मामा की बेटी की रस भरी चुदाई

दोस्तो, मेरा नाम परम है और मैं दिल्ली में रहता हूं। मैं हमेशा से ही हिन्दी सेक्स स्टोरी पढ़ा करता था। आज मैं भी आपको अपने साथ हुई एक सच्ची घटना बताना चाहता हूं। यह कहानी एकदम सच है। ये मेरी पहली स्टोरी है. मैंने अन्तर्वासना की बहुत सारी कहानियां पढ़ी हैं. सारी कहानियां एक से बढ़कर एक हैं. मैं वैसी कहानी तो आपको पेश नहीं कर पाऊंगा क्योंकि इस साइट पर उच्च कोटि के लेखक कहानी लिखते हैं.
फिर भी मैं कोशिश करूंगा कि मेरी कहानी में आपको कोई गलती न मिले और आप मेरी कहानी को पूरी तरह से इंजॉय करें. उसके बावजूद भी अगर कोई गलती मिल जाए तो माफ़ कर देना।

अब मैं कहानी पर आता हूँ। मेरी फैमिली में हम 4 लोग हैं। मम्मी-पापा, मैं और एक भाई।

चूंकि कहानी मेरे बारे में ही है इसलिए मैं अपने शरीर के बारे में जरा विस्तार से आपको बताना चाहता हूँ. मैं 28 साल का जवान लड़का हूँ. मेरी हाइट 5.7 इंच है. शरीर बिल्कुल गठीला है और लंड भी काफी दमदार है जो किसी की भी प्यास बुझा सकता है.
यह बात 4 साल पहले की है जब मैं अपने मामा जी के यहाँ घूमने गया था। मेरे मामा जी की फैमिली में 5 मेम्बर हैं. मामा-मामी, उनके 2 बड़े बेटे और एक बेटी जिसका नाम पुष्पिका है. पुष्पिका इस कहानी की मुख्य नायिका है।

पुष्पिका की उम्र उस समय 21 वर्ष थी। उसका फिगर कयामत था. देखने में बिल्कुल ऐश्वर्या राय जैसी लगती है। गुलाबी सा बदन, नीली सी आंखें, भूरे मगर चमकदार बाल (सिर के). चूत के बारे में कहानी में आगे आपको पता लग जाएगा. उसका साइज 32-28-32 के करीब था उस वक्त। जब वो चलती थी तो उसकी गांड की अलग ही शेप दिखती थी।

मेरे मामा हरियाणा में रहते हैं. दिल्ली में रहने वाले ज्यादातर लोगों की रिश्तेदारी हरियाणा में है. मैं नॉर्थ और वेस्ट दिल्ली की बात कर रहा हूं. ईस्ट वाले तो यू.पी. से आकर बसे हुए हैं. तो मुझे हरियाणा में अपने मामा के घर पहुंचते-पहुंचते शाम हो गयी थी. चूंकि दिल्ली में ट्रैफिक बहुत होता है इसलिए जितना टाइम दिल्ली से निकलने में लग जाता है उतने टाइम में तो आदमी चंढीगढ़ पहुंच जाता है.

खैर, जब मैं वहां पहुंचा तो सभी लोग मुझे देख कर बहुत खुश हुए. तभी अन्दर से पुष्पिका भी आ गयी. मैंने आज से पहले उसे कभी गलत नजरों से नहीं देखा था, लेकिन आज उसे देख कर मेरा मन ही बदल गया. अभी तक मैंने उसके खूबसूरत चेहरे को ही देखा था. फिर एक ही बार में उसके पूरे बदन को अपनी नजरों के स्कैनर से स्कैन कर लिया.
एक बार को तो मैं भूल ही गया कि वो मेरी बहन है. मन कर रहा था कि बस यहीं इसको चूस लूं। लेकिन मैंने किसी तरह अपने आप को संभाला।

काफी रात हो गयी थी. सबने खाना खाया, फिर सोने की तैयारी करने लगे. मुझे मेरे बड़े भाई के साथ उनके रूम में ही बिस्तर लगा कर सोने के लिए बोला गया। हल्की ठंड के दिन थे तो मैं और बड़े भाई नीरज एक ही रजाई में लेट गए. हमने नॉर्मली एक दूसरे से बातें की. थोड़ी देर के बाद ही भैया सो गए। लेकिन मेरी नींद तो पुष्पिका के बारे में सोच-सोच कर पता नहीं कहां गायब हो गयी थी.

