भाभी के गंदे इशारो को समझा

 हेलो दोस्तों, कैसे हैं आप लोग ? मेरा नाम गुड्डू है मैं अहमदाबाद का रहने वाला हूं। मैं अचार बनाने का काम करता हूं। मेरी दुकान में अलग-अलग तरह के अचार होते हैं। मेरे पास काफी पुराने लोग आते हैं। वह लोग मेरी दुकान में काफी समय से आ रहे हैं और मेरी दुकान का अचार उन्हें बहुत अच्छा लगता है इसलिए वह लोग मेरे पास बड़ी दूर दूर से आते हैं। मेरी दुकान को लगभग 10 वर्ष हो चुके हैं। इससे पहले मेरे पिताजी घर से ही यह काम करते थे। उन्होंने ही मुझे अचार बनाना सिखाया और उसके बाद मैं इस काम में उतर गया। मैंने सोचा कि क्यों ना मैं एक दुकान ले लूं। मैंने जब दुकान ली तो उसके बाद मेरा काम और भी अच्छा चलने लगा। मेरी जिस जगह दुकान है वहां पर काफी भीड़ रहती है और वहां लोगों का आना जाना लगा रहता है। मेरे पास एक बहुत ही पुराने कस्टमर आते हैं। मैंने जबसे यह दुकान ली है वह तब से ही मेरी दुकान से अचार लेकर जाते हैं। उनका नाम संजय है। वह बड़े ही सज्जन व्यक्ति हैं। वह जब भी मेरी दुकान पर आते हैं तो मुझसे पूछते हैं तुम्हारा काम कैसा चल रहा है। वह किसी सरकारी विभाग में हैं। वह मेरे पास लगभग हर महीने आते हैं और कभी कबार उनकी पत्नी अर्चना जी भी दुकान पर आ जाती हैं। वह भी किसी स्कूल में अध्यापिका हैं। मेरे उन लोगों से बहुत अच्छे संबंध हैं।</p>
<p>एक दिन मैं शाम के वक्त घर लौट रहा था। मैं अपनी बाइक से ही घर जा रहा था तो मैंने रास्ते में देखा कि संजय जी और आशा जी के बीच बहुत ज्यादा झगड़ा हो रहा है। मुझे तो समझ नहीं आया कि यह लोग झगड़ा क्यों कर रहे हैं। मैंने जल्दी से अपनी बाइक को एक कोने लगाकर मैं उन लोगों के पास चला गया। मैंने संजय जी से कहा कि आप लोग झगड़ा क्यों कर रहे हैं आप लोग एक अच्छे परिवार से हैं और आप लोगों को यह शोभा नहीं देता। संजय जी ने उस वक्त कुछ भी जवाब नहीं दिया। थोड़ी देर तक वह चुपचाप मेरी बातों को सुनते रहे लेकिन उनका चेहरा गुस्से से बहुत ज्यादा लाल था और अर्चना जी भी चुपचाप किनारे जाकर खड़ी हो गई। मैंने उन दोनों को समझाया कि आप दोनों शांति से काम लीजिए यदि आप दोनों इस प्रकार से झगड़ा करेंगे तो यहां पर भीड़ लग जाएगी। वह तो अच्छा है कि इस वक्त यहां पर कोई भी नहीं है। थोड़ी देर बाद संजय जी ने मुझसे कहा कि गुड्डू भाई तुम रहने दो तुम घर चले जाओ। बेकार में हमारे चक्कर में तुम परेशान हो जाओगे।


जब उन्होंने यह बात कही तो मैंने संजय जी से कहा कि आप भी मेरे परिचित हैं और मैं आपको अपने बहुत करीब समझता हूं इसीलिए मैं आप दोनों को अपनेपन से समझा रहा हूं कि आप लोग झगड़ा ना करें और यदि आप लोगों के बीच में किसी भी बात को लेकर झगड़ा है तो उसे आप जल्दी से समाप्त कर लीजिए। मुझे पूरी बात पता नहीं थी लेकिन जब संजय जी ने मुझे पूरी बात बताई तो अर्चना जी भी बीच में बोल रही थी। संजय जी मुझे कहने लगे कि इनका हर किसी कॉलेज के लड़के के साथ चक्कर चल रहा है और मैंने इन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन यह मेरी बात समझने को तैयार नहीं है। मैंने अर्चना समझाया भी कि इससे हमारा घर बर्बाद हो सकता है परंतु अर्चना इस बात को बिल्कुल भी मानने को तैयार नहीं है। तभी अर्चना जी भी बोल उठी तुम्हें तो सिर्फ मुझ पर शक करने की आदत है और जैसे तो तुम बहुत ही दूध के धुले हो। क्या तुम्हारा किसी लड़की के साथ अफेयर नहीं है। मैंने उन दोनों से कहा कि पहले आप दोनों शांति से बात कीजिए मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं उन दोनों का झगड़ा नहीं सुलझा पाऊंगा लेकिन फिर भी मैं वहां से जा नहीं सकता था क्योंकि वह दोनों ही मेरे परिचित हैं। मैंने संजय जी से कहा कि सर आप दोनों आपस में समझौता कर लीजिए नहीं तो आप दोनों का घर बर्बाद हो जाएगा और बाद में कोई भी बीच में नहीं बोलता। वह दोनों थोड़ा शांत हो गये और वहां से चले गए। मैं कुछ देर तक सोचता रहा कि इन दोनों के बीच में तो बहुत अच्छे संबंध है लेकिन अब इन दोनों के बीच में इतना झगड़ा क्यों होने लगा है और यह लोग तो जब भी मेरे पास आते हैं तो बड़े ही अच्छे तरीके से बात करते हैं। मेरे दिमाग में सिर्फ यही चल रहा था यही सोचते सोचते मैं कब घर पहुंच गया मुझे पता ही नहीं चला। मैंने घर में हाथ मुह धोया और उसके बाद मैंने अपनी पत्नी से कहा कि तुम मेरे लिए खाना लगा दो। उसने मेरे लिए खाना लगा दिया। मैं उस दिन खाना खा कर सो गया।</p>

