All men have different body odor but Rohit’s was nice. He became very still wanting to savour every moment of the time his cock was inside my mouth. After having been with you for so long, I do know what pleases a man. I am sure the suck that I gave him must have been the best that he ever received.” Anjali said.

“Is that all? Did he come inside your mouth?” I asked

“No,I would rather have a new person come inside my pussy than in my mouth.” she replied.

“For God’s sake tell me. Did he screw you?” I asked.

“Come on,now. These are not the words I expect my husband to use. Screw? Instead of ‘making love’ you used ‘screw’. This is derogatory indeed. ”Anjali chided me.

I suddenly realized my mistake. If I was getting a thrill out of this I really should not have used these words.

“Okay, I am sorry. What happened next? Tell me in detail” I asked.

“Okay, after some time I could feel that there was a lot of precum in my mouth. I therefore stopped. It was then that he made me lie down on my back. He has a knack with teasing the breasts. Taking both my hands in to his hands he teased the nipples without actually taking them inside his mouth. Once they were begging to be sucked he took them in his mouth and sucked them so hard that I virtually gasped

he then played with my anklets and then folded my legs so that the soles of my feet were at his muscular shoulders.” Anjali said.

“Muscular?” I said tentatively. 
“Yes, he has a nice body. He has far better than yours. My knees were almost touching my nipples. I was wondering where you were but he had my body on fire so that I was not exactly in a position to think of anything else. I could feel his cock at the entry of my pussy. In fact the head was virtually embedded there in the folds of the pussy. And it was all so wet with the secretions. I think he was in two minds wondering that I may feel bad. He then thrust his tongue inside my mouth and after a while whispered two questions in my ears.” Anjali stopped.

“What were they?” I was besides myself with curiosity.

“He asked me whether he could enter me. The second question was whether he could cum inside me. ”Anjali said.

“Well, what did you do then?” I asked breathlessly.

“I answered yes to both of them. After all, he has been going through such a bad marriage. With my heels I dug into his tail bone and in no time I found him entering me. Once inside me he remained there for what seemed to be an eternity. I am sorry if you don’t like this but I will be honest. I think there should be complete honesty between a husband and wife. It felt nice.”

“It felt nice?”I myself was unsure of the tone of my voice.

“Yes, love. It did. Not only that he said that my pussy had one of the more shapely ones that he had ever seen on a girl and that you were very lucky to have a wife like me and also that it was very decent of you to permit him to make love to me. I told him that you did not know but since he knew that he had my consent I do not think he was in a position to withdraw. 
Don’t compare everything with yourself, darling. With you, of course, sex is an out of the world experience but he too was very nice. Moreover I had the satisfaction of knowing that what I was doing was good. Somewhere deep inside me I thought that you knew. However that assumption proved to be wrong. After a while he started making love by withdrawing fully and then thrusting his cock right upto the hilt. Each thrust of his was making me crazy with pleasure. This carried on till I was on he verge of an orgasm. By a strange co incidence he too discharged inside me at that very moment. God, was it a gush of fluids! It must have been stored inside him for months. I think the voices of pleasure that escaped from my throat must have woken you up. It took you almost ten minutes to arrive by which time we had had time to get back into our clothes. Are you angry with me? Have I been unfaithful?” Anjali asked me anxiously waiting for my answer.

I took her hand to my cock that was absolutely stiff. ”If I was really angry would this be behaving in this manner? And no, you have not been unfaithful. You have helped out a friend. That is all. In fact I would go so far as to say that had I been knowing I too would have joined in and we could have had a threesome. But would it have been okay with you?” I asked. 

“Really!” Anjali replied with an impish grin. ”Of course I would have been able to handle it. Rest assured that your wife is fully capable to ensure that neither you nor your friend will be disappointed. You are such a darling; such a sport. I am really proud to have you as my husband. But can I tell you something that will make you pleased? Really pleased?”

“For God’s sake, get over with your surprises. What is it?” I asked.

“Darling had you asked for something else from the Almighty at this moment you would have got it. You expressed the desire for a threesome. Well, if you will just go into the guest room, you will see Rohit sleeping in the bed. For the last 2 weeks he was coming here in every afternoon and filling my pussy by his thick sticky cum after fucking my brains out with his enormous cock. I was planning to tell you about it on Saturday night. But today when you came early I instantly decided to try my luck. And we are very lucky. Your or rather our desire for a threesome can be fulfilled now!” Anjali said. I could see her eyes shining with anticipation.

At that moment I realized that circumstances that had started Anjali off on her journey of sexual discovery was going to take us to many more exciting destinations and I was very happy to be her co passenger on those journeys.

चाची की बेटी को बहुत मजे से चोदा

हैल्लो दोस्तों, मेरे चाचाजी की फेमिली में चाचा चाची और उनकी एक बेटी है और हमारा उनके साथ बहुत अच्छा प्रेम प्यार है। में उनके घर जाता रहता हूँ और मेरी चाची बहुत सेक्सी है और उनकी बेटी सारा मुझसे 3 महीने छोटी है। उसका तो जवाब ही नहीं है, इतनी सुंदर लड़की लाखो में एक होगी और उसकी सेक्सी टाँगे, काले खुले बाल, काली आँखें, गोल-गोल ब्यूटिफुल बूब्स, मोटी गांड अगर आप देख लो तो वहीं झड़ जाए, वो कपड़े भी बहुत सेक्सी पहनती है। हम स्कूल से ही एक साथ पढ़ते है और अब कॉलेज में भी एक साथ ही है, स्कूल से ही लड़के उस पर लाईन मारते थे। अब हम कॉलेज में भी एक साथ थे। वो कॉलेज में बहुत सेक्सी बनकर आती है, टाईट स्कर्ट या जीन्स जिसमें से उसकी गांड नजर आए और टाईट टॉप जिसमें से बूब्स की शेप बहुत अच्छी लगती है, कई बार तो उसके टॉप में से उसके निप्पल भी साफ-साफ दिखाई देते है। सब लड़के मेरी पीठ पीछे उसके बारे में बाते करते है, तो मुझे बहुत अच्छा लगता है। में क्लास में भी उसे देखता रहता हूँ। में और सारा शुरू से ही एक साथ रहते, खेलते और सब कुछ करते है। हम दोनों आपस में बहुत फ्रेंक है, उसके साथ गले मिलना और किस करना तो आम बात है। वो 3 साल पहले दूसरे घर में शिफ्ट हो गये, तो मुझे बहुत दुख हुआ। वो घर भी वैसे 5-6 किलोमीटर दूर ही होगा तो तब से में रोज शाम उनके घर जाता हूँ।

ये बात उस दिन की है, जब उसके मम्मी पापा 15 दिन के लिए बाहर घूमने गये थे और वो अकेली घर पर थी, इसलिए में उन दिनों उसके घर चला गया। फिर हम दोनों ने बहुत इन्जॉय किया, हम दोनों ने 2 दिन तक बहुत इन्जॉय किया और उसके हाथ का टेस्टी खाना खाया, इतना अच्छा खाना आपको होटल में भी नहीं मिलेगा। हम एक-एक मिनट साथ रहे, जब वो किचन में जाती थी, तो में भी किचन में और जब वो टॉयलेट जाती, तो में टॉयलेट के बाहर खड़ा हो जाता था। हम दोनों 2 दिन तक सोए भी एक ही रूम में थे। फिर तीसरे दिन वो जब नहाकर बाहर आई तो वो क्या गजब की लग रही थी? ब्लू मिनी स्कर्ट एक फुट से थोड़ी ज्यादा होगी और ऑरेंज शॉर्ट टॉप जो काफ़ी गहरे गले का था, जिसमें से उसके कंधे पूरे नजर आ रहे थे, उसके नीचे वो ब्रा नहीं पहनती थी, ताकि ब्रा की स्ट्रिप्स ना दिखे। वो मेरी क्या? कॉलेज में भी सबकी पसंदीदा ड्रेस होगी, में तो उस दिन उसे देखता ही रह गया था। फिर उसने पूछा कि कैसी लग रही हूँ? तो मैंने कहा कि हॉट एंड सेक्सी, तो उसने थैंक्स कहा। फिर हमने ब्रेकफास्ट किया और बेड पर बैठकर टी.वी. देखने लगे। अब में उसकी स्कर्ट की तरफ़ अपना मुँह करके उसकी नंगी टाँगे देखने लगा था और उसकी ऑरेंज पेंटी क्या मस्त थी? अब जब वो झुकती थी तो तब भी उसकी ऑरेंज पेंटी उसकी स्कर्ट के ऊपर दिखाई दे रही थी। 