मुझे उसमें अपनी बहन नहीं बल्कि एक जवान और सेक्सी लड़की नजर आ रही थी। मैं पूरी रात यही सोचता रहा कि कैसे उसे चोदा जाए … उसके बारे में सोच कर लंड ताव में आ गया था. मेरा हाथ मेरी लोअर के अंदर अपने आप ही जाकर उसको खुजलाने और सहलाने लगा. अब आप तो समझ ही सकते हो कि एक बार हाथ लंड पर खुजलाने भर के लिये भी चला जाये तो लंड को खड़ा करके ही छोड़ता है.

लंड खड़ा हो गया तो मैंने लौड़े के टोपे को भी आगे-पीछे करना शुरू कर दिया. पुष्पिका का सेक्सी बदन मेरे ख्यालों में घूम रहा था. तेजी के साथ मैं लंड को हिलाने लगा. जल्दी ही मेरे लंड ने मेरी बहन की कमसिन जवानी के सामने ख्यालों में ही घुटने टेक दिये. उसके चूचों को ख्यालों में चूसा और जब चूत को ख्यालों में नंगी किया तो मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी छूट पड़ी. अंडरवियर गीला हो गया. चूंकि साथ में भैया सो रहे थे इसलिए मैं चुपचाप वैसे ही पड़ा रहा. पुष्पिका की चूत चोदने की प्लानिंग दिमाग में चल रही थी मगर समझ नहीं आ रहा था कि यह सब होगा कैसे? यही सोचते-सोचते मैं कब सो गया, पता ही नहीं चला।

सुबह मेरी बहन पुष्पिका की आवाज से ही मेरी आँखें खुलीं.

पुष्पिका- परम भाई, चाय पी लो, कब तक सोते रहोगे? रात में ठंड लगी क्या आपको जो अब तक सो रहे हो?
मेरी आँखें जैसे ही खुली मैं उसे देखता ही रह गया. वो तभी नहा कर आई थी. उसके बाल गीले और खुले हुए थे. उसने ब्लू कलर का पंजाबी सूट पहन रखा था जिसमें वो बहुत ही मस्त माल लग रही थी. मैं बस उसे देखे जा रहा था. इतने में उसने मुझे दोबारा टोका.

पुष्पिका- क्या हुआ भाई? कहां ध्यान है आपका? इतनी देर से मुझे ही देखे जा रहे हो. लो चाय पी लो वर्ना ये ठंडी हो जाएगी।
मैं- पुष्पिका, भाई कहां है?
पुष्पिका- वो दोनों तो कॉलेज चले गए. आपको जगाया भी था उन्होंने लेकिन आप जागे ही नहीं।
मैं- अच्छा … किसने जगाया था मुझे?
पुष्पिका- भाई ने। अच्छा चलो, आप जल्दी से फ्रेश हो जाओ मैं ब्रेकफास्ट तैयार कर देती हूं आपका. इतना कहकर वो रूम से बाहर जाने लगी.

उसकी गांड का मटकना मुझे पागल कर गया. मैंने चाय पी और फिर बाथरूम में जाकर उसके नाम की मुट्ठ मारी. जिंदगी में पहली बार मुट्ठ मारने में इतना मजा आया मुझे क्योंकि रात को तो मैं थका हुआ था लेकिन रात भर नींद लेने के बाद लंड में एक अलग ही जोश भर गया था और सुबह-सुबह की एनर्जी थी लौड़े में।

तभी मेरी नज़र वहां पड़ी हुई ब्रा और पैंटी पर पड़ी. शायद पुष्पिका नहाने के बाद उन्हें रखना भूल गयी। मैंने पैंटी को उठाया तो उसमें से मुझे मेरी बहन की चूत की मनमोहक खुशबू आ रही थी। मैंने उसकी पैंटी से ही अपने लंड महाराज को रगड़ना चालू कर दिया फिर उसी पर अपना सारा लावा गिरा दिया.

नहा कर मैं बाहर आया तो देखा कि पुष्पिका ने ब्रेकफास्ट बना कर तैयार किया हुआ था।
मैंने घर में देखा कि कोई भी नजर नहीं आ रहा था तो मैंने पुष्पिका से पूछा कि मामा-मामी कहां गये हैं?
पूछने पर उसने बताया कि वो दोनों किसी काम से बराबर वाले गांव गए हैं, शाम तक ही लौटेंगे।
यह सुनकर मेरे मन में बैठा शैतान जाग गया। शैतान वैसे कल रात को ही जाग गया था मगर वह घर वालों के डर से बैठा हुआ था.

