कमसिन बदन मेरे इंतजार मे था

मेरा नाम राजेश है मैं अहमदाबाद का रहने वाला हूं। मेरी अमदाबाद में शॉप है। यह शॉप पहले से मेरे पिताजी देखते थे लेकिन जब से उन्होंने दुकान में आना कम किया है तब से मैंने ही काम शुरू कर दिया। वह मुझे कहने लगे कि बेटा अब तुम्हे ही आगे काम संभालना है और इस काम में तुम जितना मेहनत करोगे उतना ज्यादा अच्छा है। मैंने काफी सालों की मेहनत से इस दुकान को अच्छा चलाया है। मेरी दुकान पर जितने भी कस्टमर आते थे मैं उनके साथ बड़े अच्छे से व्यवहार करता हूं और वह लोग हमेशा ही मुझ से सामान खरीद कर लेकर जाते हैं। मेरे पिताजी के भी काफी पुराने कस्टमर हैं वह भी मेरे पास ही आते हैं। मैं हर साल घूमने का प्लान बनाता हूं और इस बार मैं सोचने लगा कि क्यों ना अपने मम्मी पापा को भी साथ में ले जाया जाए। मैंने अपनी पत्नी सीमा से बात की और कहा कि मैं सोच रहा हूं इस बार मम्मी पापा को भी अपने साथ घूमने के लिए ले जाया जाए। वह कहने लगी ठीक है यदि आप ऐसा कोई प्लान बना रहे हैं तो वह लोग भी हमारे साथ चलेंगे तो उन्हें भी बहुत खुशी होगी।</p>

