पीजी की लड़की को उसके रूम मे चोदा

मेरा नाम गौतम है और मैं एक बहुत ही सीधा साधारण सा लड़का हूं। मैं कॉलेज में जाता हूं परंतु फिर भी मुझे किसी भी चीज का शौक नहीं है और मेरी उम्र बहुत ही कम है। उसके बावजूद भी मैं अपनी उम्र से बहुत बड़ा लगता हूं। मेरी उम्र 23 वर्ष है लेकिन मुझे फैशन की बिल्कुल भी समझ नहीं है और ना ही मैं ज्यादा किसी के संपर्क में रहता हूं। मैं अपने कॉलेज जाता हूं और उसके बाद सीधा अपने घर पर आ जाता हूं। यही मेरी दिनचर्या थी। परंतु मुझे कई बार लगता था कि शायद मुझे बदलना चाहिए। परंतु फिर भी मैं बदल नहीं पाया और मैं कोशिश तो बहुत करता था पर फिर भी ना जाने मैं खुद को क्यों नहीं बदल पा रहा था और मैं यह बात किसी को भी नहीं बताना चाहता था। मैं अपने आप में ही खोया हुआ रहता था। मेरे बाल भी बिखरे से रहते थे और मैं मोटा सा चश्मा लगाकर रखता था। मेरा शरीर भी बहुत ज्यादा मोटा हो गया था। मैं कई बार सोचता था कि मैं जिम ज्वाइन कर लूं। परंतु उसके बाद भी मैं जिम नहीं जा पा रहा था।

मेरा नाम गौतम है और मैं एक बहुत ही सीधा साधारण सा लड़का हूं। मैं कॉलेज में जाता हूं परंतु फिर भी मुझे किसी भी चीज का शौक नहीं है और मेरी उम्र बहुत ही कम है। उसके बावजूद भी मैं अपनी उम्र से बहुत बड़ा लगता हूं। मेरी उम्र 23 वर्ष है लेकिन मुझे फैशन की बिल्कुल भी समझ नहीं है और ना ही मैं ज्यादा किसी के संपर्क में रहता हूं। मैं अपने कॉलेज जाता हूं और उसके बाद सीधा अपने घर पर आ जाता हूं। यही मेरी दिनचर्या थी। परंतु मुझे कई बार लगता था कि शायद मुझे बदलना चाहिए। परंतु फिर भी मैं बदल नहीं पाया और मैं कोशिश तो बहुत करता था पर फिर भी ना जाने मैं खुद को क्यों नहीं बदल पा रहा था और मैं यह बात किसी को भी नहीं बताना चाहता था। मैं अपने आप में ही खोया हुआ रहता था। मेरे बाल भी बिखरे से रहते थे और मैं मोटा सा चश्मा लगाकर रखता था। मेरा शरीर भी बहुत ज्यादा मोटा हो गया था। मैं कई बार सोचता था कि मैं जिम ज्वाइन कर लूं। परंतु उसके बाद भी मैं जिम नहीं जा पा रहा था।

मैं सोचता बहुत था परंतु वह चीज मैं अपने जीवन में कर नहीं पाता था। मुझे किताबें पढ़ने का बहुत ही शौक है और मैं बहुत ही किताबें पढ़ता हूं। जो भी किताब मुझे मिल जाती है मैं उसे पढ़ लिया करता हूं। मेरा बस एक ही शौक है और मैं किसी भी प्रकार के शौक नहीं करता। कॉलेज में ना तो मेरी कोई गर्लफ्रेंड थी और ना ही कोई अच्छा दोस्त है। कुछ लड़के थे जो मुझसे बात कर लिया करते थे परंतु अब वह भी मुझसे थोड़ी बहुत ही बात किया करते थे। जब उन्हें मुझसे कुछ काम होता था या फिर मुझे उनसे कुछ काम हुआ करता था। तभी बात होती थी। इससे ज्यादा हम लोगों के बीच में कोई भी संपर्क नहीं हुआ करता था। बचपन से ही मेरा कोई अच्छा दोस्त नहीं था और मैं अकेला ही रहता था। मेरे बड़े भैया हमेशा ही यह बात कहते रहते हैं कि तुम्हें किसी अच्छे लड़के से दोस्ती करनी चाहिए ताकि तुम भी उसके तौर तरीके सिख पाओ और अपने जीवन में थोड़ा बदलाव लाओ। परंतु मैं बिल्कुल भी ऐसा नहीं कर पा रहा था। यदि मैं कभी ऐसा सोचता भी तो मुझे कोई अच्छा लड़का नहीं मिलता था।</p>
