पड़ोसन नेहा आंटी के साथ चुदाई

मेरे प्यारे दोस्तो को मेरे यानी नमन की तरफ से मेरे लंड का सलाम. मुझे उमीद है, की आप सब एक दम मस्त और ठीक होंगे. आपका लंड हर रोज चुत की गहराइयो को नापता र्ही होगा.

साथ ही मेरी सभी प्यारी फीमेल फ्रेंड्स भी अपनी चुत को खूब टाँगे उठवा कर चुदा रही होंगी. मैं भगवान से ये ही दुआ करता हूँ, की हर लंड को इतना दम दे की वो जिस चूत मे जाए, उसकी इच्छा पूरी करा कर ही बाहर आए.

मैं नमन दिल्ली से आज अपनी पहली कहानी आप सब के लिए ले कर आया हूँ. मुझे उमीद है, आपको मेरी ये कहानी पसंद आएगी. ये कहानी मेरे पहले सेक्स की है. जो मेरे पहले प्यार नेहा आंटी के साथ मेरे पहले सेक्स की है.

दोस्तो, आपको पता तो है की हम दिल्ली के लड़के कितने कमिने होते है. हम रात को अपने बाप को अपनी मा न्ही चोदने देते, क्योकि हम नही चाहते हमारा एक और हिसेदार इस दुनिया मे आए. मैं शुरू से एक नंबर का मूठ बाज़्ज़ हूँ.

मैं जब आठवी क्लास मे था, तब से मैने मूठ मारनी शुरू कर दी थी. मैं चूत की तलाश मे कुत्ते की तरह इधर उधर भटकता था. पर चुत कहते है, ना किस्मत वालो को ही मिलती है. मैं बचपन से ही नेहा आंटी को देख कर बड़ा हुआ हूँ.

नेहा आंटी मेरे पड़ोस मे रहती है. वो बहोट खूबसूरत औरत है, उसकी उमर उस टाइम 30 साल के करीब थी. पर वो दिखने मे 22 साल की लगती थी. उसके पति एलेक्षन डेपारमेंट मे जॉब करते थे. आंटी के पास एक बेटी थी, पर वो भी उन्होने होस्टेल मे भेज रखी थी.

क्योकि दिल्‍ली का महॉल बहुत खराब है, शायद इस लिए. अंकल एक नंबर के शराबी आदमी है. वो साला एक नंबर का चूतिया आदमी है. मुझे तो समझ नही आता था, उस चूतिया आदमी से आंटी ने केसे शादी कर ली थी.

मैं नेहा आंटी को बहुत पसंद करता था. सच कहूँ तो मैने अपनी लाइफ की पहली मूठ आंटी के नाम पर ही मारी थी. और तो और मेरा लंड आंटी को देख कर ही खड़ा होना सीखा था.

आंटी का रंग एक दम दूध जैसा , हाइट 5’2 इंच. जबरदस्त फिगर 34-30-38. मैं उन्नकी कमर और गांद का दीवाना था. आंटी जब भी सामने आती थी, तो मेरा मन उनकी चिकनी कमर को चाटने को करने लगता था. मुझे उनसे प्यार हो गया था. मैं लाइफ मे एक बार उनके साथ सेक्स करना चाहता था.

मुझे ये मोका ना जाने कब मिलना था, क्योकि अब मैं 18 साल का हो चुका था. मेरा लंड भी अब 7 इंच का हो गया था. एक रात मैं सो रा था, तो मुझे आंटी के चिल्लाने की आवाज़ें आई. मैं उठा और देखा तो अंकल आंटी को ज़ोर ज़ोर से मार रहे थे और उनको गाल्लिया निकाल रहे थे.

उस टाइम मुझे गुस्सा तो बहुत आया, पर मैं कर भी क्या सकता था. फिर अगले दिन मैं 11 बजे आंटी के घर गया. मैं बिना डोर बेल बजाए ही चला जाता था. उस दिन भी मैं ऐसे ही अंदर चला गया, मैने देखा की आंटी कही दिख नही रही है.

