बड़े चूचों वाली स्टूडेंट की चुदाई

मेरा नाम सन्दीप सिंह है. मैं भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले का रहने वाला हूं। मेरी हाइट करीब 5.7 फीट है। मैं सदैव व्यायाम करता हूं। जिससे मेरा शरीर बिल्कुल फिट है। मेरे लंड का साईज करीब 7 इंच लम्बा और करीब 2.5 इंच मोटा है। हमारी ज्वाइंट फैमिली है.

मैं सन् 2012 से ही इस साइट का नियमित पाठक हूं। अन्तर्वसना के बारे में मुझे तब पता चला जब मैं ट्रेनिंग ले रहा था। ट्रेनिंग के दौरान मेरी मुलाकत एक व्यक्ति से हुई जो हमारे साथ ही ट्रेनिंग ले रहा था। वह राजस्थान के किसी जिले का रहने वाला था। आज मैं सेंट्रल गवर्नमेंट में एम्प्लोई हूं और अच्छी पोस्ट पर काम कर रहा हूं.

यूं तो मेरी जिन्दगी में बहुत से ऐसे वाकये हुए हैं जो मैं आप लोगों के साथ साझा करना चाहता हूँ लेकिन शुरूआत सबसे दिलचस्प किस्से के साथ करते हैं. यह किस्सा उस वक्त का है जब मैं इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी होने के बाद कॉलेज में गया था. चूंकि मैं अपनी कॉलेज की फीस और पढ़ाई का खर्च खुद ही उठाना चाहता था इसलिए मैंने एक स्कूल में टीचर की जॉब भी कर ली थी.

वह स्कूल बाहरवीं कक्षा तक था, मगर मुझे पढ़ाने के लिए नवीं और दसवीं कक्षाएं दी गईं. मुझे स्कूल में गणित और विज्ञान पढ़ाना था. शुरूआत में तो बड़ा ही अजीब लगता था और शर्म-सी भी आती थी. इसलिए मैं थोड़ा घबराता था. क्लास खत्म होने के बाद मैं ऑफिस में आकर बैठ जाता था.

स्कूल में हफ्ता भर आराम से निकल जाता था. फिर वीकेंड पर मेरी कॉलेज की क्लास होती थी. इस तरह से मैं काफी व्यस्त रहने लगा था. समय जल्दी से निकल रहा था और कब मुझे स्कूल में पढ़ाते हुए दो महीने बीत गये, कुछ पता ही नहीं चला.

तीन महीने बाद सर्दियां शुरू हो गईं. मीठी-मीठी ठंड लगने लगी थी. सुबह-शाम स्वेटर पहनना पड़ता था. मगर दिन में गर्मी लगती थी तो उसको निकालने का दिल भी कर जाता था.

स्कूल में एक लड़की थी जिसका नाम प्रिया था. वह अक्सर मेरी तरफ देखती रहती थी मगर मैंने कभी उस पर ध्यान नहीं दिया था. चूंकि मैं देखने में अच्छा था और मेरी बॉडी भी काफी फिट थी इसलिए लड़कियां जल्दी ही मुझे पसंद कर लेती थीं.

मगर प्रिया में मेरी कोई रूचि नहीं थी. उसकी फीगर तो अच्छी थी लेकिन वह देखने में अच्छी नहीं लगती थी. मैंने धीरे-धीरे उसकी तरफ ध्यान देना शुरू किया. वह मुझसे बात करने के बहाने खोजती रहती थी. कभी साइंस का कोई सवाल लेकर आ जाती थी तो कभी मैथ्स का. कई बार तो वो एक ही सवाल को दो बार ले आती थी जिससे मुझे उसकी चोरी के बारे में पता लगने लगा था कि यह जान-बूझकर ऐसा करती है. मगर फिर भी मैं उसकी तरफ कोई ऐसा भाव नहीं रखता था जिससे उसको लगे कि मैं भी उसमें रूचि रखता हूं.

उसने मुझ पर लाइन मारने की बहुत कोशिश की लेकिन मैं उसको इग्नोर कर देता था. ऐसा भी नहीं था कि मुझे लड़कियों में कोई रूचि ही नहीं थी मगर प्रिया जैसी लड़कियों की तरफ मैं कम ही ध्यान देता था.

फिर एक दिन प्रिया स्कूल के लॉन में बैठी हुई लंच कर रही थी. मैं भी स्टाफ रूम से लंच करके बाहर पानी की टंकी के पास हाथ धोने के लिए जा रहा था.
मेरी नजर प्रिया पर पड़ गई. उसके साथ दो-तीन लड़कियां और भी बैठी हुई थीं. वे सब की सब आपस में खिल-खिलाकर हंस रही थी. मेरा ध्यान उनकी तरफ गया. मैंने देखा कि एक लड़की उनमें बहुत खूबसूरत थी. उसको देख कर ऐसा लग रहा था जैसे खेत में खरपतवार के बीच में कोई सूरजमुखी का फूल खिला हुआ है. हंसती हुई बहुत ही प्यारी लग रही थी.

नजर उसकी छाती पर गई तो आसमानी रंग के नीले सूट में उसकी चूचिचों के उभार भी काफी सुडौल व गोल लग रहे थे. उन पर उसने सफेद रंग का दुपट्टा डाला हुआ था जो उसके गले पर वी-शेप बनाता हुआ उसके चूचों पर होता हुआ नीचे की तरफ नुकीला होकर उसके पेट तक पहुंच रहा था. रेशमी से बाल थे उसके जो धूप में चमक रहे थे. लाल होंठ और गोरे गाल. एक बार उस पर नजर गई तो बार-बार जाने लगी.

उस दिन पहली बार मुझे स्कूल में कोई लड़की पसंद आई थी और मेरे मन में कुछ-कुछ होने लगा था. मगर मैं टीचर था इसलिए इस तरह की बातें नहीं कर सकता था. उस दिन मैं हाथ धोकर वापस आकर स्टाफ रूम में आ बैठा.

अगले दिन लंच के टाइम में फिर प्रिया के साथ मैंने उसी लड़की को बैठे हुए देखा. अब प्रिया मुझे काम की स्टूडेंट लगने लगी थी. मगर अभी तक ये पता नहीं था कि प्रिया की उस लड़की से बात होती है या नहीं. अगर होती है तो वो दोनों कितनी अच्छी दोस्त हैं इस बारे में मुझे कुछ खास अंदाजा नहीं था.

मगर उस दिन के बाद से लंच के समय मैं जान-बूझकर बाहर निकलता था. हफ्ते भर में मुझे पता लग गया कि वो प्रिया की सहेलियों में से एक है. अब प्रिया की तरफ मैंने ध्यान देना शुरू कर दिया क्योंकि प्रिया ही एक ऐसी लड़की थी जो मेरी बात उससे करवा सकती थी. इसलिए प्रिया को घास डालना शुरू कर दिया मैंने और जल्दी ही उसके नतीजे भी दिखाई देने लगे.

अब जब भी मैं लंच टाइम में बाहर जाता तो वो खूबसूरत लड़की भी एक बार नज़र भर कर मेरी तरफ देख कर नज़र फेर लेती थी. दिल पर कटारी चल जाती थी उसकी मुस्कान से. अब रात को उसके ख्याल आने शुरू हो गये थे और एक दिन मैंने उसके बारे में सोच कर मुट्ठ भी मार डाली.

जैसे-जैसे दिन गुजर रहे थे उसकी तरफ मेरा आकर्षण बढ़ता ही जा रहा था. इधर प्रिया भी समझ चुकी थी कि मैं उसकी दोस्त को पसंद करता हूँ. इसलिए पहले प्रिया को अपने झांसे में लेना जरूरी था.

एक दिन ऐसे ही छुट्टी के वक्त मैंने प्रिया से पूछ लिया कि वह लंच में किनके साथ बैठी रहती है तो उसने बताया कि वह बाहरवीं कक्षा की लड़कियों के साथ लंच करती है.

फिर मैंने बहाने से उन सब का नाम पूछा तो पता चला उस खूबसूरत सी लड़की का नाम मनमीता (बदला हुआ) था. वह बाहरवीं कक्षा की ही छात्रा थी और प्रिया से उसकी अच्छी पटती थी. अब अगला टारगेट मनमीता तक पहुंचना हो गया था. मगर इसके लिए प्रिया की मदद की जरूरत थी. प्रिया भी मेरे दिल की बात जान चुकी थी. इसलिए जब मैं प्रिया से मनमीता के बारे में बात करता था तो उसके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान फैल जाती थी.

