नटखट साली पूजा की मस्त चुदाई

हेल्लो दोस्तो. मेरा नाम रमण है .आप सब के लिए एक मस्त कहानी ले कर आया हूँ. ये कहानी मेरे और मेरी साली के बीच उसके साथ मेरे पहले सेक्स की है. आप सब को पता ही है, की जीजू और साली मे कितनी मस्त मस्ती होती है.

तो ज़रा सोचिए दोनो के बीच कितना मस्त सेक्स होगा. तो चलिए फिर टाइम क्यो खराब करते है. सीधा अपनी कहानी पर आते है.

आज मेरी शादी को 13 साल हो चुके है. मेरी शादी 24 साल की उम्र मे अंकिता से हुई थी. उस टाइम उसकी उम्र 19 साल की थी. सच मे मैं उससे शादी करके अपने आप को काफ़ी लकी समझ रहा था. क्योकि 19 की अंकिता एक कवली लड़की थी.

मैने ही उसकी सील को तोड़ा था. वो बहुत ही सेक्सी और मस्त माल है. पर आज मैं अपनी वाइफ की न्ही अपनी साली की बात करने जा रा हूँ. मैं लकी इस लिए भी था, क्योकि मेरी एक साली भी थी. उसका नाम पूजा है, जब मेरी शादी हुई तो उसकी उम्र सिर्फ़ 16 साल थी. वो उस टाइम 10त क्लास मे थी.

जैसे की साली जीजू मे मस्ती होती है. वैसे ही मस्ती हम दोनो मे भी खूब होती थी. सच कहूँ तो मैं अपनी साली का पहले दिन से दीवाना था. क्योकि उसका 18 साल की उम्र मे जो फिगर उभर कर बाहर आया था. वैसा फिगर आज तक मैने कभी किसी लड़की का न्ही देखा.

उसका फिगर कुछ ऐसा था 33-26-28 था. अब आप खुद ही सोच सकते हो, की अगर किसी लड़की का इतना मस्त फिगर हो तो वो कितनी मस्त दिखती होगी. इसलिए मैं उसका शुरू से ही दीवाना तो था पर जब वो 18 साल की हुई तो मुझे उससे प्यार हो गया था.

अब वो मेरे घर अब काफ़ी आने जाने लग गई थी. उसके आने पर घर का माहोल ही कुछ और बन जाता था. उसको देख कर मैं काफ़ी खुश हो जाता था और पूजा भी मुझे देख कर खुश हो जाती थी.

हम दोनो अकसर एक खेल खेलते थे. वो है गुद-गुद्दि वाला खेल, मैं अकसर पूजा के पेट, बाजू के बीच उसकी गरदन और बूब्स के आस पास उसे गुद-गुद्दि करता था. जिससे वो हस हस कर पागल हो जाती थी.

पर मुझे इसमे बहुत मज़ा आता था. क्योकि इसी बहाने उसके कोमल जिस्म को छू लेता था. मुझे सच मे इसमे बहुत मज़ा आता था. मुझे इस बात का पता चल गया था. की मुझे पूजा लाइक करती है, क्योकि जब मैं उसे इधर उधर छूता था, तो वो मुझे कुछ न्ही कहती थी.

फिर मेरा एक लड़का हो गया, इसी बीच पूजा कुछ दिन मेरे घर काम करने के लिए आई थी. कसम उन दीनो मैने उसके साथ बहुत मस्ती करी. मैने उसके गालो को अच्छे से चूमा.

थोड़े टाइम बाद मुझे अपने ससुराल जाना पड़ा . उस दिन पूजा मुझे देख कर काफ़ी खुश हो रही थी. उसे देख कर मैं भी काफ़ी खुश होरा था. रात को सब टीवी देखते थे, और पूजा किचन मे सबके लिए डिन्नर बना रही थी.

मैं उससे मिलने के लिए तड़पता रहता था. मैं और मेरा लंड ये ही चाहता था की मैं ही उसकी सील को तोड़ूं. इसलिए मैं उसके पास ज़्यादातर टाइम बिताता था. जब वो उसने 12वी पास करी तो वो मेरे घर के पास वाले कॉलेज मे स्टडी के लिए वाहा अड्मिशन ले लिया.

मैं पानी पीने के लिए किचन मे गया, मैने देखा पूजा ने येल्लो कलर का टाइट सूट डाला हुआ था. कसम से साली कयामत लग रही थी. उसके बूब्स बाहर आने को मानो मचल रहे थे. मैं धीरे से उसके पास गया, और उसके पीछे खड़ा हो कर उसके दोनो बूब्स अपने हाथ मे लेने लग गया

उसके बूब्स सच मे काफ़ी सॉफ्ट थे, मैं धीरे धीरे उसके बूब्स को मसलने लग गया. पूजा ने मुझे कुछ न्ही खा, मैने महसूस किया की उसकी साँसे ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे हो रही थी. मैं समझ गया की पूजा गरम हो रही है, मुझे अब इसे और गरम करना चाहिए.

इसलिए मैं पीछे से उसे अच्छे से चिपक गया. मेरा लंड उसकी मोटी सी गांड की दरार मे जा कर फस गया. मैं अपने होंठो से धीरे धीरे उसकी गरदन को धीरे धीरे चूमने लग गया. इससे पूजा और ज़्यादा मेरे काबू मे आने लग गई.

फिर मैने अपने होंठो से उसके कान पकड़े और धीरे धीरे उसके कान को अपने होंठो से चबाने लग गया. अब तो पूजा पागल हो गई थी, उसने अपना काम वही छोड़ दिया. उसकी साँसे अचानक से बहुत तेज़ होने लग गई. और ज़ोर ज़ोर से उसके मूह से मस्ती से भरी सिसकारियाँ निकलने लग गई.

तभी मुझे एहसास हुआ की कोई आ रहा है. इसलिए मैं पूजा से दुर हो कर उससे बातें करने लग गया. अगले ही पल मेरी सासू मा किचन मे आ गई. मेरी जान मे जान आई, मैने सोचा अगर आज फस जाता तो लेने के देने पड जाते.

इसलिए उसके बाद मैं पूजा के करीब न्ही गया. अगले दिन जब मैं अपने घर वापिस जाने लगा तो पूजा भाग मेरे पास आई और मुझे अपनी बाहों मे भर लिया. उसने मेरे कान मे धीरे से कहा.

पूजा – जीजू आप बहुत अच्छे हो.

मैं – सच मे ?

पूजा – हा जीजू आई लव यू सो मच.

मैं – आई लव यू टू मेरी प्यारी साली.

पूजा – मैं जल्दी ही घर आउंगी अब.

मैं – मुझे तेरा इंतज़ार रहेगा.

फिर मैं अपने घर आ गया, मैने पूजा मे आग लगा दी थी. अब उसे शांत करवाने के लिए पूजा कुछ भी करने को तयार होगी मेरे साथ ये मुझे अच्छे से पता था. घर गया तो मुझे पता चला की अंकिता ने अपने लिए एक नयी जॉब देख ली है.

