कॉलेज की वो यादगार चुदाई

मेरे सभी प्यारे दोस्तो मेरी चिकनी और गुलाबी चूत आप सब का तहे दिल से आज की मेरी कहानी मे स्वागत करती है. मेरी ये कहानी मेरी पहली चुदाई की कहानी है. जितनी मस्त मेरी चुदाई मेरे दोस्त सागर ने मेरी की थी.

उतनी ही मस्त मेरी ये कहानी है. मेरी चूत ना जाने कब से आपको ये कहानी बताने को मचल रही है. मेरी चूत अगर कोई लड़का एक बार चाट ले तो वो मेरी चूत का होकर रह जाता है. मेरे दोस्त सागर को मेरी चूत को चाटना बहुत पसंद था.

आपको मेरी बातें बकवास लग रही होंगी. इसलिए मैं अब आपको अपनी कहानी बताती हूँ. पर उससे पहले थोड़ा मैं आपको अपने बारे मे बता देती हूँ. मेरा नाम दिव्या है, और मैं प्रयागराज मे रहती हूँ, आज मेरी शादी मेरे ही शहर मे हो गयी है.

पर आज जो मैं आपको बताने जा रही हूँ, वो बात तब की है जब मैं 21 साल की जवान थी. मैने 10+2 पास आउट कर बि.ए के लिए कॉलेज जाया करती थी. मैं उस टाइम 20 साल की हो गयी थी, मेरी जवानी मेरे उपर पूरी तरह से आ गयी थी.

मेरे बूब्स 34, कमर 28 और मेरी गांद 36 के करीब हो गयी थी. मैं अपने फिगर पर बहुत मान करती थी. क्योकि कॉलेज के लड़के मेरे लिए पागल हो रहे थे. कॉलेज के पहले साल मैने किसी से दोस्ती नही करी, जब मैने देखा की यहाँ हर लड़की किसी ना किसी के साथ सेट है.

तो ये सब देख कर मुझे थोड़ा सा अजीब सा लगा. इसलिए मैने भी अब रियालिटी मे जाने के लिए सोचा. मुझे एक लड़का शुरू से ही बहुत पसंद करता था. उसने काफ़ी बार मुझसे दोस्ती करने की कोशिश करी, पर मैने शुरू मे उसे हर बार माना कर दिया.

पर एक दिन फिर मैने उसे हा कर दी, हम दोनो मे अच्छी दोस्ती हो गयी. थोड़े ही दीनो मे मुझे उससे प्यार हो गया. हम दोनो लवर बन चुके थे, कॉलेज के बाद हम दोनो घूमने के लिए निकल जाते थे.

काफ़ी बार सागर मुझे मूवी दिखाने के लिए ले जाता था. मूवी मे सागर मेरे हाथो और मेरे गालो पर किस करने लग जाता था. मैं उसे कुछ नही कहती थी. इसलिए उसकी हिम्मत अब पहले से ज़्यादा हो गयी थी.

एक दिन की बात उसने मुझे अकेले मे मेरे होंठो पर किस कर लिया. मैने उसे फिर भी कुछ नही काहा, इस बात से वो एक दम निडर हो गया. एक दिन कॉलेज मे जब हम दोनो रूम मे अकेले थे, तभी सागर ने मुझे कस्स कर अपनी बाहों मे ले लिया

फिर उसने मेरे होंठो को अच्छे से चूसा, और फिर मेरी गर्दन और मेरे पूरे चेहरे पर किस की बारिश सी करने लग गया. फिर उसके हाथ मेरे बूब्स पर आ गये और वो मेरे बूब्स को मसलने लग गया. उस दिन पहली बार किसी ने मेरे बूब्स को मसला था, मुझे इसमे बहुत मज़ा आया. फिर उसके हाथ मेरे गांद और मेरी चूत पर घूमने लग गये.

इतना कुछ होने के बाद भी मैने उससे कुछ नही काहा, क्योकि मैं भी अब अपनी जवानी का मज़ा लेना चाहती थी. मैं चाहते हुए भी ना नही कह पा रही थी, शायद मुझे इस सब मे मज़ा आने लग गया था. इस बात को सागर ने अच्छे से समझ लिया था.

अगले दिन हम कॉलेज से हाफ डे मे निकल आए और पास के मूवी सिनिमा मे मूवी देखने लग गये. वो मूवी बहुत पुरानी हो गयी थी, इसलिए वाहा कोई भी नही था. पूरा हाल मे सिर्फ़ 2 या 3 कपल्स ही बैठे थे, वो भी सब बहुत दूर दूर बैठे थे.

सागर और मैं सबसे टॉप मे लास्ट कॉर्नर मे बैठे हुए थे. जेसे ही वाहा अंधेरा हुआ, सागर ने मुझे चूमना शुरू कर दिया. उसने मेरे गालो से शुरूवात करी और कुछ ही पल मे वो मेरे होंठो पर आ गया. मूवी कोई नही देख रहा था, हम दोनो अपने आप मे लगे हुए थे.

फिर जब वो मेरे होंठो को चूस रहा था, तभी मैने महसूस किया. की सागर का हाथ मेरे कुर्ते के अंदर मेरे बूब्स पर आ गया है. उसके हाथो मे मेरे नंगे बूब्स आ गये थे, जिसे वो ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लग गया था. मेरे पूरे जिस्म मे कुछ होने लग गया, मेरे निप्पल एक दम खड़े हो गये.

फिर उसका हाथ वाहा से निकाला और मेरी सलवार मे जाने के लिए तयार हो गया. पहले वो अपना हाथ मेरे पेट के उपर घुमा रहा था. फिर उसने मेरी सलवार का नाडा खोल दिया. मेरी टाँगे अपने आप खुल गयी, उसने अपना हाथ मेरी नंगी चूत पर रख दिया.

मुझे अपनी चूत को बिना बालो की रखना पसंद था. इसलिए जब उसने मेरी चिकनी चूत पर हाथ रखा तो तब तक मेरी चूत पूरी भीगी हुई थी. मेरे मूह से आहह आहह की आवाज़ें निकलने लग गयी. सागर को समझ मे आ गया की मैं अब पूरी गरम हो चुकी हूँ. उसने थोड़ी देर मेरी चूत मे उंगली करके मुझे और पागल कर दिया.

फिर अचानक उसने अपना हाथ मेरी सलवार से बाहर निकाला और मुझे कहा की चलो हम बाहर चलते हैं. उसने और मैने अपने कपड़े ठीक किए और वाहा से निकल लिए. उसके बाद वो मुझे अपनी बाइक पर बिठा कर कॉलेज के बॅक साइड वाले गेट के पास ले गया. वाहा से हम दोनो ने कॉलेज की दीवार को पार किया.

अब तक कॉलेज मे कोई नही था, क्योकि कॉलेज की छुट्टी हुए 2 घंटे हो चुके थे. सागर मुझे एक छोटे से रूम मे ले गया, वाहा कोई आता जाता नही था. इसलिए हम दोनो को कोई डर नही था, फिर उसने जाते ही मुझे दीवार से लगाया और मेरे होंठो को अपने होंठो मे ले कर ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गया.

उसके दोनो हाथ मेरे बूब्स पर थे, जिसे वो बस मसल्ने मे लगा हुआ था. फिर उसने मेरे कपड़े निकालने शुरू कर दिए. कुछ ही देर मे हम दोनो पूरे नंगे हो गये. सागर मेरा नंगा जिस्म देख कर पागल हो गया. वो मुझे पागलो की तरह चूमने लग गया.

फिर उसने मेरे दोनो बूब्स को बारी बारी से अच्छे से चूसा. मेरी चुत मे से पानी का सैलाब अब नीचे गिरने लग गया. जब सागर ने ये देखा तो वो नीचे बैठा और मेरी दोनो टाँगे खोल मेरी चुत को चाटने लग गया.

जब सागर ऐसा कर रहा था, तब मैं जन्नत मे आ गयी थी. मुझे ऐसा मज़ा कभी नही आया था. मेरा मन कर रहा था, की सागर सारी जिंदगी मेरी चूत को ही चाटता रहे. कसम से बहुत मज़ा आ रहा था, फिर कुछ ही देर मे मेरी चूत मे से पानी निकल गया और मैं खड़ी हो कर गिराने लग गयी.

फिर सागर ने मुझे नीचे बिठाया और अपना 6 इंच का लंड मेरे मूह मे डॉल दिया. मै लंड पहली बार चूस रही थी , पर लंड चूसने मे बहुत मज़ा आ रहा था. जब उसका लंड पूरा गीला हो गया, तो उसने अपने कपड़े नीचे बिछा कर मुझे उसके उपर लेटा दिया. और फिर उसने मेरी दोनो टाँगे खोली और मेरी चुत के बीच मे आ कर बैठ गया.

सागर ने अपना लंड मेरी चूत मे डालना शुरू कर दिया, उसका लंड धीरे धीरे मेरी चूत मे जाने लग गया. मुझे दर्द भी होने लग गया, मैं चिल्ला ना सकु. इसलिए उसने पहले ही मेरे होंठो को अपने होंठो मे ले लिया था. उसके बाद उसने मेरी चूत मे अपना पूरा लंड उतार दिया

मुझे पहले बहुत दर्द हुआ, पर कुछ ही देर मे जब दर्द मज़े मे बदल गया. तो मुझे बहुत मज़ा आया और मैं ज़ोर ज़ोर से अपनी गांद नीचे उठवा कर सागर का लंड अपनी चूत मे लेने लग गयी थी.

करीब 15 मिनिट की चूत चुदाई के बाद सागर ने अचानक अपना लंड चूत से बाहर निकाल दिया. उसके लंड की पिचकारी मेरे पेट और बूब्स तक आ रही थी. उसके लंड से निकली मलाई को मैने अपने बूब्स पे अच्छे से मालिश कर ली. फिर उसके बाद हम दोनो ने अपने कपड़े डाले और किस करके हम दोनो वाहा से निकल लिए.

उस दिन के बाद हम रोज चुदाई करने लग गये, पर सागर को मेरी चूत चाटने मे बहुत मज़ा आने लग गया. वो क्लास मे भी नीचे बैठ कर मेरी चुत को चाटता था

पड़ोसन पूजा मेरे लंड की दीवानी

मेरे सभी प्यारे दोस्तो आपका मैं आज अपनी पहली कहानी मे सावगत करता हूँ. ये कहानी मेरे लाइफ के एक सब से मस्त किससे से जुड़ी हुई है, इसलिए ये एक सच्ची कहानी है. मुझे उमीद है आपको मेरी ये कहानी पसंद आएगी.
तो फिर चलिए कहानी शुरू करते है.
ये बात आज से 3 साल पहले की है. जब मेरी शादी रेणु से हुई तो मैं काफ़ी खुश था. क्योकि शादी के बाद तो वो चूतिया ही लकड़ा होता है, जो खुश नही होता. पर तभी कुछ दिन बाद मेरे सामने रहने वाले भैया ने भी शादी कर ली, और वो भी वाइफ घर ले कर आ गये.

हम दोनो की शादी लगभग साथ ही हुई थी. हमारे मोहल्ले मे एक साथ दो नयी जवान लड़किया आ गयी थी. वो दोनो जल्दी ही एक अच्छी फ्रेंड बन गयी. पर दोस्तो सच कहूँ तो मैने जब अपने भैया की वाइफ को देखा तो मैं उपर से लेकर नीचे तक पूरा जल गया.

क्योकि उसकी पूजा के आगे मेरी रेणु कुछ भी नही थी. पूजा एक बड़े शहर की लड़की थी, इसलिए वो मॉडर्न थी. वो हमेशा घर पर जीन्स टॉप डालती थी. मैं उसके फिगर का दीवाना हो गया था. उसके बाहर निकलते बूब्स देख कर, मानो मुझे ऐसा लगता था की वो मुझे चूसने के लिए बुला रहे थे.

जब भी मैं उसे देखता था, तभी मेरा मन उसे चोदने का होने लगता था. थोड़े टाइम बाद मेरी भी उसके साथ बोल चाल होशुरू हो गयी. मैं उसे भाभी कहता था. जब भी मैं उसके साथ बात करता था, मेरा ध्यान हर टाइम उसके जिस्म पर ही होता था.

मैं अपने मन मे सोचता था की इस चूतिए को कैसे ये परी मिल गई. खैर ऐसे ही धीरे धीरे दो साल निकल गये, अभी तक मुझे पूजा के साथ मस्ती करने का मौका तक नही मिला था. मैं एक ऐसे अच्छे मोके की तलाश मे था, जिस मौके मे मैं उसे चोद कर हमेशा के लिए अपना बना लू.

देखो फिर भगवान ने एक दिन मेरी सुन ही ली. मेरी वाइफ रेणु कुछ दीनो के लिए अपने घर गयी हुई थी. मैं घर पर अकेला था, इसलिए मैने अपनी नाइट शिफ्ट करा रखी थी. ताकि मैं रात को तंग ना हो जाउ, क्योकि दिन तो कट ही जाता है.

मैं सुबह 8 बजे वापिस अपने घर नाइट शिफ्ट करके आ रा था. जब मैं घर के बाहर आया तो मैने देखा पूजा भाभी अपने पति को बाइ बाइ कर रही थी. मैने भी भैया को हेलो कर दिया, भाईया की शहर मे एक शॉप है. इसलिए वो सुबह 8 बजे ही घर से निकल जाते है.

पूजा भाभी को देख कर मैं थोड़ा सा मुस्कुरा दिया, भाभी मुझे देख कर मुस्कुरा दी. फिर मैं अपने घर मे जाने लगा पर तभी पूजा भाभी ने मुझे पीछे से आवाज़ मारी. मैं उनकी आवाज़ सुन कर पीछे मुड़ा और भाभी मुझसे बोली.

पूजा – भाईया मेरे कंप्यूटर मे नेट नही चल रहा है. क्या मैं तुम्हारा लॅपटॉप यूज़ कर सकती हूँ. मुझे अर्जेंट मेल सेंड करनी है.

मैं – हा भाभी क्यो न्ही आपका ही लॅपटॉप है. प्लीज़ जब मर्ज़ी आकर यूज़ कर लेना.

पूजा – जब मर्ज़ी क्या चलो अभी चलते है.

मैं – हा भाभी चलो.

फिर भाभी मेरे साथ मेरे घर मे आ गयी, मैने अपना लॅपटॉप अपने बेडरूम मे ही रखा हुआ था. पूरा घर खराब हुआ था, शराब की बोटले इधर उधर पड़ी हुई थी. भाभी बेड पर बैठ गयी और मैने उन्हे लॅपटॉप दे दिया.

पर मैं ये भूल गया था की कल ड्यूटी पर जाने से पहले मैने लॅपटॉप पर ब्लू मूवी की साइट्स ओपन करी हुई थी. जेसे ही भाभी ने लॅपटॉप ओन्न किया उसके सामने वो सारी ब्लू मूवीस चलने लग गयी. कुछ देर बाद ये सब देख कर भाभी बोली.

भाभी – अरे भाईया प्लीज़ इस साइट का लिंक मुझे सेंड कर देना.

मैं – सॉरी भाभी मैं इसे क्लोज़ करना भूल गया था. पर वैसे आपको साइट का लिंक क्यो चाहिए भाभी.

भाभी – अरे बस रहने दो तुम, मेरा काम हो गया है मैं चलती हूँ.

मैं – नही भाभी प्लीज़ बताओ आख़िर क्या बात है.

भाभी – अरे मैं ये इस लिए माँग रही हूँ. ताकि तेरे भैया को ये सब दिखा सकु. क्योकि वो ज़रा भी सेक्स नही करते, शॉप की टेन्षन उन्हे बहुत रहती है. इसलिए उनकी छोटी सी लुली मुझे चोद ही नही पाती.

ये कह कर वो जाने लगी, मुझसे ये सब देखा नही गया. मैने झट से अपनी पेंट और अंडरवेर उतार कर अपना लंड बाहर निकाल कर भाभी के सामने कर दिया. भाभी ने जब मेरा लंड देखा तो वो मेरे लंड को देखती ही रह गयी. फिर वो भाग कर मेरे पास आई और मेरे मूह पर थप्पड़ मार कर बोली.

भाभी – कमिने आज मेरी शादी को दो साल हो गये है. और आज मैं पहली बार तेरे घर आई हूँ और तू आज मुझे अपना लंड दिखा रहा है. कुत्ते तूने इतनी देर क्यो कर दी. मैं इसके लिए कब से तरस रही हूँ.

ये कहने के बाद उसने मेरा लंड अपने हाथ मे पकड़ा और मेरे होंठो पर अपने होंठ रख कर ज़ोर ज़ोर से मेरे होंठो को वो चूसने लग गयी. ऐसी गरम औरत आज तक मैने नही देखी थी. उसके एक टच से मेरा लंड और जिस्म गरम हो गया था.

