मैं बन गयी ऑफीस की रंडी

हेल्लो फ्रेंड्स,
मैं शेफाली आज आपके लिए एक बहुत ही मस्त कहानी ले कर आई हूँ. पर मेरी कहानी शुरू करने से पहले मैं आपको अपने बारे मे काफ़ी कुछ बताना चाहती हूँ. मैं बहुत ही सुंदर हूँ और मैं मॅरीड भी हूँ.

मैं बहुत ही सुंदर तो हूँ ही पर मेरे नैन नक्श उस्स से भी ज़्यादा सुंदर है.मैं आज अपनी लाइफ का बहुत ही अच्छा पार्ट बताने जा रही हूँ जो की मैं ज़िंदगी मे कभी भी भूल न्ही सकती हूँ.

चलो अब ज़्यादा समय ना लगाते हुए मैं आपको अपनी कहानी पर ले कर चलती हूँ. पर उससे पहले मैं आपको अपने फिगर के बारे कुछ बताना चाहती हूँ. मेरा फिगर बहुत ही कमाल का है. 32-28 -30 का है मेरा फिगर और बहुत ही कमाल का है .

ये बात आज से कुछ समय पहले की है. जब मैं नयी नयी बड़ी हुई थी यानी की मेरे उपर नयी नयी जवानी चड़ी थी तो कई लड़के मेरे उपर मरते थे. मैं बहुत ही पागल हुआ करती थी. क्योकि ये कीड़ा मेरे अंदर भी था की मैं किसी से बात करू और अपने दिल की बात बताकर खुद को चुदवा दू.

मैं पागलो की तरह लड़को से बात करने लग गई थी. मुझे ये सब बहुत ही अजीब लगता था पर साथ ही साथ मज़ा भी आया करता था.

बस फिर ऐसे ही टाइम बीतता चला गया. मैने स्कूल टाइम मे और ईवन तक कॉलेज टाइम मे भी बहुत ही सारे लड़को से बात करी और खूब मस्ती भी करी.

फिर ऐसे ही मेरे घरवालो ने मेरे बड़े होने पर मेरी शादी भी करदी. मैं अभी शादी करना न्ही चाहती थी पर फिर भी मुझे करनी पड़ी थी. मैं बहुत ही उदास भी थी की अभी से ही इतनी जल्दी मेरी शादी करदी.

मेरे हज़्बेंड का नाम विशाल है और उनका इम्पोर्ट एक्सपोर्ट का काफ़ी बड़ा बिज़्नेस है. मैं अब अपने पति के साथ बिज़ी हो गई थी. शादी होते वक़्त तो बुरा लग रा था की आख़िर ये क्या हो गया पर बाद मे धीरे धीरे सब ठीक होता चला गया. मैं उनके साथ अब काफ़ी खुश रहने लगी थी.

पहले तो नयी नयी शादी मे रोज रात को अच्छे से चुदाई हुआ करती थी. मैं पागलो की तरह चुद्वाति थी. मैं तो बस चाहती थी की मेरा पति मुझे कच्चा ही चबा डाले और ऐसे ही करता रहे. मुझे अपने पति साथ सेक्स करने मे बहुत मज़ा आता था पर फिर कुछ टाइम बाद सेक्स अब बहुत ही कम होने लग गया.

क्योकि वो अब बिज़ी होने लग गये थे और मैं भी उनके साथ उनके ऑफीस मे काम संभालने लग गई थी. मैं बहुत ही खुश थी की मैं अपने पति के साथ उनके ऑफीस मे ही कुछ काम भी संभालूगी. उधर उन्होने मेरी एक सेक्रेटरी भी रख दी ताकि मुझे कोई दिक्कत ना हो.

फिर ऐसे ही चलता रहा और फिर उसके बाद उनका बाहर का भी टूर लगना शुरू हो गया. मैं ऐसे ही उनके आने का इंतेज़ार किया करने लग गई. पर अब धीरे- धीरे अब इंतेज़ार करना बहुत ही मुश्किल लगने लग गया था.