अब उसको सब पता चल रहा था, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा और फिर हमने 2-3 घंटे के बाद लंच किया। अब में टी.वी. पर कोई सेक्सी मूवी सर्च कर रहा था, तो केबल टी.वी. पर एक इंग्लिश मूवी स्टार्ट हुई थी। फिर मैंने सारा से कहा कि चलो देखे। अब हम दोनों एक साथ बैठकर मूवी देखने लगे थे। अब में मूवी कम उसे ज्यादा देख रहा था। फिर 15 मिनट के बाद ही न्यूड सीन आ गया, जिसमें 3 गर्ल्स के बूब्स दिख रहे थे। फिर वो उठाकर टॉयलेट करने चली गई, तो में भी कुछ देर के बाद टॉयलेट करने चला गया तो मैंने देखा कि उसकी ऑरेंज पेंटी वहाँ पर पड़ी थी। अब में बहुत खुश हो गया था और सोचा कि उसको भी सेक्स चढ़ गया है। फिर में वापस आकर बेड पर उसकी स्कर्ट की तरफ़ अपनी आँखे करके बैठ गया। फिर मैंने देखा कि वो बिना पेंटी के थी। उसने पिछली रात को ही अपनी चूत को शेव किया था। फिर में मूवी देखने लगा, उसमें गर्ल्स और लड़के के कई न्यूड सीन थे। फिर हम दोनों मूवी देखते रहे और किसी ने कोई विरोध नहीं किया। फिर एक लड़का और लड़की का सेक्स सीन आया, तो मैंने कहा कि वाह क्या बूब्स है? तो उसने कहा कि बहुत अच्छी शेप है, मेरे बूब्स भी ऐसे ही है। फिर मैंने पूछा कि तूने किसी का असली में लंड देखा है? तो उसने कहा कि हाँ तेरा देखा है।

में : कब?

सारा : जब में लास्ट छुट्टियों में आई थी, तो तू रूम में नहाकर नंगा ही आ गया था।

सारा : अच्छा है, मुझे पता था तू जानबूझकर ही नंगा आ गया था।

में : दुबारा देखना है?

सारा : हाँ-हाँ माई प्लेजर, तो मैंने कहा कि अपने आप पेंट खोलकर देख ले।

फिर उसने फटाफट मेरी पेंट, शर्ट, अंडरगारमेंट उतारकर मुझे पूरा नंगा कर दिया। अब मेरा 7 इंच का लंड पूरा खड़ा हो गया था। फिर उसने पूछा कि ये इतना ऊपर क्यों उठा हुआ है? तो मैंने उसे बताया कि जब लड़को को सेक्स चढ़ता है तो उनका डंडा बड़ा और ऊपर हो जाता है और उससे कहा कि अब तू भी तो कुछ दिखा दे। फिर उसने कहा कि तू अभी स्कर्ट के अंदर देख तो रहा था। फिर मैंने कहा कि क्लियर नहीं था। फिर सारा ने मुझसे कहा कि तो तू खुद ही मेरे कपड़े उतार ले। फिर मैंने पहले उसकी स्कर्ट उतारी तो मुझे उसकी शेव चूत देखकर मज़ा आ गया। फिर जब मैंने उसका टॉप उतारा तो में उसके बूब्स भी देखता ही रह गया, वाह क्या नज़ारा था? अब हम एक दूसरे के सामने 7 साल बाद बिल्कुल नंगे खड़े थे, क्योंकि 7वीं क्लास तक तो हम एक साथ नहाते थे, तो तब मैंने फर्स्ट टाईम उसे किस किया था और 15 मिनट तक हमारी जीभ एक दूसरे के मुँह में रही होगी। अब तब एक हम दूसरे के पार्ट्स को टच कर रहे थे।

फिर मैंने उसे लंड सक करने को कहा, तो वो अपने मुँह में मेरे लंड का टेस्ट चैक करने लगी। अब हम 69 की पोजिशन में बेड पर लेट गये थे और अब में उसकी चिकनी चूत के मज़े ले रहा था। फिर मैंने उसे बिना बताए अपना माल उसके मुँह में ही छोड़ दिया। फिर उसने मेरा सारा माल पूरा बाहर थूक दिया और लास्ट का पी गई, उसे वो बहुत टेस्टी लगा था। अब उसका मुँह मेरे माल से भर गया था और अब उसका भी पानी छूट गया था, तो में उसे चाट-चाटकर पी गया। फिर हम 30 मिनट तक बेड पर पड़े रहे, तो तब वो अपने पापा के रूम से कंडोम लेकर आई और मुझे पहना दिया। फिर मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा और धीरे-धीरे अंदर डालने लगा। फिर एक इंच अंदर जाने के बाद उसे दर्द होने लगा, तो तब मैंने ज़ोर से एक धक्का मारा, तो वो रोने लगी। अब उसकी सील टूट चुकी थी, अब मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था तो में उसके ऊपर ही लेट गया और 5 मिनट के बाद मैंने फिर से एक धक्का मारा तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया और में उसके बूब्स को चूसता रहा। फिर उस रात हम सेक्स करके नंगे ही सो गये और सुबह एक साथ नहाए। फिर हमने शाम को बाहर जाने के लिए अपने-अपने कपड़े पहने और उन 12 दिनों तक हम घर में पूरे नंगे रहे और बस डोर बेल की आवाज सुनकर कुछ पहन लेते थे या बाहर जाना हो, तब कुछ पहन लेते थे। हम तब से कई बार सेक्स कर चुके है और एक बार तो कज़िन की शादी में बाथरूम में जाकर भी हमने चुदाई की है और खूब इन्जॉय किया है ।।

धन्यवाद ….

सिर की सेक्सी वाइफ सोनम

हेलो दोस्तो मेरा नाम सुधीर है और मैं बिहार से हूँ. ये मेरी पहली कहानी है जिसमे मैं अपने ही सेंटर की टीचर की वाइफ को चोद दिया था. ये पहली कहानी होने के साथ साथ मेरे पहले सेक्स संभोग की भी कहानी है. मुझे उमीद है आप को मेरी ये पहली कहानी पसंद आएगी.

अब मैं आप सब का ज़्यादा टाइम ना लेते हुए अपनी कहानी शुरू करता हूँ. तो चलिए अब आप मूठ मारने के लिए तैयार हो जाइए.

ये बात आज से 2 साल पहले की है. उन दीनो मैने अपने +2 के एग्जाम दे दिए थे. और 3 महीने के लिए बिल्कुल फ्री था. इस लिए मैने सोचा क्यो ना मैं कम्प्यूटर सिख लू.

वैसे तो मुझे कम्प्यूटर आता था पर मुझे फिर और ज़्यादा नॉलेज लेनी थी. इसलिए मैं अपने घर के पास नये ओपन हुए कम्प्यूटर सेंटर मे लगने की इच्छा हुई. मैने अपने घर वालो से बात करी मैं घर मे फ्री था इसलिए मुझे घरवालो ने जाने की परमिशन दे दी.

मैने वाहा जा कर एडमिशन ले ली और एडमिशन के बाद उन्होने मुझे नेक्स्ट दिन से आने के लिए कह दिया. मैं अगले दिन अच्छे से तैयार हो कर क्लास मे चला गया. मेरी बैच की क्लास मे हम 12 लड़के थे और एक करीब 30 साल की उमर का टीचर हमे स्टडी करवाने लग गया. मुझे उनका नेचर काफ़ी अच्छा लगा उनका स्टडी करवाने का तरीका सच मे बहोत अच्छा लगा.