फिर मैंने प्रिया से कहा- अगर तुम परीक्षा में अच्छे नम्बर लाना चाहती हो तो मेरे पास तुम्हारे लिए एक अच्छा उपाय है.
चूंकि प्रिया मैथ्स में बहुत कमजोर थी इसलिए उसको लालच आ गया और वो पूछ बैठी- मुझे क्या करना होगा सर?
मैंने कहा- अगर तुम मनमीता से मेरी बात करवा दो तो मैं तुम्हें मैथ्स में आसानी से पास करवा सकता हूँ.
प्रिया बोली- आपका काम हो जायेगा.

उसका जवाब सुनकर मन कर रहा था कि प्रिया के चूचे दबा दूं लेकिन वो अभी छोटी थी और मुझे उसमें कोई रूचि भी नहीं थी इसलिए मैं मन ही मन खुश होकर रह गया. मेरा आधा काम हो गया था.
अब बाकी का आधा काम प्रिया को करना था जिसके लिये वो पूरी तरह से तैयार थी क्योंकि मैं उसको शुरू से ही नोटिस करता आ रहा था कि यह लड़की बहुत तेज है. मुझे पूरा यकीन था कि प्रिया मेरा टांका मनमीता के साथ फिट करवा देगी.

फिर एक दिन शाम को जब मैं लेटा हुआ था तो मेरे फोन पर एक अन्जान नम्बर से कॉल आया.
मैंने हैलो किया तो वहाँ से आवाज आई- सर, मैं मनमीता बोल रही हूँ, प्रिया की सहेली.
मनमीता नाम सुनते ही मेरे मन में लड्डू से फूट पड़े और मैंने फटाक से उठ कर दरवाजा बंद कर लिया और उससे बात करने लगा. उसकी आवाज बहुत ही प्यारी थी.

उस दिन उससे बात होने के बाद फिर तो रोज ही उससे बात होने लगी. रात को घंटों तक हम बातें करते रहते थे. वो फोन पर बात करती रहती थी और मैं दरवाजा बंद करके रजाई के अंदर लंड को सहलाता रहता था.
अब उसको चोदने के लिए इंतजार करना मुश्किल हो रहा था.

बातें होते-होते मनमीता मुझसे काफी खुल गई थी. अब बस उसकी चुदाई के लिए मुहूर्त निकलना बाकी रह गया था. एक दिन वो पल भी आ गया. स्कूल में एक्सट्रा क्लास लगने लगी थी और कमजोर बच्चों को अलग से टाइम देने के लिए कहा गया था. सिर्फ मैथ्स की क्लास लगती थी.
क्लास में तीन-चार बच्चे ही थे जिनको एक्सट्रा क्लास देनी होती थी.

उस दिन क्लास शुरू होते ही प्रिया मेरे पास आई और उसने अपनी नोटबुक में एक सवाल लिखा हुआ था. सवाल समझाते हुए मैंने देखा कि उसने किताब में एक पर्ची मेरे पास छोड़ दी थी.
बाकी बच्चों से नजर बचाकर मैंने पर्ची खोलकर पढ़ी जिसमें लिखा हुआ था- मनमीता आपका इंतजार ऊपर वाली मंजिल में कर रही है.

मेरे दिल धक् से रह गया. मैंने प्रिया की तरफ देखा तो वो मुस्करा रही थी. मैंने बच्चों से कहा- तुम लोग दिए गये सवालों को मेरे बताए अनुसार हल करने की कोशिश करो, मैं थोड़ी देर में आता हूँ.

मैं जल्दी से ऊपर वाली मंजिल पर गया तो वहां आखिरी कोने वाले कमरे के दरवाजे पर मनमीता खड़ी हुई मेरा इंतजार कर रही थी. मैं नजर बचाते हुए उसके पास पहुंचा और अंदर साइड में होकर मैंने उससे पूछा- क्या बात है? आज तुम यहां कैसे रुकी हुई हो?

मनमीता ने मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर हाथ फिराते हुए उसको सहला दिया और मेरे सीने से लिपट गई. मेरा लौड़ा तुरंत खड़ा हो गया और मैंने उसके होंठों को वहीं पर चूसना शुरू कर दिया. मैंने उसके दुपट्टे को उतार कर डेस्क पर डाल दिया और उसके सूट के ऊपर से उसके चूचों को दबाने लगा.

मैंने दरवाजा हल्का सा ढाल दिया ताकि किसी को बाहर से कुछ दिखाई न दे. उसको दीवार के सहारे लगाकर मैंने उसके चूचों को जोर से मसलते हुए उसके होंठों को चूस डाला और वह भी मेरे होंठों को वैसी ही बेरहमी से चूसने-काटने लगी.
मैं उसके शर्ट को निकालना चाहता था मगर स्कूल में उसको नंगी करने में खतरा था इसलिए उसके कमीज को उसके चूचों के ऊपर करके मैंने उसकी ब्रा को भी ऊपर सरका दिया.

उसके गोरे चूचे जिनके गुलाबी निप्पल थे, मैंने अपने मुंह में भर लिये. उसकी गांड को दबाते-सहलाते हुए मैं उसके चूचों को चूसने लगा. उसके चूचे ब्रा से नीचे बाहर आने के बाद काफी मोटे लग रहे थे.

मनमीता मेरे तने हुए लौड़े को मेरी पैंट के ऊपर से सहला रही थी. उसने मेरी पैंट की जिप खोल ली और मेरे लंड को अंडरवियर की इलास्टिक से बाहर निकालते हुए चेन से बाहर करके उसको अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी.

मेरा लौड़ा आग उगल रहा था और बिल्कुल गर्म हो गया था. उसके कोमल हाथों में जाकर बात मेरे लौड़े के काबू से बाहर हो गयी और मैंने उसकी सलवार को खोलकर नीचे गिरा दिया, घुटनों के बल मैं मनमीता की टांगों के बीच में बैठ गया.
मनमीता ने अपने कमीज को ऊपर उठा लिया. उसकी सफेद पैंटी के बीच में गीला सा धब्बा हो गया था. मैंने उसकी कमर से उसकी पैंटी को खींच कर नीचे करना शुरू किया और उसकी भूरे रंग के हल्के बालों वाली चूत मेरे आंखों के सामने बेपर्दा होने लगी. उसकी चूत के दर्शन भर से ही आंखें धन्य हो गईं. चिपकी हुई गुलाबी होंठों वाली चूत थी उसकी.

मैंने उसकी जांघों पर हाथ रख कर उनको थोड़ी चौड़ी सी फैलाते हुए उसकी कमसिन कोमल चूत पर मैंने अपने प्यासे होंठ रखे तो मनमीता ने मेरे बालों में हाथ फिरा कर अपने आनंदमयी अनुभव का इशारा दे दिया. मैंने उसकी टपकती चूत के अंदर अपनी गर्म जीभ डाली और मनमीता अपनी गांड को दीवार से सटाए हुए थोड़ी और नीचे की तरफ आकर टांगें फैलाने लगी ताकि मेरी जीभ उसकी चूत में अंदर तक चली जाये.

मैंने उसकी चूत में तेजी से जीभ को तीन-चार बार अंदर-बाहर किया तो वह अपने चूचों को मसलते हुए सिसकारने लगी. कमरा खाली था और उसकी आनंद भरी कामुक सिसकारी कमरे में गूंज उठी. स्स्स … सर … आइ लव यू … अम्म … स्स्स … इस्स्स …आह …

वो अपनी चूत को मेरे होंठों पर फेंकने लगी. मैं भी उसकी चुदाई के लिए अब पल भर का इंतजार नहीं कर पा रहा था. मैंने अपने लंड को नीचे बैठे हुए ही एक हाथ से हिलाया तो लंड ने जैसे कह दिया हो- बहनचोद! अब तो डाल दे मुझे इस माल के अंदर …
मैंने जीभ को मनमीता की चूत से बाहर निकाल कर उसको यहां-वहां से चूसा चाटा और मनमीता मुझे ऊपर उठाने लगी. मैं समझ गया अब यह भी लंड लेने के लिए मरी जा रही है.

मैंने उसकी चूत पर एक पप्पी दी और फिर उसको दीवार से सटा कर उसकी टांग को उठाते हुए उसकी चूत पर लंड को लगा दिया.

उसके हाथों को दीवार पर ऊपर दबाते हुए मैंने एक धक्का उसकी चूत में मारा और आधा लंड मनमीता की गीली चूत में गच्च से फंस गया.
“उम्म्ह… अहह… हय… याह…स्स्स … सर … दर्द हो रहा है!” वह कसमसाते हुए कहने लगी. मैंने उसके चूचों को कस कर दबाया और सहलाया तथा साथ ही उसके मुंह में अपनी जीभ डाल दी.

फिर दोबारा से एक धक्का मारा तो पूरा लंड उसकी चूत में जा फंसा. आह्ह … क्या चूत थी उसकी. उसके मोटे चूचे मेरी छाती से सट गये थे. मैं उसकी गर्दन को चूमने लगा और मेरी गांड दीवार की तरफ धक्के लगाती हुई उसकी चूत में लंड को अंदर-बाहर करने लगी.