मेरे घर से 5 किलो मीटर दूर एक स्कूल है, उसने अंकिता को टीचर की जॉब मिल गई थी. साथ ही हमारे बच्चे की स्टडी वाहा फ्री होनी थी. ये मुझे एक अच्छा ऑफर लगा इसलिए मैने अंकिता को उस जॉब के लिए हा कर दी.

अब अंकिता रोज 8:15 पर आराम से घर से निकल जाती थी और साथ ही बच्चे को भी ले जाती थी. मेरा ऑफीस 11 बजे होता था, इसलिए मैं लेट ऑफीस जाता था. एक दिन मैं शाम को अपनी मस्ती मे घर आया. घर के बाहर से ही मुझे अंदर पूजा की आवाज़ आती सुनाई दी, मैं समझ गया की आज पूजा घर पर आई हुई है.

मैं तभी घर से वापिस गया और उसकी पसंद का सारा खाने का समान ले कर घर आया. जैसे ही मैं अंदर आया पूजा मेरे गले से लग गई, मैं अपनी साली का इतना प्यार देख कर खुश हो गया. फिर मैने पूजा को उसके खाने का समान दिया, जिससे वो और भी खुश हो गई.

फिर रात को करीब 10 बजे तक मैने पूजा से बात करी. फिर मैं अपनी वाइफ के साथ सो गया. पूजा अलग रूम मे सो रही थी. सच कहूँ तो मुझे नींद ही न्ही आ रही थी. मैं बस ये ही सोच रहा था, की कैसे मैं पूजा अपनी साली की चूत को मारू.

सुबह मेरी आँखे 7 बजे खुली, मैं उठा तो मैने देखा की अंकिता उपर छत पर कपड़े डालने के लिए गई है. मैं जल्दी से उठा और पूजा के रूम मे गया, वो बेड पर पिंक कलर की मॅक्सी डॉल कर सो रही थी. सच मे साली वो बहुत मस्त लग रही थी.

मैं उसके पास तो मैने देखा की उसके गोरे गोरे बूब्स बाहर आ रहे थे. मैं अपना हाथ धीरे से उसके नंगे बूब्स पर रखा और धीरे धीरे उसके बूब्स को मसलने लग गया. पूजा अब तक जाग चुकी थी, पर वो जान बुझ कर सोने की आक्टिंग कर रही थी.

असल मे वो सोते हुए भी मज़ा ले रही थी. फिर मैने उसके बूब्स मॅक्सी से पूरे बाहर निकाल दिए. बूब्स बाहर आते ही वो जाग गई और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रोकते हुए बोली.

पूजा – जीजू कोई आ जाएगा प्लीज़.

मैं – तुम फिकर ना करो, तेरी दीदी उपर छत पर गई है. वो थोड़ी देर तक आएगी.

पूजा – तो अभी आपका क्या इरादा है.

मैं – मेरा इरादा तो इन्हे चूसने का है. पर पहले तुम ये बताओ की तुमने कभी अपने बूब्स चुस्वाए है.

पूजा – हा मेरी एक सहेली है, हम दोनो एक रात एक दूसरे के बूब्स अच्छे से चूसे थे.

मैं – कोई बात न्ही आज मैं चुसूंगा.

पूजा – ठीक है जीजू चूस लो.

फिर मैं पूजा के दोनो बूब्स काफ़ी अच्छे से चूसे 10 मिनिट तक चूसे. उसकी हालत इतने मे ही खराब हो गई थी, उसका चेहरा लाल हो गया था. उसके मूह से आहह आहह की आवाज़ें आने लग गई थी.

तभी मुझे अंकिता के आने की आवाज़ आई, मैं और पूजा तभी अलग हो कर बैठ गये. फिर कुछ ही देर मे अंकिता ने घर के काम किए और बच्चे को लेकर अपने स्कूल मे चली गई.

अब पूरे घर मे मैं और पूजा अकेले थे. अंकिता के जाते ही पूजा भाग कर मेरे पास आई और मेरे होंठो को ज़ोर से पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गई. कसम से मज़ा आ गया था, उसके साथ किस्सिंग करने मे.

मेरे हाथ उसकी गांड पर चल रहे थे, मैं उसे गोध मे उठा कर बेडरूम मे ले गया. वाहा हम दोनो जाते ही पूरे नंगे हो गये. मैने पूजा के पूरे जिस्म को नीचे से उपर तक पूरा चूमा. फिर पूजा ने मेरा लंड अपने हाथ मे लिया और बोली.

पूजा – जीजू आप का लंड पूरा मस्त है. आज इस लंड से मुझे आप अपनी पूरी वाइफ बना लो. वैसे भी मैं आपकी हाफ वाइफ तो हूँ ही.

मैं – पूजा तू तो मेरी जान है. आज देख केसे मैं तुझे अपनी रानी बनाता हूँ. अच्छा वैसे कभी चूत मे लंड लिया है तूने ?

पूजा – न्ही जीजू.

मैं – मतलब आज मैं तेरी चूत की सील तोड़ूँगा. मज़ा आ जाएगा आज तो थोड़ा दर्द होगा प्लीज़ सहन कर लियो ओके.

पूजा – ठीक है, पर पहले मेरी चूत को प्यार तो करो.

ये सुन कर मैं मस्त हो गया, मैं पूजा की दोनो टाँगे उठा कर अपना मूह उसकी चूत पर रखा और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत को चूसने लग गया. उसकी कवली चूत क्या कमाल की थी. उसका स्वाद मुझे बहुत ही पसंद आया.

मैने करीब 20 मिनिट तक पूजा की चूत को अच्छे से चूसा, और फिर मैने अपना लंड उसकी चूत मे धीरे धीरे डालना शुरू कर दिया. शुरू शुरू मे पूजा को काफ़ी दर्द हुआ. वो ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी, पर उसकी कोई सुनने वाला न्ही था.

उसकी चूत से खून निकल राहा था, पर मुझे मज़ा बहुत आ रहा था. उसकी चूत को मैने बहुत चोदा. चुदाई मे टाइम का पता न्ही लगा की कब 11 बाज गये. मैने अपने ऑफीस मे फोन करके आज की छुट्टी ले ली. जिससे पूजा और खुश हो गई.

फिर हम दोनो साथ मे नहाए और फिर पूजा ने मेरा लंड चूस चूस कर उसका पानी पिया. उस दिन मैने 2 बजे तक पूजा की 4 बार जम कर चुदाई की. आज वो मेरी वाइफ बनी हुई है. उसका किसी और से शादी करने का मन न्ही करता

कॉलेज की वो यादगार चुदाई

मेरे सभी प्यारे दोस्तो मेरी चिकनी और गुलाबी चूत आप सब का तहे दिल से आज की मेरी कहानी मे स्वागत करती है. मेरी ये कहानी मेरी पहली चुदाई की कहानी है. जितनी मस्त मेरी चुदाई मेरे दोस्त सागर ने मेरी की थी.