अगले दिन जब मैं गया तो वाहा पर एक 25 साल की लड़की बैठी हुई थी. मेरे घर पास होने के कारण मैं सब से पहले क्लास मे आ जाता था. मुझे लगा की ये न्यू एडमिशन है.

मैने उससे बातें करना शुरू कर दिया. उसने मेरा दिल चोरी कर लिया था. मेरा दिल उस पर आ गया था वो सच मे बहोत ही खूबसूरत थी. कुछ ही देर मे मेरी क्लास मे सभी बच्चे आ गये थे. और जब सब आ गये थे तो वो खड़ी हुई और अपना इंट्रोडक्शन दिया.

जब उसने हमे बताया की वो हमारे टीचर की वाइफ है. और उसका नाम सोनम था. इतना खूबसूरत उसका नाम था उतना ही खूबसूरत उसका जिस्म और वो थी. मुझे वो बहोत पसंद थी वो मुझे बार-बार देख रही थी और मेरी नज़रें उस पर टिकी हुई थी. वो मुझे देख कर मस्त-मस्त स्माइल कर रही थी. क्लास कब ख़तम हुई तो मुझे पता ही नही चला.

फिर मैं अपने घर गया और घर जा कर मैं पागल सा हो गया. मैं अपने रूम मे गया और सोनम के नाम की मूठ मारने लग गया. मूठ मारने के बाद मैं शांत हुआ और अपने लंड को भी शांत किया. अगले दिन मैं सोनम मेडम से मिलने के चक्कर मे और भी जल्दी क्लास मे गया. पर अफ़सोस उस दिन हमारे टीचर आए हुए थे. मेरा दिल टूट सा गया पर कुछ देर बाद उनकी वाइफ सोनम भी आ गयी. और वो दोनो मिल कर हम को स्टडी करवाने लग गये.

ऐसे ही कुछ दिन निकल गये और मेरी और सोनम मेडम की नज़रें टकराने लग गयी. अब हम दोनो आँखो ही आँखो मे बातें करने लग गये. मुझे लग रहा था की वो मुझसे बात करना चाहती है पर सर की वजह से शायद वो मुझसे बोल नही पाती. वैसे सर 30 साल से भी उपर के थे और मेडम अभी 25 साल की थी. वो सच मे उनकी छोटी बहेन लगती थी जो एक नंबर की पताका गर्ल थी.

मैं उसे चोदना चाहता था अब मैं डेली अब न्यू हिन्दी कहानी पढ़ने लग गया और सीखने लग गया. की कैसे एक प्यासी औरत को हम खुश कर सकते है. मैं अब तक बहोत कुछ पढ़ कर सिख लिया था अब तो सिर्फ़ मुझे एक मोके की तलाश थी. और मुझे वो जल्दी ही मिल गया.

एक दिन सर क्लास मे थे और जब क्लास ख़तम होने वाली थी तभी उन्होने कहा की मुझे किसी ज़रूरी काम से 2 हफ्तो के लिए बाहर जाना पड़ेगा.More Sexy Stories  मेरी रंडी बहन की चुदाई

इसलिए कल से तुम सब को मेडम आगे की स्टडी करवाएगी. ये सुन कर मैं बहोत खुश हुआ और मेरी खुशी का ठिकाना नही था. मैं अगले दिन 30 मिनिट पहले ही क्लास मे आ गया. ये कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मेडम वाहा पर अकेली बैठी हुई थी. वो मुझे देख कर खुश हो गयी. और बोली क्या बात तुम बहोत जल्दी आ जाते हो. मैने कहा मैं इसलिए जल्दी आ जाता हूँ ताकि आप से कुछ देर बातें कर लू. क्योकि घर मे तो सारा दिन बोर हो जाता हूँ.

और फिर मेडम बोली हाँ तुम सही कह रहे हो मैं भी घर मे बोर हो जाती थी. इसलिए मैने तुम्हारे सर से कह कर ये सेंटर ओपन करवाया था ताकि मेरा मन लगा रहे. मैने कहा सर आप से काफ़ी बड़े लगते है. मेडम ने कहा हाँ ये सही है क्योकि मेरी शादी छोटी उमर मे ही हो गयी थी. मेरे मम्मी पापा की अचानक से एक्सीडेंट मे डेत हो गयी थी. इसलिए फैमिली वालो ने मेरी शादी इनसे करवा दी.

ऐसे ही हम कुछ देर बातें करते रहे और फिर इतने मे बाकी बच्चे भी आ गये. क्लास शुरू हो गयी और हम दोनो की आँखें आपस मे कुछ कुछ कह रही थी. मुझे उसके बूब्स और गांड बहोत ही मस्त लग रहे थे. मेरा दिल कर रहा था की अभी साली को घोड़ी बना कर चोद दू. पर मैं ऐसा नही कर सकता था, तभी मेरे माइंड मे एक आइडिया आया. क्लास ख़तम करने के बाद मैं घर चला गया

और अगले दिन मैं 45 मिनिट पहले सेंटर चला गया. सोनम मेडम मुझे देख कर फिर से बहोत खुश हो गयी. और बोली मुझे तुम्हारा ही इंतज़ार था की कब तुम आओगे.

फिर हम दोनो बातें करने लग गये मैने कहा मेडम प्लीज़ आप मेरी एक हेल्प कर दो वो बोली हाँ बोलो क्या हुआ. मैने कहा मेडम क्या मुझे विंडो की सीडी दे सकते हो क्योकि मेरी लॅपटॉप खराब हो गयी है. वो बोली हाँ पर वो मेरे घर है.

मैने कहा कोई बात नही मैं आप के घर से ले लूंगा. वो बोली आज तुम ऐसा करना 2 बजे अपनी बाइक ले कर आ जाना मैं जब लंच करने जाऊंगी तो तुम मेरे साथ आ जाना. फिर मैं तुम्हे दे दूँगी मैं ये सुन कर बहोत खुश हुआ. ठीक 2 बजे मैं पास वाली शॉप मे छिप गया क्योकि मैं देखना चाहता था की मेडम के दिल मे कुछ है भी या नही.

2:05 पर मेडम बाहर आई और सेंटर को लॉक करके मुझे इधर उधर देखने लग गयी. फिर मैं एक दम उनके सामने आया और वो मुझे देख कर बोली मुझे लगा शायद तुम नही आओगे. फिर हम दोनो उनके घर चले गये और घर मे जाते ही वो बोली. ऐसा करो की तुम कुछ देर मेरा वेट करो मैं अभी आती हूँ नहा कर.

मैं सोफे पर बैठ गया और जब वो नहा कर बाहर आई तो मैं उसे देखता ही रह गया. उसका बदन पूरा भीगा हुआ था उसने बस एक टॉवेल लिया हुआ था. हम दोनो एक दूसरे की आँखों मे ही देख रहे थे. फिर मैं खड़ा हुआ और उसके पास जा कर उसके होंठो को अपने होंठो मे ले कर किस करने लग गया. वो भी मुझे किस करने लग गयी हम दोनो की आँखें बंद थी.

करीब 10 मिनिट किस करने के बाद वो बोली चलो बेडरूम मे चले है वाहा जा कर सब कुछ करेगें. मैने उसे गोद मे उठया और उसे बेड पर लेटा दिया. फिर मैने उसके उसके पूरे जिस्म को अच्छे से चाटा और चूसा. मैने उसकी चुत का पानी अपने मूह से चाट-चाट कर सारा पानी पी लिया. वो बहोत ही गरम हो गयी थी.

फिर मैने उसे लंड चूसने को कहा वो बोली ये लंड है की क्या है इतना बड़ा और मोटा. मैने कहा जान इसे ही असली लंड कहते है जो चूत को फाड़ कर रख दे. फिर क्या था मैने अपना लंड उसके मूह मे तूस दिया और अच्छे से उसका मूह चोदने लग गया. मूह को चोदने के बाद मैने उसकी चूत को अपने लंड से फाड़ कर रख दिया.

