भीगा बदन देख मन डोला

Bhiga badan dekh man dola
राज एक दिन मेरे घर पर आता है और वह बहुत ही ज्यादा दुखी नजर आता है मैं राज को देखते ही समझ गया कि वह कुछ परेशानी से जूझ रहा है, मुझे नहीं मालूम था कि उसकी परेशानी क्या है परंतु वह ज्यादा ही परेशान था। जब मैंने उससे पूछा कि आखिर तुम इतना परेशान क्यों हो तो मुझे राज ने बताया यार मैं तुम्हें क्या बताऊं मेरी पत्नी की आज तबियत ठीक नहीं है और मेरे पास पैसे भी नहीं है मैंने उसे कहा क्यों तुम्हारी पत्नी को क्या हुआ। मैंने जब राज से यह बात पूछी तो राज मुझे कहने लगा ना जाने उसकी तबीयत इतनी ज्यादा क्यों खराब हो गई, राज की पत्नी का नाम कविता है और वह मेरी मुंह बोली बहन है इसलिए मैं राज और कविता दोनों को ही अपना मानता हूं।
मैंने राज से कहा ठीक है तुम कविता को लेकर अस्पताल चलो मैं वहीं आता हूं राज कविता को लेकर अस्पताल चला गया और जब वह कविता को लेकर अस्पताल में गया तो वहां पर मैंने डॉक्टर की फीस जमा कर दी और कुछ दिन तक कविता को अस्पताल में एडमिट रखा। कविता को पेट से संबंधित बीमारी हो गई थी इसलिए उसे कुछ दिनों तक अस्पताल में एडमिट रखा और उसके बाद उसे घर ले आए, राज एक साल से कुछ भी काम नहीं कर रहा है क्योंकि वह जिस कंपनी में नौकरी करता था उस कंपनी से उसे नौकरी से निकाल दिया था इसी वजह से उसकी आर्थिक स्थिति पूरी तरीके से खराब हो गई थी परंतु जब भी उसे कुछ मदद की जरूरत होती तो वह मुझे ही कहता क्योंकि वह मुझे अपना मानता था और कविता को मैं अपनी मुंह बोली बहन मानता हूं इसी वजह से मैं उन दोनों की मदद हमेशा किया करता हूं। जब कविता अस्पताल में थी तो उसी दौरान मेरी मुलाकात संजना से हुई संजना उसी अस्पताल में नर्स है संजना ने उस दौरान हमारी काफी मदद की और मुझे संजना का नेचर बहुत अच्छा लगा जब हम लोग कविता को घर ले आए तो उसके बाद काफी समय बाद राज और मैं कविता को दोबारा से अस्पताल ले गए इस दौरान मेरी संजना से दोबारा मुलाकात हो गई


जब भी संजना से मेरी मुलाकात होती तो मुझे ऐसा लगता जैसे कि मुझे मेरी पत्नी रेखा वापिस मिल गई लेकिन मेरी पत्नी मुझे छोड़कर अब जा चुकी है और वह अब किसी और के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रही है जब भी मैं इस बारे में सोचता हूं तो मुझे बहुत ही बुरा लगता है क्योंकि जिस वक्त मेरे साथ यह सब हुआ उस वक्त राज और कविता ने मेरा बहुत साथ दिया था उन दोनों ने ही मुझे सदमे से उबरने में बहुत मदद की और फिर मैं रेखा को भुला पाया। संजना को जब भी मैं देखता तो मुझे ऐसा लगता जैसे कि मैं रेखा को देख रहा हूं क्योंकि उसकी शक्ल थोड़ी बहुत रेखा से मिलती थी। मैं संजना से बात कर के बहुत खुश हो जाता उस दिन संजना ने हमसे पूछा अब कविता की तबीयत कैसी है तो राज ने जवाब दिया की उसकी तबीयत अब पहले से बेहतर है और अब वह पहले से बेहतर महसूस कर रही है इस बात से संजना ने कहा आप कविता का ध्यान रखिए बस वह कुछ दिनों बाद ही ठीक हो जाएगी। मैंने संजना से कहा आपने हमारी अस्पताल में बहुत मदद की उसके लिए मैं आपका धन्यवाद कहना चाहता हूं संजना मुझे कहने लगी यहां पर तो आए दिन पता नहीं कितने मरीज आते हैं और मेरा यही काम है भला मैं अपने काम से कैसे मुंह मोड़ सकती हूं। उसकी यह बात मुझे बहुत अच्छी लगी और मैंने संजना से कहा लेकिन आपने जिस प्रकार से हमारी मदद की और कविता की देखभाल की उसके लिए मैं आपका वाकई में शुक्रगुजार हूं कविता मुस्कुरा कर कहने लगी कोई बात नहीं आप को जब भी जरूरत हो तो आप मुझे याद कर लीजिएगा, यह कहकर वह वहां से चली गई। हम लोग भी कविता को वापस घर ले आए कविता की तबीयत अब ठीक होने लगी थी जब कविता पूरी तरीके से ठीक हो गई तो एक दिन उसने मुझे कहा भैया आपने हमारी इस मुसीबत की घड़ी में बहुत मदद की मैं उसके लिए आपका शुक्रिया अदा करना चाहती हूं। मैंने कविता से कहा देखो कविता तुम मुझे भाई मानती हो तो तुम्हें यह सब कहने की मुझे आवश्यकता नहीं है मेरा इस दुनिया में अब तुम दोनों के सिवा है ही कौन?