दो मिनट बाद मनमीता के मुंह से कामुक सीत्कार फूटने लगे और वो मुझे बांहों में भर कर प्यार करने लगी. मेरा जोश हर पल उबलता हुआ मेरे लंड के धक्कों को उसकी चूत फाड़ने के लिए उकसा रहा था. उसकी चूत की चुदाई करते हुए मैं तो सातवें आसमान में उड़ने लगा. बीच-बीच में उसके मोटे चूचों को भी मसल देता था.

दो-तीन मिनट तक मैंने उसकी चूत को दीवार से सटा कर चोदा. फिर पास ही पड़ी मेज पर उसको लेटा लिया और उसकी एक टांग से सलवार को निकाल कर अपने हाथ में उसकी टांग को उठाकर फैला दिया. उसकी चूत मेज के किनारे पर थी. मैंने अपने चिकने हो चुके लंड को उसकी चूत पर लगाया और उसकी चूत में लंड को धकेलते हुए उसके ऊपर लेट कर उसके चूचों को पीने लगा.

मनमीता ने मुझे बांहों में जकड़ लिया और मैंने मेज के ऊपर ही उसकी चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिये. उसकी गोरी और मोटी चूचियों को दबाते हुए उसकी चूत में लंड के धक्के लगाते हुए जो आनंद आया मैं उसको कैसे बताऊं दोस्तो, ऐसी किस्मत बहुत कम लोगों की चमकती है जिनको ऐसी चूत नसीब होती है.
तेजी से उसकी चूत को चोदते हुए मैं उसके जिस्म को भोगने लगा, उसके चूचों को पीता और दबाता रहा. चर्र … चर्र … चूं … चूं की आवाज के साथ हमारे मुंह से दबे हुए सीत्कार कमरे में गूंजने लगे. हाय … आस्स् .. ओह्ह … उफ्फ … हम्म …. स्स्स … आह आह अह्ह … हय … !

उसकी गोरी, चिकनी, मखमली चूत को चोदते हुए इतना मजा आया कि पांच-सात मिनट में ही मेरे अंदर का जोश मेरे लंड के वीर्य में उबाल ले आया और मैंने उसकी चूत में वीर्य की पिचकारी मार दी. पूरा लंड उसकी चूत में खाली कर दिया. धीरे-धीरे मैं शांत हो गया और दो मिनट तक ऐसे ही उसको मेज पर लेटा कर उसके चूचों से चिपका रहा.

मनमीता की चूत मार कर सच में मजा आ गया था. इतना सुखद अनुभव मुझे कभी नहीं हुआ था. फिर हम दोनों अलग हुए और जल्दी से मैंने अपने अध-सोये लंड को अपने अंडरवियर में वापस से अंदर डाला और चेन बंद करके दरवाजे के बाहर झांका.

तब तक मनमीता ने भी अपने कपड़े ठीक कर लिये थे. कपड़े व्यवस्थित करने के बाद पहले मैं कमरे से बाहर गया. मैंने मनमीता को थोड़ी देर बाद में आने के लिए बोला था. वैसे तो स्कूल में कोई नहीं था मगर चपरासी तक की निगाह से बचने के लिए एहतियात बरतना जरूरी था.

जब मैं क्लास में पहुंचा तो प्रिया मेरी तरफ देख कर मुस्करा रही थी. मैंने छुट्टी में जाते हुए उसको थैंक्स बोला तो वो कहने लगी- सर … मेरे एग्जाम का ध्यान रखना!

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया के ज़रिये अपना प्यार देना न भूलें. अपनी जिन्दगी के कुछ और भी हसीन किस्से आपके साथ शेयर करने की अभिलाषा के साथ फिलहाल के लिए अलविदा कहना चाहता हूँ. धन्यवाद!

ममेरे भाई ने मेरी कुंवारी चूत की चुदाई की-2

में अब तक आपने पढ़ा कि मेरे ममेरे भाई अर्पित ने मेरे मामा मामी की गैरमौजूदगी में मुझे सेक्स के लिए पटा लिया था. इस वक्त मैं उसके साथ बिस्तर पर लगभग नंगी पड़ी थी.
अब आगे:

मेरे मम्मों को दबाते दबाते उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था, वो बोला- आशना, कैसा लग रहा है?
मैं कुछ नहीं बोली और बस ‘उन्नह..’ बोल कर शर्मा गई. वो समझ गया कि मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है. अब वो कुछ सख्त होने लगा था और अपने दोनों हाथों से मेरे मम्मों को बेदर्दी से मसलने लगा था.

थोड़ी देर बाद उसने मुझे बेड पर सीधा लेटा दिया. उसने जैसे ही मुझे सीधा लेटाया, तो मेरे दोनों तने हुए मम्मों को देखकर वो बहुत ही उत्तेजित हो गया. अगले ही पल उसने मेरी दोनों चुचियों को हाथों से दबोच लिया. मेरे एक दूध को मेरा भाई अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरी चूची को मसलने लगा. वो अपने हाथ से मेरे चुची के निप्पल को मींजने लगा. फिर उसने मेरे दोनों मम्मों को एक साथ किया और एक साथ ही मेरे दोनों दूध अपने मुँह से चूसने लगा. मेरी दोनों चुचियां एक साथ उसके मुँह में जाने से और दोनों होंठ से दबाने से में भी बहुत उत्तेजित हो गई.

थोड़ी देर यूं ही मेरी चुचियों से खेलने के बाद वो बेड पर उठा. फिर धीरे से वो मेरी पेंटी को निकालने लगा.
मैंने कहा- अर्पित बस बस … यहीं तक ठीक है … और आगे नहीं प्लीज़.

यह सुनते ही वो मेरे सामने हंसने लगा, उसने कहा- क्या बोल रही हो यार … इतना सब कुछ होने के बाद तुम ना बोल रही हो. अभी हमने शुरुआत ही तो की है. तुमको जो देखना था, वो तो अभी तुमने देखा ही नहीं.
ये सुनते ही मैं बहुत शरमा गई और मैं भी उसके साथ हंसने लगी.

जैसे ही उसे समझ आया कि मैं भी तैयार हूँ, तो तुरंत ही उसने अपने हाथों से मेरी पेंटी को नीचे की ओर खींच दिया.
आअहह … अब मैं उसके सामने पूरी नंगी पड़ी थी. उसने मेरी कोमल सी भीगी सी चूत को देखा.

वो बोला- आशना, तेरी चूत बहुत ही जवान है यार. आज तेरी चूत मारने में मुझे बहुत ही मज़ा आने वाला है.
ऐसा बोल कर उसने मेरी चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.

ओह माँ … मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं अपनी आंखें बंद करके बस उसके मज़े ले रही थी. थोड़ी देर बाद चूत पर हाथ फेरते फेरते उसने अपनी एक उंगली धीरे से मेरी चूत के अन्दर डाल दी. आहह … मैं और उत्तेजित हो गई और मेरी चूत पूरी गीली हो गई.

उसकी उंगली मेरी चूत के अन्दर घूमने से मैं थोड़ी ही देर में ही अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई. मुझे मेरी चूत के अन्दर इतनी गुदगुदी हुई कि मैं अंगड़ाई लेने लगी. उसको पता चल गया कि मैं अब अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई हूँ.

तब उसने धीरे से अपनी उंगली मेरी चूत में से बाहर निकाली और वो अपनी उंगली चाटने लगा.
मैंने कहा- ये क्या कर रहे हो?
तो उसने कहा- इसमें जो मज़ा है, तुम्हें नहीं पता.
उसकी इस बात से मैं शरमा गई.

फिर वो धीरे धीरे मेरे पूरे बदन को चूमते चूमते अपना मुँह मेरी चूत के पास ले गया. मेरे भाई ने मेरी चूत पर अपनी जीभ लगा दी और मेरी चूत की फांकों में ऊपर से नीचे तक जीभ फेरते हुए चूत चाटने लगा.
मेरी चूत पर उसकी जीभ फिरते ही मैं बहुत ही गर्म हो गई. मैंने अपने हाथ उसके सिर पर रख दिए. मैं भी पूरा आनन्द लेने लगी ‘आअहह … अहह …’ मुझे अपने भाई से अपनी चुत चटवाने में बहुत मज़ा आ रहा था. वो ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत को चाट रहा था.

थोड़ी देर बाद मेरी चूत बहुत गीली हो गई. तभी उसने मुझे बेड पर उल्टा लेटा दिया और मेरी गांड पर हाथ फेरने लगा. वो मुझे लेटा कर वो थोड़ी देर बेड से उठ गया. मैं औंधी लेटी थी, इसलिए मुझे पता नहीं चल रहा था कि वो क्या कर रहा है, पर थोड़ी देर बाद मुझे मेरी गांड पर कुछ गर्म गर्म एहसास हुआ.