शुरू शुरू मे तो उसकी गांड फट गयी थी पर बाद मे वो मज़े से मुझसे चुदने लग गयी. फिर मैने उसे रात तक चोदा और सेंटर की छुट्टी करवा दी. अब मैं उसे रोज लंच टाइम मे चोदने लग गया और सेंटर को मैने रंडी खाना बना दिया था. जब मेरा दिल करता उसे मैं बाथरूम मे ले जा कर चोद देता.

दोस्तो, आप सब को मेरी ये कहानी कैसी लगी प्लीज़ नीचे दिए हुए कॉमेंट्स बॉक्स मे लिख कर ज़रूर बताना, मेरी मैल आईडी है

भाभी ऐसे ना देखो लंड तन जाएगा

/मैं काफी गहरी नींद में था तभी कविता मुझे उठाने लगी और कहने लगी विराट उठो मैंने भी अपनी आंखों को हल्का सा खोला और बाहर की तरफ देखा तो बाहर का दृश्य देखकर मैं खुश हो गया। पहाड़ियों की श्रृंखला जैसे हमें अपनी ओर खींच रही थी और वहां का अलौकिक दृश्य देखकर मैं बहुत ज्यादा खुश था कविता के चेहरे पर भी मुस्कान भी थी। वह मुझे कहने लगी विराट यदि तुम मुझे यहां नहीं लाते तो मैं कहां से यह सब देख पाती। कविता घर के कामों में इतनी व्यस्त रहती थी कि उसे कहीं बाहर जाने का समय ही नहीं मिल पाता था लेकिन हम दोनों ने प्लान बनाया कि इस बार हम दोनों साथ में घूमने के लिए जाएंगे। कविता पहले तो चिंतित थी वह मुझे कहने लगी विराट में कैसे आ पाऊंगी तुम्हें तो मालूम ही है कि बच्चों की जिम्मेदारी जो मुझ पर है।

मैंने उसे कहा कभी तुम्हें अपने लिए भी समय निकाल लेना चाहिए, कविता को मुझे काफी मनाना पड़ा और आखिरकार कविता मेरे साथ शिमला आने के लिए मान ही गई। हमारी शादी को 10 वर्ष होने आए थे और यह दूसरी ही बार था जब हम दोनों को साथ मे घूमने का मौका मिल पाया था। इससे पहले हम लोग अपनी शादी के एक महीने बाद ही अपने हनीमून ट्रिप पर घूमने के लिए जा पाए थे। उस वक्त मुझे अपने घर में यह कहते हुए थोड़ा शर्म सी महसूस हो रही थी कि मैं कविता को अपने साथ घुमाने लेकर जा रहा हूं। मेरे माता पिता एक गांव के परिपेक्ष में रहने वाले लोग थे तो मुझे थोड़ा हिचकिचाहट तो हुई लेकिन मैंने उनसे कह ही दिया। वह मुझे कहने लगे हां तुम कविता को अपने साथ लेकर जाओ उस वक्त हम लोगों का काफी अच्छा टूर रहा। इतने लंबे समय बाद जब मैं कविता को अपने साथ शिमला घुमाने के लिए ले गया तो वह खुश हो गयी। मुझे भी लगता था कि वह घर के कामकाजो में कुछ ज्यादा ही बिजी रहती है इसलिए उसे भी अपने लिए थोड़ा समय निकालना चाहिए इस वजह से मैंने उसे शिमला घुमाने के बारे में सोचा। मेरे दो छोटे बच्चे हैं एक की उम्र 8 वर्ष है और दूसरे की 6 वर्ष उन्हें मेरे मम्मी पापा ही देखने वाले थे।

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जिस कार में हम लोग दिल्ली से शिमला के लिए जा रहे थे उसके ड्राइवर की उम्र 50 वर्ष के आसपास रही होगी। उन्होंने कहा  सर गाड़ी में कुछ प्रॉब्लम आ रही है आप लोग क्या थोड़ी देर के लिए यहां ढाबे पर बैठ जाएंगे। वहीं पास में एक ढाबा था हम लोग वहां पर बैठ गए और वह गाड़ी देखने लगे शायद गाड़ी में कोई प्रॉब्लम आ गई थी। मैंने उस ढाबे में चाय का आर्डर दिया और हम दोनों ने चाय पी, एक चाय मैंने दुकान में काम करने वाले लड़के से कहकर ड्राइवर के लिए भी भिजवा दी। करीब हम लोगों को वहां पर एक घंटा इंतजार करना पड़ा और जब एक घंटे बाद गाड़ी ठीक हो गयी तो ड्राइवर ने हमें कहा सर चलिए। उसके बाद हम लोग कार में बैठ गए और वहां से हम लोग होटल के लिए निकल गए। जो होटल हम लोगों ने बुकिंग किया हुआ था जब हम लोग उस होटल के अंदर गए तो रिसेप्शन पर बैठी 25 वर्ष की लड़की से मैंने कहा हम लोगों ने यहां पर रूम बुक करवाया है। मैंने उन्हें अपने रूम की बुकिंग की डिटेल दिखाई वह कहने लगे हां सर आपके नाम से यहां पर रूम बुक है, उस लड़की ने वहीं पास में खड़े दो लड़कों से कहा सर और मैडम का बैग रूम में रखवा दो। हमारे पास तीन बैग थे क्योंकि शिमला में उस वक्त काफी ठंड पड़ रही थी। उन लड़कों ने हमारे बैक को उठाया और रूम में ले गए हम लोग जब रूम में गए तो रूम का टेंपरेचर नॉरमल था लेकिन बाहर काफी ज्यादा ठंड थी। उस श्याम जब हम लोग रूम से बाहर घूमने के लिए निकले तो मौसम काफी खराब हो चुका था आसमान में घने काले बादल थे ऐसा लग रहा था कि बस कुछ ही देर बाद तेज बारिश होने वाली है। हम लोग उसके बावजूद भी शिमला से थोड़ा आगे निकल आए थे ड्राइवर भी कहने लगे सर बारिश काफी तेज होने वाली है हम लोगों को यहां से होटल की तरफ चल लेना चाहिए।

हम लोग कार में बैठ गए जब हम लोग कार में बैठे तो कुछ दूर चलते ही तेज बारिश आने लगी। ड्राइवर भी कहने लगे की सर बारिश तो काफी तेज आ रही है हमें कार को कहीं सड़क के किनारे खड़े कर के कार से उतर जाना चाहिए। बारिश वाकई में काफी तेज हो रही थी और देखते ही देखते ओले भी गिरने लगे मौसम ने अपना विकराल रूप धारण कर लिया था। बारिश भी काफी तेज हो रही थी और हमारे पास कोई रास्ता नहीं था हम लोग कार से बाहर भी नहीं निकल सकते थे। ड्राइवर ने एक पेड़ के किनारे कार को लगा दिया वहां से गुजरने वाली जितनी भी गाड़ियां थी वह सब खड़ी हो गई क्योंकि बारिश काफी ज्यादा तेज थी और आगे चल पाना बहुत ही मुश्किल था। जैसे ही बारिश रुकी तो हम लोग वहां से होटल की ओर चल पड़े, हम लोग होटल में पहुंचे तो कविता काफी घबरा गई थी। वह कहने लगी बारिश कितनी तेज हो रही थी बारिश इतनी ज्यादा तेज हो रही थी कि कार का शीशा भी आगे से चटक चुका था। मैंने कविता से कहा तुम घबराओ मत सब कुछ ठीक है, उस रात कविता काफी ज्यादा घबराई हुई थी। कुछ देर बाद वह गहरी नींद में सो गई अगली सुबह जब हम लोग उठे तो बाहर का मंजर देख कर हम लोग खुश हो गए। बाहर जब होटल की खिड़की खोल कर हमने देखा तो आस पास जितने भी होटल या दुकाने थी सब बर्फ की चादर ओढ़े हुए थे। मैंने कविता को उठाया और कहा कविता देखो बाहर कितना अच्छा मौसम है कविता कहने लगी मुझे अभी नींद आ रही है।