<p>जब कुछ दिनों बाद मुझे पता चला कि संजय जी और अर्चना जी के बीच में डिवोर्स हो चुका है तो मैं यह सुनकर बड़ा ही शॉक्ड हो गया। मैंने भी सोचा कि क्या पता मेरी वजह से इन दोनों का घर बच जाये। मैंने जब इस चीज के बारे में पता करवाया तो अर्चना जी अपनी जगह गलत थी लेकिन शायद संजय जी ने बहुत जल्दी कर दी। उनका उस लड़के के साथ अफेयर तो चल रहा था लेकिन उन्होंने रिलेशन को एक्सेप्ट नहीं किया था और संजय जी ने बिना सोचे समझे ही अर्चना जी से डिवोर्स ले लिया। वह इस बारे में एक दूसरे से बात भी कर सकते थे लेकिन उन्होंने बहुत ही जल्दी बाजी की। उसके बाद संजय जी मुझे मिले भी थे लेकिन उन्होंने इस बारे में बिल्कुल भी बात नहीं की  मुझे भी लगा कि शायद मुझे इस बारे में उनसे कुछ बात नहीं करनी चाहिए इसलिए मैंने भी उनसे कुछ बात नहीं की।मेरी तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि उन दोनों के रिलेशन को पता नहीं किसकी नजर लग गई।</p>

<p>एक दिन जब मेरी दुकान में अर्चना जी आई तो वह मेरे साथ बैठी हुई थी। वह मुझे कहने लगी उस दिन मेरी वजह से आपको भी तकलीफ हुई। मैंने उन्हें कहा नहीं मैडम ऐसी कोई बात नहीं है मैंने उनसे पूछा क्या आप दोनों ने  डिवोर्स ले लिया है। वह कहने लगी हां अब हम दोनों ने डिवोर्स ले लिया है। उसके बाद अर्चना जी मुझे अक्सर फोन करने लगी। जब भी वह मेरे पास आती तो मुझे देखकर वह लार टपकाने लग जाती। मुझे समझ नहीं आया कि इनके अंदर इतना बदलाव कैसे आ गया है यह तो पहले एक अच्छी महिला थी लेकिन जब से इनका डिवोर्स हुआ है तब से तो यह बिल्कुल ही बदल चुकी हैं। एक दिन वह मेरी दुकान में आई उस दिन वह मुझे देखकर कुछ ज्यादा ही मुस्कुरा रही थी। उन्होंने मुझे गंदे इशारे करने शुरू कर दिए। मैं भी अपने आपको ना रोक सका और उस दिन मैं उनके घर चला गया। जब मैं उनके घर पर गया तो वह घर में अकेली थी। मैं जब सोफे पर बैठा हुआ था तो वह भी मेरे पास मे आकर बैठ गई और मुझसे बात करने लगी। मैंने भी उनके हाथ को पकड़ लिया और उनके बालों को सहलाने लगा। जब मैं उनके बालों को सहला रहा था तो मैंने उनके नर्म होंठो को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया। मैंने काफी देर तक उनके होठों का रसपान किया। जब हम दोनों की इच्छा भर गई तो मैने उनके कपड़े उतार दिए। मैंने जब उनके बदन के कपड़े उतारे तो उनके स्तन इतने ज्यादा गोरे थे कि मैंने उन्हें अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। मैंने उनके स्तनों को बहुत देर तक चूसा। उनके स्तनों से दूध बाहर की तरफ निकलने लगा था। मै काफी देर तक उनके स्तनों का रसपान करता रहा। उन्होंने जब मेरे लंड को मुंह मे लिया तो मुझे बहुत मजा आने लगा। वह मेरे लंड को बडे अच्छे तरीके से सकिंग कर रही थी। मुझे उन्होंने बहुत मजे दिए। मैंने भी उनके गले के अंदर लंड को डाला हुआ था। जब मेरा लंड पूरा गिला हो गया तो मैंने उन्हें उसी सोफे पर लेट आते हुए उनके दोनों पैरों को चौड़ा कर दिया। जब मैंने उनके पैरों को चौड़ा किया तो मैंने उनकी चिकनी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया। मेरा लंड जब उनकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो मुझे उन्हें चोदने में बहुत मजा आ रहा था। वह भी मेरा पूरा साथ दे रही थी और अपने मुंह से मादक आवाज मे सिसकिया ले रही थी। मैंने भी उनके स्तनों को अपने हाथो से दबाना शुरू कर दिया और उतनी ही तेजी से उन्हें चोदने लगा। मुझे उन्हें चोदने में बड़ा आनंद आ रहा था। मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि मैं उनके साथ सेक्स करूंगा लेकिन उनके यौवन का रसपान करके मैं अपने आपको बहुत ही अच्छा महसूस कर रहा था। मैंने उनके साथ 3 मिनट तक सेक्स किया। जब मेरा वीर्य पतन उनकी योनि के अंदर हुआ तो हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करके बहुत खुश थे।

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