पूजा इस टाइम पूरी नँयी दुल्हन की तरह लग रही थी. फिर मैं उसे दीवार से लगा दिया और उस के होंठो को पागलो की तरह चूसने और चूमने लग गया. उसके होंठो मे से मीठा रस्स चूस चूस कर पी रा था. कसम से उसके होंठो को चूसने मे मुझे बहुत मज़ा आ रा था.

मेरे दोनो हाथ उसके बूब्स पर चल रहे थे, और पूजा भाभी का हाथ मेरे लंड पर था. वो मेरे लंड मसल मसल कर तन्ना रही थी. मैने उसके मूह से गर्दन तक हर जगह किस कर ली थी. उसका मस्त चेहरा चूमने मे बहुत मज़ा आ रा था.

फिर मैने उसके दोनो बूब्स कस्स कर पकड़ लिए और ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लग गया. पूजा के मूह से आहह आहह की मस्त आवाज़ें निकालने लग गयी थी. उसका पूरा जिस्म आग की तरह तप रहा था.

फिर मैं उसका टॉप मैने उतार कर फेंक दिया. अब वो मेरे सामने ब्लॅक ब्रा मे खड़ी थी. उसके गोरे गोरे बूब्स किसी मोती की तरह ब्लॅक ब्रा मे चमक रहे थे. कसम से उसके दोनो बूब्स देख कर मैं पागल सा हो गया. मैने उसके बूब्स पर टूट पड़ा.

मैने अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर रखे और पीछे से उसकी ब्रा के हुक खोल दिए. हुक खुलते ही उसके करीब 34 के बूब्स उछाल कर मेरी गोद मे गिर गये. क्या कमाल का नज़ारा था. मैने उसके दोनो बूब्स को अपने हाथो मे थाम लिए.

फिर मैने एक बूब्स को अपने मूह मे भर लिया और उसके बूब्स को चूसने लग गया. उसके नरम और गरम बूब्स काफ़ी कमाल के लग रहे थे. मैने उसके दूसरे के निप्प्ल को अपने हाथ मे ले कर मसल रा था.

बहुत ही मजेदार काम चल रहा था. अब पूजा ने मेरा सिर अपने बूब्स मे दबाना शुरू कर दिया, उसके मूह से सिसकारियाँ रुकने का नाम तक नही ले रही थी. उसका जिस्म अब और भी गरम होने लग गया था.

मैने जल्दी जल्दी उसके दोनो बूब्स को पूरा अपनी जीब से चाटने लग गया. पूजा ने फिर से मेरा लंड पकड़ लिया और वो मेरे लंड से खेलने लग गयी. मेरा लंड अब पागल होने लग गया था. इसलिए मैने अपना एक हाथ उसके सिर पर रखा और उसे नीचे की और धक्का दिया.

पूजा मेरा इशारा झट से समझ गयी, वो तुरंत नीचे बैठ गयी. अब मेरा लंड उसके होंठो के सामने था. पूजा ने मेरा लंड अपने होंठो मे ले लिया और धीरे धीरे बड़े मस्त तरीके से मेरे लंड को अपने मूह मे लेने लग गयी. मेरा लंड कुछ ही देर मे 6 इंच तक उसके मूह मे चला गया.

फिर पूजा को शायद मज़ा आने लग गया, इसलिए वो पागलो की तरह मेरा लंड चूसने लग गयी. फिर करीब 15 मिनिट बाद मैने अपना लंड उसके मूह से बाहर निकाल दिया. उसके बाद मैने उसे अपनी गोद मे उठाया और बेड पर लेटा दिया.

मैने उसके पेट पर अपनी जीब चलानी शुरू कर दी, जिससे पूजा मस्त हो कर बेड पर तड़पने लगी. फिर मैने उसकी जीन्स उतार दी और उसकी सेक्सी ब्लॅक पेंटी को मैने अपने दांतो से पकड़ा और उसके जिस्म से अलग कर दिया.

उसकी चूत पर एक भी बाल नही था, और पूरी चूत पानी से भीगी हुई थी. मैने उसकी दोनो टाँगे खोली और बड़े प्यार से उसकी चूत को चूसने लग गया. उसकी चूत मे से पानी रुकने का नाम ही नही ले रा था. मैने उसकी चूत को अपनी जीब से चाटने मे लगा हुआ है.

मैं जब उसकी चुत को चाट रा था, तब पूजा बहुत तड़प रही थी. उसने मेरा सिर अपनी टाँगो से लॉक कर लिया. और नीचे से अपनी गांद को उठा उठा कर मुझसे अपनी चूत चटवाने लग गयी. कुछ ही देर मे उसकी चुत का सारा पानी एक ही बार मे निकल गया.

अब बारी थी लंड को उसकी चुत मे डालने की. इसलिए मैं खड़ा हुआ और उसकी गांद के नीचे मैने दो पिल्लो अच्छे से रख दिए. ताकि मेरा लंड अच्छे से उसकी चूत मे चला जाए. जब मैं उसकी चूत को चाट रा था, तभी मुझे पता चल गया था. की पूजा की चूत टाइट है.

इसलिए मैने पहले उसकी चूत और अपने लंड पर काफ़ी सारा थूक लगा लिया. फिर मैने अपना लंड उसकी चूत पर तोड़ा सा सेट किया. और उसके उपर जा कर मैने उसके होंठो को अपने होंठो मे ले लिया.

फिर मैने एक जोरदार धक्का मारा जिससे मेरा लंड उसकी चूत मे आधा चला गया. जिससे वो दर्द के मारे मेरे नीचे तड़पने लगी. वो अपनी टाँगे ज़ोर ज़ोर से पटक रही थी. मैने उसके दर्द की ज़रा भी परवाह नही करी.

और फिर एक और जोरदार धक्के से मैने अपना पूरा लंड उसकी चूत मे जमा कर उतार दिया. पूजा की आँखो मे आँसू आने लग गये, वो ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी. पर उसकी आवाज़ मेरे मूह मे ही दब कर रह गयी.

कुछ देर बाद पूजा थोड़ी शांत हुई और मैं अपने धक्को की स्पीड फुल कर दी. अब मैने उसके होंठो को अपने होंठो से आज़ाद कर दिया और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लग गया. पूजा चुदाई मे मेरा पूरा साथ देते हुए बोली.

पूजा – और ज़ोर से चोदो मेरे राजा मेरी चूत को फाड़ कर रख दो, और ज़ोर से चोदो रूको मत.

पूजा नीचे से अपनी गांद उठा कर मेरा साथ दे रही थी. हम दोनो को चुदाई मे पूरा मज़ा आ रा था. करीब 40 मिनिट की टाके तोड़ चुदाई के बाद मैने अपने लंड का सारा पानी उसकी चुत मे ही निकाल दिया.

फिर हम दोनो सो गये, और उठ कर बाथरूम मे नहा कर वो अपने घर चली गयी. मैने देखा की पिल्लो उसकी चूत के खून से भरा हुआ है. ये देख कर मुस्कुरा दिया. और उस दिन के बाद मैने पूजा को बहुत बार चोदा और आज भी उसे चोदने के लिए जा रहा हूँ.

दोस्तो मुझे उमीद है, की आपको मेरी कहानी मे बहुत मज़ा आया होगा. तो देर किस बात की मुझे मेल करके बताए

मैं बन गयी ऑफीस की रंडी

हेल्लो फ्रेंड्स,
मैं शेफाली आज आपके लिए एक बहुत ही मस्त कहानी ले कर आई हूँ. पर मेरी कहानी शुरू करने से पहले मैं आपको अपने बारे मे काफ़ी कुछ बताना चाहती हूँ. मैं बहुत ही सुंदर हूँ और मैं मॅरीड भी हूँ.

मैं बहुत ही सुंदर तो हूँ ही पर मेरे नैन नक्श उस्स से भी ज़्यादा सुंदर है.मैं आज अपनी लाइफ का बहुत ही अच्छा पार्ट बताने जा रही हूँ जो की मैं ज़िंदगी मे कभी भी भूल न्ही सकती हूँ.

चलो अब ज़्यादा समय ना लगाते हुए मैं आपको अपनी कहानी पर ले कर चलती हूँ. पर उससे पहले मैं आपको अपने फिगर के बारे कुछ बताना चाहती हूँ. मेरा फिगर बहुत ही कमाल का है. 32-28 -30 का है मेरा फिगर और बहुत ही कमाल का है .

ये बात आज से कुछ समय पहले की है. जब मैं नयी नयी बड़ी हुई थी यानी की मेरे उपर नयी नयी जवानी चड़ी थी तो कई लड़के मेरे उपर मरते थे. मैं बहुत ही पागल हुआ करती थी. क्योकि ये कीड़ा मेरे अंदर भी था की मैं किसी से बात करू और अपने दिल की बात बताकर खुद को चुदवा दू.

मैं पागलो की तरह लड़को से बात करने लग गई थी. मुझे ये सब बहुत ही अजीब लगता था पर साथ ही साथ मज़ा भी आया करता था.

बस फिर ऐसे ही टाइम बीतता चला गया. मैने स्कूल टाइम मे और ईवन तक कॉलेज टाइम मे भी बहुत ही सारे लड़को से बात करी और खूब मस्ती भी करी.

फिर ऐसे ही मेरे घरवालो ने मेरे बड़े होने पर मेरी शादी भी करदी. मैं अभी शादी करना न्ही चाहती थी पर फिर भी मुझे करनी पड़ी थी. मैं बहुत ही उदास भी थी की अभी से ही इतनी जल्दी मेरी शादी करदी.

मेरे हज़्बेंड का नाम विशाल है और उनका इम्पोर्ट एक्सपोर्ट का काफ़ी बड़ा बिज़्नेस है. मैं अब अपने पति के साथ बिज़ी हो गई थी. शादी होते वक़्त तो बुरा लग रा था की आख़िर ये क्या हो गया पर बाद मे धीरे धीरे सब ठीक होता चला गया. मैं उनके साथ अब काफ़ी खुश रहने लगी थी.

पहले तो नयी नयी शादी मे रोज रात को अच्छे से चुदाई हुआ करती थी. मैं पागलो की तरह चुद्वाति थी. मैं तो बस चाहती थी की मेरा पति मुझे कच्चा ही चबा डाले और ऐसे ही करता रहे. मुझे अपने पति साथ सेक्स करने मे बहुत मज़ा आता था पर फिर कुछ टाइम बाद सेक्स अब बहुत ही कम होने लग गया.

क्योकि वो अब बिज़ी होने लग गये थे और मैं भी उनके साथ उनके ऑफीस मे काम संभालने लग गई थी. मैं बहुत ही खुश थी की मैं अपने पति के साथ उनके ऑफीस मे ही कुछ काम भी संभालूगी. उधर उन्होने मेरी एक सेक्रेटरी भी रख दी ताकि मुझे कोई दिक्कत ना हो.

फिर ऐसे ही चलता रहा और फिर उसके बाद उनका बाहर का भी टूर लगना शुरू हो गया. मैं ऐसे ही उनके आने का इंतेज़ार किया करने लग गई. पर अब धीरे- धीरे अब इंतेज़ार करना बहुत ही मुश्किल लगने लग गया था.

अब वो मुझे टाइम भी न्ही देते थे यानी की मैं चुदाई के लिए तड़पने लग गई थी. पर फिर भी मैं मूली या गाजर से काम निपटा लेती थी.फिर एक दिन ऐसे ही ऑफीस मे मेरी एक बहुत ही पुरानी फ्रेंड आ गई. जिसको देख कर मैं बहुत खुश हो गई और तो और बहुत ही पागलो की तरह बात करने लग गई.

हमारी बहुत ही अच्छी दोस्ती थी और तब मैने अपनी सेक्रेटरी को बुला कर उसे बियर ओर कुछ स्नॅक्स छुपा कर लाने को काहा और फिर हम बियर पीने लग गये. ऐसे ही काफ़ी पुरानी बाते भी बाहर आ गई और कुछ लड़को की बाते भी हो रही थी. जिससे की मेरी चुत भी तड़पने लग गई.

फिर थोड़ी देर बाद वो चली गई. पर उसके जाने के बाद मैं पागल हो गई थी. क्योकि मेरे उपर चुदाई का भूत सवार हो गया था. अब ऐसे ही फिर मैने बाहर के स्टाफ से दिनेश को बुलाया और उसको काहा की मेरे साथ पेग लगा ले. उसने पहले तो मना किया और मेरी बात सुन कर मान कर मेरे पास बैठ गया.

मैं बहुत ही खुश हो गई और फिर हम दोनो बाते करने लग गये और इसी बीच वो मेरी इच्छा को जान गया. मैं बहुत ही खुश थी और फिर उसके बाद तब बियर ख़तम हो गई तो उसने काहा की बाहर से पंकज को बुला लेते है.

फिर इतने मे वो आ गया और उसे काहा की बियर ले आ और फिर दिनेश ने मेरी पेंट उतार दी. हम दोनो पहले ही जोश मे आ गये थे और फिर धीरे धीरे करके हम दोनो नंगे हो गये. मैने उसके लंड को हाथो मे ले लिया और फिर उसके बाद उसे मूह मे ले कर चूसने लग गई.

मैं बहुत ही पागल हो रही थी और उसे तो बहुत ही मज़ा आरा था. मैं इसलिए पागल हो रही थी क्योकि मैं काफ़ी टाइम बाद लंड को अंदर लेने वाली थी. फिर मैने उससे काहा की चूत को चाट और फिर उसके चाटने के बाद मैने उसे लंड डालने को काहा तो उसने डाल दिया और मुझे चोदने लग गया.

इतने मे पीछे से पंकज भी आ गया और ये देख कर पहले वो हैरान रह गया और फिर उसने भी अपने कपड़े उतार डाले और लंड को मेरे हाथो पर दे डाला. मैं बहुत ही खुश हो गई और उसे चूसने लग गई.

फिर उधर दिनेश ने मेरी चूत मे अपना पानी छोड़ दिया और फिर उसके बाद मेरे पीछे पंकज आ गया और उसने मेरी गांड मे लंड दे डाला.मैं बहोट ही मज़े से चींख रही और टाइट गांड होने की वजह से उसका पानी गांड मे ही छूट गया और फिर दोनो मेरे उपर ही लेट गये

फिर उसके बाद ऐसे ही मैने उनके दोनो लंड को एक एक करके चूसा और खूब मज़ा भी लिया. मुझे दोनो के लंड को चूस कर बहुत ही मज़ा आ रा था और मन कर रहा था की अभी और चुद जाउ. पर अभी दोनो मे इतनी हिम्मत न्ही थी की मुझे और भी चोद डाले

फिर ऐसे ही मैने टाइम की तरफ देखा तो टाइम भी काफ़ी हो गया था और मैं उन दोनो से बहुत खुश भी थी. क्योकि उन्होने मेरी चूत की प्यास को कुछ कम किया था. इसी तरह अब जब भी मेरे पति टूर पर जाते तो मै उन्न दोनो से ज़रूर चुदति थी.

मेरा बेटा एक मर्द का बच्चा



दोस्तो मैं रजनी हरयाणा से आज आप सब के लिए अपनी लाइफ की एक मस्त घटना ले कर आई हूँ. वेसे तो मेरी पूरी लाइफ सेक्स और लोडो से भरी हुई है. उपर वेली ने भी मेरी दोनो टाँगो के बीच ये दो इंच का छोटा सा छेद दे कर, मेरे नाम एक कयामत दे दी है.

मेरी चूत शुरू से ही मुझे बहुत तंग करती थी. 18 साल तक तो मैं अपनी चूत मे मूली गाजर ले कर अपना काम चला लेती थी. पर जब अपने पड़ोसी सोनू से मैं पहली बार चुदी तो उस दिन के बाद लंड मुझे इतना अछा लगा. की मैने सब मूली गाजर मोमबति सब कुछ छोड दिया.

अब मैं सिर्फ़ अपनी चूत मे लंड ही लेती थी. मेरे धीरे धीरे सोनू से और 8 लड़को से संबंध बन गये. वो सब मेरे आशिक़ थे, मुझे दिन रात वो चोदना चाहते थे. उपर से मेरी चूत भी ऐसी ही थी, जो सिर्फ़ लंड ही मांगती थी.

मेरी चूत शांत होने का नाम नही लेती थी. अगर एक दिन शांत हो भी जाती थी, तो अगली सुबह ये फिर से लंड मांगती थी.
जब मेरी शादी हुई तो, शादी से कुछ घंटे पहले मैने अपने सच्चे आशिक़ को अपनी चूत दी, उस दिन उसने पहली बार मुझे 40 मिनिट चोदा. साला कमीना गोली खा कर आया था. शादी के बाद जब मैं घर पर एक दिन बाद फेरा डालने के लिए आई.