अब जब उसको पता चला कि मेरी सेक्सी बहन घर में अकेली है तो वो फिर से खड़ा हो गया. मैंने मन ही मन में सोचा- बेटा परम, यही अच्छा मौका है अगर कुछ करना है तो …
मेरी बहन मुझसे ज्यादा खुली हुई नहीं थी. मगर किसी न किसी तरह बात तो शुरू करनी ही थी. यही सोच रहा था कि बात करूं तो करूं कैसे. फिर अगर बात शुरू हो भी गयी तो बात को सेक्स तक कैसे लेकर जाऊं.

मैंने पुष्पिका से उसकी पढ़ाई के बारे में नॉर्मली पूछा. बात शुरू करने के लिए पढ़ाई की बात करना ही सबसे बेहतर तरीका होता है क्योंकि इससे सामने वाला मना भी नहीं कर पाता है.
मैंने पूछा- तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है और आज क्यों नही गयी कॉलेज?
इस तरह की बोरिंग सी बातें करता रहा मैं पुष्पिका के साथ और उसको मेरी बातों का जवाब देना पड़ रहा था. हम दोनों में बीस मिनट तक बातें चलती रहीं जो बस फालतू ही थी.

फिर मैंने हिम्मत करके उससे पूछा- अच्छा एक बात बता, तू इतनी खूबसूरत कैसे होती जा रही है? कोई बॉयफ़्रेंड है क्या तेरा जो उसकी वजह से इतनी खूबसूरत दिखने लगी?
पुष्पिका- क्या भाई … आप दिल्ली में रह कर भी ये सब पूछोगे? मेरे फ़्रेंड तो हैं लेकिन बॉयफ्रेंड कोई नहीं है. मुझे कोई बनाना भी नहीं है क्योंकि सब मतलबी होते हैं।
उसका जवाब सुनकर मैं मन ही मन खुश हो रहा था कि चलो इस बारे में बात तो स्टार्ट हुई हमारी।

मैं- किस तरह से मतलबी होते हैं, मैं समझा नहीं कुछ?
पुष्पिका- भाई, आपकी गर्लफ्रैंड है?
मैं- पहले थी, अब तो कोई नहीं है? क्यों, तुमने ऐसा क्यों पूछा?
पुष्पिका- बस वैसे ही पूछ लिया. नहीं पूछ सकती क्या मैं अपने भाई से उसके बारे में कुछ? वैसे जब आपकी गर्लफ्रैंड थी तो आपको मेरी बातों का मतलब भी पता होना चाहिए था।
मैं- वैसे पुष्पिका, मैं नहीं समझ पाया इसलिए ही पूछ लिया था मैंने। (मैं समझ गया था कि ये मुझसे अब खुलकर बात कर सकती है बस थोड़ी सी कोशिश करनी होगी)

पुष्पिका- छोड़ो भाई, कहां की बातें ले कर बैठ गए तुम भी।
मैं- अरे बाबा बताओ तो मुझे, तुम्हारी बात का मतलब सच में मुझे समझ नहीं आया. इसलिए पूछ रहा हूँ.

अब वो मेरी तरफ घूर-घूर कर देखने लगी थी. शायद वो भी समझ गयी थी कि मैं उसके साथ ओपन होना चाहता हूँ.
पुष्पिका- आजकल के लड़कों को सिर्फ लड़की के साथ कुछ टाइम बिताना होता है. जब उससे मन भर जाता है तो दूसरी को पकड़ लेते हैं।
मैं- लेकिन मेरी गर्लफ्रैंड के बाद तो मैंने किसी को नहीं देखा।
पुष्पिका- कोशिश तो अपने भी की होगी भाई, ऐसी बात पर मैं तो विश्वास कर ही नहीं सकती कि लड़के की नजर किसी और लड़की पर न जाए.
मैं- हां ये तो तुम सही बोल रही हो, लेकिन मुझे कोई वैसी मिली ही नहीं उसके अलावा।
पुष्पिका- एक बात पूछूँ … बुरा तो नहीं मानोगे?
मैं- पूछो, तुम्हारी बातों का बुरा क्यों मानूँगा?
पुष्पिका- ऐसी कौन सी हूर की परी थी वो वो जो उसके जैसी आपको अब तक नहीं मिली?