मैंने कविता को जबरदस्ती उठाते हुए कहा पर तुम देखो तो सही कविता उठी और उसने जब खिड़की से बाहर देखा तो वह भी खुश हो गई। वह कहने लगी बाहर तो वाकई में बड़ा अच्छा मौसम है कविता ने जल्दी से अपना हाथ मुंह धोया और उसके बाद हम लोग तैयार होकर वहां से नीचे चले गए। जब हम लोग गए तो वहां पर और भी लोग घूमने के लिए आए हुए थे सब लोग बर्फ में एक दूसरे के साथ इंजॉय कर रहे थे, कविता और मैंने भी उन्हें जॉइन कर लिया। मैंने अपने जीवन में पहली बार ही बर्फ देखी थी और कविता ने भी अपने जीवन में पहली बार ही बर्फ देखी थी हम दोनों बहुत खुश थे। कविता मुझे कहने लगी शिमला आना अच्छा रहा और उस दिन हम लोगों ने काफी देर तक इंजॉय किया। हम लोग होटल में पहुंचे ही थे कि तभी मेरे पापा का फोन आ गया वह मुझे कहने लगे विराट बेटा तुम कब वापस लौट रहे हो। मैंने उन्हें कहा पापा बस हम लोग दो दिन बाद वापस आ जाएंगे। मैंने उन्हें कहा यहां पर काफी ज्यादा बर्फबारी हुई है इसलिए दो से तीन दिन तो लग ही जाएंगे। वह कहने लगे ठीक है तुम लोग अपना ध्यान रखना और यह कहते हुए उन्होंने फोन रख दिया। कविता मुझे कहने लगी चलो ना विराट दोबारा बाहर चलते हैं मौसम कितना सुहावना है। मैंने उसे कहा नहीं मेरा मन नहीं हो रहा लेकिन वह मुझे जबरदस्ती बाहर ले गई। उस मौसम में और भी पर्यटक वहां पर आए हुए थे वह सब एक दूसरे पर बर्फ के गोले फेंक रहे थे जैसे कि पहले फेक रहे थे सब के चेहरे पर मुस्कान थी। मैंने एक बर्फ का गोला लिया और मैं अपनी पत्नी कविता की ओर दौड़ा मैंने जैसे ही वह बर्फ का गोला फेका तो वह जाकर एक भाभी के छाती से टकराया और वह बर्फ का गोला वही धराशाई हो गया।

भाभी के चेहरे की चमक बया कर रही थी कि वह मेरी हो चुकी है मुझे बड़ा अच्छा लगा और मैं भी उन्हें देखकर मुस्कुरा दिया। मुझे नहीं मालूम था कि वह भाभी भी उसी होटल में रुके हुए हैं जिसमें मैं रुका हुआ हूं और उस रात उन्होंने मुझे अपने रूम में बुला लिया। कविता भी सो चुकी थी मैं एक नए बदन को अपना बनाने की ओर बढ़ चुका था। मैं जब उनके रूम में गया तो उनके पति सोए हुए थे उन्होंने जो नाइटी पहनी हुई थी उसमें वह बेहद ही खूबसूरत लग रही थी और उनका बदन बड़ा ही सेक्सी लग रहा था। मुझसे रहा नहीं जा रहा था वह भी अपने आपको रोक ना सकी उन्होंने मुझे कहा आप मेरे होठों को चूम लीजिए और मुझे अपना बना लीजिए। मैंने उनके गुलाबी होठों को चूमना शुरू किया और उन्हें अपना बना लिया भाभी के उत्तेजना बढने लगी थी। मैंने उनकी नाइटी को उनके बदन से उतार दिया। उनके बदन पर लाल रंग की पैंटी और ब्रा ही रह गए थे मैंने उनकी ब्रा को उतार दिया और उनके बड़े और लटकते हुए स्तनों का काफी देर तक रसपान किया। मुझे काफी आनंद आता मैं काफी देर तक उनके स्तनों का जमकर रसपान करता मैंने उनके स्तनों पर लव बाइट भी दे दी थी।

मैने उनकी पैंटी को उतार कर उनकी योनि को अपनी उंगली से सहलाया जब वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई तो मैंने उन्हें घोड़ी बनाते हुए उनकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसा दिया। मेरा लंड उनकी योनि के अंदर तक जा चुका था और उनके मुंह से चीख निकलती उन्होंने मुझे कहा कोई बात नहीं तुम करते रहो मेरे पति की नींद खुलने वाली नहीं है वह बड़ी गहरी नींद में थे। मैं उनकी बड़ी चूतडो को पकड़कर ऐसे चोद रहा था जैसे कि वह मेरा खुद का माल हो। अब मैं पूरी तरीके से बेफिक्र हो चुका था और उन्हें बड़ी तेज गति से मैने धक्के देना शुरू कर दिया था। मेरे धक्के तेज होने लगे थे उनकी चूतड़ों से फच फच की आवाज आने लगी थी मेरा लंड उनकी चूतडो से टकराता तो मेरे अंडकोष में दर्द हो जाता। मेरा लंड उनकी योनि के पूरा अंदर तक जा रहा था मुझे बड़ा मजा आ रहा था मैं काफी देर तक ऐसा ही करता रहा लेकिन जैसे ही मेरे वीर्य की गरमा गरम बूंदें भाभी की योनि में गिरने लगी तो वह भी समझ चुकी थी कि मेरा वीर्य पतन हो चुका है। मैंने भी अपने लंड को बाहर निकाल लिया उन्होंने मेरे लंड का जमकर रसपान किया मैं कुछ ही देर बाद अपने रूम में आकर बड़ी गहरी नींद में सो गया।

गॅंड का मज़ा खुली चूत मे कहा

हेलो दोस्तो मैं विक्रम आज बहोट टाइम बाद आप सब के लिए अपनी एकदम नयी कहानी ले कर आया हूँ. जो की मेरे साथ हाल मे ही घटी है. दोस्तो ये कहानी एक दम सच्ची और मस्त है. मुझे उमीद है आप को मेरी ये कहानी भी पसंद आएगी. आज की कहानी मेरे और मेरे पड़ोस मे रहने वाली एक मस्त और हॉट भाभी के बीच हम दोनो के सेक्स की है.

कहानी शुरू करने से पहले मैं आप को अपने बारे मे बता हूँ. जैसा की मैने आप को बताया की मेरा नाम विक्रम है. और मेरी उमर 24 साल है. मैं अभी बी.कॉम फाइनल ईयर मे हूँ. और मैं दिखने मे हैंडसम हूँ. मेरी बॉडी कुछ खास नही है पर मैने अपने आप को काफ़ी मेनटेन रखा हुआ है.

मैं अपने से ज़्यादा अपने लंड का बहोट ख़याल रखता हूँ. क्योकि अगर मर्द का लंड किसी के काम नही है तो वो किसी काम का नही होता है. इसलिए मैं अपने को हमेशा एकदम चिकना और सॉफ सुथरा रखता हूँ. मैने सब से पहले अपने स्कूल मे पढ़ने वाली इंग्लीश की टीचर को चोदा था और कुछ दीनो बाद उसकी बड़ी बेटी को भी चोद दिया था.

फिर मैं कॉलेज मे आया और कॉलेज के पहले ही महीने मैने अपनी क्लास की 2 लड़कियो को अपने रॉकेट की सैर करा दी थी. लास्ट ईयर तक आते आते मैने करीब 12 लड़कियो और अपनी 2 टीचर्स को अपने लंड का सवाद चका दिया है. टीचर्स तो साली इतनी प्यासी है की अब तक मुझसे चुदति है.

मैं जहा पर रहेता हूँ वाहा पर आज से 4 महीने पहले एक नयी फैमिली शिफ्ट हुई थी. उनकी फैमिली मे हस्बैंड वाइफ और उनके 2 बच्चे थे. भाईया का नाम सुनील था जो की एक फ़ार्मा कंपनी मे मार्केटिंग का काम करते थे. भाभी का नाम टीना था और वो घर मे अपने बच्चो को संभालने के साथ साथ पूरा घर भी संभालती थी.