तो मेरे 8 दोस्तो ने मुझे मेरे घर के साथ वाले घर मे उपर बुलाया. वाहा उन्होने मुझे सब ने करीब एक घंटे तक चोदा. सब ने मेरी चूत को बारी बारी से चोदा. मैं अपने चारो तरफ लंड देख कर काफ़ी खुश थी.

उस दिन के बाद मैं जब भी अपने घर आती थी, तो उन सब से चुदाई करवाती थी. पर मैं हर हफ्ते तो अपने घर आने से रही. क्योकि मेरी शादी हिसार मे हुई थी. और वाहा से मेरे घर आने मे 6 घंटे आराम से लगते थे.

मेरे सुसराल मे मेरे सास सुसर, मेरे पति और मेरी ननद रहती थी. मेरे पति और मेरे ससुर जी सुबह ही अपनी शॉप पर चले जाते थे. उनके जाने के बाद मेरी ननद सीमा भी अपने कॉलेज मे चली जाती थी.

अब घर पर मैं और मेरी सासू मा ही रहती थी. हमारा घर बहुत बड़ा था. इसलिए हमने अपने गेट के आगे वाला रूम किराए पर दिया हुआ था. वाहा हमने कॉलेज मे स्टडी करने वाले 4 लड़को को रखा हुआ.

वो चारो लड़के एक से उपर एक थे. उन्हे देख कर मेरी चूत और गांद मे खुज़ली होने लग जाती थी. आप को अच्छे से पता है, एक औरत बाहर की ओर तभी देखती है. जब उसका पति उसे खुश ना करता हो.

ऐसा ही कुछ मेरा हाल था, मेरा पति वैसे तो अपने आप को बहुत दमदार समझता है. पर साला 3 मिनिट से ज़्यादा उससे सेक्स नही होता. वो ज़्यादा से ज़्यादा सिर्फ़ 4 मिनिट ही सेक्स कर पाता है.

अब आप ही बताओ क्या मैं इससे खुश हो सकती हूँ. जो लड़की 40 – 40 मिनिट लगातार लड़को से चुदति है. वो क्या 4 मिनिट मे खुश हो सकती है. इसलिए मैने हार कर उन लड़को . . . . . . ..

जब से मैं शादी करके इस घर मे आई थी. तब से लड़के किसी ना किसी बहाने से मुझे देखने के लिए कोई ना कोई समान लेने आते रहते थे. पर मेरी सासू मा हमेशा घर के आगे ही बैठी रहती थी. इसलिए वो लड़के कभी घर के अंदर नही आए.

सासू मा मुझे आवाज़ मार कर बुलाती और मैं उन्हे वो सामान दे देती थी. वो मुझे देख कर मुस्कुराने लग जाते थे. मुझे लगा की अब ये ही वो लंड है, जो मुझे अच्छे से खुश कर सकते है. इसलिए मैने उन्हे अब पटाने की सोची

धीरे धीरे काफ़ी टाइम निकल गया, अब मेरी सासू मा उन्हे अपने बच्चो की तरह समझने लग गयी. सर्दियो का मौसम चल पड़ा था, सर्दी अपने पूरे ज़ोर पर थी. इसलिए जब हम सुबह चाय बनाते थे, तो सासू मा उनके लिए भी मुझसे चाय बनवाती थी.

और अब मैं ही उन्हे सुबह सुबह चाय देने जाती थी. पहले तो मैं बाहर दरवाजे पर ही राहुल को चाय पकड़ा देती थी. राहुल पर मेरा दिल आया हुआ था, क्योकि वो दिखने मे ही एक मर्द लगता था. जब भी मैं उसे चाय देती थी, तब वो मेरा हाथ पकड़ लेता था.

उसका वो छूना मेरी चूत मे हलचल पैदा कर देता था. राहुल भी मुझे छुप छुप कर देखता था. एक दिन सुबह मैं ही उन्हे चाय देने गयी, तो मैने देखा दरवाजा खुला है. इसलिए मैं अंदर ही चली गयी और मैने चाय उनके टेबल पर रख दी.

जैसे ही मैं नीचे झुकी तो मेरे दूध से भर हुए बूब्स के दर्शन उन्हे हो गये. उन सब के मूह खुले के खुले रह गये, सबकी नज़रें मेरे गोरे गोरे बूब्स पर जम सी गयी थी. मुझे अंदाज़ा हो ही गया था, की उन सब के लंड खड़े हो गये है.

क्योकि उनके हाथ अपने लंड पर आ गये थे. फिर मैं वाहा से मुस्कुरा कर वापिस आ गयी. अब मुझे पता चल गया था, की अब ये सब मुझे चोद्ने के लिए पागल हो गये है. पर मुझे उनसे चुदने के लिए एक अच्छा मौका चाहिए था.
पर जब तक मेरे घर मे मेरी सासू मा बैठी थी, तब तक मैं उनके चुदना तो दूर की बात थी. मैं तो उन्हे देख भी नही सॅक्टी थी. मैं तो टाइट ब्रा डॉल कर छत के उपर से ही उन्हे अपने जिस्म के नज़ारे देती रहती थी.

एक दिन मेरी मौसी सास मर गयी, सब को उनके मरने मे जाना था. सब तयार हो गये, पर जब मेरी सासू मा ने मेरे हाथ मे चुड़ा देखा तो उन्होने मुझे वाहा जाने से मना कर दिया. मेरे पास मेरी ननद रह गयी. अब हम दोनो घर मे अकेले थे.

उन्होने रात को आ जाना था, मेरी ननद उनके जाने के बाद अपने कॉलेज चली गयी. उसके जाते ही मैने अच्छे से मेकप किया, और अपनी ब्लॅक कलर की टाइट ब्रा डाली. ब्रा और पेंटी के उपर मैने सीधा पतला सा टाइट सूट डाला लिया. वो वाइट कलर का सूट था.

जिसमे मेरी ब्लॅक कलर की ब्रा-पेंटी सॉफ सॉफ दिख रही थी. मेरी पज़्ज़ामे मे मेरी पनटी सॉफ दिख रही थी. मैं किचन से चाय ले कर उनके पास चली गयी. मैं सीधा उनके रूम मे चली गयी. अंदर राहुल और मोहित था, मोहित रज़ाई मे सोया हुआ था.

राहुल मेरे आने के इंतज़ार मे बैठा हुआ था. जब उसने मुझे देखा तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी और वो बोला.

राहुल – भाभी आओ आज आप भी अपनी चाय मेरे साथ बैठ कर पी लो.

मैं – हा क्यो न्ही.

राहुल – भाभी वैसे आज आप कमाल लग रही हो.

मैं – तू अपनी चाय ध्यान से पी ले, कही ये तेरे कपड़ो पर चाय ना गिर जाए.

राहुल – कोई बात नही भाभी आप हो ना मेरे कपड़े सॉफ करने के लिए.

ये कहते ही वो मेरे पास आ कर बैठ गया. उसके हाथ मेरे पॅट्टो पर आ गये, मुझसे भी अब रहा नही गया. मैं भी उसका लंड उनकी पेंट के उपर से ही पकड़ लिया. वो एक दम मस्त हो गया, उसने अपनी चाय टेबल पर रखी और मेरे होंठो को चूसने लग गया.

फिर उसने मेरे बूब्स को मसलना शुरू कर दिया, मेरे मूह से आहह आहह की आवाज़ें निकलने लग गयी. मेरी आवाज़ सुन कर सागर भी उठ गया, जब उसने देखा की राहुल मुझे चूस रहा है. वो भी उठा और नंगा हो कर मेरे पास गया, उसका लंड काफ़ी दमदार लग रहा था.

फिर राहुल और सागर ने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. मैं उनके आगे पूरी नंगी हो गयी. राहुल भी पूरा नंगा हो गया, मेरे दोनो हाथो मे दो दमदार लॅंड थे. कसम से इतने टाइम बाद टाइट लंड ले कर अच्छे से मज़ा आ गया.

राहुल ने मुझे बेड पर सीधा लेटा दिया. सागर मेरी चूत को चूसने लग गया. राहुल ने अपना लंड मेरे मूह मे डॉल दिया. जिसे मैं ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गयी, वो मेरे बूब्स मसल्ने लग गये. मैं मस्ती मे उसका लंड चूस रही थी, साथ ही सागर से अपनी चूत चुस्वा रही थी.

इतने मे मोहित और शिव भी दूध और ब्रेड ले कर अंदर आ गये. जब उन्होने देखा की मैं उन दोनो के बीच नंगी लेटी हुई थी. मैं शरम के मारे रज़ाई मे छिप गयी. मोहित पूरा नंगा हो कर मेरे पास आ कर बोला.

मोहित – मेरी जान बाहर आओ, इन सब से ज़्यादा मैं ही तुझसे प्यार करता हूँ.

मैने धीरे धीरे बाहर मूह निकाल कर बाहर देखा. मैं मोहित का लंड देख कर पागल हो गयी. क्योकि उसका लंड 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था. एक दम लंबा काला मोटा डंडा लग रहा था. उसने अपना लंड मेरे होंठो पर रख दिया.

उसके लंड की खुश्बू मुझे पागल कर रही थी, मैने उसका लंड अपने मूह मे भर लिया. फिर उसके लंड को मैने ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गयी. बाकी वो तीनो मेरे चूत,गांद और मेरे बूब्स से खेलने लग गये.

शिव तो मेरे दोनो बूब्स का दीवाना था, वो मेरे बूब्स को चूसने मे लग गया. सागर मेरी चूत को चूसने मे अभी तक लगा हुआ था. फिर मोहित ने लंड बाहर निकाला और बोला मेरी जान आज तू मेरे लंड के उपर बैठ कर इसकी सवारी कर.

मैं – ज़रूर मेरे राजा तेरे लंड की सवारी तो मैं इसे अपनी गांद मे ले कर करूँगी.

मोहित नीचे लेट गया, मैने अपनी एक उंगली अपनी मूह मे ले कर उसे गीली करी और उसे अपनी गांद मे ले कर अपनी गांद को चिकना कर लिया. मैं मोहित के 8 इंच के लंड के उपर बैठ गयी. उसका लंड धीरे धीरे मेरी गांद को चीरता हुआ मेरी गांद मे घुस गया.

मोहित – वाह मेरी रानी मेरा तो इस दुनिया मे आना सफल हो गया मेरी रानी.

फिर वो तीनो बारी बारी से मुझे अपना लंड चुसवाने लग गये. करीब 10 मिनिट बाद मोहित ने अपना लंड मेरी गांद से निकाल दिया. वो साइड मे बैठ गया और बोला.

मोहित – सालो तुम तीनो ने जितना चोदना है, इसे चोदो और फिर दफ़ा हो जाओ कॉलेज मे.

मोहित की बाद सुनते ही वो तीनो मेरे उपर टूट पड़े, कोई मेरी गांद कोई मेरी चुत और कोई मेरा मूह बारी बारी से चोद रहा था. उन तीनो ने मुझे 45 मिनिट तक जम कर चोदा सालो ने मेरे बूब्स मेरी चूत और मेरे पेट पर अपना अपना पानी निकाल दिया.

उसके बाद मोहित ने मुझे गरम पानी से नहलाया और फिर उसने मुझे बहुत जबरदस्त तरीके से चोद्ना शुरू कर दिया. उसने मुझे दीवार के साथ लगा कर मुझे घोड़ी बना दिया. और फिर पीछे से मेरी गांद मे अपना लंड डॉल कर मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदने लग गया.

फिर गांद से लंड निकाल कर मेरी चूत मे डॉल दिया. वो मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदने लग गया. कसम से उसके लंड मे बहुत दम था, क्योकि अभी तक उसके लंड का पानी नही निकला था.

मैं – मेरे राजा मुझे अपने बच्चे की मा बना दे ना प्लीज़.

मोहित – क्यो नही मेरी रानी ये ले खोल अपनी बच्चे दानी ये ले अपने यार का पानी.

मैं अभी अपनी चुत से उसके लंड को अच्छे से कस्स कर पकड़ लिया और उसके लंड की पिचकारी मेरी चुत के अंदर निकाल दिया. फिर मैं उसके सीने पर सिर रख कर सो गयी. फिर 1 बजे हम दोनो ने फिर से चुदाई शुरू कर दी. 3 बजे वो तीनो आ गये और कॉलेज से आते ही सालो ने मुझे फिर से चोदना शुरू कर दिया.

चुदाई करवाते हुए मुझे ये पता ही नही चला की कब 5 बजे गये. मेरी ननद घर आई, जब उसे मैं किन नही मिली तो वो सीधे उस रूम मे आ गयी. जब उसने देखा की मैं तीनो लड़को के साथ चुद रही हूँ, तो वो बोली.

ननद – अछा भाभी आप यहाँ चुदति हो, मैं भैया को बता दूँगी.

मोहित – साली ज़रूर बता दियो, पहले अपनी भाभी के साथ जन्नत के मज़े तो ले ले.

ये कहते ही मोहित ने मेरी ननद को पकड़ कर अंदर खींच लिया. फिर दो लड़के उसे चोदने मे लग गये, और मुझे भी दो लड़के चोदने लग गये. फिर कुछ दीनो बाद मैं मोहित के बचे की मा बन गयी. पर साली मुसीबत तो तब हो गयी, जब मेरी ननद भी मा बनने वाली थी.

मोहित ने उसका ऑपरेशन करवा कर उसे बचाया. आज मैं मोहित के बचे की मा बन चुकी हूँ. और मेरा चूतिया पति सोचता है की वो 3 मिनिट की चुदाई से मुझे मा बना सकता है.

मुझे उमीद है, आपको मेरी कहानी पसंद आई होगी



एक फूल दो काँटे



हेलो दोस्तो, केसे हो आप सब? मेरा नाम आशा है और आज मैं आपको अपनी एक कहानी बताने जा रही हूँ. पर कहानी बताने से पहले मैं आपको अपने बारे मे बताना चाहती हूँ. तो चलिए पहले अपने बारे मे ही शुरू कर लेते है.

मेरा नाम तो आप जान ही चुके हो और तो और अब काफ़ी कुछ जान भी जाओगे. मैं बहुत ही मस्त लड़की हूँ. मेरा फिगर बहुत ही कमाल का है. मैं एक काफ़ी हस्मुख टाइप की लड़की हूँ. मैं बहुत ही खुश रहती हूँ.

चलो ये सब तो चलता रहता है. मैं अब अपनी स्टोरी पर भी ले कर चलती हूँ. मैं बहुत ही खुश रहती हूँ और रहू भी क्यू ना आख़िरकार मैं हूँ ही इतनी स्मार्ट.

चलो अब ज़्यादा टाइम ना वेस्ट करते हुए आपको कहानी पर ले कर चलती हूँ. मैं तब स्कूल मे थी जब की मेरी ये कहानी है. उस समय मैं नयी नयी जवान हुई थी. और नयी जवान होने पर बहुत कुछ चैंजेस भी आ रहे थे.
मेरी ही क्लास मे एक लड़का है जिसका नाम मनीष है. वो बहुत ही स्मार्ट है और तो और मैं उसे काफ़ी ज़्यादा पसंद भी करती हूँ.मैं उसे काफ़ी देखती रहती हूँ और तो और बड़े ही प्यार से उससे बात करती हूँ.

और फिर ऐसे ही मैने उससे पहले फ्रेंडशिप करली और फिर मैं उसके साथ टाइम स्पेंड करने लग गई. मुझे उसके साथ क्लास मे टाइम स्पेंड करना बहुत ही अच्छा लगता था. और तो और उसे भी अब ये बहुत ही अच्छा लगता था. मैं बहुत ही खुश भी थी की वो भी मुझे अब पसंद करने लग गया है.

मैं अब उसके साथ क्लास मे ही लेटर के थ्रू बात किया करती थी. अपने प्यार का जिक्र किया करते थे और तो और फिर ऐसे ही सब कुछ किया करते थे. ऐसे ही चल रहा था की एक दिन उसने मुझे बाहर गार्डेन मे मिलने को काहा और फिर तब मैने सोचा की मिलने जाउ या ना जाउ.

क्योकि मुझे ये भी डर था की क्लास का कोई भी हमे एक साथ देख ना ले. फिर मैने हिम्मत करी की देखा जाएगा और फिर मूह पर रुमाल बाँध कर उससे मिलने चली गई. वाहा पहुच कर मेरी हिम्मत और खुल गई और फिर मैं उससे बात करने लग गई और उसके साथ ही घूमने लग गई.

ये एहसास होने के बाद मैने सोचा की अब सब कुछ जो होगा देखा जाएगा बस अब मनीष साथ टाइम स्पेंड करना है. फिर हम ऐसे ही मिलने लग गये. हम ऐसे काफ़ी बार मिले और तो और उसने एक बार भी मुझे ग़लत इंटेन्षन से कभी भी टच न्ही किया जो की उसका प्लस पॉइंट था.