आअहह जैसे ही उसने मेरी गांड को छुआ, तो मुझे पता चल गया कि ये तो मेरे भाई अर्पित का लंड था. उसका लंड बड़ा ही सख़्त और बेहद गर्म था. मैं बहुत ही उत्तेजित हो गई. क्योंकि आज मैं किसी लड़के का लंड पहली बार देखने वाली थी.

वो मेरी पीठ पर चढ़ कर मेरे बदन पर लेट गया. उसका लंड मेरी गांड से टकरा रहा था. उसने कहा- आशना आगे की ओर घूम जाओ … पर अपनी आंखें बंद रखना … ठीक है!
वो मेरे ऊपर से हट गया.
मैंने कहा- ठीक है.

मैं अपनी आंखें बंद रखकर आगे की ओर घूम गई. मैं आंखें बंद करके महसूस कर रही थी कि वो अपना लंड लेकर मेरे सामने ही खड़ा है. पर मैंने अपनी आंखें बंद ही रखीं. उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने मूसल लंड पर रख दिया.
आआअहह … आज मैंने किसी लंड को पहली बार अपने हाथों में लिया था.

तभी उसने थरथराती आवाज में कहा- आशना … अब आंखें खोलो.
मैंने अपनी आंखें खोल दीं. मैंने जैसे ही आंखें खोलीं कि सामने अर्पित का बहुत लंबा लंड मेरे हाथ में था. पहले तो मैं थोड़ी डर गई और मेरे हाथ से लंड छूट गया.
अर्पित हंस पड़ा और बोला- अरे तुम तो लंड देखकर ही डर गईं.
मैंने कहा- नहीं नहीं ऐसा नहीं.

मैं शर्मा गई.
उसने कहा- आशना शरमाओ मत … बस इसके मज़े लो.
मैंने भी हंसते हुए उसको ज़ोर से किस किया और उसके साथ साथ अपने हाथ से फिर से उसके लंड को पकड़ लिया. मैं अपने भाई के मूसल से लंड को ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी. उसको भी मज़ा आने लगा. मैं भी उसके पूरे बदन को चूमने लगी. धीरे धीरे चूमते चूमते में उसके लंड के पास चूमने लगी.

उसने कहा- आशना यस आशना यस …

मुझे पता चल गया कि वो लंड चूसने के लिए कह रहा है … पर मैंने पहले कभी लंड नहीं चूसा था, तो मुझे पसंद नहीं था.
मैंने ना बोला.
उसने कहा- ठीक है, कोई बात नहीं.

थोड़ी देर बाद उसने मेरी आंखों पर मेरी ही ब्रा की पट्टी बनाकर बांध दी और मुझे बेड पर बिठा दिया.

फिर उसने कहा- आशना अपना मुँह नहीं खोलोगी?

उसके यह कहने पर मैंने अपना मुँह खोल दिया. मेरे मुँह खोलते ही उसने अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया. मैंने हटने की कोशिश की पर उसने थोड़ी देर के लिए मेरे सिर को ज़ोर से पकड़ लिया. अब मेरी आंखें बंद थीं और मेरे मुँह में अर्पित का लंड था. मैं उसका लंड बाहर भी नहीं निकाल सकती थी … क्योंकि उसने मेरा सिर अपने हाथों से ज़ोर से पकड़ रखा था.

थोड़ी देर बाद मेरे मुँह में उसका लंड रहने से मुझे भी मज़ा आने लगा और मैं उसका लंड चूसने लगी.
अब अर्पित ने मुझसे पूछा- क्यों आशना, तुमको तो लंड पसंद नहीं था ना … मुँह में लेना?

मैंने कुछ नहीं कहा और बस लंड को चूसने का मज़ा लेती रही. एक ओर मुझे ऐसा लग रहा था कि ये सब ग़लत है और एक तरफ लग रहा था कि अब पूरे मज़े कर ही लूँ. न जाने फिर कब ऐसा मौका मिले. ये सोचकर उसका लंड में चाटती रही.

जब मेरे मुँह में उसका लंड था और मैं जब उसका लंड ज़ोर ज़ोर से चूस रही थी, तब अचानक मेरे मुँह के अन्दर कुछ हुआ. जब तक मैं उसका लंड मुँह से निकाल पाती कि उसके पहले ही मेरा मुँह उसके वीर्य से पूरा भर गया. भाई का लंड मेरे मुँह के अन्दर होने की वजह से उसकी पिचकारी बहुत अन्दर तक चली गई. उसके लंड का आधा वीर्य मेरे गले के अन्दर भी चला गया.

आअहह … मैंने तुरंत ही अपने मुँह से उसका लंड बाहर निकाला. मैं पूरी डर गई थी.
उसने हंसते हुए कहा- क्या हुआ?
मैंने कहा- तुम्हारा वीर्य मेरे अन्दर भी चला गया है … कुछ हुआ तो?

ये सुनते ही वो ज़ोर से हंस पड़ा. उसने कहा- इस मुँह से निगलने से कुछ नहीं होता … मेरी रानी … नीचे के मुँह से निगलोगी तो कुछ होगा समझी. फिर कुछ कैसे होता है, तुम्हें पता ही होगा.
मैं हंस दी. चूंकि मुझे उसके लंड का स्वाद मजेदार लगा था इसलिए मैं अपने मुँह में बचे वीर्य का स्वाद लेने लगी.

कुछ देर तक हम दोनों यूं ही ऐसे पड़े रहे.

फिर मेरे भाई ने कहा- आशना बस अब तुम मेरा लंड फिर से चूसो और खड़ा कर दो.
मुझे उसका लंड चूसने में बहुत मज़ा आया था. इसलिए मैंने फिर से उसका लंड मेरे मुँह में लिया और बहुत ही शांति से लंड को चूसने लगी. अबकी बार मैं उसके लंड को ऐसे प्यार से चूस रही थी, जिससे उसे भी मज़ा आए. मैंने पूरे लंड को गले गले तक लेकर बड़ी मस्ती से चूसा.

उसने मेरे दूध मसलते हुए कहा- आशना, तुम बहुत ही मस्त लंड चूसती हो यार.
यह सुनते ही मुझे भी मजा आ गया और बहुत ही प्रेम से उसका लंड चूसा. थोड़ी देर में उसका लंड एकदम लंबा और कड़क हो गया. उसने मुझे बेड पर लेटा दिया.
अब उसने कहा- आशना अब तुम ज़न्नत के नज़ारे देखने के लिए तैयार हो जाओ.

यह सुनकर मैं बहुत शर्मा गई, मैं समझ गई थी कि भाई का लंड अब मेरी चूत फाड़ेगा.

भाई ने ये कहते कहते मेरी टांगें फैला दीं और अपना लंड सैट करके मेरी चूत में डाल दिया.

‘आहह … उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओओओ उहह.’ उसका लंड जैसे ही मेरी चूत के अन्दर गया, तो मेरे मुँह से चीख निकल गई. मुझे बहुत ही दर्द हो रहा था.
मैंने अर्पित से कहा- बहुत दर्द हो रहा है … प्लीज़ निकाल लो … मुझे नहीं चुदवाना. प्लीज़ अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लो.
वो बोला- अरे डार्लिंग … अभी तो मेरा लंड सिर्फ़ आधा ही अन्दर गया है. अगर तुमको बहुत दर्द हो रहा है, तो निकाल देता हूँ.

ऐसा बोल कर वो थोड़ी देर मुझे किस करता रहा. उसका आधा लंड मेरी चूत में घुसा हुआ था. उसके एक ही वार ने मेरा चूत का परदा तोड़ दिया था.
कुछ पल बाद मेरा दर्द कुछ कम हो गया. तो मैंने उससे पूछा- मुझे इतना दर्द क्यों हो रहा है?
वो बोला- तुम्हारी सील मेरे एक ही झटके से टूट गई है इसलिए … पर अब दर्द नहीं होगा.

थोड़ी देर वो अपना लंड मेरी चूत में डालकर मेरे साथ बातें करता रहा. थोड़ी देर बाद मेरा दर्द कम होते ही उसने बातों ही बातों में मेरी चूत में अपने लंड से और एक ज़ोर से धक्का दे दिया.
इस बार उसने अपना पूरा छह इंच का लंड मेरी चूत को चीरते हुए अन्दर तक डाल दिया. मेरे मुँह से फिर से सिसकारी निकल गई- आआअहह … मर गई अर्पित … मर गई मैं तो!