उतनी ही मस्त मेरी ये कहानी है. मेरी चूत ना जाने कब से आपको ये कहानी बताने को मचल रही है. मेरी चूत अगर कोई लड़का एक बार चाट ले तो वो मेरी चूत का होकर रह जाता है. मेरे दोस्त सागर को मेरी चूत को चाटना बहुत पसंद था.

आपको मेरी बातें बकवास लग रही होंगी. इसलिए मैं अब आपको अपनी कहानी बताती हूँ. पर उससे पहले थोड़ा मैं आपको अपने बारे मे बता देती हूँ. मेरा नाम दिव्या है, और मैं प्रयागराज मे रहती हूँ, आज मेरी शादी मेरे ही शहर मे हो गयी है.

पर आज जो मैं आपको बताने जा रही हूँ, वो बात तब की है जब मैं 21 साल की जवान थी. मैने 10+2 पास आउट कर बि.ए के लिए कॉलेज जाया करती थी. मैं उस टाइम 20 साल की हो गयी थी, मेरी जवानी मेरे उपर पूरी तरह से आ गयी थी.

मेरे बूब्स 34, कमर 28 और मेरी गांद 36 के करीब हो गयी थी. मैं अपने फिगर पर बहुत मान करती थी. क्योकि कॉलेज के लड़के मेरे लिए पागल हो रहे थे. कॉलेज के पहले साल मैने किसी से दोस्ती नही करी, जब मैने देखा की यहाँ हर लड़की किसी ना किसी के साथ सेट है.

तो ये सब देख कर मुझे थोड़ा सा अजीब सा लगा. इसलिए मैने भी अब रियालिटी मे जाने के लिए सोचा. मुझे एक लड़का शुरू से ही बहुत पसंद करता था. उसने काफ़ी बार मुझसे दोस्ती करने की कोशिश करी, पर मैने शुरू मे उसे हर बार माना कर दिया.

पर एक दिन फिर मैने उसे हा कर दी, हम दोनो मे अच्छी दोस्ती हो गयी. थोड़े ही दीनो मे मुझे उससे प्यार हो गया. हम दोनो लवर बन चुके थे, कॉलेज के बाद हम दोनो घूमने के लिए निकल जाते थे.

काफ़ी बार सागर मुझे मूवी दिखाने के लिए ले जाता था. मूवी मे सागर मेरे हाथो और मेरे गालो पर किस करने लग जाता था. मैं उसे कुछ नही कहती थी. इसलिए उसकी हिम्मत अब पहले से ज़्यादा हो गयी थी.

एक दिन की बात उसने मुझे अकेले मे मेरे होंठो पर किस कर लिया. मैने उसे फिर भी कुछ नही काहा, इस बात से वो एक दम निडर हो गया. एक दिन कॉलेज मे जब हम दोनो रूम मे अकेले थे, तभी सागर ने मुझे कस्स कर अपनी बाहों मे ले लिया

फिर उसने मेरे होंठो को अच्छे से चूसा, और फिर मेरी गर्दन और मेरे पूरे चेहरे पर किस की बारिश सी करने लग गया. फिर उसके हाथ मेरे बूब्स पर आ गये और वो मेरे बूब्स को मसलने लग गया. उस दिन पहली बार किसी ने मेरे बूब्स को मसला था, मुझे इसमे बहुत मज़ा आया. फिर उसके हाथ मेरे गांद और मेरी चूत पर घूमने लग गये.

इतना कुछ होने के बाद भी मैने उससे कुछ नही काहा, क्योकि मैं भी अब अपनी जवानी का मज़ा लेना चाहती थी. मैं चाहते हुए भी ना नही कह पा रही थी, शायद मुझे इस सब मे मज़ा आने लग गया था. इस बात को सागर ने अच्छे से समझ लिया था.

अगले दिन हम कॉलेज से हाफ डे मे निकल आए और पास के मूवी सिनिमा मे मूवी देखने लग गये. वो मूवी बहुत पुरानी हो गयी थी, इसलिए वाहा कोई भी नही था. पूरा हाल मे सिर्फ़ 2 या 3 कपल्स ही बैठे थे, वो भी सब बहुत दूर दूर बैठे थे.

सागर और मैं सबसे टॉप मे लास्ट कॉर्नर मे बैठे हुए थे. जेसे ही वाहा अंधेरा हुआ, सागर ने मुझे चूमना शुरू कर दिया. उसने मेरे गालो से शुरूवात करी और कुछ ही पल मे वो मेरे होंठो पर आ गया. मूवी कोई नही देख रहा था, हम दोनो अपने आप मे लगे हुए थे.

फिर जब वो मेरे होंठो को चूस रहा था, तभी मैने महसूस किया. की सागर का हाथ मेरे कुर्ते के अंदर मेरे बूब्स पर आ गया है. उसके हाथो मे मेरे नंगे बूब्स आ गये थे, जिसे वो ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लग गया था. मेरे पूरे जिस्म मे कुछ होने लग गया, मेरे निप्पल एक दम खड़े हो गये.

फिर उसका हाथ वाहा से निकाला और मेरी सलवार मे जाने के लिए तयार हो गया. पहले वो अपना हाथ मेरे पेट के उपर घुमा रहा था. फिर उसने मेरी सलवार का नाडा खोल दिया. मेरी टाँगे अपने आप खुल गयी, उसने अपना हाथ मेरी नंगी चूत पर रख दिया.

मुझे अपनी चूत को बिना बालो की रखना पसंद था. इसलिए जब उसने मेरी चिकनी चूत पर हाथ रखा तो तब तक मेरी चूत पूरी भीगी हुई थी. मेरे मूह से आहह आहह की आवाज़ें निकलने लग गयी. सागर को समझ मे आ गया की मैं अब पूरी गरम हो चुकी हूँ. उसने थोड़ी देर मेरी चूत मे उंगली करके मुझे और पागल कर दिया.

फिर अचानक उसने अपना हाथ मेरी सलवार से बाहर निकाला और मुझे कहा की चलो हम बाहर चलते हैं. उसने और मैने अपने कपड़े ठीक किए और वाहा से निकल लिए. उसके बाद वो मुझे अपनी बाइक पर बिठा कर कॉलेज के बॅक साइड वाले गेट के पास ले गया. वाहा से हम दोनो ने कॉलेज की दीवार को पार किया.

अब तक कॉलेज मे कोई नही था, क्योकि कॉलेज की छुट्टी हुए 2 घंटे हो चुके थे. सागर मुझे एक छोटे से रूम मे ले गया, वाहा कोई आता जाता नही था. इसलिए हम दोनो को कोई डर नही था, फिर उसने जाते ही मुझे दीवार से लगाया और मेरे होंठो को अपने होंठो मे ले कर ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गया.