जिस वक्त रेखा ने मेरा साथ छोड़ा था उस वक्त तुम दोनों ने ही तो मेरा साथ दिया था और अब तुम लोग ही मेरा परिवार हो कविता कहने लगी लेकिन भैया आपको भी अपने बारे में अब सोचना चाहिए और आपको अब शादी कर लेनी चाहिए। मैंने कविता से कहा मैं अभी शादी नहीं करना चाहता तुम्हें तो पता ही है कि मेरा पहला अनुभव कैसा रहा और रेखा के साथ मैं अपनी शादी के बंधन को आगे तक निभा ही नही पाया इसलिए मैं दोबारा से वह गलती नहीं करना चाहता। मैं शादी के पक्ष में बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि मैंने रेखा को दिलो जान से प्यार किया था लेकिन उसके बावजूद भी उसने मेरे साथ यह सब किया, मेरे दिल और दिमाग में सिर्फ यही बात थी कि अब मैं कभी भी दूसरी शादी नहीं करना चाहता मैं इस बात से बहुत ही ज्यादा दुखी था लेकिन अब जैसे मुझे आदत सी हो चली थी और मैं अकेला ही रहता था। मुझे नहीं पता था कि संजना मेरे जीवन में इतनी जल्दी आ जाएगी और इसमें कविता ने मेरी बहुत मदद की। संजना अब मेरे जीवन में आ चुकी थी संजना को मैंने सब कुछ बता दिया था संजना को मेरी दर्द भरी कहानी सुनकर बकहुत बुरा लगा अब वह हमारे जीवन में कभी वह दुख दोबारा से नहीं आने देगी इसलिए उसने मुझे कहा अब तुम्हें कभी भी इस बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है तुम मुझ पर पूरी तरीके से भरोसा कर सकते हो।

मुझे भी संजना पर पूरा भरोसा था क्योंकि पहले जिस प्रकार से मेरे साथ इतना बड़ा धोखा हुआ था उससे मैं पूरी तरीके से उभर चुका था और मैं समझ चुका था कि अब शायद संजना मेरे साथ यह नहीं करेगी क्योंकि संजना एक बहुत ही अच्छी लड़की है और मैं उससे बहुत ज्यादा प्यार करता हूं, संजना भी मुझसे मिलने के लिए आया करती थी। हम लोग जब भी राज और कविता से मिलते तो उन दोनों के चेहरे पर मुस्कान देखकर मुझे बहुत अच्छा लगता राज ने भी एक कंपनी में नौकरी ज्वाइन कर ली थी और अब सब कुछ ठीक चलने लगा था मेरे जीवन में भी संजना आ चुकी थी और मेरा अकेलापन भी अब दूर हो चुका था लेकिन समस्या सिर्फ इतनी थी कि संजना की मम्मी हम दोनों की शादी के लिए तैयार नहीं थी क्योंकि जब संजना ने उन्हें मेरे पहली शादी के बारे में बताया तो उसकी मम्मी ने साफ तौर पर मना कर दिया और हम दोनों सिर्फ इसी बात का इंतजार कर रहे हैं कि कब उसकी मम्मी हम दोनों के रिश्ते को रजामंदी दे और हम दोनों एक साथ अपना जीवन व्यतीत कर पाए लेकिन यह सब फिलहाल तो संभव होता दिख नहीं रहा था उसके बावजूद भी संजना मेरा बहुत ज्यादा ध्यान देती और हमेशा ही वह यह बात कहती कि अब तुम्हें किसी बात की भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। संजना के मेरे जीवन में आने से मेरे जीवन में खुशहाली आ चुकी थी और मैं बहुत ज्यादा खुश था मैं इतना ज्यादा खुश था कि अब मैं संजना के साथ भी ज्यादातर समय बिताने लगा था और संजना को भी मेरा साथ बहुत अच्छा लगता हम दोनों ही एक-दूसरे का बहुत ध्यान दिया करते। संजना और मेरे बीच में दिन-ब-दिन प्यार बढ़ता जा रहा था, संजना मेरे घर पर आया करती वह कभी कभार मेरे लिए खाना भी बना देती।