पर वो अपने लंड से मेरी चूत में धक्के देता ही रहा और मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदता रहा. मुझे बहुत दर्द हो रहा था, पर वो मुझे बेरहमी से चोदता ही रहा.
‘आआहह … आअहह … आआअहह … उउइई माँआअ … मैं मर गई … आअहह…’

थोड़ी देर बाद उसने मेरे होंठ पर होंठ जमा दिए. उसने मुझे किस करते करते चोदना चालू रखा. उसके किस करते ही मेरे मुँह से आवाज़ निकलना बंद हो गई और मैं भी चुदाई का मज़ा लेने लगी.

उस दिन अर्पित ने मुझे पूरा एक घंटा चोदा. उस दौरान मैं न जाने कितनी बार पिघली होऊंगी, मुझे होश ही नहीं है.

काफी देर बाद अपनी कुंवारी चूत चुदाई का मज़ा लेते लेते मुझे मेरी चूत के अन्दर कुछ अहसास हुआ. मैंने अर्पित को देखा, तो वो अपना वीर्य मेरी चूत में छोड़ चुका था. वीर्य छोड़ते ही वो ओर ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदने लगा. ये उसके लंड के अंतिम धक्के थे.

थोड़ी देर बाद वो निढाल होकर मेरे बदन पर ही ढेर हो गया. उसने मेरे होंठ पर अपने होंठ जमा दिए और मुझे किस करने लगा. मैं भी उसको किस करने लगी.

थोड़ी देर बाद वो मेरे बदन से उतर कर मेरे बाजू में बेड पर लेट गया. फिर उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया. वो बोला- आशना आज तुमको चोदकर मुझे बहुत मज़ा आया.
मैंने भी कहा- आज मैंने अपनी लाइफ की पहली चुदाई अपने ही भाई से करवा ली.
उसने कहा- आशना अब फिर से कब? मैंने हंस कर कहा- मम्मी पापा बाहर जाएंगे तब!

हम दोनों हंस कर एक दूसरे से चिपक गए. मेरी चुदाई न जाने कितनी बार हुई होगी. मैं अपने भैया के लंड की शैदाई हो चुकी थी.

आपको मेरी कुंवारी चूत की चुदाई की कहानी कैसी लगी … प्लीज़ मुझे मेल जरूर कीजिएगा.

चाची की बेटी को बहुत मजे से चोदा

हैल्लो दोस्तों, मेरे चाचाजी की फेमिली में चाचा चाची और उनकी एक बेटी है और हमारा उनके साथ बहुत अच्छा प्रेम प्यार है। में उनके घर जाता रहता हूँ और मेरी चाची बहुत सेक्सी है और उनकी बेटी सारा मुझसे 3 महीने छोटी है। उसका तो जवाब ही नहीं है, इतनी सुंदर लड़की लाखो में एक होगी और उसकी सेक्सी टाँगे, काले खुले बाल, काली आँखें, गोल-गोल ब्यूटिफुल बूब्स, मोटी गांड अगर आप देख लो तो वहीं झड़ जाए, वो कपड़े भी बहुत सेक्सी पहनती है। हम स्कूल से ही एक साथ पढ़ते है और अब कॉलेज में भी एक साथ ही है, स्कूल से ही लड़के उस पर लाईन मारते थे। अब हम कॉलेज में भी एक साथ थे। वो कॉलेज में बहुत सेक्सी बनकर आती है, टाईट स्कर्ट या जीन्स जिसमें से उसकी गांड नजर आए और टाईट टॉप जिसमें से बूब्स की शेप बहुत अच्छी लगती है, कई बार तो उसके टॉप में से उसके निप्पल भी साफ-साफ दिखाई देते है। सब लड़के मेरी पीठ पीछे उसके बारे में बाते करते है, तो मुझे बहुत अच्छा लगता है। में क्लास में भी उसे देखता रहता हूँ। में और सारा शुरू से ही एक साथ रहते, खेलते और सब कुछ करते है। हम दोनों आपस में बहुत फ्रेंक है, उसके साथ गले मिलना और किस करना तो आम बात है। वो 3 साल पहले दूसरे घर में शिफ्ट हो गये, तो मुझे बहुत दुख हुआ। वो घर भी वैसे 5-6 किलोमीटर दूर ही होगा तो तब से में रोज शाम उनके घर जाता हूँ।

ये बात उस दिन की है, जब उसके मम्मी पापा 15 दिन के लिए बाहर घूमने गये थे और वो अकेली घर पर थी, इसलिए में उन दिनों उसके घर चला गया। फिर हम दोनों ने बहुत इन्जॉय किया, हम दोनों ने 2 दिन तक बहुत इन्जॉय किया और उसके हाथ का टेस्टी खाना खाया, इतना अच्छा खाना आपको होटल में भी नहीं मिलेगा। हम एक-एक मिनट साथ रहे, जब वो किचन में जाती थी, तो में भी किचन में और जब वो टॉयलेट जाती, तो में टॉयलेट के बाहर खड़ा हो जाता था। हम दोनों 2 दिन तक सोए भी एक ही रूम में थे। फिर तीसरे दिन वो जब नहाकर बाहर आई तो वो क्या गजब की लग रही थी? ब्लू मिनी स्कर्ट एक फुट से थोड़ी ज्यादा होगी और ऑरेंज शॉर्ट टॉप जो काफ़ी गहरे गले का था, जिसमें से उसके कंधे पूरे नजर आ रहे थे, उसके नीचे वो ब्रा नहीं पहनती थी, ताकि ब्रा की स्ट्रिप्स ना दिखे। वो मेरी क्या? कॉलेज में भी सबकी पसंदीदा ड्रेस होगी, में तो उस दिन उसे देखता ही रह गया था। फिर उसने पूछा कि कैसी लग रही हूँ? तो मैंने कहा कि हॉट एंड सेक्सी, तो उसने थैंक्स कहा। फिर हमने ब्रेकफास्ट किया और बेड पर बैठकर टी.वी. देखने लगे। अब में उसकी स्कर्ट की तरफ़ अपना मुँह करके उसकी नंगी टाँगे देखने लगा था और उसकी ऑरेंज पेंटी क्या मस्त थी? अब जब वो झुकती थी तो तब भी उसकी ऑरेंज पेंटी उसकी स्कर्ट के ऊपर दिखाई दे रही थी। 

अब उसको सब पता चल रहा था, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा और फिर हमने 2-3 घंटे के बाद लंच किया। अब में टी.वी. पर कोई सेक्सी मूवी सर्च कर रहा था, तो केबल टी.वी. पर एक इंग्लिश मूवी स्टार्ट हुई थी। फिर मैंने सारा से कहा कि चलो देखे। अब हम दोनों एक साथ बैठकर मूवी देखने लगे थे। अब में मूवी कम उसे ज्यादा देख रहा था। फिर 15 मिनट के बाद ही न्यूड सीन आ गया, जिसमें 3 गर्ल्स के बूब्स दिख रहे थे। फिर वो उठाकर टॉयलेट करने चली गई, तो में भी कुछ देर के बाद टॉयलेट करने चला गया तो मैंने देखा कि उसकी ऑरेंज पेंटी वहाँ पर पड़ी थी। अब में बहुत खुश हो गया था और सोचा कि उसको भी सेक्स चढ़ गया है। फिर में वापस आकर बेड पर उसकी स्कर्ट की तरफ़ अपनी आँखे करके बैठ गया। फिर मैंने देखा कि वो बिना पेंटी के थी। उसने पिछली रात को ही अपनी चूत को शेव किया था। फिर में मूवी देखने लगा, उसमें गर्ल्स और लड़के के कई न्यूड सीन थे। फिर हम दोनों मूवी देखते रहे और किसी ने कोई विरोध नहीं किया। फिर एक लड़का और लड़की का सेक्स सीन आया, तो मैंने कहा कि वाह क्या बूब्स है? तो उसने कहा कि बहुत अच्छी शेप है, मेरे बूब्स भी ऐसे ही है। फिर मैंने पूछा कि तूने किसी का असली में लंड देखा है? तो उसने कहा कि हाँ तेरा देखा है।

में : कब?

सारा : जब में लास्ट छुट्टियों में आई थी, तो तू रूम में नहाकर नंगा ही आ गया था।

सारा : अच्छा है, मुझे पता था तू जानबूझकर ही नंगा आ गया था।

में : दुबारा देखना है?