पर मैं तो काफ़ी कुछ चाहती थी यानी की मैं उसके जिस्म को छूना चाहती थी और मैं चाहती थी की वो मेरे जिस्म को भी छुए. और तो और ऐसे ही फिर उसके दिल तक ये बात पहुच ही गई. कहते है ना की दिल की बात दिल ही जानता है तो ठीक वैसे ही मेरे साथ भी हुआ था.

और फिर उसने तभी मेरे होंठो को चूस लिया . मैं बहुत ही खुश हो गई और मैं भी उसके होंठो को चूसने लग गई. मै बहुत ही पागल हो रही थी की आख़िरकार ये क्या हो रहा है. और फिर उसने मेरे बूब्स को हाथो मे ले लिया और दबाने लग गया और ऐसे ही मैने भी हाथ अंदर डाल ही दिया.
फिर हम जब भी मिलते तो हाथो से ही कुछ ना कुछ कर लेते. फिर ऐसे ही हम एक दूसरे को ज़्यादा छेड़ने लग गये और फिर ऐसे ही उसने अपना पानी निकलना शुरू कर दिया और साथ ही साथ मेरा भी निकालने लग गया.

फिर एक दिन उसने मुझसे चुदने को काहा यानी की चूत मे लंड को लेना. ये सुन कर मैं घबरा गई क्योकि मैं ये सब न्ही कर सकती थी. और फिर मैं ऐसे ही उसको साल भर टालती रही. फिर मेरे घरवालो ने मेरा रिश्ता कही और सेट कर दिया और फिर जब ये बात मैने मनीष को बताई तो हम दोनो फुट फुट कर रोए.

फिर थोड़े ही दीनो बाद मेरी शादी हो गई. मेरे हज़्बेंड का खुद का काम था यानी की खुद की ही शॉप थी. मैं बहुत ही खुश रहा करती थी. उन्होने मेरे साथ चुदाई करके मुझे चुदकक्ड बना दिया था. और तो और मैं उसने बहुत प्यार करने लग गई.

पर मेरे लिए तो डबल डबल खुशिया थी. क्योकि मेरे पति तो मुझसे प्यार करते ही थे और दूसरी तरफ मनीष भी मुझसे काफ़ी प्यार करता था और अब तक करता आ रहा था. ये देख कर मैं काफ़ी खुश थी की मुझे दोनो की तरफ से बहुत ही प्यार मिलना है.

और फिर ऐसे ही थोड़ा टाइम निकल गया. मैं काफ़ी खुश भी थी और मैं आपको बता दू की मेरे पति लुधियाना, देल्ही की टूरिंग भी करते थे तो वो कभी कभी जाते थे और तब मैं घर पर अकेली राहा करती थी.

फिर एक दिन उनके जाने के बाद मैने मनीष को मिलने को काहा. पहले तो उसने मुझे मना ही कर दिया की मैं ये क्या कह रही हु. पर मनीष आ ही गया. हम एक रेस्तारेंट मे मिले. हमने काफ़ी देर तक अच्छी बात करी और फिर हम कुछ खाने पीने लग गये. फिर काफ़ी देर बाद उसने मुजसे कहा की कही और चलते है तो मुझे कुछ समझ ही न्ही आ रहा था की मैं काहा जाउ और काहा ना जाउ. फिर ज़्यादा दिमाग़ लगाने से अच्छा मैं खुद ही उसे अपने घर ले आई.

मैं और वो दोनो ही बहुत खुश थे. फिर घर आ कर उसने मुझे अपनी बाहो मे भर लिया. मैं उसे मना करने लग गई की मैं अब शादी शुदा हूँ. तो वो मुझे कहने लग गया की मैं तो तुम्हारा पहला आशिक़ हूँ और तुम मुझे अब भी मना करोगी.

मेरी तड़प को देखो ना. और फिर उसकी इस तड़प को देख कर मुझे भी लगा की अब हो ही जाना चाहिए. और फिर उसने मेरे कपड़ो को उतार दिया और मैने भी उसके कपड़े उतार दिए. मैने उसके लंड को हाथ मे ले लिया.

फिर तब मैने देखा की उसका लंड मेरे पति से भी मोटा है और काफ़ी बड़ा भी है. और फिर उसके बाद मैने उससे बाहो मे भर लिया और फिर ऐसे ही उसे प्यार करने लग गई. मैं उसे चूमने लगी और वो भी मुझे चूसने लग गया.

मैं पागलो की तरह उसको चूम रही थी और फिर मैने उसके होंठो को चूसना शुरू कर दिया. और फिर उसके बाद मैने उसके लंड को मूह मे भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गई. मुझे बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ राहा था और तो और वो मेरी चुत को चाटने लग गया.

मैं भी पागल हो रही थी और फिर ऐसे ही मैने भी उसको अपने उपर आने को काहा. और फिर वो मेरे उपर आ कर बैठ गया और मेरे बूब्स को चूसने लग गया. मैं तो पागल हो रही थी और तो और फिर मैने अपनी टाँगे को खोल दी और उसने लंड को मेरी चूत पर सेट किया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लग गया.

ये देख कर मैं पागल हो गई और ज़ोर ज़ोर से आहह आह करने लग गई और खुद को चुदवाने भी लग गई. मुझे बहुत ही मज़ा आ राहा था और तो और वो भी पागल हो राहा था और फिर ऐसे ही मुझे चोदने के बाद मैने उसके लंड पर अपना पानी निकाल दिया.

और फिर उसके बाद उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरी गांद को चोदने लग गया. मुझे बहुत ही ज़्यादा दर्द हो रहा था और काफ़ी देर तक चोदने के बाद उसने मेरी गांद मे ही पानी निकाल दिया और फिर थक कर लेट गया.

बस फिर उसके बाद मैने ऐसे ही उससे बहुत ही सारी बाते करी और फिर उसने मुझसे काहा की तुम अब भी मेरी ही रहोगी ना. तो मैने भी कह दिया की हाँ हाँ ज़रूर. और फिर ऐसे ही मैने उसको काहा की अब सब पहले जैसा होगा.

और फिर वो खुश हो कर वाहा से चला गया और फिर ऐसे ही मैं उसको मिलने लग गई. अब मुझे अपना प्यार और पति का प्यार दोनो का प्यार मिलने लग गया था.

आप सब को मेरी ये कहानी केसी लगी मुझे ज़रूर बताना



चलो कुछ नया ट्राइ करते है

हेलो दोस्तो, मैं आपका दोस्त राज फिर एक बार आपके लंड ओर चुतो को सलाम करके एक न्यू स्टोरी लेकर आया हूँ, उमीद करता हूँ की आपको मेरी और स्टोरीस की तरह ही पसंद आएगी.

बात आज से लगभग 2 साल पहले की है, मैं देल्ही मैं ही था ओर अपने सारे पुराने चक्कर छोड़ कर एक सिंपल लाइफ जीने की कोशिश कर रहा था.

मगर आपको तो पता है के मेरी ज़िंदगी मे, जब भी मैं कुछ बदलने की कोशिश करता हूँ कोई ना कोई घटना घट ही जाती है.

तो बात को ज़्यादा ना बढ़ाते हुए मैं घटना पर आता हूँ संडे का दिन था, मैं घर से घूमने के लिए घर से निकला ओर पुराने किले पर पहुच गया.

क्यों की ये ही एक जगह है देल्ही मे जहाँ पर हर तरह का प्यार देखने को मिल जाता है, तो मैं वहाँ पर लड़के लड़कियों को प्यार करते हुए देख रहा था, ओर अकेला टहल रहा था कोई लड़का किसी लड़की की बाहो मे बाहे डॉल कर बैठा था, या कोई किसी को किस कर रहा था.

मगर वहाँ पर एक लड़की थी जो एक पेड़ के नीचे अकेली बैठी थी ओर पेड़ को खोदकर कुछ लिख रही थी, लड़की ने पेड़ पर खोद कर एक दिल बना रखा था ओर उसमे अंजलि ओर विक्की लिखा था ओर दिल के नीचे आई हॅयेट यू विक्की लिखा था.

वो लड़की दिखने मे बहुत उदास लग रही थी ओर उसकी आँखों से कुछ आसू की बूंदे टपक रहीं थी. मैं थोडा दूर खड़ा होकर उसको देखने लगा, लड़की ने उस दिल को खोदना चालू कर दिया ओर दिल पर जो लव लिखा था उसको मिटा दिया ओर दिल मे तीर का निशान बना दिया ओर वो रोने लगी, मुझसे रहा नही गया ओर मैं उस लड़की के पास पहुच गया.

वो लड़की दिखने मे बहुत सुंदर थी, उसके लंबे लंबे बाल थे ओर गोल चेहरा, नीली आँखें, उँचे उठे हुए चुचे, कद 5 फिट का ओर पतली कमर थी दिखने मे लड़की किसी अच्छे घर की लग रही थी.

मैने उससे पूछा तुम रो क्यों रही हो?

उसने कोई जवाब नही दिया.

मैने फिर पूछा अंजलि तुम रो क्यों रही हो?

उसने कहा आपको मेरा नाम कैसे पता क्या हम एक दूसरे को जानते है?

मैने कहा, मैंने आपको रोते हुए देख कर पूछ लिया बस इंसानियत के नाते.

उसने कहा, क्या यहाँ पर रोने पर भी मनाई है क्या ओर आप कौन जो इंसानियत दिखा रहे हो.

वो लड़की खुद से बहुत उदास थी.

मैने कहा, तुम्तो बेकार मे ही खुद से गुस्सा हो तुम जिसके लिए आँसू बहा रही हो उसको तुम्हारी कोई फिकर नही है ओर वो किसी और से प्यार करता है.

वो लड़की मेरी बात सुनकर एक दम से चोंक गई ओर मुझसे पूछने लगी ये सब आप कैसे जानते हो?

मैने कहा, मैने बताया ना मैं सब जनता हू सब के बारे मैं, ये ही नही ओर ये भी की अभी तुम्हारे दिल मे क्या चल रहा है ओर तुम क्या करने की सोच रही हो (मैं लगातार अंधेरे मैं तीर छोड़ने लगा और मेरे सारे तीर निशाने पर लग रहे थे ओर लगते क्यों नही आपको तो पता है की मैं औरतों को बस मे करने मैं माहिर हूँ).

वो मेरी बात सुनकर रोने लगी ओर बोली जब आप इतना सब जानते हो तो कोई तो रास्ता होगा मेरी इस परेशानी का.

मैने कहा, रास्ते तो बहुत है लेकिन अभी नही तुम मेरा ये मोबाइल नंबर रख लो ओर घर जाकर मुझसे बात करना फिर मैं बता दूँगा क्या करना है.

उसको समझा कर मैं अपने घर आगया ओर वो अपने घर चली गई.

रात के 10 बजे मेरे फोन पर किसी का फोन आया दूसरी तरफ से लड़की की आवाज़ आरहि थी. मैने पूछा कौन बोल रहा है?

उसने कहा आप बताओ आपको तो सब पता है.

मैने कहा बोलो अंजलि कैसी हो?

उसने कहा, मैं तो वैसी ही हूँ लेकिन आपसे मिलकर मेरे दिल ओर दिमाग़ मे जंग हो गई है की आख़िर आप हो कौन?

मैने कहा, तुम चिंता मत करो बस ये सोचलो की मैं आपका एक शुभ चिंतक हूँ ओर मेरी जिसको भी ज़रूरत होती है, मैं उसके पास पहुच जाता हूँ.

अंजलि ने पूछा – आप का नाम क्या है?

मैने उसको बताया मेरा नाम राज है ओर अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मदत कर सकता हूँ.

अंजलि मेरी बातों को बड़े ध्यान से सुन रही थी ओर फिर उसने पूछा आप मेरी क्या मदत कर सकते हो.

मैने कहा मैं चाहूं तो तुमको वो हासिल हो जाएगा जो तुम पाना चाहती हो.

अंजलि ने कहा, वो कैसे?

मैने कहा, बस तुमको मुझ पर भरोसा करना पड़ेगा.

अंजलि ओर इसके लिए मुझे क्या करना होगा ओर कितना खर्चा होगा.

मैने अंजलि को बताया की इसके लिए कोई खर्चा नही होगा बस तुमको एक बार मुझसे मिलना होगा.

अंजलि ने कहा, मैं आप से मिलने तो नही आ सकती लेकिन आप चाहो तो मेरे घर पर आ सकते हो.

मैने कहा, ठीक है तुम मुझे अपने घर का पता बता दो मैं मंगलवार को तुम्हारे घर पर आ जाता हू.

अंजलि ने मुझे अपने घर का पता बता दिया.

ओर मैं मंगलवार को 11 बजे उसके घर पहुच गया अंजलि का घर बहुत बड़ा था ओर घर के बाहर 2 चोकीदार खड़े थे ओर आँगन मे स्वीमिंग पूल था ओर घर के अंदर हर चीज़ थी 3-4 नोकर यहाँ वहाँ घूम रहे थे दरवाज़े मे मुझसे पूछा किससे मिलना है तभी अंदर से आवाज़ आई आने दो इनको ये आवाज़ अंजलि की थी.

मैं अंदर चला गया अंजलि मुझे अंदर एक कमरे मे ले गयी ये कमरा भी बहुत बड़ा था ओर कमरे मे बाथरूम भी अंदर ही था.

अंजलि ने मुझसे पूछा क्या लेंगे ठंडा या गरम.

मैने कहा कुछ नही.

फिर भी अंजलि ने के नोकर को इशारा कर दिया ओर वो मेरे लिए शरबत लेकर आ गया.

अंजलि ने मुझको बेड पर बिठा दिया और पूछा.

अब बताओ आप मेरे लिए क्या कर सकते हो ?

मैने कहा तुम्हारे मों बाप कहाँ है.

अंजलि ने कहा वो तो ज़्यादा तर विदेश मे ही रहते है ओर मैं ही बस यहा रहती हूँ, मैं विक्की से बहुत प्यार करती थी ओर उसको मेरी दौलत से प्यार था जब मुझे ये समझ मे आया तो मैने उसको पैसे देने बंद कर दिए ओर वो मुझे छोड़ कर चला गया.

मैने कहा, ये सब तो मुझे तुमको देख कर ही पता चल गया था तुम बेकार मैं ही आँसू बहा रही हो वो तुम्हारे लायक नही था.

अंजलि बोली लेकिन मैने उसको सच्चा प्यार किया है मैं उसको भूल नही पा रही हूँ, मैने आज तक जिससे भी प्यार किया है वो मुझे छोड़ कर चला जाता है ओर ये कह कर रोने लगी.

मैने कहा दो मिनिट के लिए मेरी बात सुनलो.

सब ठीक हो जाएगा ओर बस 2 मिनिट के लिए गेट लॉक कर दो.

अंजलि ने गेट लॉक कर दिया ओर मेरे पास आकर बैठ गई.

मैने अंजलि को मेरी आँखों मे देखने के लिए बोला वो मेरी आँखों मे देखने लगी ओर फिर मैने उसको आँख बंद करने को कहा और फिर उसको कहा आँख बंद करके गौर से देखो क्या दिख रहा है.

अंजलि ने कहा कुछ नही दिख रहा ओर आँख बंद करके क्या दिखेगा.

मैने अंजलि के सर पर हाथ रख कर कहा गौर से देखो कुछ दिख जाए गा.

ओर अंजलि को अपनी बातों से सम्मोहित करने लगा ओर अंजलि को जो मैं दिखाना चाह रहा था वही दिखने लगा, ओर अंजलि मुझसे बहुत प्रभावित होती जा रही थी.

फिर मैने अंजलि से कहा इस दुनिया मे सब कुछ तुम्हारा है और तुम सबकी हो और सब मेरा है और मैं सबका और तुम मुझ मे हो ओर मैं तुममे इसलिए खुद को मुझमे समा कर देखो.

अंजलि पूरी तरह से मुझसे प्रभावित हो गई.

और फिर इसी तरह से 2-3 दिन मैं हम एक दूसरे के अच्छे दोस्त बन गये. मैं पहले तो 2-3 दिन अपने घर से उसके घर गया.

मगर फिर जब कुछ नही हो पाया ओर अंजलि जीतने समय के लिए मेरे साथ रहती उसको बहुत अच्छा फील होता था मैं उसको मेडिटेट करवाने लगा.

एक दिन अंजलि बोली क्या तुम कुछ दिन के लिए मेरे घर पर रह सकते हो मैने भी हा कर दी.

उस दिन मैं अंजलि को फिर से सम्मोहित कर रहा था, तो मैने अंजलि से कहा की मैं चाहूं तो तुमको वो शक्ति मिल सकती है जिसे पाकर तुम दुनिया के हर इंसान को बस मे कर सकती हो लेकिन इसकी कीमत बहुत बड़ी है.