फिर मैं बेडरूम मे गया, तो मैने देखा की आंटी आँखें बंद करके बेड पर लेटी हुई थी. उनका कुर्ता उनके पेट तक उठा हुआ था. मैने देखा की उनकी कमर पर बेल्ट के निशान थे. मैने बड़े ध्यान से देखा और मुझे उस चूतिया अंकल पर बहुत गुस्सा आया. इतने मे आंटी उठ गयी और मुझे देख वो डर गयी और बोली.

आंटी – अरे नमन तू कब आया .

मैं – बस अभी आया हूँ, पर आपका ये क्या हाल हुआ है.

ये सुनते ही उन्होने अपना कुर्ता नीचे कर लिया, और बोली – अरे ये तो कुछ नही है, ऐसे ही बचपन के निशान है.

मैं – आंटी मैं 5 साल का बचा न्ही हूँ. ये निशान बेल्ट से मारने के है.

ये सुनते ही आंटी खड़ी हुई और मुझे अपने गले से लगा लिया. वो ज़ोर ज़ोर से रोने लग गयी. मैने कभी नही सोचा था, की आंटी इस तरह मेरे गले लग जाएगी. मैने आंटी को समझाया और उन्हे बेड पर अपने साथ बिठाया और बोला.

मैं – देखो आंटी मुझे पता है की रात को यहाँ क्या हुआ था. पर आप क्या मुझे बता सकती हो, की ये क्यू डेली होता है.

आंटी – नही मैं तुम्हे ये बात नही बता सकती.

मैं – देखिए आंटी आपको ये बताना ही होगा, वरना मैं यहाँ से चल्ला.

आंटी – तुम 18 के हो गये हो ना ?

मैं – हा.

आंटी – तो सुनो बात ये है की, तुम्हारे अंकल से सेक्स नही होता. और रोज दारू पी कर आते है. और जब सेक्स करते है तो खुद दो 2 मिनिट मे फ्री हो जाते है. पर मेरा काम नही होता, जब मैं उन्हे ये कहती हूँ तो वो मुझे मारने लग जाते है.

मैं – अछा तो ये बात है.

मैने थोड़ी देर सोचा और बोला – आंटी क्या मैं इसमे आपकी हेल्प कर सकता हूँ ?

आंटी – तुम क्या मेरी हेल्प करोगे, तुम अभी छोटे हो.

मैं बेड पे खड़ा हुआ और अपनी पेंट नीचे करके अपना 7 इंच का लंड बाहर निकाल कर बोला – देखो आंटी इससे आपका काम बन जाएगा, क्योकि अगर आप खुश रहोगी. तो आप अंकल से बोलेंगी नही और वो आपको मरेगा नही.

आंटी – हाए राम इतना बड़ा लंड, वो भी इतनी सी उमर मे ?

मैं – क्यो अंकल का छोटा है क्या ?

आंटी – छोटा नही बहुत छोटा है.

मैं – तो आपका काम इससे बन जाएगा ?

आंटी खड़ी हुई और मुझे अपने गले से लगा कर रोने लग गयी. मैने उनका चेहरा पकड़ा और उनके आँसू सॉफ करके उनके होंठो को चूसने लग गया. आंटी ने रोका और बोली.

आंटी – रूको प्लीज़ पहले मैं दरवाजा बंद कर देती हूँ.

आंटी ने जल्दी से दरवाजा बंद किया और फिर मेरे पास आकर मुझसे लिपट गायी. फिर मैने उनके होंठो को अपने होंठो मे भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गया. आंटी के होंठो मे रस भरा हुआ था, जिसे मैं ज़ोर ज़ोर से चूस रहा था. उसके बाद मैने आंटी ने एक दूसरे के कपड़े निकाल दिए.

