चुदाई एक खेल से ज्यादा भावना है

किसान हो तुम लोग सब ठीक बा ना | अगर नहीं बा तो हमसे बोलो हम ठीक करबतानी | अबे सब चुतियापा है ऐसा कुछ नहीं होता खुद की मुसीबत खुस ही झेलनी होती है | इसलिए ना किसी से कहना और हमेशा खुश रहना | यही सिद्धांत है अपनी लाइफ का | मुझे नहीं पता अब आप लोग इसको कितना मानते हो पर मैंने तो सीख लिया है और आप भी इसको सीख लो तो ये आगे भी बड़ा काम आएगा | मैं आप सब से ये कहना चाहता हूँ कि अपनी लाइफ खुद तक सीमित रखोगे तो सब कुछ अच्छा मिलेगा और सब कुछ ठीक रहेगा | मैंने हमेशा से यही चाहा है कि सब कुछ सही रहे और इसके आगे मैंने कुछ सोचा नहीं | अगर आप मुझे कहोगे मैं हिन्दू हूँ तो नहीं साहब मैं बस एक इंसान हूँ और इंसानियत का धर्म निभाता हूँ

जन्म उस खुदा ने दिया पाला पोसा मुझे राम ने, मुझे तो कोई फर्क समझ नहीं आता गीता और कुरान में |</p>
<p>इसलिए आप भी इंसान बनो और इस जहाँ को जन्नत बना दो और ज्यादा बाटें ना करते हुए आपको मैं बता दूँ कि मेरा नाम रवि खान है और मैं आपको अपनी एक अजीब सी दास्ताँ सुनाने आया हूँ |</p>
<p>ये सब शुरू हुआ कुछ महीने पहले जब मैं पंडित अर्जुन मिश्र का एक लौटा पुत्र हुआ करता था और हरिद्वार में अपना पनिताई का काम विधि विदां पूर्वक करता था | पर ना जाने कब कहा किसका मिलन किस्से हो जाए ये कभी कोई नहीं जानता | मैंने भी ऐसा कुछ नहीं सोचा था बस अपने काम और ध्यान में लगा रहता था | पिताजी बीमार चलते थे इसलिए उनका भी सारा काम मुझे देखा रहता था | मेरे ऊपर कई जिम्मेदारियां थीं और उनका निर्वाह मैं स्वयं करता था क्यूंकि पंडिताइन अभी तक जिंदगी में आयीं नहीं थी और पिताजी कई जगह बात चला रहे थे | बड़ी मुश्किल से एक साल बाद हमे एक रिश्ता मिला और लड़की काफी गुनी थी वो उनका नाम हेमलता था और वो कृष्ण भक्त थीं | हमने सोचा चलो अब क्या हुआ इनसे हमारा लग्न है तो हम इनसे ही शादी करेंगे | सब जम गया और सब कुछ तय भी हो गया | 6 महीने बाद का मुहूर्त निकला लग्न का और उसके अगले महीने शादी का | हमे तो ऐसा लग रहा था जैसे गंगा मैय्या हमपर अपनी कृपा बरसा रहीं थीं | उसके बाद हमने सोचा हम उनसे मिल आयें पर उसके लिए हमे बनारस जाना पड़ा |</p>
<p>वहां जब हम उनसे मिले तो मंत्रमुग्ध हो गए और ना जाने कैसे कैसे सपने सजा बैठे | नहीं हमारा मतलब सपने सब सही थे बस हमने जो देखा था वो हमे स्वप्न की भाँती प्रतीत हो रहा था क्यूंकि सब पहली बार था | बड़ी ही सुन्दर और सुशील कन्या थीं वो | और उनके साथ रहे तो ऐसा लगा ही नहीं जैसे हम उनसे पहली बार मिल रहे हैं | उसके बाद मैंने सोचा चलो भाई अब इनसे मुलाकात हो गयी है अब इनसे अपने मन की बात बता दी जाए | जैसे ही हमने बात शुरू की उतने में खबर आई कि दंगे हो गए हैं और सबको घर के अन्दर रहना पड़ेगा | हमने जैसे तैसे उनको घर पहुँचाया और कहा हम खुद को संभाल लेंगे | उन्होंने कहा अप कहाँ जा रहे हैं हमने कहा बस एक अधूरा काम है हमारे पिताजी का लेखा हम घाट पर भूल गए हैं जल्द ही लौट आयेंगे | हम जैसे तैसे बचते हुए घाट तक पहुंचे तो देखा पुलिस लगी थी | पर हम चुपके से पीछे नदी में उतरे और तैरते हुए घाट पर गए और वो पोथी उठा लाये | रास्ते में जाते जाते हमे एक और कन्या मिली जो कि मुसलमान थीं और उन्हें शायद कोई मदद के लिए नहीं मिला इसलिए हमने कहा आप हमारे साथ चलिए नहीं तो दिक्कत हो जाएगी | हमने उनको एक सुरख्सित स्तन पर पहुँचा दिया | उसके बाद जब हम अपनी उनके घर में थे तब हमे याद आया यार अब सब ठीक है हालात काबू में हैं अब चलके देख लिया जाए वो महिला कैसी हालत में है | हम निकल पड़े वहीँ से उनको देखने के लिए |</p>