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कुछ भी कहो साली टीना भाभी दिखने मे पूरी मॉडेल थी. इतनी सेक्सी और हॉट भाभी मैने आज तक नही देखी थी. रंग गोरा और बूब्स ना तो ज़्यादा बड़े और ना ही ज़्यादा छोटे. उन बूब्स को कोई भी देख कर एक दम पर्फेक्ट बूब्स ही कहेगा इतने सेक्सी बूब्स थे उसके. उसके चेहरा ही इतना मस्त और सेक्सी था की हम जैसे लड़के तो उसके होंठो को देख कर ही मूठ मार लेते थे. ये कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

टीना भाभी का फिगर एक दम सन्नी लीयोन जैसा था. मुलायम और सॉफ्ट थोड़े थोड़े बाहर निकले हुई गांड. जिसे देख कर एक ही मन करता था की बस इन्हे हाथ मे ले कर दबा दो बस. भाभी सच मे बहोट सेक्सी थी. हमारे मोहल्ले के क्या आस पास के भी काफ़ी लड़के उसके पीछे पड़े हुए थे.

हर कोई भाभी को अपने नीचे सुलाना चाहता था. मैं भी उसे पहली बार देख कर उसी का होकर रह गया. मैं किसी भी हालत मे टीना भाभी की चूत को मारना चाहता था. पर मैं अभी तक उन्हे छुप-छुप कर देखने के सिवा और कुछ नही कर पा रहा था. उनके सेक्सी जिस्म मेरी आँखो मे बस गया था. मैं अब सुबह शाम उनको याद करके मूठ मारता था.

जब मैं अपने कॉलेज से फ्री हुआ तो मैं पूरा दिन अपने घर पर ही रहेने लग गया. तब मैने देखा की भाभी मेरे घर भी आती है और मम्मी से बातें करती है. मैं अपने रूम मे से उन्हे छिप कर देखता था. और जब वो छत पर कपड़े सुखाने के लिए आती तो मैं भी किसी ना किसी बहाने से छत पर आ जाता था. और भाभी को देखता था.

और भीगे हुए कपड़ो मे इतनी सेक्सी लगती थी की बस पूछो मत. कपड़े गीले होने की वजह से उनके जिस्म से पूरे चिपक जाते थे. और उनका असली फिगर मेरे सामने आ जाता था. कहीं बार तो मेरे लंड ने ऐसे ही अपना पानी निकाल दिया था. अब मैं समझ गया था की अब मुझे कैसे भी करके भाभी से बात शुरू करनी ही पड़ेगी.

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इसलिए जब भी भाभी छत पर आती तो मैं भी किसी ना किसी बहाने से उप्पर आ जाता था. और एक दिन मैने उनसे बात शुरू कर दी. और उस दिन के बाद हम दोनो अक्सर बातें करने लग गये. भाभी अब जब भी मेरे घर पर आती थी. तो वो मुझसे भी बातें करने लग जाती थी. भाभी जान कर मम्मी के सामने मुझसे अपने कुछ काम करवाती थी. जिसे मम्मी को शक हो की हम दोनो मे कुछ है.

एक दिन की बात है मैं भाभी के घर गया तो मैने देखा की भाभी अपने 2 साल की लड़की को अपने बूब्स से दूध पीला रही थी. मुझे उनका लेफ्ट वाला बूब्स पूरा दिख गया और मैं गोरा बूब्स देखते ही पागल हो गया. मेरा दिमाग़ पागल सा हो गया मैरा दिल कर रहा था की अभी बूब्स को मूह मे डाल कर चूस लू. जैसे ही भाभी ने मुझे देखा तभी भाभी ने अपने बूब्स को छुपा लिया.

मैं उनके घर सिर्फ़ 5 मिनिट ही बैठा और फिर अपने घर आ कर मैने सब से पहले भाभी के गोरे बूब्स को याद करके मूठ मारी. तब जा कर मेरा दिमाग़ सेट हुआ और मेरा लंड भी शांत हो गया. मैं उस रात पूरी रात नही सो पाया मेरी आँखो के सामने पूरी रात भाभी का बूब्स घूमता रहा. मेरा सोना बहोत मुश्किल हो गया था. मैने इसलिए सोचा की किसी भी हालत मे कल भाभी के घर जा कर उन्हे चोदना ही पड़ेगा. इसलिए मैं सोने से पहले भाभी के नाम की मूठ मारी और मैं सो गया.

सुबह मैं उठा और तैयार होकर 11 बजे भाभी के घर गया. मैं जाते ही सोफे पर बैठ गया और भाभी को आवाज़ दी. भाभी किचन मे थी इसलिए वो थोड़ी देर तक आने वाली थी. तभी मैने देखा की टेबल के नीचे मैनफोर्स के 4 बड़े बॉक्स पड़े है. मैं देख कर हैरान रह गया की भाभी को भाईया इतने चोदते है की महीने भर के कॉन्डोम एक साथ ही ला कर रखे हुए है.

कुछ ही देर मे भाभी आ गई और वो मेरे सामने बैठ कर मुझसे बातें करने लग गई. तभी मैने पूछ लिया की भाभी इतने सारे कॉन्डोम लगता है भाभीया बहोत ही वो है. भाभी बोली नही नही विक्रम तुम बहोत ग़लत सोच रहे हो. दरअसल ये बॉक्स सप्लाइ के लिए है वो आज जाते हुए भूल गये ले जाना. वैसे तुम्हारी कॉलेज मे गर्ल फ्रेंड नही है क्या.

भला अब कोई लड़का क्यो कहेगा की उसकी पहले कोई गर्ल फ्रेंड है या उसने कभी पहले सेक्स किया भी हुआ है. इसलिए मैने भाभी को सॉफ ना कर दिया. तभी मैने पूछा वैसे भाईया कॉन्डोम यूज़ करते है. भाभी बोली नही करते थे और वैसे तुम तो ऐसे पूछ रहे हो की जैसे तुमने कॉन्डोम कभी ट्राइ तक नही करा.

मैं बोला अच्छा भाभी तभी इतनी जल्दी आप के 2 बच्चे है. और मैने कभी सेक्स ही नही किया तो कॉन्डोम की क्या ज़रूरत है. और किस्मत देखिए ज़रा जो सेक्स करता है वो कॉन्डोम यूज़ नही करता है और जो सेक्स नही करता आज उसके सामने कॉन्डोम ही कॉन्डोम पड़े है. और लोग उसे कह रहे है की तू कॉन्डोम यूज़ किया कर.

भाभी ने कहा तू भी कॉन्डोम यूज़ किया कर कहीं पहले 2 साल मे ही 2 बच्चे कर दे. वरना सेक्स का मज़ा ही नही आएगा.

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मैं बोला क्यो भाभी भाईया अब आपके साथ सेक्स नही करते क्या.

ये सुनते ही भाभी एक दम उदास हो गई वो कुछ नही बोली. मैं समझ गया की क्या बात है वो रोने ही वाली थी तभी मैं उनके पास गया. और उन्हे अपनी भाहों मे भर लिया. मैने बड़े प्यार से उनके आसुओ को सॉफ किया. इस से पहले मैं कुछ करता भाभी ने खुद ही मेरे होंठो को चूमना शुरू कर दिया.

भाभी ने शुरुवात तो कर दी थी पर अब एंडिंग मुझे करनी थी. इसलिए मैं उनका सिर पकड़ा और उनके होंठो को ज़ोर-ज़ोर चूसने लग गया. जिन होंठो को देख मैं मूठ मारता था आज मैं उन्हे ही चूस रहा था मुझे यकीन नही हो रहा था. होंठो को 15 मिनिट तक चूसने के बाद मैने उनके सारे कपड़े उतार दिए.