हम दोनो पूरी तरह से नंगे हो गये. आंटी का गोरा बदन सच मे बहुत सेक्सी था, आंटी का हाथ मेरे लंड पर था. और मेरे दोनो हाथ उनके बूब्स पर थे. हम दोनो एक दूसरे के जिस्म को मसल्ने मे लगे हुए थे, मुझे आंटी के जिस्म की गर्मी महसूस हो रही थी.

फिर आंटी अचानक से नीचे बैठ गयी, और मेरे लंड पर अपनी जीब चलाने लग गयी. ये देख कर मैं काफ़ी खुश हो गया, फिर धीरे धीरे आंटी ने मेरा लंड अपने मूह मे ही भर लिया. और देखते ही देखते आंटी ने मेरे लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गयी. मैं उस टाइम जन्नत मे चला गया था.

करीब 10 मिनिट की लंड चूसने के बाद आंटी बेड के किनारे पर अपनी टाँगे खोल कर लेट गयी. मैं उनका इशारा समझ गया, मैं नीचे बैठ कर उनकी चुत को चूसने लग गया. उनकी चुत मे से पहले से ही पानी बाहर आ रा था. जिसे मैं छत छत कर पी रहा था

तभी अचानक ना जाने आंटी को क्या हुआ, उन्होने मेरा सिर कस्स कर पकड़ कर अपनी चुत मे दबा लिया. और फिर अपनी दोनो टाँगो से मुझे अपनी चूत पर लॉक भी कर लिया. तभी अचानक मेरे मूह पर पानी की जोरदार पिचकारी पड़ी, पहले मुझे लगा की आंटी ने मेरे मूह पर ही मूत दिया है.

पर वो मूत नही सालो का इकट्ठा किया हुआ पानी था, उसका टेस्ट मीठा था. मैं सारा पानी छत छत कर पी गया. फिर आंटी खड़ी हुई और मेरे भीगे हुए चेहरे को वो चाटने लग गयी, और बोली.

आंटी – तुम बहुत कमाल की चूत चाटते हो. अब ज़रा धीरे धीरे चूत मे लंड डालना, तुम्हारा लंड पहले से ही काफ़ी बड़ा है.

मैं – तुम फिकर मत करो मेरी जान.

फिर क्या था, आंटी ने खुद ही अपने हाथ मे मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत के मूह पर सेट कर दिया. मैने तभी एक जोरदार धका मारा, और उनकी चूत मे अपना आधा लंड डाल दिया. आंटी ज़ोर से चिलाते हुए बोली.

आंटी – हाए मम्मी आह, कुत्ते कहा था ना आराम से डाल.

तभी मैने एक और जोरदार धक्के से अपना पूरा लंड उनकी चूत की गहराई मे डाल दिया. उसके बाद क्या हुआ वो पूछो मत, क्योकि आंटी मेरे नीचे दर्द के मारे तड़पने लग गयी. उनके नाख़ून मेरी कमर मे गॅड गये.

मैने उनके बूब्स के निपल्लो को चूसना शुरू करदिया, तब जा कर उनकी चूत का दर्द शांत हुआ. फिर मैने ज़ोर ज़ोर से उनकी चुदाई करना शुरू कर दिया. करीब 5 मिनिट बाद आंटी की चूत का पानी निकल गया.

पर मैने 15 मिनिट बाद अपने लंड का पानी उनकी चूत मे निकाला. फिर हम दोनो 20 मिनिट तक ऐसे ही एक दूसरे के उपरनीचे सोते रहे. उसके बाद हम दोनो एक साथ बाथरूम मे नहाए.

नहाते हुए मेरा दिल उनकी टाइट .गांद पर आ गया, मैने उनकी गांद मारने की ज़िद करी और फिर मैने उनकी गांद भी मारी. आंटी मुझसे बहुत खुश हो गयी, और अब मैं उनका दूसरा पति बन कर उनके घर पर जाता हूँ.

मुझे उमीद है, आपको मेरी आज की कहानी पसंद आई होगी.

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