अंजलि ने कहा, मैं हर कीमत अदा कर दूँगी ओर वो अपने ड्रोवर मैं से 2000 के नोट की गॅडी उठा कर ले आई.

मैने कहा, ये कीमत इस दुनिया के लिए है भगवान की दुनिया मैं तो इसकी कोई कीमत नही है इसके लिए तुमको उस हालत मैं बैठना होगा जिस हालत मे इंसान इस दुनिया मे आता है.

पहले तो वो थोड़ा रुकी गई लेकिन फिर उसने अपने सारे कपड़े उतार कर एक तरफ रख दिए. फिर मैने अंजलि को आँख बंद कर के बैठने के लिए बोल दिया.

अंजलि के आँख बंद करते ही मैने गेट बंद करके अपने सारे कपड़े उतार कर कमरे की लाइट भी बंद कर दी. अंजलि के पास आकर बैठ गया ओर धूप जला दी धूप की खुसबु पूरे कमरे मैं फैल चुकी थी.

मैने अंजलि से कहा की अब तुम तैयार हो.

अंजलि ने कहा मैं तैयार हूँ मुझे क्या करना है.

मैने कहा, ये तो तुमको अब पता चल जाएगा जब मैं अपने उपर उस शक्ति को बुलाउन्गा ओर तुमको मुझसे उस शक्ति को ग्रहण करना है.

अंजलि ने कहा ठीक है.

मैं अंजलि के सामने आँख बंद करके बैठ गया ओर तरह तरह की आवाज़ निकाल कर अंजलि के हाथ पकड़ कर हिलते हुए एक दम से संत हो गया.

फिर आवाज़ को भारी करके अंजलि को हाथ पकड़ कर अपनी तरफ बुलाने लगा, जैसे जैसे अंजलि मेरी तरफ बढ़ रही थी मेरा लंड खड़ा होता जा रहा था धीरे धीरे अंजलि मेरे बिल्कुल करीब आ गयी और मेरे पैर अंजलि के पैरों से चिपकने लगे.

मैने अंजलि को और आगे आने के लिए बोला ओर वो और आगे आ गई और अब मैने अंजलि के दोनो पैरों को अपनी कमर के दोनो तरफ कर दिया.

अब अंजलि की मुलायम सी चुत मेरे लंड से लगने लगी और मेरा सीना अंजलि के सिने से चिपक ने लगा.

मैने अंजलि से कहा आज तुमको मुझमे समाना है ओर मैं तुझमे समा कर तुमको शक्ति दे दूँगा.

मैने अंजलि को थोड़ा सा उठा कर कुछ बड़बड़ाते हुए अपना लंड अंजलि की चुत पर सेट कर दिया ओर अंजलि को धीरे धीरे बैठने के लिए बोला.

अंजलि जैसे जैसे मेरी गोद मे बैठ रही थी मेरा लंड अंजलि की चुत मे घुसता जा रहा था. फिर धीरे धीरे मेरा पूरा का पूरा लंड अंजलि की चूत मैं समा चुका था, लेकिन उसने एक बार भी उः आहह नही की मेरा इतना लंबा ओर मोटा लंड भी वो इतनी आसानी से ले चुकी थी इससे ये तो पता चलगया था की अब तक वो चुद गई थी.

फिर मैने अंजलि को एक नाम बता दिया ओर कहा इस नाम को लेकर उपर नीचे होती रहो.

पहले तो अंजलि धीरे धीरे उपर नीचे हो रही थी, लेकिन जैसे जैसे उसको मज़ा आने लगा उसकी उपर नीचे होने की क्रिया तेज हो गई ओर वो तेज तेज उपर नीचे होने लगी ओर सिसकिया भरने लगी ओर मेरे लंड पर कूदने लगी, जैसे बहुत दीनो के बाद लंड मिला हो.

फिर मैने अपना एक हाथ अंजलि की छोटी छोटी चुचियों पर रख दिया. अंजलि की चुचि किसी अनार के आकर की ओर सख़्त थी.

मैने धीरे धीरे उसके स्तन को सहलाना शुरू कर दिया ओर फिर मैने अपने होठ अंजलि के होठों पर रख दिए.

फिर अंजलि को बाहों मे भर कर उसको उठा कर बेड पर लिटा कर, अब मैने अंजलि की चुत पर अपने लंड की बरसात चालू कर दी ओर मैं तेज तेज धक्के देने लगा.

फिर बीच मे अपना लंड अंजलि की चुत से निकल कर मैं अंजलि की चुत पर आ गया ओर अपने होठ अंजलि की मुलायम ओर मखमली चुत पर रख दिए.

अंजलि की चुत इतनी मुलायम ओर मखन की तरह चिकनी थी के जैसे अभी तक किसी ने उसको चोदा ना हो. लेकिन मेरे लंड को इतनी आसानी से लेने के कारण मैं खुद सोच मे पड़ गया था की ये चुदि है या नही आख़िर बात क्या है मै इसका पता लगा कर रहूँगा.

मैं अंजलि की चुत को छत छत कर सॉफ कर रहा था ओर उसके चुत को भी अपनी जीभ से छेड़ रहा था. अंजलि की चुत की फांकों ने मुझसे अंजलि की चुत की आप बीती मुझे बता दी थी की अंजलि को अभी तक किसी ने नही चोदा था.

ये तो अंजलि ने कुछ नया ट्राइ करने के चक्कर मे अपनी चुत का सत्या-नास कर दिया था, मैं बड़े मज़े से अंजलि की गुलाबी चूत को चूस रहा था ओर अंजलि बेड पर किसी नागिन की तरह बलखा रही थी.

फिर मैं अंजलि की चुत को चाटते हुए उपर बढ़ने लगा. फिर अंजलि के दोनो चुचियो का रस निचोड़ निचोड़ कर पीने लगा और अपने लंड को अंजलि की चुत मे फिर से रख दिया ओर अब अंजलि भी गांद उठा उठा कर धक्के लगाने लगी.

मैं यू ही अंजलि को चोदता रहा ओर फिर 1 घंटे बाद मेरे लंड ने बहुत सारा गाढ़ा क्रीम अंजलि की चुत मे छोड़ दिया.

अंजलि अब तक ना जाने कितनी बार झाड़ चुकी थी ओर अब वो बिल्कुल शांत्त पड़ गई थी. मैं अंजलि के उपर पूरा नंगा लेटा हुआ था ओर फिर बेहोशी का नाटक करके एक तरफ़ पड़ गया.


मेरी चचेरी बहन पूनम का प्यार

हेलो दोस्तो मेरा नाम सागर है. मैं आज अपनी ज़िंदगी का एक सच आप सब के लिए ले कर आया हूँ. ये मेरी एक अधूरी लव स्टोरी है, जिसमे मैने अपनी जान से सिर्फ़ एक बार सेक्स किया और हम दोनो हमेशा के लिए एक दूसरे के हो गये.

मुझे पूरी उमीद है की आपको मेरी ये कहानी पढ़ने मे बहुत मज़ा आएगा. तो चलिए फिर कहानी को जल्दी से शुरू करते है.

ये बात आज से दो साल पहले की है, जहाँ से ये सब शुरू हुआ था. मैं बचपन से अपनी गर्मियो की छुटटी अपने चाचा के घर मनाने जाता था. मुझे वाहा सच मे बहुत मज़ा आता था. उनकी एक बेटी थी, उसका नाम पूनम था. जब मैं उसके घर आता था 

तो वो मुझे देख कर खुश हो जाती थी.

हम दोनो बचपन से ही बहुत बनती थी. पूनम मुझसे 2 साल बड़ी थी, वो बचपन से ही बहुत सुंदर और क्यूट थी. खैर धीरे धीरे हम बड़े होने लग गये. मुझे सेक्स के बारे मे कुछ भी न्ही पता था. पर मुझे ये पता था की सेक्स लड़का और लड़की के बीच मे होता है

जब मैं 21 साल का हुआ और पूनम 23 साल की हुई. तो वो किसी परी से कम न्ही थी, वो सच मे काफ़ी खूबसूरत बन गई थी. उसे देख कर मैं सोचता था की काश ये मेरी गर्ल फ्रेंड होती तो मैं इसे सच मे बहुत प्यार करता. उसके बूब्स अब मोटे हो गये थे, जो बाहर की ओर निकले रहते थे.

उसके पतले पतले गुलाबी होंठ अब और भी सेक्सी रस्स से भर गये थे. उसके होंठो को देखते ही मूह मे पानी आ जाता था और उसके होंठो का रस्स पीने का मन होता था. उसकी पतली कमर ना जाने कैसे उसके गोल गोल और मोटी गांड
संभाल रही थी.

जब पूनम चलती थी तो उसकी गांड मटकती हुई बहुत सुंदर लगती थी. मन करता था भी दोनो च्छूतड़ो को अपने हाथो मे ले कर उन दोनो को मसल दू.. कयि बार तो ऐसा लगता था, बस अभी साली को घोड़ी बना कर इसकी गांड मे अपना लंड घुसा दू.

पर खैर मैं ऐसा सोच ही सकता था, क्योकि उसके घर पर उसे ही चोदना काफ़ी रिस्क से भरा हुआ था. फिर कुछ टाइम मेरे घर पर हमने मम्मी पापा की सालगिरा के लिए एक फंक्षन रखा. उस फंक्षन की तयारि के लिए पूनम दो दिन पहले ही आ गई.

उसको देख कर मैं खुशी से पागल हो गया. वो सच मे बहुत खूबसूरत लग रही थी. मैने तभी उसका हाथ पकड़ा और उसे सीधा अपने रूम मे ले गया. हम दोनो के बारे सब को पता था, की मैं और पूनम बचपन से ही एक दूसरे के अच्छे दोस्त है.

इसलिए किसी कोई शक न्ही हुआ, मैने अंदर आते ही डोर को अंदर से बंद कर लिया. फिर मैने उसे बेड पर बिठाया और खुद भी उसके साथ बैठ गया. फिर हम दोनो बातें करने लग गये. फिर मैने हिम्मत करके उससे पूछा.

मैं – पूनम अब तो तुम इतनी बड़ी हो गई हो, तुमने कोई अपना दोस्त बनाया या न्ही ?

पूनम – न्ही अभी तक कोई न्ही बनाया, पर तू आज ये सवाल मुझसे क्यू पूछ रहा है. मुझे तेरे इरादे ठीक न्ही लग रहे है.

मैं – क्या करूँ पूनम मैं तुम्हे बहुत पसंद करता हूँ. पर मुझे तुम ये बता दो की मैं तुम्हे पसंद हूँ या न्ही ?

पूनम ने मुझे जवाब दिया, वो मुझे आँख मार के जाने लगी. मैने उसका हाथ प्कड़ा और फिर से वो ही सवाल पूनम से पूछे.

पूनम – सागर आज तुम मुझसे ये क्यो पूछ रहे हो. मुझे तो कुछ समझ न्ही आ राहा है.

मैं – प्लीज़ तुम बता दो ना.

पूनम – अरे बुद्धु तुम मुझे अच्छे लगते हो इसलिए तो मैं तुमसे बात करना पसंद करती हूँ.

ये सुनते ही मैं खुश हो गया, और तभी मैने उसे आई लव यू काहा और उसके गोरे गाल पर एक किस कर दी. फिर हम दोनो रूम से बाहर आ गये, और फिर हम दोनो अपने अपने कामो मे लग गये.

शाम हम दोनो थोड़े फ्री से हुए, मैने दूर से ही उसे अपने रूम मे जाने का इशारा किया. पूनम थोड़ी देर बाद इधर उधर देख कर मेरे रूम मे चली गई. फिर मैने अपने होंठ उसके होंठो पर रखे और ज़ोर ज़ोर से उसके होंठो को मैं चूसने लग गया.

उसके होंठो का रस्स पीने मे सच मे मुझे बहुत मज़ा आरा था. मुझे ऐसा लग रहा था, मानो मैं कोई गुलाब चूस रहा हूँ. करीब 10 मिनिट तक हम दोनो एक दूसरे के होंठो को चूस्ते रहे और फिर उसने मुझे पीछे को धक्का दिया और मुझे दूर करके रूम से निकल कर भाग गई.

कसम उसके होंठो को चूस कर मेरी प्यास बुझ गई थी. मुझे उसके होंठो को चूसने का मन फिर से करने लग गया था. अगले दिन फिर शाम को सब लोग बाहर फंक्षन मे गये थे. घर पर मैं, पूनम और कुछ और लोग थे.

मैने फिर से उसे मेरे रूम मे जाने को कहा, पूनम थोड़ी देर मे मेरे रूम मे आ गई. उसके आते ही मैने उसे अपनी बाहों मे भर लिया और उसे ज़ोर ज़ोर से इधर उधर चूमने और चाटने लग गया. इस बार वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.
मैने मौका देख कर अपना एक हाथ उसके बूब्स पर रखा जिससे वो सिहर उठी. उसने मेरा हाथ हटाने की कोशिश करी, पर मैं अब काहा मानने वाला था, इसलिए मैने उसका हाथ को दूर करके उसके दोनो बूब्स को पकड़ कर मसलने लग गया.

पूनम पागल सी होने लग गई और बोली – हा सागर मसल दो मेरे राजा ये तुम्हारे आहह आहह उ मम्मी आहह मस्लो और ज़ोर से मसल दो प्लीज़.

उसकी हालत देख कर मैं भी गरम हो गया और मैने उसका कुर्ता उपर किया और अपना हाथ अंदर करके उसके बूब्स बाहर निकाल दिए. मैने अपना मूह उसके बूब्स पर रखा और ज़ोर ज़ोर से उसके बूब्स को चूसने लग गया. उसके बूब्स सच मे काफ़ी सॉफ्ट थे.

मैं उसके बूब्स चूसने मे मस्त था, और पूनम मुझसे अपने बूब्स चुसवाने मे मस्त हो रही थी. तभी मुझे उसकी मम्मी यानी मेरी चाची की आवाज़ आई. उनकी आवाज़ सुनते ही मैने एक दम से पूनम को छोड़ दिया और अपनी अलमारी मे कुछ समान देखने का बहाना करने लग गया.

पूनम ने भी अपने कपड़े ठीक किए और वाहा से वो चली गई. अब हम दोनो मे पूरी आग लगी हुई थी. अब ये आग ज़रूर सेक्स करने से ही शांत होनी थी. खैर मैं भी अब फंक्षन मे जाने के लिए तयार होने लग गया. मैं अच्छे से तयार हो कर बाहर आया.

पर जब मैने पूनम को देखा तो उसे देखता ही रह गया, वो किसी कयामत से कम न्ही लग रही थी. उसने पटियाला पंजाबी ब्लॅक सूट डाला हुआ था. उपर और कमर से सूट एक दम टाइट था. जिस वजह से उसके मोटे मोटे बूब्स और कमर बहुत ही मस्त लग रही थी.

मुझे तो सच मे उसको देख कर मज़ा ही आ गया. मेरी आँख उस पर ही थी, फिर किचन मे गई. मैं भी झट से उसके पीछे भाग कर किचन मे चला गया. किचन मे उसके और मेरे सिवा और कोई न्ही था.

मैने तभी उसे दीवार से लगा कर उसे अपनी बाहों मे भर लिया. फिर मैने बिना कुछ बोले ही उसके होंठो को अपने होंठो मे लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गया. उसके होंठ का रस्स था की ख़तम होने का नाम ही न्ही लेरा था. फिर हम दोनो अलग हुए और फंक्षन मे चले गये.

रात को जब सब वापिस सोने के लिए जा रहे थे, तो मैने पूनम को अपने साथ सोने के लिए काहा पर उसने और उसकी मम्मी ने मेरे साथ सोने से मना कर दिया. मेरा दिल सा टूट गया, मैं अपने रूम मे चला गया. पर मुझे उस रात नींद न्ही आ रही थी.

आँखो मे पूनम का चेहरा और उसके नंगे बूब्स घूम रहे थे. मुझे लग रहा था की आज की रात शायद मुझे जाग कर ही काटनी होगी. खैर मुझे नींद न्ही आ रही थी, पर फिर भी मैं सोने की कोशिश कर रहा था. करीब 30 मिनिट बाद मुझे मेरे रूम का दरवाजा खुलता हुआ महसूस हुआ.

मैं उठा तो देखा मेरे रूम मे पूनम नाइटी डॉल कर आ रही थी. मैने उसे देखते ही बेड से उछल कर उसके पास गया. और मैने डोर को अंदर से बंद किया और उसे अपनी बाहों मे भर लिया, तभी पूनम बोली.

