एक फूल दो काँटे



हेलो दोस्तो, केसे हो आप सब? मेरा नाम आशा है और आज मैं आपको अपनी एक कहानी बताने जा रही हूँ. पर कहानी बताने से पहले मैं आपको अपने बारे मे बताना चाहती हूँ. तो चलिए पहले अपने बारे मे ही शुरू कर लेते है.

मेरा नाम तो आप जान ही चुके हो और तो और अब काफ़ी कुछ जान भी जाओगे. मैं बहुत ही मस्त लड़की हूँ. मेरा फिगर बहुत ही कमाल का है. मैं एक काफ़ी हस्मुख टाइप की लड़की हूँ. मैं बहुत ही खुश रहती हूँ.

चलो ये सब तो चलता रहता है. मैं अब अपनी स्टोरी पर भी ले कर चलती हूँ. मैं बहुत ही खुश रहती हूँ और रहू भी क्यू ना आख़िरकार मैं हूँ ही इतनी स्मार्ट.

चलो अब ज़्यादा टाइम ना वेस्ट करते हुए आपको कहानी पर ले कर चलती हूँ. मैं तब स्कूल मे थी जब की मेरी ये कहानी है. उस समय मैं नयी नयी जवान हुई थी. और नयी जवान होने पर बहुत कुछ चैंजेस भी आ रहे थे.
मेरी ही क्लास मे एक लड़का है जिसका नाम मनीष है. वो बहुत ही स्मार्ट है और तो और मैं उसे काफ़ी ज़्यादा पसंद भी करती हूँ.मैं उसे काफ़ी देखती रहती हूँ और तो और बड़े ही प्यार से उससे बात करती हूँ.

और फिर ऐसे ही मैने उससे पहले फ्रेंडशिप करली और फिर मैं उसके साथ टाइम स्पेंड करने लग गई. मुझे उसके साथ क्लास मे टाइम स्पेंड करना बहुत ही अच्छा लगता था. और तो और उसे भी अब ये बहुत ही अच्छा लगता था. मैं बहुत ही खुश भी थी की वो भी मुझे अब पसंद करने लग गया है.

मैं अब उसके साथ क्लास मे ही लेटर के थ्रू बात किया करती थी. अपने प्यार का जिक्र किया करते थे और तो और फिर ऐसे ही सब कुछ किया करते थे. ऐसे ही चल रहा था की एक दिन उसने मुझे बाहर गार्डेन मे मिलने को काहा और फिर तब मैने सोचा की मिलने जाउ या ना जाउ.

क्योकि मुझे ये भी डर था की क्लास का कोई भी हमे एक साथ देख ना ले. फिर मैने हिम्मत करी की देखा जाएगा और फिर मूह पर रुमाल बाँध कर उससे मिलने चली गई. वाहा पहुच कर मेरी हिम्मत और खुल गई और फिर मैं उससे बात करने लग गई और उसके साथ ही घूमने लग गई.

ये एहसास होने के बाद मैने सोचा की अब सब कुछ जो होगा देखा जाएगा बस अब मनीष साथ टाइम स्पेंड करना है. फिर हम ऐसे ही मिलने लग गये. हम ऐसे काफ़ी बार मिले और तो और उसने एक बार भी मुझे ग़लत इंटेन्षन से कभी भी टच न्ही किया जो की उसका प्लस पॉइंट था.

पर मैं तो काफ़ी कुछ चाहती थी यानी की मैं उसके जिस्म को छूना चाहती थी और मैं चाहती थी की वो मेरे जिस्म को भी छुए. और तो और ऐसे ही फिर उसके दिल तक ये बात पहुच ही गई. कहते है ना की दिल की बात दिल ही जानता है तो ठीक वैसे ही मेरे साथ भी हुआ था.

और फिर उसने तभी मेरे होंठो को चूस लिया . मैं बहुत ही खुश हो गई और मैं भी उसके होंठो को चूसने लग गई. मै बहुत ही पागल हो रही थी की आख़िरकार ये क्या हो रहा है. और फिर उसने मेरे बूब्स को हाथो मे ले लिया और दबाने लग गया और ऐसे ही मैने भी हाथ अंदर डाल ही दिया.
फिर हम जब भी मिलते तो हाथो से ही कुछ ना कुछ कर लेते. फिर ऐसे ही हम एक दूसरे को ज़्यादा छेड़ने लग गये और फिर ऐसे ही उसने अपना पानी निकलना शुरू कर दिया और साथ ही साथ मेरा भी निकालने लग गया.

फिर एक दिन उसने मुझसे चुदने को काहा यानी की चूत मे लंड को लेना. ये सुन कर मैं घबरा गई क्योकि मैं ये सब न्ही कर सकती थी. और फिर मैं ऐसे ही उसको साल भर टालती रही. फिर मेरे घरवालो ने मेरा रिश्ता कही और सेट कर दिया और फिर जब ये बात मैने मनीष को बताई तो हम दोनो फुट फुट कर रोए.