अब मेरे सामने भाभी आज पूरी नंगी थी. जिसे मैं ना जाने कब से इंतेजार कर रहा था. आज वो मस्त और सेक्सी बूब्स मेरे सामने थे. दोनो बूब्स को मैने अपने हाथो मे लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लग गया. मैने दोनो बूब्स को खूब अच्छे से चूसा और भाभी पूरी गरम हो गई थी.

तभी मै नीचे गया और उनकी दोनो टाँगे खोल कर उनकी चूत को चाटने लग गया. चूत तो पहले से ही बहोत गीली हो चुकी थी फिर भी मैने खूब अच्छे से भाभी की चूत चाटी और उनकी चूत का सारा पानी निकाल दिया. मैने सारा पानी चाट-चाट कर सॉफ कर दिया. भाभी की चूत एकदम चिकनी हो रखी थी.

फिर मैं भाभी को अपना 7 इंच का लंड अच्छे से चुस्वाया. और फिर मैं उन्हे बेडरूम मे चोदने के लिए ले कर गया. पर वाहा पर उनकी बेटी सो रखी थी. इसलिए मैं उन्हे सोफे पर ही ले आया. और उनकी दोनो टॅंगो को खोल लिया. भाभी ने अपने हाथो से मेरे लंड पर कॉन्डोम लगा दिया. और फिर मैं धक्के से अपना लंड उनकी चूत मे घुसा दिया.

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चूत काफ़ी खुली थी इसलिए लंड पूरा एक झटके मे पूरा अंदर गया. भाभी ने कहा इसलिए मैं कह रही थी की बच्चे इतनी जल्दी मत करना. पर फिर भी मैं बहोत ज़ोर से भाभी की चूत को चोद रहा था. जब भाभी को मज़ा आने लग गया तो भाभी भी अपनी गांड को उठा उठा कर लंड को चूत मे ले रही थी.

भाभी की चूत का पानी निकलने के बाद वो थोड़ा शांत हो गई. मैं तभी अपना लंड चूत से बाहर निकाला और उनकी गांड मे एक ही झटके मे पूरा लंड उतार दिया. भाभी की सांस रुक गई मूह खुला का खुला रह गया. उनके नाख़ून सोफे के अंदर गड़ गये. और बहोत ज़ोर से वो चिल्लाई.

इससे पहले वो और कुछ बोलती मैने उनकी गांड को चोदना शुरू कर दिया. और मैं उनकी गांड को खूब अच्छे से चोदा. और उनकी गांड मे ही अपने लंड का सारा पानी निकाल दिया. भाभी मेरे लंड की चुदाई से बहोत खुश नज़र आ रही थी. उन्होने जाते हुए मुझे लिप्स किस किया और मेरे लंड को मूह मे भर कर अच्छे से 2 मिनिट तक चूसा. और जाते हुए मुझे कहा अब मैं तुम्हारी हू, रोज इस टाइम पर आकर मुझे चोद जाया करो.

उस दिन के बाद मैं अब भाभी को रोज चोदता हूँ. अब वो मेरी रंडी बन गई है जो मेरा लंड हर बार अपनी गांड मे लेती है.

दोस्तो ये कहानी आप को कैसी लगी मुझे कॉमेंट्स करके ज़रूर बताना. मुझे आप के कॉमेंट्स और ईमेल्स का इंतेजार रहेगा,

ट्रेन मे मिली दीक्षा की चूत

हेलो दोस्तो मैं रमण आज फिर से आपके लिए एक नयी स्टोरी ले कर आया हूँ. जैसा की आप सब को पता ही है की मेरी सारी कहानिया एकदम असली होती है. क्योकि जो भी मेरे साथ सच मे होता है वो ही मैं आप सब को बताता हूँ. आज भी मैं एक सच्ची कहानी ले कर आया हूँ. मुझे उमीद है आप को मेरी आज की कहानी पसंद आएगी. जैसे आप को मेरी पहले वाली कहानिया पसंद आई है.

ये हादसा मेरे साथ पिछले महीने ही हुआ था. जिसे मैं आज लिख रहा हूँ. जैसा की आप सब मेरे बारे मे जानते ही है मेरा नाम रमण है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मेरी उमर 25 साल हो गई है और मेरी शादी को 1 साल हो गया है. शादी के बाद अपनी वाइफ रीता के साथ मैं डेली सेक्स करता हूँ.

मैं अपनी वाइफ से बहोत खुश हूँ. क्योकि वो बहोत हॉट और सेक्सी है. पर मैं मर्द इस लिए बाहर की जवान लड़कियो को देख कर अक्सर दिमाग़ खराब हो जाता है. मैं दिल्ली मे ही टाटा मोटर्स मे काम करता हूँ. सब कुछ बहोत अच्छा चल रहा था. मैं टाइम से घर से निकलता था और टाइम से घर आ जाता था.

मेरे मम्मी पापा को अब मुझसे एक बच्चा चाहिए था इस लिए मैं और वाइफ बच्चे की प्लानिंग कर रहे थे. की तभी मुझे ऑफीस की तरफ से पुणे 1 वीक के लिए जाना पड़ गया. इससे मेरी वाइफ बहोत उदास सी हो गई थी. पर मैं कुछ नही कर सकता था मुझे किसी भी हालत मे जाना ही था. क्योकि टाटा की नयी कार टियागो आने वाली थी. मुझे उस कार के बारे मे सब कुछ जानना था वाहा पर जा कर.

इस लिए कंपनी ने मेरी ट्रेन टिकेट्स पहले ही बुक कर दी थी. मेरी ट्रेन रात को 11 बजे चलनी थी. इसलिए मैं घर से अकेला ही आया था क्योकि 11 बजे का माहोल दिल्ली मे ठीक नही होता है. और मैं नही चाहता था की मेरी वाइफ या मेरे मम्मी दादी स्टेशन से घर अकेले जाएँ.

मैने एसी स्लीपर मे अपनी सीट बुक करवाई थी. मैं टाइम से 20 मिनिट पहले ही ट्रेन मे बैठ गया था. और इतनी देर मे मैने अपना सारा समान सेट कर लिया था. फिर मैं ट्रेन के दरवाजे पर जा कर खड़ा हो गया और इधर उधर देखने लग गया. कुछ ही देर मे ट्रेन चल पड़ी.

तभी मैने देखा की 2 लड़किया डोर से भागी भागी आ रही है. मैने सोचा की उनकी हेल्प कर दु. मैने उन दोनो का बारी बारी से हाथ पकड़ ट्रेन के अंदर लिया. और फिर उन्होने मुझे थैंक्स कहा. मैने सोचा की मेरी तो लॉटेरी लग गई है. रात मे मेरे पास आज दो चाँद है.

इससे पहले मैं और सपने देखता तो उन्होने कहा की दरअसल हमारी सीट क्लास 3 की है और ये क्लास 1 है. ये सुनते ही मेरे सारे सपने टूट गये. तभी मैने सोचा की ये ट्रेन तो अब कम से कम 2 घंटे बाद ही रुकने वाली है. इस लिए मैं ऑफर किया की आप मेरी सीट पर इतनी देर बैठ सकती है.

मेरी सीट के सामने वाली सीट एकदम खाली थी. इसलिए वो दोनो वाहा पर बैठ गई. देखने मे मुझे लग रहा था की एक की उमर करीब 20 की होगी और एक की 18 या 19 की. उन दोनो ने मुझसे बात करना शुरू कर दिया. बातों ही बातों मे मुझे पता चला की बड़ी वाली का नाम दिशा है छोटी वाली का नाम दीक्षा है.

वो दोनो सिस्टर थी और सच मे दोस्तो दोनो की दोनो परी थी. इतनी हॉट और सेक्सी की मैं बता नही सकता. दोनो ने एकदम टाइट जीन्स और टॉप डाले हुए थे. ये कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

दोनो के बूब्स उनका टॉप को फाड़ कर बाहर आने की कोशिश कर रहे थे. मेरा दिल कर रहा था अभी इन दोनो का टॉप फाड़ कर इन दोनो के बूब्स को चूस डालूं. मेरा दिमाग़ उन दोनो को देख कर खराब सा होने लग गया था.