उसकी अदाएं मेरे दिल पर अब जादू करने लगी थी मैं संजना के प्यार में पागल हो चुका था और वह भी मेरा पूरा साथ देती। यह सिलसिला काफी समय तक चलता रहा एक दिन बड़ी तेज बारिश हो रही थी संजना मुझसे मिलने आ गई। संजना का बदन पूरा भीगा हुआ था मैंने जब उसे देखा तो मैं अपने आप पर काबू नहीं कर सका मैंने संजना से कहा तुम अंदर जाकर कपड़े बदल लो। वह अंदर कमरे में चली गई उसने अपने कपड़े उतारे तो मैं दरवाजे से यह सब देख रहा था। जब मैंने उसके नंगे और गोरे बदन को देखा तो मैं अपने आप पर काबू नहीं कर सका, मैंने दरवाजे को खोला तो संजना घबरा गई। वह अपने शरीर को ढकने की कोशिश करने लगी, मैंने जैसे ही उसके शरीर को सहलाना शुरू किया तो वह कुछ देर तक तो शर्माने लगी लेकिन जब उसके गोरे बदन को मैंने अपनी बाहों में ले लिया तो उसकी बड़ी गांड मेरे हाथों में थी मैं उसकी गांड को अपने हाथों से दबा रहा था। उसके स्तनों को भी मैंने अपने हाथों से दबाया और जब मैंने उसके होठों को चूमना शुरू किया तो उसे बड़ा अच्छा महसूस हुआ। जब वह पूरी तरीके से गरम हो गई तो उसने मुझे कहा क्या मैं तुम्हारे कपड़े उतार सकती हूं। मैंने उसे कहा इसमें पूछने की क्या बात है उसने मेरे बदन से सारे कपड़े उतार दिए।

उसने जब मेरी छाती को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया तो मैं भी गरम हो गया। हम दोनों बिस्तर पर लेट चुके थे वह मेरे नीचे लेटी हुई थी मैंने उसके स्तनों का रसपान बड़े अच्छे से किया। जब मैंने अपने लंड को संजना कि गरमागरम चूत पर लगाया तो उसकी योनि से गरम आग बाहर निकल रही थी। मैंने भी धक्का देते हुए उसकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया। जब मैंने उसकी योनि में अपने लंड को प्रवेश करवाया तो उसकी योनि से खून निकलने लगा और उसके मुंह से आवाज निकलने लगी। उसकी आवाज इतनी मादक थी मैं अपने आप पर काबू ना कर सका और बड़ी तेजी से धक्के देने लगा। मै इतनी तेजी से धक्के मारता उसकी मादक आवाजो में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। जैसे ही मेरा वीर्य संजना की योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो मेरी खुशी का ठिकाना ना था। हम दोनों के बीच में पहली बार सेक्स हुआ, उसके बाद संजना ने अपने कपड़े पहन लिए लेकिन जब भी मै संजना को देखता तो अपने आप पर काबू नहीं कर पाता और हम दोनों के बीच सेक्स हो ही जाता। हम दोनों की अब तक शादी नहीं हुई है।

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