सारा : हाँ-हाँ माई प्लेजर, तो मैंने कहा कि अपने आप पेंट खोलकर देख ले।

फिर उसने फटाफट मेरी पेंट, शर्ट, अंडरगारमेंट उतारकर मुझे पूरा नंगा कर दिया। अब मेरा 7 इंच का लंड पूरा खड़ा हो गया था। फिर उसने पूछा कि ये इतना ऊपर क्यों उठा हुआ है? तो मैंने उसे बताया कि जब लड़को को सेक्स चढ़ता है तो उनका डंडा बड़ा और ऊपर हो जाता है और उससे कहा कि अब तू भी तो कुछ दिखा दे। फिर उसने कहा कि तू अभी स्कर्ट के अंदर देख तो रहा था। फिर मैंने कहा कि क्लियर नहीं था। फिर सारा ने मुझसे कहा कि तो तू खुद ही मेरे कपड़े उतार ले। फिर मैंने पहले उसकी स्कर्ट उतारी तो मुझे उसकी शेव चूत देखकर मज़ा आ गया। फिर जब मैंने उसका टॉप उतारा तो में उसके बूब्स भी देखता ही रह गया, वाह क्या नज़ारा था? अब हम एक दूसरे के सामने 7 साल बाद बिल्कुल नंगे खड़े थे, क्योंकि 7वीं क्लास तक तो हम एक साथ नहाते थे, तो तब मैंने फर्स्ट टाईम उसे किस किया था और 15 मिनट तक हमारी जीभ एक दूसरे के मुँह में रही होगी। अब तब एक हम दूसरे के पार्ट्स को टच कर रहे थे।

फिर मैंने उसे लंड सक करने को कहा, तो वो अपने मुँह में मेरे लंड का टेस्ट चैक करने लगी। अब हम 69 की पोजिशन में बेड पर लेट गये थे और अब में उसकी चिकनी चूत के मज़े ले रहा था। फिर मैंने उसे बिना बताए अपना माल उसके मुँह में ही छोड़ दिया। फिर उसने मेरा सारा माल पूरा बाहर थूक दिया और लास्ट का पी गई, उसे वो बहुत टेस्टी लगा था। अब उसका मुँह मेरे माल से भर गया था और अब उसका भी पानी छूट गया था, तो में उसे चाट-चाटकर पी गया। फिर हम 30 मिनट तक बेड पर पड़े रहे, तो तब वो अपने पापा के रूम से कंडोम लेकर आई और मुझे पहना दिया। फिर मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा और धीरे-धीरे अंदर डालने लगा। फिर एक इंच अंदर जाने के बाद उसे दर्द होने लगा, तो तब मैंने ज़ोर से एक धक्का मारा, तो वो रोने लगी। अब उसकी सील टूट चुकी थी, अब मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था तो में उसके ऊपर ही लेट गया और 5 मिनट के बाद मैंने फिर से एक धक्का मारा तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया और में उसके बूब्स को चूसता रहा। फिर उस रात हम सेक्स करके नंगे ही सो गये और सुबह एक साथ नहाए। फिर हमने शाम को बाहर जाने के लिए अपने-अपने कपड़े पहने और उन 12 दिनों तक हम घर में पूरे नंगे रहे और बस डोर बेल की आवाज सुनकर कुछ पहन लेते थे या बाहर जाना हो, तब कुछ पहन लेते थे। हम तब से कई बार सेक्स कर चुके है और एक बार तो कज़िन की शादी में बाथरूम में जाकर भी हमने चुदाई की है और खूब इन्जॉय किया है ।।

धन्यवाद ….

सिर की सेक्सी वाइफ सोनम

हेलो दोस्तो मेरा नाम सुधीर है और मैं बिहार से हूँ. ये मेरी पहली कहानी है जिसमे मैं अपने ही सेंटर की टीचर की वाइफ को चोद दिया था. ये पहली कहानी होने के साथ साथ मेरे पहले सेक्स संभोग की भी कहानी है. मुझे उमीद है आप को मेरी ये पहली कहानी पसंद आएगी.

अब मैं आप सब का ज़्यादा टाइम ना लेते हुए अपनी कहानी शुरू करता हूँ. तो चलिए अब आप मूठ मारने के लिए तैयार हो जाइए.

ये बात आज से 2 साल पहले की है. उन दीनो मैने अपने +2 के एग्जाम दे दिए थे. और 3 महीने के लिए बिल्कुल फ्री था. इस लिए मैने सोचा क्यो ना मैं कम्प्यूटर सिख लू.

वैसे तो मुझे कम्प्यूटर आता था पर मुझे फिर और ज़्यादा नॉलेज लेनी थी. इसलिए मैं अपने घर के पास नये ओपन हुए कम्प्यूटर सेंटर मे लगने की इच्छा हुई. मैने अपने घर वालो से बात करी मैं घर मे फ्री था इसलिए मुझे घरवालो ने जाने की परमिशन दे दी.

मैने वाहा जा कर एडमिशन ले ली और एडमिशन के बाद उन्होने मुझे नेक्स्ट दिन से आने के लिए कह दिया. मैं अगले दिन अच्छे से तैयार हो कर क्लास मे चला गया. मेरी बैच की क्लास मे हम 12 लड़के थे और एक करीब 30 साल की उमर का टीचर हमे स्टडी करवाने लग गया. मुझे उनका नेचर काफ़ी अच्छा लगा उनका स्टडी करवाने का तरीका सच मे बहोत अच्छा लगा.

अगले दिन जब मैं गया तो वाहा पर एक 25 साल की लड़की बैठी हुई थी. मेरे घर पास होने के कारण मैं सब से पहले क्लास मे आ जाता था. मुझे लगा की ये न्यू एडमिशन है.

मैने उससे बातें करना शुरू कर दिया. उसने मेरा दिल चोरी कर लिया था. मेरा दिल उस पर आ गया था वो सच मे बहोत ही खूबसूरत थी. कुछ ही देर मे मेरी क्लास मे सभी बच्चे आ गये थे. और जब सब आ गये थे तो वो खड़ी हुई और अपना इंट्रोडक्शन दिया.

जब उसने हमे बताया की वो हमारे टीचर की वाइफ है. और उसका नाम सोनम था. इतना खूबसूरत उसका नाम था उतना ही खूबसूरत उसका जिस्म और वो थी. मुझे वो बहोत पसंद थी वो मुझे बार-बार देख रही थी और मेरी नज़रें उस पर टिकी हुई थी. वो मुझे देख कर मस्त-मस्त स्माइल कर रही थी. क्लास कब ख़तम हुई तो मुझे पता ही नही चला.

फिर मैं अपने घर गया और घर जा कर मैं पागल सा हो गया. मैं अपने रूम मे गया और सोनम के नाम की मूठ मारने लग गया. मूठ मारने के बाद मैं शांत हुआ और अपने लंड को भी शांत किया. अगले दिन मैं सोनम मेडम से मिलने के चक्कर मे और भी जल्दी क्लास मे गया. पर अफ़सोस उस दिन हमारे टीचर आए हुए थे. मेरा दिल टूट सा गया पर कुछ देर बाद उनकी वाइफ सोनम भी आ गयी. और वो दोनो मिल कर हम को स्टडी करवाने लग गये.

ऐसे ही कुछ दिन निकल गये और मेरी और सोनम मेडम की नज़रें टकराने लग गयी. अब हम दोनो आँखो ही आँखो मे बातें करने लग गये. मुझे लग रहा था की वो मुझसे बात करना चाहती है पर सर की वजह से शायद वो मुझसे बोल नही पाती. वैसे सर 30 साल से भी उपर के थे और मेडम अभी 25 साल की थी. वो सच मे उनकी छोटी बहेन लगती थी जो एक नंबर की पताका गर्ल थी.

मैं उसे चोदना चाहता था अब मैं डेली अब न्यू हिन्दी कहानी पढ़ने लग गया और सीखने लग गया. की कैसे एक प्यासी औरत को हम खुश कर सकते है. मैं अब तक बहोत कुछ पढ़ कर सिख लिया था अब तो सिर्फ़ मुझे एक मोके की तलाश थी. और मुझे वो जल्दी ही मिल गया.

एक दिन सर क्लास मे थे और जब क्लास ख़तम होने वाली थी तभी उन्होने कहा की मुझे किसी ज़रूरी काम से 2 हफ्तो के लिए बाहर जाना पड़ेगा.More Sexy Stories  मेरी रंडी बहन की चुदाई

इसलिए कल से तुम सब को मेडम आगे की स्टडी करवाएगी. ये सुन कर मैं बहोत खुश हुआ और मेरी खुशी का ठिकाना नही था. मैं अगले दिन 30 मिनिट पहले ही क्लास मे आ गया. ये कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मेडम वाहा पर अकेली बैठी हुई थी. वो मुझे देख कर खुश हो गयी. और बोली क्या बात तुम बहोत जल्दी आ जाते हो. मैने कहा मैं इसलिए जल्दी आ जाता हूँ ताकि आप से कुछ देर बातें कर लू. क्योकि घर मे तो सारा दिन बोर हो जाता हूँ.