फिर थोड़े ही दीनो बाद मेरी शादी हो गई. मेरे हज़्बेंड का खुद का काम था यानी की खुद की ही शॉप थी. मैं बहुत ही खुश रहा करती थी. उन्होने मेरे साथ चुदाई करके मुझे चुदकक्ड बना दिया था. और तो और मैं उसने बहुत प्यार करने लग गई.

पर मेरे लिए तो डबल डबल खुशिया थी. क्योकि मेरे पति तो मुझसे प्यार करते ही थे और दूसरी तरफ मनीष भी मुझसे काफ़ी प्यार करता था और अब तक करता आ रहा था. ये देख कर मैं काफ़ी खुश थी की मुझे दोनो की तरफ से बहुत ही प्यार मिलना है.

और फिर ऐसे ही थोड़ा टाइम निकल गया. मैं काफ़ी खुश भी थी और मैं आपको बता दू की मेरे पति लुधियाना, देल्ही की टूरिंग भी करते थे तो वो कभी कभी जाते थे और तब मैं घर पर अकेली राहा करती थी.

फिर एक दिन उनके जाने के बाद मैने मनीष को मिलने को काहा. पहले तो उसने मुझे मना ही कर दिया की मैं ये क्या कह रही हु. पर मनीष आ ही गया. हम एक रेस्तारेंट मे मिले. हमने काफ़ी देर तक अच्छी बात करी और फिर हम कुछ खाने पीने लग गये. फिर काफ़ी देर बाद उसने मुजसे कहा की कही और चलते है तो मुझे कुछ समझ ही न्ही आ रहा था की मैं काहा जाउ और काहा ना जाउ. फिर ज़्यादा दिमाग़ लगाने से अच्छा मैं खुद ही उसे अपने घर ले आई.

मैं और वो दोनो ही बहुत खुश थे. फिर घर आ कर उसने मुझे अपनी बाहो मे भर लिया. मैं उसे मना करने लग गई की मैं अब शादी शुदा हूँ. तो वो मुझे कहने लग गया की मैं तो तुम्हारा पहला आशिक़ हूँ और तुम मुझे अब भी मना करोगी.

मेरी तड़प को देखो ना. और फिर उसकी इस तड़प को देख कर मुझे भी लगा की अब हो ही जाना चाहिए. और फिर उसने मेरे कपड़ो को उतार दिया और मैने भी उसके कपड़े उतार दिए. मैने उसके लंड को हाथ मे ले लिया.

फिर तब मैने देखा की उसका लंड मेरे पति से भी मोटा है और काफ़ी बड़ा भी है. और फिर उसके बाद मैने उससे बाहो मे भर लिया और फिर ऐसे ही उसे प्यार करने लग गई. मैं उसे चूमने लगी और वो भी मुझे चूसने लग गया.

मैं पागलो की तरह उसको चूम रही थी और फिर मैने उसके होंठो को चूसना शुरू कर दिया. और फिर उसके बाद मैने उसके लंड को मूह मे भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गई. मुझे बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ राहा था और तो और वो मेरी चुत को चाटने लग गया.

मैं भी पागल हो रही थी और फिर ऐसे ही मैने भी उसको अपने उपर आने को काहा. और फिर वो मेरे उपर आ कर बैठ गया और मेरे बूब्स को चूसने लग गया. मैं तो पागल हो रही थी और तो और फिर मैने अपनी टाँगे को खोल दी और उसने लंड को मेरी चूत पर सेट किया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लग गया.

ये देख कर मैं पागल हो गई और ज़ोर ज़ोर से आहह आह करने लग गई और खुद को चुदवाने भी लग गई. मुझे बहुत ही मज़ा आ राहा था और तो और वो भी पागल हो राहा था और फिर ऐसे ही मुझे चोदने के बाद मैने उसके लंड पर अपना पानी निकाल दिया.

और फिर उसके बाद उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरी गांद को चोदने लग गया. मुझे बहुत ही ज़्यादा दर्द हो रहा था और काफ़ी देर तक चोदने के बाद उसने मेरी गांद मे ही पानी निकाल दिया और फिर थक कर लेट गया.

बस फिर उसके बाद मैने ऐसे ही उससे बहुत ही सारी बाते करी और फिर उसने मुझसे काहा की तुम अब भी मेरी ही रहोगी ना. तो मैने भी कह दिया की हाँ हाँ ज़रूर. और फिर ऐसे ही मैने उसको काहा की अब सब पहले जैसा होगा.

और फिर वो खुश हो कर वाहा से चला गया और फिर ऐसे ही मैं उसको मिलने लग गई. अब मुझे अपना प्यार और पति का प्यार दोनो का प्यार मिलने लग गया था.

आप सब को मेरी ये कहानी केसी लगी मुझे ज़रूर बताना



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