उसके दोनो हाथ मेरे बूब्स पर थे, जिसे वो बस मसल्ने मे लगा हुआ था. फिर उसने मेरे कपड़े निकालने शुरू कर दिए. कुछ ही देर मे हम दोनो पूरे नंगे हो गये. सागर मेरा नंगा जिस्म देख कर पागल हो गया. वो मुझे पागलो की तरह चूमने लग गया.

फिर उसने मेरे दोनो बूब्स को बारी बारी से अच्छे से चूसा. मेरी चुत मे से पानी का सैलाब अब नीचे गिरने लग गया. जब सागर ने ये देखा तो वो नीचे बैठा और मेरी दोनो टाँगे खोल मेरी चुत को चाटने लग गया.

जब सागर ऐसा कर रहा था, तब मैं जन्नत मे आ गयी थी. मुझे ऐसा मज़ा कभी नही आया था. मेरा मन कर रहा था, की सागर सारी जिंदगी मेरी चूत को ही चाटता रहे. कसम से बहुत मज़ा आ रहा था, फिर कुछ ही देर मे मेरी चूत मे से पानी निकल गया और मैं खड़ी हो कर गिराने लग गयी.

फिर सागर ने मुझे नीचे बिठाया और अपना 6 इंच का लंड मेरे मूह मे डॉल दिया. मै लंड पहली बार चूस रही थी , पर लंड चूसने मे बहुत मज़ा आ रहा था. जब उसका लंड पूरा गीला हो गया, तो उसने अपने कपड़े नीचे बिछा कर मुझे उसके उपर लेटा दिया. और फिर उसने मेरी दोनो टाँगे खोली और मेरी चुत के बीच मे आ कर बैठ गया.

सागर ने अपना लंड मेरी चूत मे डालना शुरू कर दिया, उसका लंड धीरे धीरे मेरी चूत मे जाने लग गया. मुझे दर्द भी होने लग गया, मैं चिल्ला ना सकु. इसलिए उसने पहले ही मेरे होंठो को अपने होंठो मे ले लिया था. उसके बाद उसने मेरी चूत मे अपना पूरा लंड उतार दिया

मुझे पहले बहुत दर्द हुआ, पर कुछ ही देर मे जब दर्द मज़े मे बदल गया. तो मुझे बहुत मज़ा आया और मैं ज़ोर ज़ोर से अपनी गांद नीचे उठवा कर सागर का लंड अपनी चूत मे लेने लग गयी थी.

करीब 15 मिनिट की चूत चुदाई के बाद सागर ने अचानक अपना लंड चूत से बाहर निकाल दिया. उसके लंड की पिचकारी मेरे पेट और बूब्स तक आ रही थी. उसके लंड से निकली मलाई को मैने अपने बूब्स पे अच्छे से मालिश कर ली. फिर उसके बाद हम दोनो ने अपने कपड़े डाले और किस करके हम दोनो वाहा से निकल लिए.

उस दिन के बाद हम रोज चुदाई करने लग गये, पर सागर को मेरी चूत चाटने मे बहुत मज़ा आने लग गया. वो क्लास मे भी नीचे बैठ कर मेरी चुत को चाटता था

हॉस्पिटल मे प्यार मस्ती चुदाई

हेलो फ्रेंड्ज़, मैं विशाल. मेरी उमर 22 साल है. मैं दिखने मे काफ़ी हॅंडसम हूँ. मैं बहुत ही हॅंडसम हूँ इसलिए लड़किया मुझ पर मरती है. मेरा रंग भी काफ़ी गोरा है और मेरी हाइट भी काफ़ी अछी है जिसकी वजह से काफ़ी लड़कियाँ मुझ पर मरती है.

मेरे लंड का साइज़ भी काफ़ी अछा है और वो एक लड़की की चूत को सेट करने के लिए बहुत ही सही है. मैं आज आपके लिए अपनी एक कहानी ले कर आया हूँ. तो अब बिना किसी देरी के मैं आपको अपनी कहानी पर ले कर चलता हूँ.

तो एक टाइम की बात है की मेरी आँखो मे कुछ प्राब्लम हो रही थी. पहले तो मैने ऐसे ही केमिस्ट से आइ ड्रॉप्स ले कर घर पर थोडा ट्रीटमेंट किया. पर मुझे उसमे कुछ फरक नही लगा. तो मैने एक दिन डॉक्टर पास जाने की सोची और सुबह उठ कर डॉक्टर पास चला गया.

मैं जब वाहा पर पहुँचा और वहा से मैने अपना कार्ड बनवाया औड फिर डॉक्टर के कॅबिन के बाहर बैठ गया और इंतेज़ार करने लग गया. कुछ टाइम मैं ऐसे ही बैठा रहा और फिर ऐसे काफ़ी टाइम निकल गया. मुझसे बैठ करनही हो रहा था और पता भी करना था की आख़िरकार कब नंबर आएगा मैने सोचा की पता तो चले की अंदर हो क्या रहा है क्योकि आधे घंटे से ना कोई अंदर जारा था और ना ही कोई आवाज़ लगाई जा रही थी.

बस इतना देखते ही मैं अंदर कॅबिन मे चला गया. वाहा मैं जेसे ही गया तो मैने देखा की वाहा पर एक बहुत ही खूबसूरत लड़की बैठी हुई थी. उसको देख कर मेरा दिल खुश हो गया और फिर उसके बाद मैने ऐसे ही उससे पूछा की डॉक्टर काहा है. तो उन्होने बताया की वो अभी आए नही है इसीलिए कोई आवाज़ नही लगाई जा रही है

उसके मूह से ये सुन कर मैं तो पागल ही हो गया और फिर मैं बाहर आ गया और उसके बाद वाहा बैठ गया जहा से वो मुझे सॉफ सॉफ नज़र आ रही थी. और वो भी बाहर मुझे देख कर स्माइल पास कर र्ही थी. मैं आपको बता दू की उसको पहली नज़र देखते ही उससे प्यार हो गया था.

बस फिर क्या था ऐसे ही बैठे हुए हुमारी आँखे चार होती रही और फिर उसके बाद मैने ऐसे ही उसको इशारा भी किया पर वो चुप रही. फिर उसके बाद डॉक्टर भी आ गये. डॉक्टर के आने के बाद अब नंबर लगना शुरू हो गया और फिर थोड़ी ही देर बाद मेरे नाम ले कर मुझे बुलाया गया.

फिर उसके बाद मैं अंदर गया तो डॉक्टर पास जा कर बैठ गया. और डॉक्टर अब मेरा चेक अप करने लग गये. और वो लड़की भी यही खड़ी थी जिसको मैं अब काफ़ी देर तक ऐसे ही देख रहा था और वो मुझे देख रही थी.

और फिर जब डॉक्टर ने कहा की कुछ डेली चेक अप करवाने होंगे क्योकि उससे ही पता चलेगा की असल मे प्राब्लम क्या है.फिर उसके बाद मैं बाहर आ कर बैठ गया और दूसरे चेक अप का इंतेज़ार करने लग गया.