उन दोनो की जीन्स इतनी टाइट थी की दोनो जीन्स का आधे से ज़्यादा कपड़ा उन दोनो की चूत के उप्पर इखट्टा हो रखा था. दीक्षा का रंग काफ़ी गोरा था वो एक दम चमक रही थी. पर दिशा का रंग थोड़ा सा सांवला था. पर वो ज़्यादा हॉट एंड सेक्सी लग रही थी क्योकि उसके बूब्स और बॉडी काफ़ी बाहर निकली हुई थी.

दिशा को तो कोई भी देख कर कह सकता था की इस साली ने बहोत से लंड खाए हुए है. पर दिशा दिखने मे ऐसी नही थी और सेक्सी लग रही थी पर चुदि हुई नही लग रही थी. ऐसे ही हम तीनो बातें करते रहे. वो दोनो मुझसे कह रही थी की अगर टीटी आ गया तो. मैने कहा उसे कुछ पैसे देगें और समझा देगें की ट्रेन उस टाइम चल पड़ी थी.

इतने मे ही वो आदमी आ गया जिस सीट पर वो बैठी हुई थी. मैं उन दोनो को अपनी सीट पर कर लिया. वो आदमी तो आते ही सो गया और दीक्षा खिड़की वाली सीट के उप्पर बैठी हुई और दिशा मेरे दूसरी साइड बैठी हुई थी. मैं अपनी किस्मत को देख हैरान हो रहा था क्योकि मेरे दोनो और खूबसूरत परियाँ बैठी हुई थी.

मैं बहोत हिम्मत करके दीक्षा के पॅट्टो पर हाथ पहरना शुरू कर दिया. उसने मुझे कुछ नही कहा और जब उसने मुझे एक सेक्सी सी स्माइल करी तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई. मैने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसके बूब्स को सहलाने लग गया. मुझे बहोत मज़ा आ रहा था. क्योकि दिशा मेरे कंधे पर अपना सिर रख कर सो गई थी.

उसके टॉप मे से उसके दोनो बूब्स सॉफ सॉफ दिख रहे थे. मेरा लंड एक दम खड़ा हो गया. मैं दिशा को धीरे धीरे गरम कर रहा था ताकि मैं उसे चोद सकु. जब मुझे लगा की दीक्षा के मूह से गरम गरम साँसे आने लग गई है मतलब की वो गरम होना शुरू हो गई है.

तभी सला टी.टी आ गया और उन दोनो से फाइन माँगने लग गया. मैने उसे साइड मे ले जा कर बात करी. और कहा की ये दोनो अगले स्टेशन पर ही क्लास 3 मे चली जाएगी. पर साले इंडिया वाले सारे के सारे कुत्ते है उसने फिर भी मुझसे 500 रुपए ले ही लिए. अब मुझे दीक्षा को चोद कर अपने 500 रुपए पूरे करने थे.

इसलिए मेरे माइंड मे एक आइडिया आया. मैने दिशा से कहा की जब नेक्स्ट स्टेशन आएगा. तो आप नीचे जा अपनी सीट देख लेना और दीक्षा को फोन कर देना. फिर मैं दीक्षा के साथ आप का समान ले कर आप के पास आ जाऊंगा. मेरी बात दिशा को ठीक लगी उसने एक दम हाँ कह दिया और दीक्षा मुझे देख कर मुस्कुराने लग गई. शायद वो मेरा प्लान अच्छे से समझ चुकी थी.

रात के 1 बज चुके थे जैसे ही ट्रेन रुकी तो दिशा नीचे उतर कर अपनी सीट देखने चली गई. मैं और दीक्षा ट्रेन के डोर पर खड़े थे. ठंड काफ़ी थी इसलिए हमे ठंड लग रही थी. मैने उसे पीछे से हग किया हुआ था. तभी दिशा का फोन आ गया की उसे अपनी सीट मिल गई है. मुझे बहोत अफ़सोस हुआ की अब तो दीक्षा गई मेरे हाथ से.

पर भगवान मेरे साथ था तभी ट्रेन चल पड़ी. और दीक्षा ने फोन करके कह दिया की वो नेक्स्ट स्टेशन पर आएगी तेरे पास. बस फिर क्या मैने झट से ट्रेन का डोर बंद किया. और उसको अपनी बाहों मे भर लिया. और जान कर कापने का नाटक करने लग गया. दीक्षा ने तभी मुझे अपनी बाहों मे ले लिया. और मुझे किस करने लग गई.

उसने मुझे करीब 20 मिनिट तक किस किया और मुझे गरम करने लग गई. मेरे हाथ अब उसके बूब्स पर आ गये थे. जिसे मैं ज़ोर ज़ोर से दबाने लग गया. मैने देखा की सब सो रहे है. मैने वहीं पर दीक्षा को नीचे बिठा दिया और अपना लंड बाहर निकाल कर उसे अपना लंड चुसवाने लग गया.

उसके मूह की गरमी से मैं भी गरम होने लग गया. मुझे सच मे बहोट मज़ा आ रहा था. उसके बाद मैने उसे अपनी सीट पर ले आया और उप्पर वाली सीट पर उसे चड़ा दिया. मैने ट्रेन की लाइट बंद कर दी. और खुद भी उप्पर चड़ गया मैं अपने साथ एक कंबल ले आया था.

सीट पर आते ही मैने उसे अपने नीचे ले लिया और उसके होंठो को पागलो की तरह चूसने लग गया. फिर मैने उसका टॉप उप्पर कर दिया और ब्रा मे से उसके दोनो बूब्स को बाहर निकाल लिया. उसके दोनो बूब्स को पागलो की तरह चूसने लग गया. उसके मूह से आहह आह की मस्ती भरी आवाज़ें आने लग गई. मुझे लगा की अब तो मैं गया तभी मैं उसके होंठो पर अपने होंठ रखे.

और उसके कान मे धीरे से कहा की शोर मत करो अगर कोई उठ गया ना तो वो भी तुम्हारी चूत मारेगा. फिर मैने अपना लंड बाहर निकाला और उसकी जीन्स एक तंग से बाहर निकाल ली. मैने जोश मे आ कर उसकी पैंटी भी फाड़ दी. और अपना थूक उसकी चूत पर लगा कर अपना लंड उसकी चूत मे डाल दिया.

उसको दर्द हो रहा था पर वो चिल्ला भी नही सकती थी. इस लिए उसने मेरे कंधे पर अपने दाँत गाड़ दिए. मुझे इस दर्द मे बहोत मज़ा आ रहा था. मैं ट्रेन के धक्के के साथ अपने धक्के शुरू कर दिए थे. मैं बड़ी तसल्ली से उसकी चूत मार रहा था. उसने धीरे से मेरे कान मे कहा की आप का लंड तो सच मे बहोत बड़ा है.

फिर क्या था मुझे उसकी बात सुन कर जोश आ गया और ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूत को चोदने लग गया. मैने उसकी चूत को करीब 30 मिनिट तक चोदा और फिर मैं उसके उप्पर ऐसे ही लेट गया. कंबल मे हम दोनो को नींद कब आई पता तक नही चला

सुबह के 4 बजे गये थे तभी दिशा का फोन आया की स्टेशन आ गया है जल्दी से मेरे पास आ जा. फिर क्या था हम दोनो ने जल्दी से कपड़े डाले और मैने उसका समान ले कर उसे वाहा तक छोड़ने गया. जाते जाते दीक्षा ने मुझे लिप्स किस किया और कहा कल रात को फिर आउंगी.

क्योकि उन्होने भी मुंबई जाना था. मैने ट्रेन के अपने 4 दिन के सफ़र मे दीक्षा और दिशा को बारी बारी से चोदा. और मैने उन दोनो बहनो को कैसे चोदा. और मै ये अपनी आने वाली कहानी मे बताऊंगा. आप को ये मेरी सच्ची कहानी कैसी लगी मुझे ये ज़रूर बताना,