पूनम – सागर आई लव यू मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ. ना जाने अब मैं कैसे तुम्हारे बिना जीऊंगी. तुमने मुझे 2 दीनो मे जीतना प्यार दिया है, शायद कभी मैने इतना प्यार पाया हो. इसलिए आज से मैं तुमने अपना सब कुछ दे रही हूँ.

मैं – आई लव यू सो मच मेरी पूनम. मैं वादा करता हूँ मैं भी जिंदगी भर तुम्हारा ही रहूँगा,

पूनम – मेरी जान हम दोनो के पास आज रात ही है. सागर तुमने आज रात मेरे साथ जो करना है वो कर लो. क्योकि मैं कल सुबह ही यहाँ से जाने वाली हू.

ये कहते ही उसने मेरे होंठो को चूसने लग गई. और ज़ोर ज़ोर से मेरे होंठो को अपने होंठो से दबा दबा कर चूस रही थी. उसके बाद मैने भी उसे अपनी बाहों मे अच्छे से पकड़ लिया और खूब अच्छे से उसके बूब्स को मसलने लग गया.

मेरे दोनो हाथ उसके पूरे जिस्म पर घूम रहे थे. मैने महसूस किया की पूनम बहुत गरम हो रही है. इसलिए मैने उसे अपनी गोद मे उठाया और उसे बेड पर गिरा दिया. फिर मैं उसके उपर आया और उसके होंठो और उसकी गर्रदन को चूसने लग गया.

मैने धीरे धीरे उसकी नाइटी उसके जिस्म से अलग कर दी. अब वो मेरे सामने पिंक ब्रा और पिंक पेंटी मे थी. सच मे साली क्या कयामत लग रही थी. उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया.

मैने जल्दी से ही उसकी ब्रा और पेंटी भी जल्दी से उतार दी. अब वो मेरे सामने एक दम नंगी थी. मैने उसके नंगे बूब्स को देख कर पागल हो गया, मैने उसके बूब्स पर टूट पड़ा. फिर मैने उसके बूब्स को चूस्ते हुए उसके चिकने पेट पर आ गया.

मैं उसके पेट को अपनी जीब से चाटता हुआ नीचे उसकी चूत पर आ गया. उसकी चुत मे से पहले से ही रस्स टपक टपक कर नीचे गिर रहा था. मैने अपनी जीब से उसकी चूत को अच्छे से चाट चाट कर सॉफ कर दिया. फिर मैने अपनी जीब उसकी चुत मे डाली और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत को अपनी जीब से ही चोद्ने लग गया.

देखते ही देखते उसने मेरी जीब पर अपनी चूत का पानी एक बार और निकाल दिया. फिर मैने उसकी चूत का सारा पानी पिया और उसकी छूट को चाट चाट कर सॉफ कर दिया. अब मैने महसूस किया की पूनम ने मेरा लंड अपने हाथ मे पकड़ लिया.

मैं खड़ा हुआ और पूनम ने मुझे पूरा नंगा कर दिया. उसने मेरा लंड देखा और वो डर सी गई. पर जब मैने उसे समझाया तो उसने मेरा लंड अपने मूह मे ले लिया. उसे मेरा लंड पसंद आया और वो ज़ोर ज़ोर से मेरे लंड को चूसने लग गई. वो मेरे लंड को अच्छे से चूस रही थी.

फिर मैने उसकी दोनो टाँगे खोली और अपना लंड उसकी चुत पर लगा कर उसकी चूत को अपने लंड से मसलने लग गया. जब वो थोड़ी सी मस्त हुई, तभी मैने अपना लंड उसकी चूत मे डॉल दिया. दर्द के मारे वो चिल्लाने लगी, पर तभी मैने उसके मूह पर अपना हाथ रख दिया.

थोड़ी देर मे वो शांत हुई और मैने फिर एक और धक्के से अपना पूरा लंड उसकी चूत मे उतार दिया. मैने नीचे देखा तो उसकी चुत मे से खून निकल रहा था. जिसे देख कर मैं जोश मे आया और मैने फुल स्पीड मे चुदाई शुरू कर दी. हम दोनो का पानी एक साथ उसकी चूत मे ही निकल गया.

उस रात मैने उसे 4 बजे तक जम कर 4 बार चोदा. फिर अगले दिन वो अपने घर चली गई. उस दिन के बाद हम दोनो दिन रात फोन पर बातें करने लग गये. पर 7 महीने बाद उसका मुझे फोन आया, वो फोन पर रो रही थी.
उसने मुझे खा की उसकी शादी तय हो गई है. मैं बहुत उदास हो गया, मैं उसकी शादी मे गया और उसे अपनी आँखो के सामने किसी और की होते हुए देखा.

पर आज भी मुझे उसकी बहुत याद आती है. आज मैं एक दम अकेला हूँ, मैने अभी तक उससे एक बार भी कॉंटॅक्ट करने की कोशिश न्ही करी. मुझे उमीद है आपको मेरी कहानी पसंद आई होगी.

तो चलिए जल्दी ही मिलता हूँ, अपनी एक और नयी कहानी के साथ. तब तक के लिए गुड बाइ टेक केयर.

ससुर जी बने मेरे बच्चे बाप

हेलो फ्रेंड्स,मेरा नाम शालिनी. मैं 24 साल की हूँ. मैं दिखने मे काफ़ी ज़्यादा सुंदर हूँ. मैं शादी शुदा हूँ. आज मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रही हूँ जो की बहुत ही मस्त है. पर कहानी शुरू करने से पहले मैं आपको अपने बारे मे बताना चाहती हूँ.

तो दोस्तो, मेरा नाम तो आप जान ही गये हो पर अब वैसे थोड़ा मेरे बारे मे भी जान लीजिए.

तो कहानी शुरू करने से पहले मैं आपको बता दू, की मैं शादी से पहले कई लड़को के साथ अफ्फैर कर चुकी हूँ. और कई के साथ तो मैने सेक्स भी किया है. यानी की मैं पहले से ही चुदि हुई थी.

चलो अब मैं आपको कहानी पर ले कर चलती हूँ. मैं शादी ऐसे न्ही करना चाहती थी पर घर वालो की मर्ज़ी से मुझे ऐसे इस लड़के से शादी करनी पड़ी जो की अब मेरा पति है.

चलो जैसे भी करके शादी तो कर ली पर पहले ही रात को मैं इतनी ज़्यादा दुखी हुई जो आज तक कभी न्ही हुई थी. पर उस रात जो मैं चाहती थी वैसा तो बिल्कुल भी न्ही हुआ. बल्कि उस रात तो मुझे ऐसे ही सोना पड़ा. फिर ऐसे ही चलता रहा और मुझे अपने पति का लंड भी पसंद न्ही था.

क्योकि वो छोटा सा था और तो और वो खुद अपना माल निकाल कर सो जाता था जैसे की दूसरे बंदे की तो कोई इछा ही न्ही होती है. बस ऐसे ही फिर चलता रहा. मैं तो बस परेशान रहने लग गई की अब मेरा क्या होगा.

उधर अब सासू मा भी बोलने लग गई थी की अब तो साल होने वाला है तो बच्चे की खुश खबरी भी सुना दो. पर मैं उनसे क्या कहती की आपका बेटा मुझे खुश तो रख न्ही पता तो बच्चा केसे करेगा.

अब जो भी हो बस चले जा रहा था और मैं भी बस ऐसे ही जिंदगी बिताए जा रही थी. फिर एक रात की बात है की वो फुल शराब के नशे मे डूब कर मेरे रूम मे आ गये. उन्होने शराब पी रखी थी जो की उसके मूह से स्मेल आने पर पता चल ही रहा था.

फिर वो रूम मे आ कर मुझे नंगी करके प्यार करने लग गये. तब मुझे लगा की आज ये नशे मे मुझे जम चोदेगे तो चलो अब कुछ मज़ा तो आएगा. और फिर मैं भी खुशी से चुदवाने लग गई.

पर तब वो चोद रहा था और साथ ही साथ मुझे भी मज़ा आ रहा था. उसने मुझे काफ़ी देर तक चोदा और तब मुझे लगा की आज मैं झड़ ने वाली हू.
पर ऐसा कुछ न्ही हुआ और उसने आज भी अपना पानी निकाला और मुझे ऐसे ही छोड़ दिया.

फिर पता न्ही क्यू. मैं उसके बाद सारी पेहेन रही थी और ब्रा डाल ही रही थी की तभी उसने मुझे कमरे मे बाहर निकाल दिया. मैं नंगी ही बाहर सोफे पर आ कर बैठ गई. इस बीच मैं आपको ये तो बताना ही भूल गई की मेरे ससुर फौज से रिटाइर्ड थे तो उस वजह से उनमे काफ़ी हवस थी.

अब जैसा भी था मैं वाहा पर बैठी हुई थी की तभी पापा वाहा पर आ गये. और बोले की तुम यहा क्या कर रही हो. मैं तो तब नंगी थी तो मुझे काफ़ी ज़्यादा शर्म आ रही थी पर तब पापा ने कहा की तुम मेरे रूम मे आ कर सोजाओ.

मैं भी अब उनकी बात मान कर उनके रूम मे चली गई. उस दिन मम्मी जी भी घर पर न्ही थे और मैं तब उनके कमरे मे थी. मैं वाहा जा कर बैठ गई और फिर पापा मेरे पास आ कर बैठ गये और पूछने लग गये

तब मैने उन्हे डरते हुए सब कुछ बता दिया की ऐसे ऐसे हुआ. फिर क्या था पापा ने मेरे कंधे पर हाथ रखा तो मुझ मे काफ़ी हड़बड़ी सी उठी. और फिर उसके बाद मैने खुद पर कंट्रोल करना छोड़ दिया. फिर उसके बाद मैने भी कुछ ना कहा.

और वो मेरे जिस्म को देखते रहे और खुद भी नंगे होते रहे. मैं उन्हे मन्ना तो कर रही थी पर फिर भी मैने ऐसे ही चलने दिया. और फिर वो मुझे अपनी बाहो मे भर कर चाटने लग गये. मैं तो उनके ऐसे करने पर पागल हो रही थी और मुझे आज लग रहा था की आज मैं सही मामले मे मज़े ले सकूँगी.

क्योकि मेरा पति तो है ही ऐसा. फिर उसके बाद वो मेरे बूब्स को चूसने लग गये और मैं पागल होती गई. और फिर ऐसे ही धीरे धीरे वो मेरी चूत को चाटने लग गये और फिर उसके बाद मैं पागल हो गई और मैने कहा की लंड डालो दो


फिर काफ़ी देर तक चुदने के बाद उन्होने मुझे घोड़ी बना दिया और फिर वैसे ही मुझे चोदने लग गये. आज मुझे लग रहा था की आज मैं वो मज़ा ले रही हू जो कब से न्ही ले पा रही थी. और फिर उसके बाद मैने अपना पानी निकाल दिया, और फिर उन्होने करीब 10 मिनिट बाद मेरी चूत मे अपना पानी निकाल दिया. और तब मैने कहा की मुझे प्रेग्नेंट होना है.

और फिर उसके बाद मैने उनसे खूब चुदवाया. और तब मैं सो गई. फिर जब मेरे पीरियड्स रुके तो मैने चेक करा और पता चला की मैं प्रेग्नेंट हो गई हूँ. और फिर उसके बाद तो मैं उनसे डेली चुदने लग गई. मैने कंप्यूटर क्लास भी जोइन कर लिया पर ये तो एक बहाना था. असल मे मैं 2 घंटे के लिए डेली अपने ससुर पास जाती और उनसे चुद कर वापिस आजाती.

तो दोस्तो ऐसे ही 9 महीने हो जाने पर मेरे पास एक लड़का हुआ. और तब मेरा पूरा परिवार बहुत खुश हो गया और साथ मे मैं भी बहुत खुश थी. तो दोस्तो ये थी मेरी कहानी आपको केसी लगी मुझे ज़रूर बताना

हॉस्पिटल मे प्यार मस्ती चुदाई

हेलो फ्रेंड्ज़, मैं विशाल. मेरी उमर 22 साल है. मैं दिखने मे काफ़ी हॅंडसम हूँ. मैं बहुत ही हॅंडसम हूँ इसलिए लड़किया मुझ पर मरती है. मेरा रंग भी काफ़ी गोरा है और मेरी हाइट भी काफ़ी अछी है जिसकी वजह से काफ़ी लड़कियाँ मुझ पर मरती है.

मेरे लंड का साइज़ भी काफ़ी अछा है और वो एक लड़की की चूत को सेट करने के लिए बहुत ही सही है. मैं आज आपके लिए अपनी एक कहानी ले कर आया हूँ. तो अब बिना किसी देरी के मैं आपको अपनी कहानी पर ले कर चलता हूँ.

तो एक टाइम की बात है की मेरी आँखो मे कुछ प्राब्लम हो रही थी. पहले तो मैने ऐसे ही केमिस्ट से आइ ड्रॉप्स ले कर घर पर थोडा ट्रीटमेंट किया. पर मुझे उसमे कुछ फरक नही लगा. तो मैने एक दिन डॉक्टर पास जाने की सोची और सुबह उठ कर डॉक्टर पास चला गया.

मैं जब वाहा पर पहुँचा और वहा से मैने अपना कार्ड बनवाया औड फिर डॉक्टर के कॅबिन के बाहर बैठ गया और इंतेज़ार करने लग गया. कुछ टाइम मैं ऐसे ही बैठा रहा और फिर ऐसे काफ़ी टाइम निकल गया. मुझसे बैठ करनही हो रहा था और पता भी करना था की आख़िरकार कब नंबर आएगा मैने सोचा की पता तो चले की अंदर हो क्या रहा है क्योकि आधे घंटे से ना कोई अंदर जारा था और ना ही कोई आवाज़ लगाई जा रही थी.

बस इतना देखते ही मैं अंदर कॅबिन मे चला गया. वाहा मैं जेसे ही गया तो मैने देखा की वाहा पर एक बहुत ही खूबसूरत लड़की बैठी हुई थी. उसको देख कर मेरा दिल खुश हो गया और फिर उसके बाद मैने ऐसे ही उससे पूछा की डॉक्टर काहा है. तो उन्होने बताया की वो अभी आए नही है इसीलिए कोई आवाज़ नही लगाई जा रही है

उसके मूह से ये सुन कर मैं तो पागल ही हो गया और फिर मैं बाहर आ गया और उसके बाद वाहा बैठ गया जहा से वो मुझे सॉफ सॉफ नज़र आ रही थी. और वो भी बाहर मुझे देख कर स्माइल पास कर र्ही थी. मैं आपको बता दू की उसको पहली नज़र देखते ही उससे प्यार हो गया था.

बस फिर क्या था ऐसे ही बैठे हुए हुमारी आँखे चार होती रही और फिर उसके बाद मैने ऐसे ही उसको इशारा भी किया पर वो चुप रही. फिर उसके बाद डॉक्टर भी आ गये. डॉक्टर के आने के बाद अब नंबर लगना शुरू हो गया और फिर थोड़ी ही देर बाद मेरे नाम ले कर मुझे बुलाया गया.

फिर उसके बाद मैं अंदर गया तो डॉक्टर पास जा कर बैठ गया. और डॉक्टर अब मेरा चेक अप करने लग गये. और वो लड़की भी यही खड़ी थी जिसको मैं अब काफ़ी देर तक ऐसे ही देख रहा था और वो मुझे देख रही थी.

और फिर जब डॉक्टर ने कहा की कुछ डेली चेक अप करवाने होंगे क्योकि उससे ही पता चलेगा की असल मे प्राब्लम क्या है.फिर उसके बाद मैं बाहर आ कर बैठ गया और दूसरे चेक अप का इंतेज़ार करने लग गया.

फिर थोड़ी देर और बैठ कर डॉक्टर ने मुझे बुलाया और कहा की इस लेडी डॉक्टर साथ चले जाओ और वो तुम्हारे चेक अप करलेगी. मैं ये सुन कर काफ़ी खुश हो गया की जो चाहा वही मिला. और मैं उनके साथ उनके पीछे पीछे चला गया.

पहले तो थोड़े से कामन से टेस्ट हुए. और फिर उसके बाद वो मुझे एक रूम मे ले गयी. जहा पर बिल्कुल अंधेरा ही था और वाहा पर मेरा 10 मिनिट का टेस्ट होना था. और फिर जैसे ही हम दोनो उस रूम मे आए तो पता नही कब और कैसे सब 

होता चला गया.

वो लड़की के होंठ मेरे होंठो पर आ गये और मैं उसको चूसने लग गया. और फिर ऐसे ही मैने उसके कपड़े कब उतार दिए मुझे पता ही नही चला. और फिर मैं उसके बूब्स को चूसने लग गया और फिर वो मेरे भी कपड़े उतारने लग गयी और ऐसे ही चलता रहा.