और फिर मेडम बोली हाँ तुम सही कह रहे हो मैं भी घर मे बोर हो जाती थी. इसलिए मैने तुम्हारे सर से कह कर ये सेंटर ओपन करवाया था ताकि मेरा मन लगा रहे. मैने कहा सर आप से काफ़ी बड़े लगते है. मेडम ने कहा हाँ ये सही है क्योकि मेरी शादी छोटी उमर मे ही हो गयी थी. मेरे मम्मी पापा की अचानक से एक्सीडेंट मे डेत हो गयी थी. इसलिए फैमिली वालो ने मेरी शादी इनसे करवा दी.

ऐसे ही हम कुछ देर बातें करते रहे और फिर इतने मे बाकी बच्चे भी आ गये. क्लास शुरू हो गयी और हम दोनो की आँखें आपस मे कुछ कुछ कह रही थी. मुझे उसके बूब्स और गांड बहोत ही मस्त लग रहे थे. मेरा दिल कर रहा था की अभी साली को घोड़ी बना कर चोद दू. पर मैं ऐसा नही कर सकता था, तभी मेरे माइंड मे एक आइडिया आया. क्लास ख़तम करने के बाद मैं घर चला गया

और अगले दिन मैं 45 मिनिट पहले सेंटर चला गया. सोनम मेडम मुझे देख कर फिर से बहोत खुश हो गयी. और बोली मुझे तुम्हारा ही इंतज़ार था की कब तुम आओगे.

फिर हम दोनो बातें करने लग गये मैने कहा मेडम प्लीज़ आप मेरी एक हेल्प कर दो वो बोली हाँ बोलो क्या हुआ. मैने कहा मेडम क्या मुझे विंडो की सीडी दे सकते हो क्योकि मेरी लॅपटॉप खराब हो गयी है. वो बोली हाँ पर वो मेरे घर है.

मैने कहा कोई बात नही मैं आप के घर से ले लूंगा. वो बोली आज तुम ऐसा करना 2 बजे अपनी बाइक ले कर आ जाना मैं जब लंच करने जाऊंगी तो तुम मेरे साथ आ जाना. फिर मैं तुम्हे दे दूँगी मैं ये सुन कर बहोत खुश हुआ. ठीक 2 बजे मैं पास वाली शॉप मे छिप गया क्योकि मैं देखना चाहता था की मेडम के दिल मे कुछ है भी या नही.

2:05 पर मेडम बाहर आई और सेंटर को लॉक करके मुझे इधर उधर देखने लग गयी. फिर मैं एक दम उनके सामने आया और वो मुझे देख कर बोली मुझे लगा शायद तुम नही आओगे. फिर हम दोनो उनके घर चले गये और घर मे जाते ही वो बोली. ऐसा करो की तुम कुछ देर मेरा वेट करो मैं अभी आती हूँ नहा कर.

मैं सोफे पर बैठ गया और जब वो नहा कर बाहर आई तो मैं उसे देखता ही रह गया. उसका बदन पूरा भीगा हुआ था उसने बस एक टॉवेल लिया हुआ था. हम दोनो एक दूसरे की आँखों मे ही देख रहे थे. फिर मैं खड़ा हुआ और उसके पास जा कर उसके होंठो को अपने होंठो मे ले कर किस करने लग गया. वो भी मुझे किस करने लग गयी हम दोनो की आँखें बंद थी.

करीब 10 मिनिट किस करने के बाद वो बोली चलो बेडरूम मे चले है वाहा जा कर सब कुछ करेगें. मैने उसे गोद मे उठया और उसे बेड पर लेटा दिया. फिर मैने उसके उसके पूरे जिस्म को अच्छे से चाटा और चूसा. मैने उसकी चुत का पानी अपने मूह से चाट-चाट कर सारा पानी पी लिया. वो बहोत ही गरम हो गयी थी.

फिर मैने उसे लंड चूसने को कहा वो बोली ये लंड है की क्या है इतना बड़ा और मोटा. मैने कहा जान इसे ही असली लंड कहते है जो चूत को फाड़ कर रख दे. फिर क्या था मैने अपना लंड उसके मूह मे तूस दिया और अच्छे से उसका मूह चोदने लग गया. मूह को चोदने के बाद मैने उसकी चूत को अपने लंड से फाड़ कर रख दिया.

शुरू शुरू मे तो उसकी गांड फट गयी थी पर बाद मे वो मज़े से मुझसे चुदने लग गयी. फिर मैने उसे रात तक चोदा और सेंटर की छुट्टी करवा दी. अब मैं उसे रोज लंच टाइम मे चोदने लग गया और सेंटर को मैने रंडी खाना बना दिया था. जब मेरा दिल करता उसे मैं बाथरूम मे ले जा कर चोद देता.

दोस्तो, आप सब को मेरी ये कहानी कैसी लगी प्लीज़ नीचे दिए हुए कॉमेंट्स बॉक्स मे लिख कर ज़रूर बताना, मेरी मैल आईडी है

भाभी ऐसे ना देखो लंड तन जाएगा

/मैं काफी गहरी नींद में था तभी कविता मुझे उठाने लगी और कहने लगी विराट उठो मैंने भी अपनी आंखों को हल्का सा खोला और बाहर की तरफ देखा तो बाहर का दृश्य देखकर मैं खुश हो गया। पहाड़ियों की श्रृंखला जैसे हमें अपनी ओर खींच रही थी और वहां का अलौकिक दृश्य देखकर मैं बहुत ज्यादा खुश था कविता के चेहरे पर भी मुस्कान भी थी। वह मुझे कहने लगी विराट यदि तुम मुझे यहां नहीं लाते तो मैं कहां से यह सब देख पाती। कविता घर के कामों में इतनी व्यस्त रहती थी कि उसे कहीं बाहर जाने का समय ही नहीं मिल पाता था लेकिन हम दोनों ने प्लान बनाया कि इस बार हम दोनों साथ में घूमने के लिए जाएंगे। कविता पहले तो चिंतित थी वह मुझे कहने लगी विराट में कैसे आ पाऊंगी तुम्हें तो मालूम ही है कि बच्चों की जिम्मेदारी जो मुझ पर है।

मैंने उसे कहा कभी तुम्हें अपने लिए भी समय निकाल लेना चाहिए, कविता को मुझे काफी मनाना पड़ा और आखिरकार कविता मेरे साथ शिमला आने के लिए मान ही गई। हमारी शादी को 10 वर्ष होने आए थे और यह दूसरी ही बार था जब हम दोनों को साथ मे घूमने का मौका मिल पाया था। इससे पहले हम लोग अपनी शादी के एक महीने बाद ही अपने हनीमून ट्रिप पर घूमने के लिए जा पाए थे। उस वक्त मुझे अपने घर में यह कहते हुए थोड़ा शर्म सी महसूस हो रही थी कि मैं कविता को अपने साथ घुमाने लेकर जा रहा हूं। मेरे माता पिता एक गांव के परिपेक्ष में रहने वाले लोग थे तो मुझे थोड़ा हिचकिचाहट तो हुई लेकिन मैंने उनसे कह ही दिया। वह मुझे कहने लगे हां तुम कविता को अपने साथ लेकर जाओ उस वक्त हम लोगों का काफी अच्छा टूर रहा। इतने लंबे समय बाद जब मैं कविता को अपने साथ शिमला घुमाने के लिए ले गया तो वह खुश हो गयी। मुझे भी लगता था कि वह घर के कामकाजो में कुछ ज्यादा ही बिजी रहती है इसलिए उसे भी अपने लिए थोड़ा समय निकालना चाहिए इस वजह से मैंने उसे शिमला घुमाने के बारे में सोचा। मेरे दो छोटे बच्चे हैं एक की उम्र 8 वर्ष है और दूसरे की 6 वर्ष उन्हें मेरे मम्मी पापा ही देखने वाले थे।

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जिस कार में हम लोग दिल्ली से शिमला के लिए जा रहे थे उसके ड्राइवर की उम्र 50 वर्ष के आसपास रही होगी। उन्होंने कहा  सर गाड़ी में कुछ प्रॉब्लम आ रही है आप लोग क्या थोड़ी देर के लिए यहां ढाबे पर बैठ जाएंगे। वहीं पास में एक ढाबा था हम लोग वहां पर बैठ गए और वह गाड़ी देखने लगे शायद गाड़ी में कोई प्रॉब्लम आ गई थी। मैंने उस ढाबे में चाय का आर्डर दिया और हम दोनों ने चाय पी, एक चाय मैंने दुकान में काम करने वाले लड़के से कहकर ड्राइवर के लिए भी भिजवा दी। करीब हम लोगों को वहां पर एक घंटा इंतजार करना पड़ा और जब एक घंटे बाद गाड़ी ठीक हो गयी तो ड्राइवर ने हमें कहा सर चलिए। उसके बाद हम लोग कार में बैठ गए और वहां से हम लोग होटल के लिए निकल गए। जो होटल हम लोगों ने बुकिंग किया हुआ था जब हम लोग उस होटल के अंदर गए तो रिसेप्शन पर बैठी 25 वर्ष की लड़की से मैंने कहा हम लोगों ने यहां पर रूम बुक करवाया है। मैंने उन्हें अपने रूम की बुकिंग की डिटेल दिखाई वह कहने लगे हां सर आपके नाम से यहां पर रूम बुक है, उस लड़की ने वहीं पास में खड़े दो लड़कों से कहा सर और मैडम का बैग रूम में रखवा दो। हमारे पास तीन बैग थे क्योंकि शिमला में उस वक्त काफी ठंड पड़ रही थी। उन लड़कों ने हमारे बैक को उठाया और रूम में ले गए हम लोग जब रूम में गए तो रूम का टेंपरेचर नॉरमल था लेकिन बाहर काफी ज्यादा ठंड थी। उस श्याम जब हम लोग रूम से बाहर घूमने के लिए निकले तो मौसम काफी खराब हो चुका था आसमान में घने काले बादल थे ऐसा लग रहा था कि बस कुछ ही देर बाद तेज बारिश होने वाली है। हम लोग उसके बावजूद भी शिमला से थोड़ा आगे निकल आए थे ड्राइवर भी कहने लगे सर बारिश काफी तेज होने वाली है हम लोगों को यहां से होटल की तरफ चल लेना चाहिए।