<p>मेरी मम्मी ने एक दिन मेरे पापा और भैया से बात की, कि हम लोग घर में पी.जी खोल लेते हैं। हमारे घर पर बहुत ही जगह है। मेरे पिताजी ने कहा कि वह कौन देखेगा। मैं अभी अपनी नौकरी में जाता हूं और मेरे पास समय नहीं होता। मेरी मम्मी ने कहा कि मैं सब संभाल लूंगी और खाना बनाना होगा तो मैं खाना भी बना दिया करूंगी। तुम उसकी चिंता मत करो। मेरे पिताजी ने कहा ठीक है, तुम शुरु कर लो अगर तुम्हें लगता है तुम चला पाओगी तो तुम शुरू कर सकती हो। हमारी मम्मी ने पी.जी खोल लिया और हमारे पास कई कॉल आने लगे और कई लोग हमारे घर पर देखकर भी गए। एक दिन हमारे घर पर एक सुंदर सी लड़की आई। मैंने जैसे ही उसे देखा तो मुझे उसे देख कर बहुत ही अच्छा लग रहा था। वह किसी हीरोइन से कम नहीं लग रही थी। उसका नाम सौम्या था। जब उसने भी देखा तो वह कहने लगी ठीक है। मैं यहां पर रह लूंगी। मेरी मम्मी ने भी उसे जानकारी ली और कहा कि तुम क्या करती हो। तो वह कहने लगी कि मैं स्कूल में पढ़ाती हूं। मेरी मम्मी ने कहा ठीक है यह तो बहुत ही अच्छी बात है। अब वह हमारे घर पर रहने लगी और हमारे साथ ही वह खाना खाया करते थे।</p>
<p>धीरे-धीरे कुछ और लड़कियां भी हमारे घर पर आने लगी लेकिन मुझे सौम्या बहुत ही पसंद थी और मुझे ऐसा लगता था कि मुझे उससे बात करनी चाहिए थी लेकिन मैं उससे बात नहीं कर पाता। जब भी वह मेरी तरफ देखती तो मैं शरमा जाता था और अपनी नजरें झुका लेता लेकिन वह हमेशा ही मेरी मम्मी से पूछती थी क्या गौतम बात नहीं करता है। मेरी मम्मी कहती की वह थोड़ा कम बात किया करता है। अब सौम्या जब भी घर पर होती तो उसके पास समय होता तब वह मेरे पास बैठने के लिए आ जाती। परंतु मैं फिर भी उससे बात नहीं किया करता था और वह मुझसे पूछने लगती थी कि तुम क्या कर रहे हो। मैं उसे बताता कि मैं कॉलेज कर रहा हूं। अब वह भी मुझसे बहुत बात करती थी और मुझे भी धीरे-धीरे उसके साथ बात करना अच्छा लगने लगा। अब हम दोनों के बीच में बहुत बातें हुआ करती थी। उसे मुझसे बात करना बहुत अच्छा लगता था और मुझे भी बहुत ही अच्छा लगता था उससे बात करना। सौम्या से मेरी अब दोस्ती हो चुकी थी और वह मुझे हमेशा कहती थी कि तुम लड़कों की तरह रहा करो। ऐसे अंकल की तरह बनकर रहोगे तो तुम्हें कोई लड़की पसंद कैसे करेगी। मैं उसे कहता था कि मैं लड़कियों में ज्यादा इंटरेस्ट नहीं रखता। पर वह मुझे कहने लगी कि तुम्हें बदलना तो पड़ेगा ही। अपने लिए तो तुम थोड़ा बदलाव ला ही सकते हो। मैंने उसे कहा कि बात तो सही है पर मैं बदलना नहीं चाहता। वह मुझे कहने लगी कि तुम्हें अपनी जिंदगी में बदलाव तो लाना ही पड़ेगा। मैंने उससे कहा कि मैं कैसे बदलूंगा। वह कहने लगी कि तुम उसकी चिंता मत करो। मैं तुम्हारा हुलिया पूरा बदल कर रख दूंगी।</p>