मैंने हिम्मत करके पुष्पिका की आँखों में देख कर बोला- तुम्हारे जैसी थी बिल्कुल.
पुष्पिका- क्या मतलब है भाई आपका?
मैं- पुष्पिका वो बिल्कुल तुम्हारी तरह ही सेक्सी थी.
पुष्पिका- मैं बहन हूं आपकी और आप इस तरह के शब्द यूज़ कर रहे हो अपनी बहन के लिए?
मैं- सॉरी अगर तुम्हें बुरा लगा हो तो. लेकिन मैं सिर्फ़ सच बता रहा था. तुम बहुत सुंदर और सेक्सी हो गयी हो पुष्पिका.

लड़की का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने का ये सबसे अच्छा तरीका होता है. उसके हुस्न की तारीफ करते रहो और किसी दूसरी लड़की से उसकी तुलना करते रहो. मैं उन सब बातों में माहिर था. मगर मेरी बातों का असर फिलहाल कुछ उल्टा सा हो गया था.
पुष्पिका गुस्से में- ये बातें भाई-बहन के बीच अच्छी नहीं लगती.
मैं- अगर कोई और बोलता तो क्या तुम्हें तब भी बुरा लगता?

पुष्पिका वहां से उठ कर जाने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया. मुझे पता नहीं क्या होने लगा था. मेरे अंदर की हिम्मत अपने आप ही बढ़ने लगी थी. वैसे ऐसा करने के लिए बहुत हिम्मत की जरूरत होती है. एक तरफ पुष्पिका इसके लिए तैयार नहीं थी मगर फिर भी मैंने उसका हाथ पकड़ लिया था.
मैं बस उसके साथ आज सेक्स करना ही चाहता था किसी भी हालत में। पुष्पिका ने मेरा हाथ छुड़ाने की कोशिश की तो मैं कुर्सी से उठा और अपने हाथों से उसके गालों को पकड़ लिया. वो बस गुस्से से मेरी तरफ देखे जा रही थी.

मैं- पुष्पिका, अगर मैं तुम्हें पसंद करता हूं तो गलत क्या है? अभी थोड़ी देर पहले तुमने ही कहा था कि सब मतलबी होते हैं लेकिन मैं तो तुम्हारा ही भाई हूँ. मैं क्या मतलब निकालूंगा तुमसे! क्या तुम अपनी जवानी को यूं ही बेकार करना चाहती हो? अगर तुम मुझसे नाराज हो तो सॉरी. मैं अभी वापस दिल्ली चला जाता हूं.

ये सुनकर वो कुछ समय के लिए बिल्कुल चुप हो गयी. थोड़ी देर बाद मेरे कान के पास आकर बोली- भाई मेरा भी मन करता है लेकिन किसी को पता न चल जाये इसलिए ख़ानदान की इज्जत की वजह से मैं हमेशा अपने ऊपर कंट्रोल कर लेती हूं। आप मेरे भाई हो इसलिए मैंने आपको ये सब बात बता दी। लेकिन हमारे बीच में ऐसा कुछ नहीं हो सकता. आप मेरे भाई हो और मैं बहन हूं आपकी।

मैंने उसके गाल पर एक किस किया और बोला- अगर तुम कहीं बाहर कुछ करती तो पता भी चल सकता था लेकिन मेरे साथ करने के बारे में किसी को पता भी नहीं चलेगा. सबकी नजरों में हम भाई-बहन हैं. कोई शक भी नहीं करेगा हमारे ऊपर और मैं तुम्हें बहुत खुश रखूंगा।
इतना कहते ही मैं मेन गेट बंद कर आया।

चलते हुए मुझे महसूस हो रहा था कि मेरा लंड मेरी लोअर में तनने लगा है. तनाव में आते हुए लंड के साथ हवस भी बढ़ने लगी थी.