फिर थोड़ी देर और बैठ कर डॉक्टर ने मुझे बुलाया और कहा की इस लेडी डॉक्टर साथ चले जाओ और वो तुम्हारे चेक अप करलेगी. मैं ये सुन कर काफ़ी खुश हो गया की जो चाहा वही मिला. और मैं उनके साथ उनके पीछे पीछे चला गया.

पहले तो थोड़े से कामन से टेस्ट हुए. और फिर उसके बाद वो मुझे एक रूम मे ले गयी. जहा पर बिल्कुल अंधेरा ही था और वाहा पर मेरा 10 मिनिट का टेस्ट होना था. और फिर जैसे ही हम दोनो उस रूम मे आए तो पता नही कब और कैसे सब 

होता चला गया.

वो लड़की के होंठ मेरे होंठो पर आ गये और मैं उसको चूसने लग गया. और फिर ऐसे ही मैने उसके कपड़े कब उतार दिए मुझे पता ही नही चला. और फिर मैं उसके बूब्स को चूसने लग गया और फिर वो मेरे भी कपड़े उतारने लग गयी और ऐसे ही चलता रहा.

फिर उसके बाद उसने नीचे बैठ कर मेरे लंड को मूह मे ले लिया और चूसना शुरू कर दिया. मुझे उसके ऐसे करने से बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा था. फिर मैने भी उसको वाहा पर स्ट्रेचर पर लेटया और उसकी चूत पर जीब लगा कर चाटने लग गया.

मेरे ऐसे करने से उसकी चुत ने एक बार पानी छोड़ दिया और फिर मैने भी उसकी चुत का सारा का सारा पानी पी लिया. बस फिर उसके बाद तो चूत मे कब लंड गया और कब मैं उसे चोदने लग गया ये मुझे भी पता नही चला.

और फिर ऐसे ही चोदते हुए मैने उसकी चूत मे ही अपना सारा माल निकाल दिया और फिर वो कपड़े पहन कर वहा से चली गयी. उसके जाने के बाद मैने खुद को ठीक किया और मैने देखा की कपड़े पर ब्लड लग गया था पर फिर भी मैने इसे इग्नोर किया और फिर मेरा चेक अप हुआ.

और फिर डॉक्टर को रिपोर्ट्स दिखाई तो डॉक्टर ने थोड़ी सी प्राब्लम ही बताई जो की मेडिसिन लेने पर जल्दी ही ठीक हो जाएगी .मैं ये सुन कर काफ़ी खुश हो गया की चलो कुछ ज़्यादा भी प्राब्लम नही है क्योकि मुझे इसकी टेन्षन भी बहुत हो रही थी.

मैं फिर उसके बाद अपना ध्यान रखने लग गया और उसको याद करने लग गया क्योकि उसने जो किया था वो भी नही जानती थी की वो क्या करना चाहती थी. फिर उसके बाद मैं एक बार फिर से डॉक्टर पास गया पर मुझे वो वाहा पर नही 

कॉलेज में मेरी वो जुगाड


<p>मेरा नाम अविनाश है। मैं कोलकाता के एक छोटे से शहर का रहने वाला हूं। मैं हिंदी माध्यम से पढ़ा हुआ लड़का हूं। मुझे अंग्रेजी में बहुत समस्याएं होती थी। इस वजह से मेरे पिता ने मेरा दाखिला कोलकाता के नामी कॉलेज मैं करवा दिया था। मेरे पिताजी चाहते थे मैं अपने जीवन में कुछ अच्छा करूं। शायद उन्होंने यही सोचकर मेरा दाखिला करवाया था। लेकिन मैं एक नंबर का नशेड़ी था। और ऊपर से मुझे गंदी सेक्स की लत थी। उन्होंने मुझे कई बार बाथरूम में मुठ मारते पकड़ा था। मैं कई बार अपने भाभियों को नंगे देखते हुए पकड़ा गया था। इस बात से वह बहुत आहत थे। क्योंकि मेरे दोनों भाई पोस्ट पर थे। बड़े भैया मेरे डॉक्टर थे और उनसे छोटे वाले सरकारी संस्थान पर बड़े पद पर कार्यरत थे। घर में मैं ही निकम्मा था। मेरी दोनों भाभीया भी एक नंबर की माल थी। मेरा उनको देखकर ही कई बार वीर्य निकल जाता था। हमारे मोहल्ले में भी मेरी दोनों भाभियों के कई आशिक थे। जो उन्हें अपनी छतों से देखा करते थे। क्योंकि उनके स्तंभ बड़े-बड़े थे। जिनको देखने के लिए सारे मोहल्ले के सारे ठरकी लौंडे छतों पर उनको देखा करते थे। दोष उन मोहल्ले वालों का भी नहीं था। भाभियों के स्तंभों के उभार इतने थे कि कोई भी पिघल सकता था। मैंने भी कई बार उन पर अपने हाथों का स्पर्श किया था। इस वजह से मेरे पिताजी मुझसे बहुत नाराज थे। उन्होंने मुझे कई बार रंगे हाथों पकड़ लिया था। एक बार तो मैंने अपनी भाभी के चूत में उंगली डाल दी थी। हंसती भी सारे मोहल्ले वालों को देखकर थी। मोहल्ले वाले भी दुविधा में थे साला किसको देगी।


अब इन सब भांग भोसड़ा से दूर मैं कोलकाता शहर में आ चुका था। देखते ही देखते पता भी नहीं चला कब कॉलेज के दिन बीते चले गए। लेकिन मुझ में कोई सुधार नहीं था। फर्स्ट ईयर में भी हमने सिर्फ दारू पी और लड़कियों को चोदा फिर क्या था सेकंड ईयर भी बीत गया। शायद थर्ड इयर का अंतिम सप्ताह चल रहा था ! एक शाम क्लास ख़त्म होने के बाद दूसरी मंजिल से कोई गीत गुनगुनाते नीचे उतर रहा था तभी किसी ने कहा – फलाने हॉल में ‘डीबेट’ होने वाला है । मन एकदम से ललचा गया । एक मित्र को कहा – यार , डीबेट में हिस्सा लेने का मन । उसने तड़ाक से जबाब दिया – अंग्रेज़ी में होगा , सोच लो । तब के दिनों या शायद आज भी उनदिनों के दोस्त मुझे ‘भाभीचोद’’ ही कहते हैं । नोटबुक को पीछे जींस में खोंसा और हॉल में प्रवेश किया ! कुछ दोस्तों ने उत्साह में जबाब दिया – ‘भाभीचोद’ आ गया ‘ ।डर था – निखील अग्रवाल से – जूनियर था – गजब का अंग्रेज़ी बोलता था – एकदम मुंबई के कॉन्वेंट की लड़की लोग जैसा पटर पटर। तेज भी था। पर मेरे बैच वाले साथ में थे – अब किस बात की देर – सीधे डायस पर माईक हाथ में लिया मैंने और पता नहीं क्या-क्या बोलने लगा। हॉल ठसाठस भरा हुआ ।सबसे पीछे मेरे बैच के ‘चौदह सरदार’ लम्बे चौड़े सीटी मारने लगे। मैंने उन्हें ‘थम्स अप’ इशारा किया और शुरू हो गया । क्या बोला और क्या नहीं बोला , कुछ नहीं पता लेकिन बोलते गया। सरदार पीछे से सीटी और तेज़ आवाज़। दस मिनट बाद शांत हुआ। मुझे वहां पर चूतो का कुछ झुंड दिखाई दिया। सारी की सारी एक से बढ़कर एक लग रही थी। मेरी नजर वहां पर एक चूत पर गढ गई। जैसे ही डिबेट खत्म हुई। हम सारे दोस्तों से निकल पड़े। क्योंकि हम सब पीछे थे इसलिए हमें आसानी हुई वहां से निकलने में फिर हम सारे दोस्त निखिल का इंतजार करने लगे।</p>