अब वो मुझे टाइम भी न्ही देते थे यानी की मैं चुदाई के लिए तड़पने लग गई थी. पर फिर भी मैं मूली या गाजर से काम निपटा लेती थी.फिर एक दिन ऐसे ही ऑफीस मे मेरी एक बहुत ही पुरानी फ्रेंड आ गई. जिसको देख कर मैं बहुत खुश हो गई और तो और बहुत ही पागलो की तरह बात करने लग गई.

हमारी बहुत ही अच्छी दोस्ती थी और तब मैने अपनी सेक्रेटरी को बुला कर उसे बियर ओर कुछ स्नॅक्स छुपा कर लाने को काहा और फिर हम बियर पीने लग गये. ऐसे ही काफ़ी पुरानी बाते भी बाहर आ गई और कुछ लड़को की बाते भी हो रही थी. जिससे की मेरी चुत भी तड़पने लग गई.

फिर थोड़ी देर बाद वो चली गई. पर उसके जाने के बाद मैं पागल हो गई थी. क्योकि मेरे उपर चुदाई का भूत सवार हो गया था. अब ऐसे ही फिर मैने बाहर के स्टाफ से दिनेश को बुलाया और उसको काहा की मेरे साथ पेग लगा ले. उसने पहले तो मना किया और मेरी बात सुन कर मान कर मेरे पास बैठ गया.

मैं बहुत ही खुश हो गई और फिर हम दोनो बाते करने लग गये और इसी बीच वो मेरी इच्छा को जान गया. मैं बहुत ही खुश थी और फिर उसके बाद तब बियर ख़तम हो गई तो उसने काहा की बाहर से पंकज को बुला लेते है.

फिर इतने मे वो आ गया और उसे काहा की बियर ले आ और फिर दिनेश ने मेरी पेंट उतार दी. हम दोनो पहले ही जोश मे आ गये थे और फिर धीरे धीरे करके हम दोनो नंगे हो गये. मैने उसके लंड को हाथो मे ले लिया और फिर उसके बाद उसे मूह मे ले कर चूसने लग गई.

मैं बहुत ही पागल हो रही थी और उसे तो बहुत ही मज़ा आरा था. मैं इसलिए पागल हो रही थी क्योकि मैं काफ़ी टाइम बाद लंड को अंदर लेने वाली थी. फिर मैने उससे काहा की चूत को चाट और फिर उसके चाटने के बाद मैने उसे लंड डालने को काहा तो उसने डाल दिया और मुझे चोदने लग गया.

इतने मे पीछे से पंकज भी आ गया और ये देख कर पहले वो हैरान रह गया और फिर उसने भी अपने कपड़े उतार डाले और लंड को मेरे हाथो पर दे डाला. मैं बहुत ही खुश हो गई और उसे चूसने लग गई.

फिर उधर दिनेश ने मेरी चूत मे अपना पानी छोड़ दिया और फिर उसके बाद मेरे पीछे पंकज आ गया और उसने मेरी गांड मे लंड दे डाला.मैं बहोट ही मज़े से चींख रही और टाइट गांड होने की वजह से उसका पानी गांड मे ही छूट गया और फिर दोनो मेरे उपर ही लेट गये

फिर उसके बाद ऐसे ही मैने उनके दोनो लंड को एक एक करके चूसा और खूब मज़ा भी लिया. मुझे दोनो के लंड को चूस कर बहुत ही मज़ा आ रा था और मन कर रहा था की अभी और चुद जाउ. पर अभी दोनो मे इतनी हिम्मत न्ही थी की मुझे और भी चोद डाले

फिर ऐसे ही मैने टाइम की तरफ देखा तो टाइम भी काफ़ी हो गया था और मैं उन दोनो से बहुत खुश भी थी. क्योकि उन्होने मेरी चूत की प्यास को कुछ कम किया था. इसी तरह अब जब भी मेरे पति टूर पर जाते तो मै उन्न दोनो से ज़रूर चुदति थी.