वापस आते ही मैंने उसको अपनी बांहों में भर लिया। वो भी मुझसे एकदम से चिपक गयी जैसे बहुत दिनों की प्यासी हो.
मैंने उसके लिप्स पर अपने लिप्स रख दिये. वो स्मूच करने लगी. अब हम भाई बहन नहीं रह गये थे. लग रहा था कि एक-दूसरे में समा जाएंगे। वो मेरे होंठों को ऐसे पी रही थी जैसे कि खा ही जाएगी. हम दोनों की जीभ एक-दूसरे के मुंह में घूमने लगी. कभी वो मेरे होंठों को चूस लेती तो कभी मेरे गालों पर चूम लेती. वह मुझसे भी ज्यादा गर्म हो गई थी.

15 मिनट तक हम किस करते रहे. उसके बाद हम अलग हुए. अब पुष्पिका के चहरे पर एक अलग ही खुशी झलक रही थी. बिल्कुल भी टाइम खराब न करते हुए वह मुझे खींच कर अपने बेडरूम में ले गयी. अंदर जाकर हमने फिर से एक-दूसरे को किस किया. उसने मेरी टी-शर्ट उतार दी. नीचे से मैंने बनियान पहनी हुई थी जिसको मैंने खुद निकाल दिया. बनियान उतारते ही मेरी चेस्ट नंगी हो गई. फिर मैंने लोअर भी खींच कर नीचे गिरा दिया और अपनी टांगों से निकालते हुए जमीन पर ही छोड़ दिया.
मेरे अंडरवियर में मेरा लौड़ा तन कर पागल हो चुका था. पुष्पिका के नाम की दो बार मुट्ठ मारने के बाद भी उसका जोश आसमान छू रहा था. पुष्पिका थी ही इतनी सेक्सी. मैंने फिर से उसको अपनी बांहों में पकड़ा और उसकी गर्दन को चूमने लगा. मेरा तना हुआ लौड़ा उसकी जांघों के बीच में छिपने का रास्ता ढूंढ रहा था.

कुछ देर तक उसको चूसने के बाद मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किये. उसके शर्ट को उतारा तो नीचे से उसने काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी. हाय … क्या बताऊं … उसके गोरे बदन पर काले रंग की ब्रा में खड़े हुए उसके चूचे देखकर मैं तो पगला गया. मैंने जल्दी से उसकी सलवार का नाड़ा खुलवाकर उसकी सलवार भी उतरवा दी. अब वो केवल ब्रा और पैंटी में रह गई थी.

मैंने उसको अपनी बांहों में कस कर भींचा और उसकी गर्दन को चूमते हुए उसको बेड पर धकेल दिया. उसके ऊपर चढ़ कर उसकी ब्रा के ऊपर से मैंने उसके चूचों को दबाया और फिर उसको पलटी मार कर पेट के बल लेटा दिया. उसकी ब्रा के हुक खोले और उसकी गोरी पीठ को नंगी कर दिया. उसके बालों को हटा कर उसकी पीठ पर अपने गर्म होंठ रख कर उसको चूमा और फिर से उसको सीधी करते हुए उसकी ब्रा को उसके कंधों से निकाल कर अलग कर दिया. उसके गुलाबी रंग लिये निप्पलों का तनाव देख कर मैं उसके चूचों पर टूट पड़ा.

पुष्पिका की चूचियों को जोर से पीने लगा. वो मुझे बांहों में लेकर प्यार करने लगी. मेरा लंड उसकी पैंटी पर रगड़ खा रहा था. उसके बाद मैंने उसके चूचों को चूस कर लाल कर दिया और उसके पेट को चूमते हुए उसकी पैंटी को खींच दिया. उसकी गोरी जांघों से जब उसकी पैंटी निकली तो उसकी हल्के बालों वाली चूत देख कर मैं धन्य हो गया.

मैंने उसकी टांगों को थोड़ी फैलाया और उसकी चूत पर अपने होंठ रख दिये. वो तड़प उठी.
उसकी चूत को चूसते ही बात मेरे काबू से बाहर हो गई. मैंने अपनी गांड उसकी तरफ घुमाई और कच्छे को उतार कर अपना तना हुआ औजार उसके होंठों पर लगा दिया. उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगी. 69 की पोजीशन में वो मेरे ऊपर आ गयी. उसने अपनी चूत को मेरे होंठों पर रख दिया और खुद मेरा लौड़ा अपने मुंह में ले कर आइसक्रीम की तरह चूसने लगी. मुझे तो मानो जन्नत का स्वाद आ रहा था।

इधर मैं उसकी चूत को पागलों की तरह चूस रहा था, उसकी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था. कुछ ही देर में वो झड़ गयी. उसकी चूत से गर्म-गर्म लावा बह चला. मैंने उसका जलता हुआ सारा लावा पी लिया. वो शांत हो गई मगर मेरे लंड को चैन कहां था. मैंने उसकी चूत में उंगली चलानी शुरू कर दी.