<p>निखील को प्रथम और सरदारों के हल्ला गुल्ला की वजह से मुझे सेकंड चुना गया। सब दोस्त यार साथ में ढाबा गए – चाय सिगरेट। उस झुण्ड में वैसे भी बैचमेट थे जो ताली बजाने के बजाए हाल से बाहर निकल गए थे। हा हा हा हा।</p>

<p>महेंद्र ने मेरी बहुत मदद की जहाँ जहाँ पर कॉलेज के प्रोग्राम होते। मुझे खोज के साथ ले जाता। रास्ता भर समझाता – भाभीचोद ,घबराना नहीं , नेचुरल रहना , तुम जैसा कोई नहीं। उसके शब्द मेरे अन्दर गजब का कांफिडेंस पैदा करते। एक बार फाईनल ईयर में, पास के एक बहुत नामी कॉलेज में जाना हुआ – खुद नहीं पता कितने प्राईज़ जीते। गाड़फट गयी थी। अचानक से इतना फेमस हो गया – उसका अन्तिम दिन का अन्तिम प्रोग्राम मेरे नाम हो गया। लडके पागल हो गए थे। लेदर का जैकेट लहरा हवा मे लेहरा रहे थे। पता नहीं उनके गांड में कैसी मस्ती छाई हुई थी।</p>

<p>वो भी क्या दिन थे। कभी सूर्योदय नहीं देखा था। आराम से जागना। तब तक सारे रूममेट नदारत – वैसे दोस्तों की अनुपस्थिती में लड़कियों को रूम पर लाना और किसी को ना बताना कि मैंने उसकी ही गर्लफ्रेंड को चोदो, एक दो बार तो दोस्तों की बहन को भी चोदा। घनी मूछें ब्लू कलर डेनिम ढेर सारे पौकेट वाले शर्ट एक छोटा नोटबुक – पीछे खोंस के नुकीला तीन इंच हील वाला जूता। टक – टक करते हुए पांच मिनट देर से क्लासरूम में घुसना। ब्लैकबोर्ड को देखते हुए – सेकेण्डलास्ट बेंच पर जा कर बैठ जाना। कलम नदारत। क्लास की चूतो गाड़़ – रंडीयो से – पेन प्लीज़ … और एक साथ पांच जुगाड़ लोग का अपना बैग से एक्स्ट्रा पेन निकालना और टॉपर की पेन को ले लेना और बाकी की तरेरती नज़रों को मुस्कुरा कर देखना। फिर नोटबुक के पीछे – लड़कियों के चूचो,चूत,गाड़ की फोटो बनाना। पीछे की सीट पर लड़कियों को देखते हुए मुठ मारना। अगर पुरुष शिक्षक है तो – इगो क्लेश। महिला शिक्षक खुद मेरी क्षमता से ज्यादा मार्क्स। क्योंकि उन्हें मेरी क्षमता का भलीभांति पता था। क्योंकि मैं उनको कई बार कॉलेज के हॉल में चोद चुका था। एकदम गाय की तरह सीधा मुह बना के उनके सामने नज़रें झुका लेता था ! करुना भाव में न जाने कितने बार उनलोगों का मुझपर उपकार किया।</p>

<p>इन्टरनल / सेशनल परीक्षा के ठीक पहले – क्लास के फ्रंट बेंच वालों के रूम का चक्कर। यार , सिलेबस बता दो। यार नोट्स दे दो। हमारी क्लास में पूनम नाम की लड़की थी। जो कि मुझ पर बहुत फिदा थी पर मैंने कभी उसे भाव नहीं दिया। क्योंकि वह थोड़ी सांवली सी थी। परंतु मुझे पता नहीं था वह भी मुझे पसंद करती है। और वह फ्रेंड बेंच पर बैठते थी। पूनम मुझसे बोलने लगी अविनाश मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूं। मैंने कहा ठीक है। मैंने पूनम से कहा क्या मैं तुम्हारे घर आ सकता हूं नोट लेने के लिए उसने एकदम से मना कर दिया और बोलने लगी मेरे घर मत आना मेरे पापा पुलिस में है और बहुत ही शक्की किस्म के आदमी हैं। पूनम बोलने लगी तुम ही बताओ कहां ठीक रहेगा। मैंने भी अपना दिमाग चलाया और बोलने लगा हॉस्टल में मेरे रूम में आ जाना। लगता है उसकी भी चूत से रिसाव हो रहा था। और मैं अपने सारे दोस्तों को बहाना बनाकर बाहर भेज दिया। इतने में पूनम भी मेरे कमरे में आ गई। पूनम ने वाइट कलर की शर्ट फ्रॉक पहन रखी थी। मैंने आज तक कभी भी उसे उस नजरों से देखा नहीं था। जैसे मेरी खराब होती जा रही थी। मैंने पूनम को बोला बैठो।</p>

<p>वह मेरे बगल में आकर बैठ गई। मैं बहुत पतला सा शॉर्ट पहना हुआ था जिसमें मेरे लंड का उभार साफ दिखाई दे रहा था। पूनम ने अपने हाथ में रखे नोट मेरी टेबल पर रख दीए। मैंने पूनम को कहा आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो। पूनम बोलने लगी मैं तो हमेशा ही सुंदर थी तुमने कभी देखा ही नहीं मुझे हमें समझ चुका था। चोदने का समय आ गया है। उसके बाद मैंने पूनम की स्कर्ट पर उसकी जांघों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। थोड़ी देर तो वह चुपचाप रही और कुछ बोली नहीं फिर देखते ही देखते वह भी मदहोश होती चली गई। मादक आवाज निकलाने लगी बोलने लगी मेरा गीला हो गया है। अब और मत तड़पाओ मैंने भी उसकी चूत को सहलाना शुरु कर दिया। आप हो कुछ ज्यादा ही नशे में होने लगी थी। मैंने भी उसको अपना लंड पकड़ा दिया। और वह अपने हाथों से हिलाने लगी। मैंने भी उसको जमीन पर पटक दिया जमीन पर ही उसके निप्पलों से दूध को पीने लगा। फिर तो जैसे वह पागल हो गई। मैंने उसकी चूत मैं अपने लंड का समागम करवा दिया। और कुछ भी झटकों में अपना पानी वही छोड़ दिया। उसके बाद से पूनम मेरी पक्की जुगाड़ बन चुकी है। जब मेरे पास कोई नहीं होता तो मैं उसको बुला लेता हूं