हम लोग कार में बैठ गए जब हम लोग कार में बैठे तो कुछ दूर चलते ही तेज बारिश आने लगी। ड्राइवर भी कहने लगे की सर बारिश तो काफी तेज आ रही है हमें कार को कहीं सड़क के किनारे खड़े कर के कार से उतर जाना चाहिए। बारिश वाकई में काफी तेज हो रही थी और देखते ही देखते ओले भी गिरने लगे मौसम ने अपना विकराल रूप धारण कर लिया था। बारिश भी काफी तेज हो रही थी और हमारे पास कोई रास्ता नहीं था हम लोग कार से बाहर भी नहीं निकल सकते थे। ड्राइवर ने एक पेड़ के किनारे कार को लगा दिया वहां से गुजरने वाली जितनी भी गाड़ियां थी वह सब खड़ी हो गई क्योंकि बारिश काफी ज्यादा तेज थी और आगे चल पाना बहुत ही मुश्किल था। जैसे ही बारिश रुकी तो हम लोग वहां से होटल की ओर चल पड़े, हम लोग होटल में पहुंचे तो कविता काफी घबरा गई थी। वह कहने लगी बारिश कितनी तेज हो रही थी बारिश इतनी ज्यादा तेज हो रही थी कि कार का शीशा भी आगे से चटक चुका था। मैंने कविता से कहा तुम घबराओ मत सब कुछ ठीक है, उस रात कविता काफी ज्यादा घबराई हुई थी। कुछ देर बाद वह गहरी नींद में सो गई अगली सुबह जब हम लोग उठे तो बाहर का मंजर देख कर हम लोग खुश हो गए। बाहर जब होटल की खिड़की खोल कर हमने देखा तो आस पास जितने भी होटल या दुकाने थी सब बर्फ की चादर ओढ़े हुए थे। मैंने कविता को उठाया और कहा कविता देखो बाहर कितना अच्छा मौसम है कविता कहने लगी मुझे अभी नींद आ रही है।

मैंने कविता को जबरदस्ती उठाते हुए कहा पर तुम देखो तो सही कविता उठी और उसने जब खिड़की से बाहर देखा तो वह भी खुश हो गई। वह कहने लगी बाहर तो वाकई में बड़ा अच्छा मौसम है कविता ने जल्दी से अपना हाथ मुंह धोया और उसके बाद हम लोग तैयार होकर वहां से नीचे चले गए। जब हम लोग गए तो वहां पर और भी लोग घूमने के लिए आए हुए थे सब लोग बर्फ में एक दूसरे के साथ इंजॉय कर रहे थे, कविता और मैंने भी उन्हें जॉइन कर लिया। मैंने अपने जीवन में पहली बार ही बर्फ देखी थी और कविता ने भी अपने जीवन में पहली बार ही बर्फ देखी थी हम दोनों बहुत खुश थे। कविता मुझे कहने लगी शिमला आना अच्छा रहा और उस दिन हम लोगों ने काफी देर तक इंजॉय किया। हम लोग होटल में पहुंचे ही थे कि तभी मेरे पापा का फोन आ गया वह मुझे कहने लगे विराट बेटा तुम कब वापस लौट रहे हो। मैंने उन्हें कहा पापा बस हम लोग दो दिन बाद वापस आ जाएंगे। मैंने उन्हें कहा यहां पर काफी ज्यादा बर्फबारी हुई है इसलिए दो से तीन दिन तो लग ही जाएंगे। वह कहने लगे ठीक है तुम लोग अपना ध्यान रखना और यह कहते हुए उन्होंने फोन रख दिया। कविता मुझे कहने लगी चलो ना विराट दोबारा बाहर चलते हैं मौसम कितना सुहावना है। मैंने उसे कहा नहीं मेरा मन नहीं हो रहा लेकिन वह मुझे जबरदस्ती बाहर ले गई। उस मौसम में और भी पर्यटक वहां पर आए हुए थे वह सब एक दूसरे पर बर्फ के गोले फेंक रहे थे जैसे कि पहले फेक रहे थे सब के चेहरे पर मुस्कान थी। मैंने एक बर्फ का गोला लिया और मैं अपनी पत्नी कविता की ओर दौड़ा मैंने जैसे ही वह बर्फ का गोला फेका तो वह जाकर एक भाभी के छाती से टकराया और वह बर्फ का गोला वही धराशाई हो गया।

भाभी के चेहरे की चमक बया कर रही थी कि वह मेरी हो चुकी है मुझे बड़ा अच्छा लगा और मैं भी उन्हें देखकर मुस्कुरा दिया। मुझे नहीं मालूम था कि वह भाभी भी उसी होटल में रुके हुए हैं जिसमें मैं रुका हुआ हूं और उस रात उन्होंने मुझे अपने रूम में बुला लिया। कविता भी सो चुकी थी मैं एक नए बदन को अपना बनाने की ओर बढ़ चुका था। मैं जब उनके रूम में गया तो उनके पति सोए हुए थे उन्होंने जो नाइटी पहनी हुई थी उसमें वह बेहद ही खूबसूरत लग रही थी और उनका बदन बड़ा ही सेक्सी लग रहा था। मुझसे रहा नहीं जा रहा था वह भी अपने आपको रोक ना सकी उन्होंने मुझे कहा आप मेरे होठों को चूम लीजिए और मुझे अपना बना लीजिए। मैंने उनके गुलाबी होठों को चूमना शुरू किया और उन्हें अपना बना लिया भाभी के उत्तेजना बढने लगी थी। मैंने उनकी नाइटी को उनके बदन से उतार दिया। उनके बदन पर लाल रंग की पैंटी और ब्रा ही रह गए थे मैंने उनकी ब्रा को उतार दिया और उनके बड़े और लटकते हुए स्तनों का काफी देर तक रसपान किया। मुझे काफी आनंद आता मैं काफी देर तक उनके स्तनों का जमकर रसपान करता मैंने उनके स्तनों पर लव बाइट भी दे दी थी।

मैने उनकी पैंटी को उतार कर उनकी योनि को अपनी उंगली से सहलाया जब वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई तो मैंने उन्हें घोड़ी बनाते हुए उनकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसा दिया। मेरा लंड उनकी योनि के अंदर तक जा चुका था और उनके मुंह से चीख निकलती उन्होंने मुझे कहा कोई बात नहीं तुम करते रहो मेरे पति की नींद खुलने वाली नहीं है वह बड़ी गहरी नींद में थे। मैं उनकी बड़ी चूतडो को पकड़कर ऐसे चोद रहा था जैसे कि वह मेरा खुद का माल हो। अब मैं पूरी तरीके से बेफिक्र हो चुका था और उन्हें बड़ी तेज गति से मैने धक्के देना शुरू कर दिया था। मेरे धक्के तेज होने लगे थे उनकी चूतड़ों से फच फच की आवाज आने लगी थी मेरा लंड उनकी चूतडो से टकराता तो मेरे अंडकोष में दर्द हो जाता। मेरा लंड उनकी योनि के पूरा अंदर तक जा रहा था मुझे बड़ा मजा आ रहा था मैं काफी देर तक ऐसा ही करता रहा लेकिन जैसे ही मेरे वीर्य की गरमा गरम बूंदें भाभी की योनि में गिरने लगी तो वह भी समझ चुकी थी कि मेरा वीर्य पतन हो चुका है। मैंने भी अपने लंड को बाहर निकाल लिया उन्होंने मेरे लंड का जमकर रसपान किया मैं कुछ ही देर बाद अपने रूम में आकर बड़ी गहरी नींद में सो गया।