वो कुछ देर तो आराम से लेट कर मेरी उंगलियों से चुदती रही. फिर पांच मिनट के बाद उसके बदन में फिर से हरकत होने लगी. वो बोली- परम भाई, अब मुझे चोद दो प्लीज … अब मैं आपका लंड अपनी चूत में लेना चाहती हूँ।

मैंने अपना ‘सामान’ उसकी चूत पर रखा और उसके चूचों को पीने लगा. उसकी चूत पर लंड टच होते ही उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया. वो मेरी पीठ को सहलाने लगी. मैं हल्के से उसकी चूत पर अपने लंड का टोपा रगड़ रहा था. मेरे लंड का बुरा हाल हो गया था पानी छोड़कर. पूरा लंड पच-पच करने लगा था. फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे और उसकी चूत में एक धक्का दे दिया.

आधा लंड ही गया था कि वो चीख पड़ी. उसने मेरे होंठों को काट लिया मगर मैंने शरीर का भार उस पर डालते हुए उसकी चूत में लंड को घुसाना जारी रखा. धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया. वो मेरी पीठ को नोंचने लगी. शायद पुष्पिका को दर्द हो रहा था. लेकिन वो मेरे लंड को अपनी चूत में एडजस्ट करने की कोशिश कर रही थी.

जब वो थोड़ी नॉर्मल हुई तो मैंने धीरे-धीरे धक्के देने शुरू कर दिए. अब वो मेरा पूरा साथ दे रही थी. उसके मुंह से आनंद की आवाजें निकलने लगीं थीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… भाई … मेरे भाई … मेरी चूत को चोद दे … आह … मजा आ रहा है. फक मी हार्ड भैया.

पूरा कमरा उसकी सीत्कारों से गूंजने लगा. मेरे आनंद का तो कोई ठिकाना ही न था. उसकी टाइट चूत में लंड को पेलता हुआ मैं स्वर्ग में पहुंच चुका था. मेरे धक्के पर उसकी गांड उछल कर मेरी तरफ आती और फत्थ की आवाज हो जाती. ऐसे बीस मिनट तक वो चूत को धकेलती रही और मैं लंड को.
मैंने कहा- मेरा निकलने वाला है, कहां निकालूँ?
उसने बोला- भैया मेरे अंदर ही निकाल दो. आपका माल मुझे अपने अंदर लेना है. आज आप पूरा सुख दे दो मुझे.

दो-तीन जोरदार धक्कों के बाद मैंने सारा लावा उसकी चूत में ही निकाल दिया।
हम काफी देर तक एक-दूसरे के उपर नंगे ही पड़े रहे.

10 मिनट हुए थे कि इतने में ही गेट पर किसी के आने की आवाज आई. हमने जल्दी से कपड़े पहने. पुष्पिका ने कपड़े अपने बदन पर पहनने में मुझसे से भी ज्यादा फुर्ती दिखाई और फटाफट गेट खोलने के लिए चली. तब तक मैंने भी अपनी लोअर और टी-शर्ट डाल ली थी. अंडरवियर को जेब में ठूंस लिया और बाथरूम में घुस गया.
बाहर आकर देखा तो भैया कॉलेज से आ गए थे. मैं वहीं बेड पर बैठ गया और वो फ्रेश होने बाथरूम में चले गए. पुष्पिका ने उठते हुए मेरे लंड पर हाथ फेरा और मेरी गर्दन पर किस करते हुए किचन में चली गई. उसके बदन में आज खुशी की अलग ही लहर दिखाई दे रही थी.

फिर उसके बाद जब भी मैं मामा के घर जाता और हमें मौका मिलता तो हम दोनों एक-दूसरे को खुश कर दिया करते थे. यह सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा और आज भी चल रहा है.

आप सबको यह कहानी पसंद आई हो तो कमेंट करके बताना और मुझे मेल भी करना. यह मेरी पहली स्टोरी थी. अगर कोई गलती हो गई हो तो मैं फिर से आप लोगों से माफी चाहूंगा. धन्यवाद.

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