बस में मिली भाभी का दुःख दूर किया

मैं दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूँ | एक दिन की बात है मुझे अपने ऑफिस के किसी जरूरी काम से लखनऊ जाना था | मैंने बस से जाने के लिए फैसला किया | मैं बस अड्डे पर पहुंचा तो वहां कोई बस नहीं थी | मैंने पूछताछ पर जाकर पता किया तोवहां से मुझे पता चला की बस 1 घंटे बाद मिलेगी मैं खड़ा होकर बस का इन्तजार कर रहा था | मैंने देखा की पड़ोस में ही एक बहुत ही खूबसूरत भाभी खड़ी थी जो मुझे ही देखे जा रही थी | उनकी उम्र करीब 28 साल होगी और उनका फिगर 34-30-36 होगा | वो मुझे चुपके से देख रही थी पर मैंने उनपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया | मैं अपनी बस का इन्तजार चुपचाप करने लगा थोड़ी देर बाद बस आ गयी सब लोग जल्दी जल्दी चढ़ने लगे पर मैं इतनी भीड़ में नहीं चढ़ा मैं खड़ा सबके चढ़ जाने का इन्तजार कर रहा था | जब सब लोग चढ़ गए तो मैं भी बस में घुसा और सीट ढूँढने लगा पर बस की सभी सीटे फुल हो चुकी थी | तभी मुझे लगा की जैसे मुझे कोई आवाज दे रहा हो मैंने पीछे मुड कर देखा तो वो भाभी जो मुझे बाहर कड़ी घूर रही थी उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया | उन्होंने मेरे लिए एक सीट ले रखी थी मैं उनके पास जाकर बैठ गया | मैंने उनको धन्यवाद कहा तो वो कहने लगी इसमें धन्यवाद की क्या बात है |</p>
<p>हम दोनों आपस में बातें करने लगे उन्होंने मेरा नाम पूछा तो मैंने अपना नाम लव बताया | फिर मैंने भी उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपना नाम कीर्ति बताया | मैंने उनसे पूछा की आप कहाँ जा रही है तो उन्होंने बताया की लखनऊ में उनकी एक बहन रहती है और वो उन्ही से मिलने जा रही है | उन्होंने मुझसे पुछा की तुम कहाँ जा रहे हो मैंने भी उनको बताया की मैं अपने ऑफिस के काम से लखनऊ जा रहा हूँ | वो मुझसे पूछने लगी की तुम्हारे घर में कौन-कौन है मैंने बताया की मम्मी-और पापा और मैं हम तीन लोग ही है | उन्होंने मुझसे पूछा की तुम्हारी अभी तक शादी नहीं हुई मैंने कह की जी नहीं मैंने अभी तक शादी के बारे में सोंचा नहीं | फिर वो मुझसे कहने लगी की तुम्हारी गर्लफ्रेंड तो जरूर होगी | मैंने बताया की मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है और मैं अभी तक सिंगल हूँ | उनको मुझपे विश्वास नहीं हो रहा था उन्होंने कहा मैं मान ही नहीं सकती की तुम जैसे हैण्डसम लड़के की कोई गर्लफ्रेंड नहीं होगी | मैंने कहा सच में कसम से मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है तब जाकर उनको मुझपे विश्वास हुआ |</p>
<p>मैंने उनसे पूछा की आपकी फैमिली में कौन-कौन है तो उन्होंने बताया की उनकी फैमिली में सिर्फ वो और उनके पति है और उनकी सास और ससुर गाँव में ही रहते है | उन्होंने बताया की उनके पति दिल्ली में एक सरकारी नौकर है | मैंने उनसे पुछा की आपके बच्चे नहीं है | मेरी ये बात पूछने पर वो उदास हो गयी उन्होंने कहा की अभी तक उनके बच्चे नहीं हुए है | फिर थोड़ी देर बाद एक जगह बस रुकी मैं उतरा और पानी की बोतल लेने चला गया | मैंने वहां से समोसे भी लिए और मैं वापस बस में आकर बैठ गया मैंने समोसे भाभी से लेने को कहा वो मन करने लगी | पर मैंने समोसा उठाया और उनको देने लगा | समोसा देते समय मेरा हाँथ उनकी चूचियों पर लगा गया पर उन्होंने कुछ नहीं कहा और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी  | मैंने फिर उनको दूसरा समोसा देने के बहाने उनके बूब्स में जानबूझकर हाँथ लगा दिया | वो कुछ नहीं कह रही थी फिर मैंने पानी की बोतल उनकी तरफ बढाई और उनके बूब्स पर जानबूझकर थोडा सा पानी गिरा दिया | उनका ब्लाउस भीग गया और मैंने उनसे सॉरी बोला | उन्होंने कहा कोई बात नहीं धोखा तो किसी से हो सकता है और फिर वो अपना साडी का पल्लू हटा कर रुमाल दे अपने बूब्स को पोछने लगी | उनके बूब्स बहुत ही मस्त लग रहे थे | उनकी बूब्स की घुन्डियाँ ठंडा पानी गिरने के कारण कड़ी हो गयी थी और साफ़ नजर आने लगी थी | मेरा लंड खड़ा होने लगा था मैंने बड़ी मुश्किल से उसको सम्हाला |</p>
<p>मैंने धीरे से अपना हाँथ उनकी जांघ पर रख दिया उन्होंने कुछ नहीं कहा फिर मैं उनकी जांघ को सहलाने लगा | उन्होंने अपना हाँथ मेरे लंड पर रख दिया और सहलाने लगी मुझे बहुत ही मजा आ रहा था | मैंने अपना हाँथ उनकी चूत की तरफ बढाया और उनकी चूत को साडी के ऊपर से सहलाने लगा | कुछ देर हम लोग ये सब करते रहे फिर उन्होंने मुझसे मेरा नंबर माँगा | मैंने उनको अपना नंबर बताया और उनका नबर भी अपने मोबाइल में सेव कर लिया | हम लोग अपनी मंजिल पर  पहुँच गए थे | हम दोनों बस से उतर गए और उन्होंने मुझे देखकर एक प्यारी सी स्माइल की और फिर हम दोनों अलग हो गए | वो चली गयी और मैं भी अपने काम के लिए निकल पड़ा मैंने अपना काम निपटाया और फिर मैंने एक होटल में रूम लिया | रूम में पहुंचकर मैंने खाना आर्डर किया क्यूंकि बहुत भूंख लगी थी | रूम सर्विस से खाना मैंने रूम में ही मंगा लिया और फिर मैंने खाना खाया | जब मैंने खाना ख़तम कर लिया तो मैंने सोंचा की चलो अब भाभी को फोन लगाते है मैंने उनको फोन लगाया | उन्होंने फोन उठाया और कहने लगी बहुत देर में याद आई मेरी | मैंने कह नहीं कीर्ति जी बस अभी मीटिंग से वापस आया हूँ | उन्होंने कहा खैर कोई बात नहीं कैसी रही मीटिंग | मैंने कहा की डील फ़ाइनल हो गयी तो उन्होंने मुझसे कहा की अब क्या प्लान है | मैंने उनसे कहा की आज तो मैं वापस जाऊंगा नहीं मैंने होटल में रूम ले लिया है और कल निकलूंगा | मैंने उनसे कहा की क्या आज हम मिल सकते है तो उन्होंने कहा की इतनी बेसब्री ठीक नहीं है | मैंने कहा की मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा है तो उन्होंने कहा की सब्र रखो और तुम कल दिल्ली चलो मैं तुमको वहीँ मिलूंगी | मैंने कहा की कब उन्होंने कहा की वो मै वक्त आने पर बता दूँगी | फिर हम दोनों ने फोन सेक्स किया और खुद को शांत किया | मैं अगले दिन दिल्ली वापस चला आया हम दोनों की रोज बात होने लगी |</p>
<p>चार दिन बाद उनका फोन आया उन्होंने कहा की जान तुम्हारी इन्तजार की घड़ियाँ घतम हो गयी और आज मैं तुमको 8 बजे मिलूंगी | मैं ख़ुशी से पाकल होने लगा | मैंने उनसे कहा की हम कहाँ मिल रहे हैं उन्होंने मुझसे कहा की तुम मेरे घर ही चले आना क्यूंकि मरे पति दो दिन के लिए कोलकाता गए हुए है | मैंने कहा ठीक है मैंने उनसे पूछा की आप शराब पीती है | उन्होंने कहा क्यूँ नहीं मैंने उनके लिए एक वाइन की बोतल खरीदी और मैं उनके घर पहुंचा | उन्होंने दरवाजा खोला क्या मस्त लग रही थी नाइटी में मैंने उनको वाइन की बोतल पकड़ा दी | उन्होंने मुझसे बैठने को कहा फिर हम दोनों ने बैठकर पहले वाइन पी फिर उन्होंने मेरे लिए खाना बनाया था | हम दोनों ने खाना खाया और फिर हम दोनों बैठकर टीवी देखने लगे | मैंने सोंचा की मैं ही पहल करता हूँ मैंने उनको बाँहों में भर लिया और उनकी गर्दन पर किस करने लगा | वो भी मेरे लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगी | मैंने उनको गोद में उठा लिया और उनको बेड पर ले जाकर लिटा दिया मैंने एक – करके उनके सारे कपडे निकाल दिए और उनको नंगी कर दिया | उन्होंने ने भी मेरी पैंट को निकाल दिया और मेरे लंड को निकाल कर सहलाने लगी | अब हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गये वो मेरे लंड को चूसने लगी और मैं उनकी चूत के दानो को अपनी जीभ से सहलाने लगा | वो मदहोश होने लगी और अपनी चूत को मेरे सिर की तरफ दबाने लगी मैं मस्ती से उनकी चूत को चाटे जा रहा था | फिर उन्होंने मुझसे कहा की अब मुझे मत तडपाओ प्लीज चूत में लंड डाल दो मैंने उनकी चूत पर अपना लंड रखा और एक झटके में अपना लंड उनकी चूत म डाल दिया | उनके मुहँ से आह की आवाज निकली मैं उनको किस करने लगा और उनको जोर से चोदने लगा लगभग  20 मिनट की चुदाई के बाद वो झड गयी पर मैंने धक्के  लगाने बंद ही नहीं किया और मैं चोदता रहा | थोड़ी देर बाद मैं भी झड गया | उस रात मैंने उनकी चार बार चुदाई की | उस दिन के बाद उन्होंने कई बार मुझसे चूत चुदवाई और अब वो प्रेग्नेनेट है और बहुत ही खुश है | उन्होंने मुझसे बताया की वो बच्चा मेरा है