<p>मेरी पत्नी पूछने लगी लेकिन हम लोग घूमने कहां जाएंगे? मैंने उसे कहा हम लोग केरला जाने वाले हैं। मैंने सुना है कि वहां पर काफी अच्छा है और अभी कुछ दिनों पहले दिनेश का परिवार भी वहां गया था। दिनेश मेरे मामा का लड़का है। मैंने भी सारी तैयारियां कर ली थी और मेरी पत्नी तो लगातार दिनेश की पत्नी से संपर्क में थी और वह उससे पूछ रही थी आप लोग कहां कहां घूमने गए थे? मेरी पत्नी ने तो सारा नक्शा ही अपने दिमाग में बना लिया और वह मुझे कहने लगी कि हम लोग यहां घूमने जाएंगे। मैंने रीमा से कहा कि तुम सब्र रखो हमें वहां पहुंचने तो दो। तुमने तो लगता है हमें घर बैठे ही सारा केरला घुमा दिया। हम लोग फ्लाइट से जाने वाले थे और जिस दिन हम लोग घर से निकले उस दिन हम सब लोग बहुत ही एक्साइटेड थे। मैं तो इस बात से खुश था कि मेरे साथ मेरे मम्मी पापा भी आ रहे हैं। मेरे पापा मम्मी पहली बार ही फ्लाइट में बैठ रहे थे इसलिए उन्हें थोड़ा डर लग रहा था परंतु मैंने उन्हें कहा कि आप डरिए मत ऐसा कुछ भी नहीं होगा और जब वह फ्लाइट में बैठे तो उन्हें बहुत अच्छा लग रहा था। उसी फ्लाइट में एक लड़की थी। उसने चश्मे पहने हुए थे। वह बार बार मेरी तरफ घूर कर देख रही थी। जब मैं अपनी सीट में बैठ गया तो वह मुझसे पूछने लगी क्या यह आपके मम्मी पापा हैं? मैंने उसे कहा हां यह मेरे मम्मी पापा हैं।</p>
<p>वह कहने लगी आप अपने माता पिता का कितना ध्यान रखते हैं। आजकल कोई अपने माता पिता का इतना ध्यान नहीं रखता। मैंने उससे कहा क्यों तुम ऐसा क्यों कह रही हो? वह कहने लगी मैं एक सामाजिक संस्था से जुड़ी हूं और वहां पर मैं बुजुर्गों की सेवा करती हूं। वहां पर कई ऐसे बुजुर्ग लोग आते हैं जिनको कि उनके बच्चे घर से निकाल देते हैं। मैंने उससे पूछा तुम कहां रहती हो? वह कहने लगी मैं यही अहमदाबाद में रहती हूं लेकिन अक्सर मैं काम के सिलसिले में इधर-उधर जाती रहती हूं। उसने मुझसे हाथ मिलाया और अपना नाम बताया। उसका नाम रोहिणी है। रोहणी मुझे जाने लगी आप कहां जा रहे हैं? मैंने उसे कहा मैं केरला जा रहा हूं। वह कहने लगी मैं भी कुछ दिनों के लिए वहीं पर हूं। हम लोग वहां पर एक सेमिनार करवाने वाले हैं। मैंने कहा चलो यह तो अच्छी बात है। अगर तुम्हें समय मिले तो तुम मुझे मिलना। मैंने उसे अपने दुकान का विजिटिंग कार्ड दे दिया। वह कार्ड देखते ही मुझे कहने लगी क्या आप कि ज्वेलरी की शॉप है? मैंने उसे कहा हां मेरी ज्वेलरी की शॉप है। कभी तुम आना जब तुम्हें समय मिले। वह कहने लगी जरूर क्यों नहीं। मैं पक्का आऊंगी और अब हम लोग पहुंच चुके थे। मैं जिस होटल में रुका था वहां का स्टाफ बहुत ही अच्छा था और वहां के मैनेजर से तो मेरी दोस्ती ही हो गई थी। मुझे कोई भी छोटी मोटी चीज की जरूरत होती तो मैं उससे ही पूछ लेता और वह मेरी मदद कर देता। हम लोगों ने केरला में काफी इंजॉय किया। एक दिन मेरे फोन पर रोहणी का फोन आया। वह कहने लगी सर यदि आपके पास वक्त हो तो आप हमारे सेमिनार में आ जाइए। मैंने सोचा मैं तो यहां घूमने आया हूं मैं उसके सेमिनार में जाकर क्या करूंगा लेकिन उसने मुझे बुला ही लिया।</p>
<p>मैंने अपनी पत्नी से कहा कि तुम मम्मी-पापा का ध्यान रखना मैं कुछ समय बाद आता हूं। यह कहते हुए मैं जब रोहिणी के बताए पते पर पहुंचा तो वहां पर वह सेमिनार करवा रही थी और उसके साथ में काफी लोग भी थे। जब सेमिनार खत्म हुआ तो मैंने उसे कहा तुम तो बड़ी ही समझदार हो और तुमने जिस गर्मजोशी से आगे से बोलना शुरू किया मुझे बहुत अच्छा लगा। वह कहने लगी आप भी हमारे साथ जुड़ जाइए। मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हें अहमदाबाद में मिलूंगा और उसके बाद मैं इस बारे में तुमसे बात करूंगा। मैंने उसे कहा यदि आज तुम फ्री हो तो शाम को तुम हमारे साथ ही डिनर पर आ जाओ। वह कहने लगी ठीक है मैं शाम को आ जाऊंगी लेकिन मेरे पास कोई कन्वेंस नहीं है। मैंने उसे कहा मैं तुम्हें लेने के लिए शाम के वक्त आ जाऊंगा। उसने मुझे अपने होटल का एड्रेस दे दिया था शाम के वक्त जब मैं उसके होटल में गया तो मैं उसके रूम में पहुंच गया। जैसे ही मैं उसके रूम में पहुंचा तो वहां पर मुझे कोई दिखाई नहीं दे रहा था।</p>
<p>मैं रूम में ही बैठा था जैसे ही रोहणी बाथरूम से बाहर निकली तो वह पैंटी और ब्रा में थी उसने पिंक कलर की पैंटी ब्रा पहनी थी जिसमे उसका बदन बडा ही अच्छा लग रहा था। उसके बदन को देखकर मेरा लंड एकदम तन कर खड़ा हो गया मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाया शायद वह भी मुझे देखकर डर गई थी और वह अपनी जगह पर ही खड़ी हो गई उसका बदन गिला था। मैंने जब उसकी कमर पर अपने हाथ को रखा तो मेरा लंड और भी ज्यादा बड़ा होने लगा। मैंने उसके नरम होंठों को जब चूसना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा मैं उसके होठों को बड़े अच्छे से चूस रहा था और मेरा लंड भी एकदम तन कर खड़ा हो गया। मैंने उसकी पैंटी और ब्रा को उतार दिया। जब मैंने उसके स्तनों को अपने हाथों से दबाया तो वह पूरी तरीके से गर्म हो गई और मैंने उसके स्तनों को काफी देर तक चूसा। जब मैंने उसकी योनि को चाटना शुरू किया तो उसे मजा आ गया मैं उसे उठाते हुए बिस्तर पर ले गया और मैंने उसे लेटा दिया। मैंने उसके स्तनों पर अपने लंड को रगडना शुरू कर दिया। जब उसने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ते हुए अपने मुंह के अंदर लिया तो मुझे और भी ज्यादा मजा आ गया। वह मेरे लंड को सकिंग करने लगी और बड़े अच्छे से चूस रही थी जब वह अपने गले तक मेरे लंड को लेती तो मुझे और भी ज्यादा मजा आ जाता मैंने भी उसके गले तक अपने लंड को डालना शुरू कर दिया था। जब मैंने उसकी योनि पर अपने लंड को लगाया तो मचलने लगी। मैंने उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया मैंने भी धीरे धीरे अपने लंड को उसकी योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया। जब मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो मुझे बहुत ही अच्छा महसूस होने लगा और उसे भी मजा आ गया उसके चेहरे पर एक अलग ही खुशी के भाव थे। वह मुझे कह रही थी बस अब तो आप मुझे पेलते रहो मैंने भी बड़ी तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिए। उसकी योनि इतनी ज्यादा टाइम थी कि मुझे उसे चोदने में बड़ा मजा आता। मैंने उसकी लंबी टांगों को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और बड़ी तेजी से उसकी चूत मारी। मैंने जब अपनी जीभ उसके स्तनों पर लगाई तो मुझे बहुत मजा आ गया मैंने उसे बड़ी तेजी से पेलना शुरू कर दिया। मैं उसे पूरे जोश में चोद रहा था और वह भी अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी। वह मुझे कहने लगी आप ऐसे ही मुझे धक्के देते रहो। मैंने उसकी चूत का भोसड़ा बना कर रख दिया था जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने रोहणी के मुंह पर अपने लंड को लगा दिया। उसने मेरे लंड को अपने मुंह से चूसना शुरू कर दिया और जैसे ही मेरा वीर्य उसके मुंह के अंदर गिरा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ।</p>

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