फिर उसके बाद उसने नीचे बैठ कर मेरे लंड को मूह मे ले लिया और चूसना शुरू कर दिया. मुझे उसके ऐसे करने से बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा था. फिर मैने भी उसको वाहा पर स्ट्रेचर पर लेटया और उसकी चूत पर जीब लगा कर चाटने लग गया.

मेरे ऐसे करने से उसकी चुत ने एक बार पानी छोड़ दिया और फिर मैने भी उसकी चुत का सारा का सारा पानी पी लिया. बस फिर उसके बाद तो चूत मे कब लंड गया और कब मैं उसे चोदने लग गया ये मुझे भी पता नही चला.

और फिर ऐसे ही चोदते हुए मैने उसकी चूत मे ही अपना सारा माल निकाल दिया और फिर वो कपड़े पहन कर वहा से चली गयी. उसके जाने के बाद मैने खुद को ठीक किया और मैने देखा की कपड़े पर ब्लड लग गया था पर फिर भी मैने इसे इग्नोर किया और फिर मेरा चेक अप हुआ.

और फिर डॉक्टर को रिपोर्ट्स दिखाई तो डॉक्टर ने थोड़ी सी प्राब्लम ही बताई जो की मेडिसिन लेने पर जल्दी ही ठीक हो जाएगी .मैं ये सुन कर काफ़ी खुश हो गया की चलो कुछ ज़्यादा भी प्राब्लम नही है क्योकि मुझे इसकी टेन्षन भी बहुत हो रही थी.

मैं फिर उसके बाद अपना ध्यान रखने लग गया और उसको याद करने लग गया क्योकि उसने जो किया था वो भी नही जानती थी की वो क्या करना चाहती थी. फिर उसके बाद मैं एक बार फिर से डॉक्टर पास गया पर मुझे वो वाहा पर नही 

भाभी और उनकी छोटी बहन

मेरा नाम अजय. मै अपनी भाभी को रोज़ चोदता था एक बार उनकी बेहेन घर आई और उसे भी मैने ठोक दिया यही मै कहानी मे बताने वाला हू.मैं आपको कहानी पर ले कर चलता हूँ.

मैं और भाभी रूम मे थे. और मैं उनको नंगी करके चोद रहा था. मुझे उनको चोदने ने बहुत मज़ा आ रा था और मैं काफ़ी देर से उन्हे चोदे जा रा था. फिर ऐसे ही मैं लगा हुआ था की तभी दरवाजा पर हल्का सा खड़का हुआ तो मैने देखा की भाभी की छोटी बेहेन हमे देख रही थी.

और फिर उसके बाद वो बाहर आ कर सोफे पर बैठ गई. अब जब हम दोनो भी बाहर आए और तब भाभी ने उससे पूछा की क्या हुआ तब आँचल बोली – आप दोनो ये क्या कर रहे थे.

भाभी – जो मैं तुम्हारे जीजू से न्ही करवा पाती वो ही सब हो रहा था.

आँचल – मैं जीजू को बता दूँगी.

भाभी- ठीक है तुम बता दो और मैं भी सब बता दूँगी.

भाभी की ये बात सुन कर वो घबरा गई की आख़िरकार ऐसी कोन सी बात है जो इनको पता चली है.

भाभी – मुझे पता है की तुम डेली अपनी पूसी को रब्ब करती हो और तो और उंगली भी डालती हो .

ये सब बाते सुन कर वो चुप रह गई और कहने लग गई की अछा बता दो , मुझे क्या करना होगा.

भाभी- तुम्हे कुछ नही करना है. बस तुम ये बता दो की तुम्हारा मन करता है चुदने का .

आँचल- हाँ दीदी करता तो बहुत है पर किससे चुदु मुझे ये समझ न्ही आता है.

भाभी – तो आज तुम चुद ही जाओगी.

आँचल- वो केसे.

भाभी- तुम्हे मेरा फ्रेंड चोदेगा.

आँचल- ये करेंगे.

मैं तो मन ही मन खुश हो रहा था की चलो अब आज दो दो की चूत को चोदने का मौका मिलेगा और एक तो फ्रेश पीस ही मिलेगी

अब मैने भाभी को देखा और वो भी मुझे करने के लिए कह रही थी. तो मैने भी कोई ना न्ही करी और ऐसे ही बाते सुनता रहा.

और फिर उसके बाद भाभी ने उसकी पेंट को उतरा तो मैं तो बस देखता ही रह गया. उसकी पेंटी पूरी गीली हो रखी थी और तो और फिर भाभी भी उसकी पूसी को रब करने लग गई. ये देख कर मैने भी उसके टफ बूब्स को अपने हाथो मे ले लिया और दबाने लग गया.

मुझे तो ऐसे बहुत मज़ा आ रहा था और फिर उसके बाद भाभी ने उसको पूरा नंगा कर दिया. मैं उसका नंगा जिस्म देख कर पागल ही हो गया.उसका क्या मस्त जिस्म था उसको देख कर मेरा मन कर रहा था की अभी के अभी इसको पकड़ कर चोद डालु.

फिर उसके बाद भाभी मुझे कहने लग गई की अब शुरू होज़ा. तो मैने उनकी बात को सुना और फिर उसके बाद अपने लंड को हाथो मे ले लिया. मेरा लंड देख कर आँचल थोड़ा घबरा गई और फिर मैने उसे ये चूसने को कहा तो उसने मुझसे कहा की मैं इसे न्ही चुसूगी.

तब भाभी ने उससे कहा की अगर तुम इसे न्ही चुसोगी तो ये खड़ा न्ही हो पाएगा और फिर तुम्हे चोदेगा कैसे. फिर उसके बाद उसने बात मान ली और मेरे लंड को चूसने लग गई. मुझे लंड को चुसवाने मे बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा था.

फिर उसके बाद मैने उसको लंबा लेटा दिया औड उसके बूब्स को चूसने लग गया. मै भी पागल हो रहा था और ऐसे ही भाभी ने उसके मूह पर अपनी चूत रख दी और फिर ऐसे ही मैने भी उसको और गरम करना शुरू कर दिया.

फिर भाभी ने कहा की अब जो करना है जल्दी से कर लो कही और कोई आ ना जाए. तो मैं ये बात सुन कर अपने लंड को हाथ मे ले कर मसलने लग गया. फिर भाभी ने उसकी चूत के नीचे पिल्लो रखा और फिर मैने उसकी चूत पर लंड को सेट किया

लंड सेट करने के बाद मैने हल्का सा धक्का लगाया तो वो अंदर न्ही गया. तब मैने भाभी से कहा की अंदर न्ही जा रहा है तो भाभी उठ कर रूम मे से क्रीम ले कर आई और उसने थोड़ी मेरे लंड पर लगाई और कुछ उसकी पूसी पर रब करी.

अब उसके ऐसे करने के बाद मैने भी उसकी चूत पर अपना लंड रखा और फिर उसके बाद हल्का सा धक्का दिया तो वो हल्का सा ही अंदर चला गया. हल्का सा अंदर जाते ही भाभी ने उसके मूह पर अपना हाथ रख दिया और वो रोने लग गई.

फिर मैने ज़्यादा देर ना करते हुए एक ज़ोर का धक्का दिया तो वो ज़ोर से चिल्लाई पर उसकी आवाज़ बाहर न्ही आ सकी. और फिर उसके बाद मैने उसको ऐसे ही चोदना शुरू कर दिया. मुझे उसको चोदने मे बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा था और मैं उसे काफ़ी देर तक ऐसे ही चोदता रहा और बस चोदता ही रहा.

फिर उसके बाद मैने उसके बूब्स को पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया. उसकी चूत मे पूरा का पूरा लंड जा चुका था और फिर मैं भी ऐसे ही ज़ोर ज़ोर से लगा हुआ था. फिर उसके बाद मैने उसकी चूत मे ही सारा माल डालने को कहा पर भाभी ने काहा की सारा का सारा माल बाहर निकलेगा.

तो मैने उनकी बात को मानते हुए अपने लंड को चूत से निकाला और जेसे ही निकाला तो मैने उसके मूह मे डाल दिया. और जैसे ही उसके मूह मे लंड गया तो मैने सारा का सारा माल उसके मूह मे निकाल दिया और वो भी मज़े से पी गई

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मैं ये देख कर बहुत खुश हो गया और उसे भी मेरा पानी भी बहुत ही ज़्यादा टेस्टी भी लगा था. और फिर ऐसे ही काफ़ी देर तक लंड उसकी मूह मे रहा और फिर ऐसे ही काफ़ी देर तक वो चुस्ती रही.

और फिर मैने दोनो बहनो को एक साथ भी ज़रूर चोदा और खूब मज़ा भी लिया.

कहानी पढ़ कर जरूर बताइए की कैसी लगी क्योकि मुझे आपके कॉमेंट का इंतेज़ार रहेगा. और आगे फिर कभी किसी और कहानी के साथ मिलुगा.

पड़ोसन नेहा आंटी के साथ चुदाई

मेरे प्यारे दोस्तो को मेरे यानी नमन की तरफ से मेरे लंड का सलाम. मुझे उमीद है, की आप सब एक दम मस्त और ठीक होंगे. आपका लंड हर रोज चुत की गहराइयो को नापता र्ही होगा.

साथ ही मेरी सभी प्यारी फीमेल फ्रेंड्स भी अपनी चुत को खूब टाँगे उठवा कर चुदा रही होंगी. मैं भगवान से ये ही दुआ करता हूँ, की हर लंड को इतना दम दे की वो जिस चूत मे जाए, उसकी इच्छा पूरी करा कर ही बाहर आए.

मैं नमन दिल्ली से आज अपनी पहली कहानी आप सब के लिए ले कर आया हूँ. मुझे उमीद है, आपको मेरी ये कहानी पसंद आएगी. ये कहानी मेरे पहले सेक्स की है. जो मेरे पहले प्यार नेहा आंटी के साथ मेरे पहले सेक्स की है.

दोस्तो, आपको पता तो है की हम दिल्ली के लड़के कितने कमिने होते है. हम रात को अपने बाप को अपनी मा न्ही चोदने देते, क्योकि हम नही चाहते हमारा एक और हिसेदार इस दुनिया मे आए. मैं शुरू से एक नंबर का मूठ बाज़्ज़ हूँ.

मैं जब आठवी क्लास मे था, तब से मैने मूठ मारनी शुरू कर दी थी. मैं चूत की तलाश मे कुत्ते की तरह इधर उधर भटकता था. पर चुत कहते है, ना किस्मत वालो को ही मिलती है. मैं बचपन से ही नेहा आंटी को देख कर बड़ा हुआ हूँ.

नेहा आंटी मेरे पड़ोस मे रहती है. वो बहोट खूबसूरत औरत है, उसकी उमर उस टाइम 30 साल के करीब थी. पर वो दिखने मे 22 साल की लगती थी. उसके पति एलेक्षन डेपारमेंट मे जॉब करते थे. आंटी के पास एक बेटी थी, पर वो भी उन्होने होस्टेल मे भेज रखी थी.

क्योकि दिल्‍ली का महॉल बहुत खराब है, शायद इस लिए. अंकल एक नंबर के शराबी आदमी है. वो साला एक नंबर का चूतिया आदमी है. मुझे तो समझ नही आता था, उस चूतिया आदमी से आंटी ने केसे शादी कर ली थी.

मैं नेहा आंटी को बहुत पसंद करता था. सच कहूँ तो मैने अपनी लाइफ की पहली मूठ आंटी के नाम पर ही मारी थी. और तो और मेरा लंड आंटी को देख कर ही खड़ा होना सीखा था.

आंटी का रंग एक दम दूध जैसा , हाइट 5’2 इंच. जबरदस्त फिगर 34-30-38. मैं उन्नकी कमर और गांद का दीवाना था. आंटी जब भी सामने आती थी, तो मेरा मन उनकी चिकनी कमर को चाटने को करने लगता था. मुझे उनसे प्यार हो गया था. मैं लाइफ मे एक बार उनके साथ सेक्स करना चाहता था.

मुझे ये मोका ना जाने कब मिलना था, क्योकि अब मैं 18 साल का हो चुका था. मेरा लंड भी अब 7 इंच का हो गया था. एक रात मैं सो रा था, तो मुझे आंटी के चिल्लाने की आवाज़ें आई. मैं उठा और देखा तो अंकल आंटी को ज़ोर ज़ोर से मार रहे थे और उनको गाल्लिया निकाल रहे थे.

उस टाइम मुझे गुस्सा तो बहुत आया, पर मैं कर भी क्या सकता था. फिर अगले दिन मैं 11 बजे आंटी के घर गया. मैं बिना डोर बेल बजाए ही चला जाता था. उस दिन भी मैं ऐसे ही अंदर चला गया, मैने देखा की आंटी कही दिख नही रही है.

फिर मैं बेडरूम मे गया, तो मैने देखा की आंटी आँखें बंद करके बेड पर लेटी हुई थी. उनका कुर्ता उनके पेट तक उठा हुआ था. मैने देखा की उनकी कमर पर बेल्ट के निशान थे. मैने बड़े ध्यान से देखा और मुझे उस चूतिया अंकल पर बहुत गुस्सा आया. इतने मे आंटी उठ गयी और मुझे देख वो डर गयी और बोली.

आंटी – अरे नमन तू कब आया .

मैं – बस अभी आया हूँ, पर आपका ये क्या हाल हुआ है.

ये सुनते ही उन्होने अपना कुर्ता नीचे कर लिया, और बोली – अरे ये तो कुछ नही है, ऐसे ही बचपन के निशान है.

मैं – आंटी मैं 5 साल का बचा न्ही हूँ. ये निशान बेल्ट से मारने के है.

ये सुनते ही आंटी खड़ी हुई और मुझे अपने गले से लगा लिया. वो ज़ोर ज़ोर से रोने लग गयी. मैने कभी नही सोचा था, की आंटी इस तरह मेरे गले लग जाएगी. मैने आंटी को समझाया और उन्हे बेड पर अपने साथ बिठाया और बोला.

मैं – देखो आंटी मुझे पता है की रात को यहाँ क्या हुआ था. पर आप क्या मुझे बता सकती हो, की ये क्यू डेली होता है.

आंटी – नही मैं तुम्हे ये बात नही बता सकती.

मैं – देखिए आंटी आपको ये बताना ही होगा, वरना मैं यहाँ से चल्ला.

आंटी – तुम 18 के हो गये हो ना ?

मैं – हा.

आंटी – तो सुनो बात ये है की, तुम्हारे अंकल से सेक्स नही होता. और रोज दारू पी कर आते है. और जब सेक्स करते है तो खुद दो 2 मिनिट मे फ्री हो जाते है. पर मेरा काम नही होता, जब मैं उन्हे ये कहती हूँ तो वो मुझे मारने लग जाते है.

मैं – अछा तो ये बात है.

मैने थोड़ी देर सोचा और बोला – आंटी क्या मैं इसमे आपकी हेल्प कर सकता हूँ ?

आंटी – तुम क्या मेरी हेल्प करोगे, तुम अभी छोटे हो.

मैं बेड पे खड़ा हुआ और अपनी पेंट नीचे करके अपना 7 इंच का लंड बाहर निकाल कर बोला – देखो आंटी इससे आपका काम बन जाएगा, क्योकि अगर आप खुश रहोगी. तो आप अंकल से बोलेंगी नही और वो आपको मरेगा नही.

आंटी – हाए राम इतना बड़ा लंड, वो भी इतनी सी उमर मे ?

मैं – क्यो अंकल का छोटा है क्या ?

आंटी – छोटा नही बहुत छोटा है.

मैं – तो आपका काम इससे बन जाएगा ?

आंटी खड़ी हुई और मुझे अपने गले से लगा कर रोने लग गयी. मैने उनका चेहरा पकड़ा और उनके आँसू सॉफ करके उनके होंठो को चूसने लग गया. आंटी ने रोका और बोली.

आंटी – रूको प्लीज़ पहले मैं दरवाजा बंद कर देती हूँ.

आंटी ने जल्दी से दरवाजा बंद किया और फिर मेरे पास आकर मुझसे लिपट गायी. फिर मैने उनके होंठो को अपने होंठो मे भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गया. आंटी के होंठो मे रस भरा हुआ था, जिसे मैं ज़ोर ज़ोर से चूस रहा था. उसके बाद मैने आंटी ने एक दूसरे के कपड़े निकाल दिए.

हम दोनो पूरी तरह से नंगे हो गये. आंटी का गोरा बदन सच मे बहुत सेक्सी था, आंटी का हाथ मेरे लंड पर था. और मेरे दोनो हाथ उनके बूब्स पर थे. हम दोनो एक दूसरे के जिस्म को मसल्ने मे लगे हुए थे, मुझे आंटी के जिस्म की गर्मी महसूस हो रही थी.