<p>उसके बाद जो हुआ वो बड़ा रोचक है | क्यूंकि जब हम उनके पास पहुंचे तो वो हमसे चिपक के रोने लगीं और कहने लगीं सब खत्म हो गया कुछ नहीं बचा | हम उनको हटाना चाह रहे थे क्यूंकि वो गैर मज़हब की थीं पर हमने उनकी हलक को समझा और कहा आप हमारे साथ हरिद्वार चलिए वहां आपको किसी काम पर लगवा देंगे | हम पंडिताइन के पास गए और उनसे ये सब बताया तो उन्होंने हमारे होंथूं पर एक चुम्बन चिपका दिया और कहा आप जैसा पति सबको मिलना चाहिए पंडित जी | हमने कहा बस आपकी मेहेरबानी है पंडिताइन जी | अब हमारी सगाई की तारीख आ गयी और हम एक सूत्र में बंधने के लिए तैयार हो गए | वो महिला भी अपने काम में मगन थी और उसको कोई दिक्कत नहीं थी | हमारा ब्याह भी बस निकट ही था और हम सब बड़े उल्लास के साथ तैय्यारी में लगे हुए थे | उसके बाद हमारा ब्याह का दिन आ गया और हेमलता बड़ी खुश थीं | वो महिला भी मौजूद थी हमारे ब्याह में | उसके बाद जब सब आ गए और सबने उसको देखा तो भड़क गए हमने सबको समझाया और कहा देखिये ये सब नॉर्मल बात है वो हैं तो आखिर इंसान मज़हब का इसमें क्या दोष | सबने कहा नहीं ऐसा नहीं होता आप ऐसा नहीं करते ये नहीं चलेगा आपको अपनी पंडिताई से हाथ धोना पड़ सकता है |</p>
<p>मेरा दिमाग हुआ ख़राब और मैंने कहा माँ का भोसड़ा पंडिताई का और माँ की चूत तुमाहरी | मेरा नाम आज से रवि खान | सब चौंक गए पर मेरी पत्नी ने नेरा समर्थन किया और पिताजी ने भी | बस मुझे और क्या चाहिए था | अब हमारा विवाह सम्पान हो गया और मैंने शादी मंदिर में नहीं मस्जिद में की | किसी को कोई आपत्ति नहीं हुई | उसके बाद जबब हम सुहागरात के लिए गए तब पत्नी जी ने कहा सुनिए आप बहुत अच्छे हैं आप ऐसे ही रहिएगा हमेशा | मैंने कहा जी हम ऐसे ही रहेंगे | उसके बाद हमारा काम चालु हुआ और करीब दो ढाई घटे तक हम दोनों एक दुसरे से बात करते रहे और उसके बाद हम दोनों एक दुसरे में खोने लगे | फिर क्या था हमारी पत्नी ने हमे फिर से एक चुम्बन प्रदान कर दिया और हमारा मन सातवें आसमान पर पहुँच गया उसके बाद हमने भी उनको चुम्बन दे दिया | अब सबको पता है इसके बाद कपडे खुलते हैं पर ऐसा नहीं हुआ हमने एक दुसरे को गले से लगा लिया और एक दुसरे ओ सहलाते रहे | उसके बाद हमने अपनी पत्नी का पल्लू नीचे किया और उनके माथे पर एक चुम्बन दिया और उसके बाद उनके गले पर चूमने लगे | वो भी हमे पकड़ के पीठ सहलाने लगीं | उसके बाद हमने उनकी साडी को हटा दिया और उनके ब्लाउज के ऊपर से ही उनके उभारों को मसलने लगे और चूमने लगे | फिर हम दोनों के जोश में थोड़ी सी वृद्धि हुई और हम आगे की और बढे |</p>
<p>हमारी पत्नी ने हमारा पयजामा खोला और हमने उनका लहंगा उतार दिया और वो बिलकुल नग्न अवस्था में हमारे सामने थी बस एक अंगिया थी उनके बदन पर जिसे हमने बाद में खोल दिया | हम भी पूरे नग्न हो गए और उन्होंने हमारे लंड को पकड़ा और कहा पंडित जी ये तो बहुत बड़ा और मोटा है | हमने कहा आपके लिए किया है इसको ऐसा अब आपका है आप जो चाहे करिए | उन्होंने कहा हमे नहीं पता क्या करना है तो हमने कहा चूसिये इसको | उन्होंने उसको चूसना चुरू किया और जैसे ही उन्होंने चूसना शुरू किया हम सिसकियाँ भरने लगे | आआआआ ऊऊऊ ऊउम्म्म ऊउफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ आअह्ह्ह्ह आआआआ ऊऊऊ ऊउम्म्म ऊउफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ आअह्ह्ह्ह की आवाज़ निकलने लगी हमारे मुँह से | उसके बाद पत्नी के उभार पर हमने हाथ रखा और उनको मसलने लगे | जब हमारा वीर्य निकल गया तब हमने उनके उभारों को चूसना शुरू किया और वो आआआआ ऊऊऊ ऊउम्म्म ऊउफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ आअह्ह्ह्ह करने लगीं | उसके बाद हमे उनकी चूत पर अपना मुँह रखा और कहा अब देखिये मज़ा | हमने उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया और उसके बाद वो भी सिस्कारियां लेने लगीं और हमे उत्साहित रखने के लिए अपनी चूत को हमारे मिंह में घुसाने लगीं |</p>
<p>जब हम उन्हें चाट रहे थे तब वो आआआआ ऊऊऊ ऊउम्म्म ऊउफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ आअह्ह्ह्ह कर रहीं थी | उसके बाद हमने कहा अब हम आपको पेलेंगे और इतना कहके हमने उनकी चूत में लंड का प्रवेश करवा दिया और वो चिल्लाने लगीं | उनकी चूत टाइट थी और हल्का सा खून भी निकला था | पर हमने उन्हें पहली रात आराम से चोदा और धीरे धीरे उनकी चूत में पूरा लंड डाला | उसके बाद हमारी जिंदगी आज तक अच्छी चल रही है और बच्चे भी हैं

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