<p>वह मुझे एक लड़के के पास ले गई उसका नाम सुरेश था। वह बहुत ही ज्यादा स्मार्ट और उसकी बहुत ही अच्छी पर्सनैलिटी थी। जब मैं उससे मिला तो मुझे उससे मिलकर बहुत ही खुशी हुई। वह सौम्या का बॉयफ्रेंड था। मुझे सुरेश ने पूरी तरीके से बदल कर रख दिया और मैं अपने आप को पहचान भी नहीं पा रहा था। अब मैंने जिम भी ज्वाइन कर लिया। और धीरे-धीरे मैं पतला भी होता चला गया और मैं बहुत ही स्वीट हो गया था। मेरे घर वाले भी बहुत ज्यादा खुश हुए। वो कहने लगे कि तुम इतना ज्यादा कैसे बदल गये। मैंने बताया कि यह सब सौम्या ने किया है। उस की बदौलत ही मैं इतना फिट हो पाया हूं। अब हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे और मै अक्सर उसके कमरे में ही रहता था। और वह मुझसे बहुत ही बात किया करती थी और जब उसके पास टाइम होता तो वह मेरे रूम में आ जाती और मुझसे बहुत देर तक बात किया करती थी। जब भी उसे लेट हो जाती थी तो वह मुझे फोन कर दिया करती थी। मैं अपने घर में बता दिया करता था। अब धीरे-धीरे मुझे सौम्या से बहुत लगाव होने लगा और मैं उसकी तरफ आकर्षित हो रहा था। मुझे भी ऐसा लग रहा था कि मुझे सौम्या से प्यार होने लगा है। क्योंकि सौम्या थी ही इतनी सुंदर और वह दिल की भी बहुत ही अच्छी थी। वह मेरा बहुत ही ध्यान रखा करती थी।</p>
<p>मैं एक दिन सौम्या के कमरे में बैठा हुआ था तो मेरे हाथ में उसकी पैंटी लग गई और मैं उसे सुघने लगा। जब मै उसकी पैंटी सूघ रहा था तो वह सामने आ गई। वह कहने लगी तुम यह क्या कर रहे हो मैंने उसे कहा कि तुम्हारी पैंटी को सूघ रहा हूं। वह जैसे ही मेरे पास आई तो मैंने उसे तुरंत ही अपने नीचे लेटा दिया और उसे किस करने लगा। मैं उसे बहुत अच्छे से किस कर रहा था वह भी अब मुझे किस करने लगी। मैंने उसके सारे कपड़े खोल दिया और जब उसका नंगा बदन मेरे सामने था तो मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था। मैंने उसकी योनि को थोड़ी देर तक चाटा और कुछ देर मैंने उसके स्तनों का रसपान किया। मैंने उसकी योनि के अंदर जैसे ही अपने मोटे लंड को डाला तो वह उछल पड़ी और मैं उसे बड़ी ही तेजी से चोदना लगा। मैं उसे इतनी तेज झटके दिए जा रहा था कि उसका बदन हिल रहा था और मैं उसके स्तनों का रसपान किया जा रहा था। वह पूरे मजे में आ गई और मैंने उसे बड़ी तेजी से धक्के देना शुरू कर दिया। मैं उसे इतनी तेज तेज धक्के दे रहा था कि उसे भी अब मज़ा आने लगा वह मेरा पूरा साथ देती। वह मुझे कहती कि तुमने मेरी चूत मार कर बहुत ही अच्छा किया क्योंकि इसे कई दिनों से सुरेश ने नहीं मारा था। अब मैंने और भी तेजी से उसे चोदना शुरू कर दिया। मैंने उसे इतनी तेज तेज धक्के मारे कि उसकी चूत से बड़ी तेज गर्मी निकलने लगी और मेरे लंड से बड़ी तेज गर्मी निकल रही थी और उसी गर्मी के बीच में मेरा वीर्य उसकी योनि में जा गिरा।

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