फिर आंटी अचानक से नीचे बैठ गयी, और मेरे लंड पर अपनी जीब चलाने लग गयी. ये देख कर मैं काफ़ी खुश हो गया, फिर धीरे धीरे आंटी ने मेरा लंड अपने मूह मे ही भर लिया. और देखते ही देखते आंटी ने मेरे लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गयी. मैं उस टाइम जन्नत मे चला गया था.

करीब 10 मिनिट की लंड चूसने के बाद आंटी बेड के किनारे पर अपनी टाँगे खोल कर लेट गयी. मैं उनका इशारा समझ गया, मैं नीचे बैठ कर उनकी चुत को चूसने लग गया. उनकी चुत मे से पहले से ही पानी बाहर आ रा था. जिसे मैं छत छत कर पी रहा था

तभी अचानक ना जाने आंटी को क्या हुआ, उन्होने मेरा सिर कस्स कर पकड़ कर अपनी चुत मे दबा लिया. और फिर अपनी दोनो टाँगो से मुझे अपनी चूत पर लॉक भी कर लिया. तभी अचानक मेरे मूह पर पानी की जोरदार पिचकारी पड़ी, पहले मुझे लगा की आंटी ने मेरे मूह पर ही मूत दिया है.

पर वो मूत नही सालो का इकट्ठा किया हुआ पानी था, उसका टेस्ट मीठा था. मैं सारा पानी छत छत कर पी गया. फिर आंटी खड़ी हुई और मेरे भीगे हुए चेहरे को वो चाटने लग गयी, और बोली.

आंटी – तुम बहुत कमाल की चूत चाटते हो. अब ज़रा धीरे धीरे चूत मे लंड डालना, तुम्हारा लंड पहले से ही काफ़ी बड़ा है.

मैं – तुम फिकर मत करो मेरी जान.

फिर क्या था, आंटी ने खुद ही अपने हाथ मे मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत के मूह पर सेट कर दिया. मैने तभी एक जोरदार धका मारा, और उनकी चूत मे अपना आधा लंड डाल दिया. आंटी ज़ोर से चिलाते हुए बोली.

आंटी – हाए मम्मी आह, कुत्ते कहा था ना आराम से डाल.

तभी मैने एक और जोरदार धक्के से अपना पूरा लंड उनकी चूत की गहराई मे डाल दिया. उसके बाद क्या हुआ वो पूछो मत, क्योकि आंटी मेरे नीचे दर्द के मारे तड़पने लग गयी. उनके नाख़ून मेरी कमर मे गॅड गये.

मैने उनके बूब्स के निपल्लो को चूसना शुरू करदिया, तब जा कर उनकी चूत का दर्द शांत हुआ. फिर मैने ज़ोर ज़ोर से उनकी चुदाई करना शुरू कर दिया. करीब 5 मिनिट बाद आंटी की चूत का पानी निकल गया.

पर मैने 15 मिनिट बाद अपने लंड का पानी उनकी चूत मे निकाला. फिर हम दोनो 20 मिनिट तक ऐसे ही एक दूसरे के उपरनीचे सोते रहे. उसके बाद हम दोनो एक साथ बाथरूम मे नहाए.

नहाते हुए मेरा दिल उनकी टाइट .गांद पर आ गया, मैने उनकी गांद मारने की ज़िद करी और फिर मैने उनकी गांद भी मारी. आंटी मुझसे बहुत खुश हो गयी, और अब मैं उनका दूसरा पति बन कर उनके घर पर जाता हूँ.

मुझे उमीद है, आपको मेरी आज की कहानी पसंद आई होगी.

जीजू का बड़ा लंड

दीदी घोड़ी बनी हुई थी और जीजू पीछे से उसकी गाँड चोद रहे थे। मुझे सिरहन सी उठने लगी। जीजू ने अब दीदी के बोबे मसलने चालू कर दिये थे… मेरे हाथ स्वत: ही मेरे स्तनों पर आ गये… मेरे चेहरे पर पसीना आने लगा… जीजू को दीदी की चुदाई करते पहली बार देखा तो मेरी चूत भी गीली होने लगी थी। इतने में जीजू झड़ने लगे… उसके वीर्य की पिचकारी दीदी के सुन्दर गोल गोल चूतड़ों पर पड़ रही थी…मैं दबे पाँव वहाँ से हट गई और नीचे की सीढ़ियां उतर गई। मेरी साँसें चढ़ी हुई थीं। धड़कनें भी बढ़ी हुई थीं। दिल के धड़कने की आवाज़ कानों तक आ रही थी।मैं बिस्तर पर आकर लेट गई… पर नींद ही नही आ रही थी। मुझे रह-रह कर चुदाई के सीन याद आ रहे थे। मैं बेचैन हो उठी और अपनी चूत में ऊँगली घुसा दी… और ज़ोर-ज़ोर से अन्दर घुमाने लगी। कुछ ही देर में मैं झड़ गई।

दिल कुछ शान्त हुआ। सुबह मैं उठी तो जीजू दरवाजा खटखटा रहे थे। मैं तुरन्त उठी और कहा,” दरवाजा खुला है…।” जीजू चाय ले कर अन्दर आ गये। उनके हाथ में दो प्याले थे। वो वहीं कुर्सी खींच कर बैठ गये। “मजा आया क्या…?” मैं उछल पड़ी… क्या जीजू ने कल रात को देख लिया था “जी क्या… किसमें… मैं समझी नहीं…?” मैं घबरा गई “वो बाद में… आज तुम्हारी दीदी को दो दिन के लिए भोपाल हेड-क्वार्टर जाना है… अब आपको घर सँभालना है…” “हम लड़कियाँ यही तो करती हैं ना… फिर और क्या-क्या सँभालना पड़ेगा…?” मैंने जीजू पर कटाक्ष किया। “बस यही है और मैं हूँ… सँभाल लेगी क्या…?” जीजू भी दुहरी मार वाला मज़ाक कर रहे थे

“जीजू… मजाक अच्छा करते हो…!” मैंने अपनी चाय पी कर प्याला मेज़ पर रख दिया। मैंने उठने के लिए बिस्तर पर से जैसे ही पाँव उठाए, मेरी स्कर्ट ऊपर उठ गई और मेरी नंगी चूत उन्हें नज़र आ गई। मैंने जान-बूझ कर जीजू को एक झटका दे दिया। मुझे लगा कि आज ही इसकी ज़रूरत है। जीजू एकटक मुझे देखने लगे… मुझे एक नज़र में पता चल गया कि मेरा जादू चल गया। मैंने कहा,”जीजू… मुझे ऐसे क्या देख रहे हो…;“कुछ नही… सवेरे-सवेरे अच्छी चीजों के दर्शन करना शुभ होता है…!” मैन तुरंत जीजू का इशारा समझ गई… और मन ही मन मुस्कुरा उठी।;“आपने सवेरे-सवेरे किसके दर्शन किये थे?” मैंने अंजान बनते हुए पूछा… लगा कि थोड़ी कोशिश से काम बन जायेगा। पर मुझे क्या पता था कि कोशिश तो जीजू खुद ही कर रहे थे।दीदी दफ्तर से आकर दौरे पर जाने की तैयारी करने लगी… डिनर जल्दी ही कर लिया… फिर जीजू दीदी को छोड़ने स्टेशन चले गये। मैंने अपनी टाईट जीन्स पहन ली और मेक अप कर लिया। जीजू के आते ही मैंने झील के किनारे घूमने की फ़रमाईश कर दी। वो फ़िर से कार में बैठ गये… मैं भी उनके साथ वाली सीट पर बैठ गई। जीजू मेरे साथ बहुत खुश लग रहे थे। कार उन्होंने उसी दुकान पर रोकी, जहाँ हम रोज़ कोल्ड-ड्रिंक लेते थे। आज कोल्ड-ड्रिंक जीजू ने कार में ही मंगा ली। “हाँ तो मैं कह रहा था कि मजा आया था क्या?” मुझे अब तो यकीन हो गया था कि जीजू ने मुझे रात को देख लिया था। “हां… मुझे बहुत मज़ा आया था…” मैंने प्रतिक्रिया जानने के लिए तीर मारा… जीजू ने तिरछी निगाहों से देखा… और हँस पड़े – “अच्छा… फिर क्या किया…“आप बताओ कि अच्छा लगने के बाद क्या करते हैं…” जीजू का हाथ धीरे धीरे सरकता हुआ मेरे हाथों पर आ गया। मैंने कुछ नही कहा… लगा कि बात बन रही है। “मैं बताऊँगा तो कहोगी कि अच्छा लगने के बाद आईस-क्रीम खाते हैं…” और हँस पड़े और मेरा हाथ पकड़ लिया। मैं जीजू को तिरछी नजरों से घूरती रही कि ये आगे क्या करेंगे। मैंने भी हाथ दबा कर इज़हार का इशारा किया।हम दोनों मुस्कुरा पड़े। आँखों आँखों में हम दोनों सब समझ गये थे… पर एक झिझक अभी बाकी थी। हम घर वापस आ गये।&>जीजू अपने कमरे में जा चुके थे… मैं निराश हो गई… सब मज़ाक में ही रह गया। मैं अनमने मन से बिस्तर पर लेट गई। रोज की तरह आज भी मैंने बिना पैन्टी के एक छोटी सी स्कर्ट पहन रखी थी… मैंने करवट ली और पता नही कब नींद आ गई… रात को अचानक मेरी नींद खुल गई… जीजू हौले से मेरे बोबे सहला रहे थे… मैं रोमांचित हो उठी… मन ने कहा… हाय! काम अपने आप ही बन गया… मैं चुपचाप अनजान बन कर लेटी रही… जीजू ने मेरी स्कर्ट ऊंची कर दी और नीचे से नंगी कर दिया। पंखे की हवा मेरे चूतड़ों पर लग रही थी। जीजू के हाथ मेरे चिकने चूतड़ों पर फ़िसलने लगे… जीजू धीरे से मेरी पीठ से चिपक कर लेट गये… उनका लण्ड खड़ा था… उसका स्पर्श मेरी चूतड़ों की दरार पर लग रहा था… उसके सुपाड़े का चिकनापन मुझे बड़ा प्यारा लग रहा था। उसने मेरे बोबे जोर से पकड़ लिए और लण्ड मेरी गाँड पर दबा दिया। मैंने लण्ड को गाँड ढीली कर के रास्ता दे दिया… और सुपाड़ा एक झटके में छेद के अन्दर था।
जीजू… हाय रे… मार दी ना… मेरी पिछाड़ी को…” मेरे मुख से सिसकारी निकल पड़ी। उसका लण्ड गाँड़ की गहराईयों में मेरी सिसकारियों के साथ उतरता ही जा रहा था। “रीता… जो बात तुझमें है… तेरी दीदी में नहीं है…” जीजू ने आह भरते हुए कहा। लण्ड एक बार बाहर निकल कर फिर से अन्दर घुसा जा रहा था। हल्का सा दर्द हो रहा था। पर पहले भी मैं गाँड चुदवा चुकी थी। अब जीजू ने अपनी ऊँगली मेरी चूत में घुसा दी थी… और दाने के साथ मेरी चूत को भी मसल रहे थे… मैं आनन्द से सराबोर हो गई। मेरी मन की इच्छा पूरी हो रही थी… जीजू पर दिल था… और मुझे अब जीजू ही चोद रहे थे। “मत बोलो जीजू बस चोदे जाओ… हाय कितना चिकना सुपाड़ा है… चोद दो आपकी साली की गाँड को…” मैं बेशर्मी पर उतर आई थी…उसका मोटा लण्ड तेजी से मेरी गाँड में उतराता जा रहा था… अब जीजू ने बिना लण्ड बाहर निकाले मुझे उल्टी लेटा कर मेरी भारी चूतड़ों पर सवार हो गये। और हाथों के बल पर शरीर को ऊँचा उठा लिया और अपना लण्ड मेरी गाँड पर तेजी से मारने लगे… उनका ये फ्री-स्टाईल चोदना मुझे बहुत भाया। राजू… मेरी चूत का भी तो ख्याल करो… या बस मेरी गाँड ही मारोगे…” मैंने जीजू को घर के नाम से बुलाया। “रीता… मेरी तो शुरू से ही तुम्हारी गाँड पर नजर थी… इतनी प्यारी गाँड… उभरी हुई और इतनी गहरी… हाय मेरी जान…”जीजू ने लण्ड बाहर निकाल लिया और चूत को अपना निशाना बनाया… “जान… चूत तैयार है ना… लो… ये गया… हाय इतनी चिकनी और गीली…” और उसका लण्ड पीछे से ही मेरी चूत में घुस पड़ा… एक तेज मीठी सी टीस चूत में उठी… चूत की दीवारों पर रगड़ से मेरे मुख से आनन्द की सीत्कार निकल गई “हाय रे… जीजू मर गई… मज़ा आ गया… और करो…।” जीजू का लण्ड गाँड मारने से बहुत ही कड़ा हो रहा था… जीजू के चूतड़ खूब उछल-उछल कर मेरी चूत चोद रहे थे। मेरी चूचियाँ भी बहुत कठोर हो गईं थीं।मैंने जीजू से कहा,”जीजू… मेरी चूचियाँ जोर से मसलो ना… खींच डालो…!” जीजू तो चूचियाँ पहले से ही पकड़े हुए थे… पर हौले-हौले से दबा रहे थे… मेरे कहते ही उन्हें तो मज़ा आ गया… जीजू ने मेरी दोनो चूचियाँ मसल के, रगड़ के चोदना शुरू कर दिया। मेरी दोनों चूतड़ों की गोलाईयाँ उसके पेडू से टकरा रहीं थीं… लण्ड चूत में गहराई तक जा रहा था… घोड़े की तरह उसके चूतड़ धक्के मार-मार कर मुझे चोद रहे थे।मेरे पूरे बदन में मीठी-मीठी लहरें उठ रहीं थीं… मैं अपनी आँखों को बन्द करके चुदाई का भरपूर आनन्द ले रही थी। मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी… जीजू के भी चोदने से लग रहा था कि मंज़िल अब दूर नहीं है। उसकी तेजी और आहें तेज होती जा रही थी… उसने मेरी चूचक जोर से खींचने चालू कर दिये थे… मैं भी अब चरमसीमा पर पहुँच रही थी। मेरी चूत ने जवाब देना शुरू कर दिया था… मेरे शरीर में रह-रह कर झड़ने जैसी मिठास आने लगी थी। अब मैं अपने आप को रोक ना सकी और अपनी चूत और ऊपर दी… बस उसके दो भरपूर लण्ड के झटके पड़े कि चूत बोल उठी कि बस बस… हो गया।“जीजूऽऽऽऽऽ बस…बस… मेरा माल निकला… मै गई… आऽऽऽऽऽऽईऽऽऽऽऽअऽअऽऽऽआ…” मैंने ज़ोर लगा कर अपनी चूचियाँ उससे छुड़ा ली… और बिस्तर पर अपना सर रख लिया… और झड़ने का मज़ा लेने लगी… उसका लण्ड भी आखिरी झटके लगा रहा था। फिर…… आह्… उसका कसाव मेरे शरीर पर बढ़ता गया और उन्होंने अपना लण्ड बाहर खींच लिया। झड़ने के बाद मुझे चोट लगने लगी थी… थोड़ी राहत मिली… अचानक मेरे चूतड़ और मेरी पीठ उसके लण्ड की फ़ुहारों से भीग उठी… जीजू झड़ने लगे थे… रह-रह कर कभी पीठ पर वीर्य की पिचकारी पड़ रही थी और अब मेरे चूतड़ों पर पड़ रही थी। जीजू लण्ड को मसल-मसल कर अपना पूरा वीर्य निकाल रहे थे।जब पूरा वीर्य निकल गया तो जीजू ने पास पड़ा तौलिया उठाया और मेरी पीठ को पौंछने लगे…”रीता… तुमने तो आज मुझे मस्त कर दिया” जीजू ने मेरे चेहरे को किस करते हुए कहा… मैं चुदने की खुशी में कुछ नहीं बोली… पर धन्यवाद के रूप में उन्हें फिर से बिस्तर पर खींच लिया… मुझे अभी और चुदना था… इतनी जल्दी कैसे छोड़ देती… दो तीन दौर तो पूरा करती… सो जीजू के ऊपर चढ़ गई… जीजू को लगा कि पूरी रात मज़े करेंगे… जीजू अपना प्यार का इकरार करने लगे… “मेरी रानी… तुम प्यारी हो… मैं तो तुम पर मर मिटा हूँ… जी भर कर चुदवा लो… अब तो मैं तुम्हारा ही हूँ…” और दुगुने जोश से उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में कस लिया… मैं आज तो रात-भर स्वर्ग की सैर करने वाली थी…