नींद में अपनी साली की चूत फाड़ दी

मेरा नाम मोहित है और मैं एक फार्मासिस्ट हूं। मुझे जॉब करते हुए काफी समय हो चुका है लेकिन मैं अपनी जॉब से समय नहीं निकाल पाता हूं। फिर भी जब मुझे समय मिलता है तो मैं अपने बड़े भाई के साथ घूमने के लिए चला जाता हूं। उसकी और मेरी दोस्ती बहुत ही मजबूत है। हम दोनों एक साथ ही रहते हैं। क्योंकि वह सिर्फ मुझ से एक वर्ष ही बड़ा है और मेरी हर बात को वह बहुत ही अच्छे से समझता है। जिससे कि मैं भी उसके साथ एक दोस्त की तरीके से रहता हूं। हम जब भी शराब पीने बैठते हैं तो हम दोनों ढेर सारी बातें किया करते हैं। वह भी एक मेडिकल कंपनी में अकाउंट का काम संभालता है। वैसे तो हम दोनों को काफी कम समय मिल पाता है बैठने का लेकिन एक दिन हम दोनों ऐसे ही बैठे हुए थे और हम काफी सारी बातें कर रहे थे। तभी उस दिन उसने मुझे बताया कि मैंने अपने ऑफिस में एक गर्लफ्रेंड बना ली है

मैंने उसे बोला यह तो बहुत ही अच्छी बात है। मैंने जब उससे उसका नाम पूछा तो उसने मुझे उसका नाम बताया। उसका नाम कावेरी था और वह मुझे कह रहा था कि मैं उससे शादी करना चाहता हूं। इस बारे में घर पर बात करता हूं तो देखते हैं क्या वह लोग बोलेंगे। मैंने उसे कहा कि तुम इस बारे में घर में बात कर लो तो वह तुम्हारी शादी के लिए वह मान जाएंगे। अब वह मुझे एक बार कावेरी से मिलाने भी लेकर गए। वह बहुत ही सुंदर थी। मैं उससे मिलकर बहुत ही खुश हुआ और मैं कहने लगा कि तुम इससे शादी कर लो। ये तुम्हारे लायक है। यह बात सुनकर वह भी बहुत खुश हो गया और मैंने ही उसकी शादी की बात घर पर की। जिससे कि मेरे पिताजी भी बहुत खुश हुए और कहने लगे कि बेटा तुमने बहुत ही अच्छा फैसला लिया है और वह शादी के लिए तैयार हो गए।</p>
<p>जब हम लोग शादी के लिए तैयार हुए तो हमने बहुत ही धूमधाम से शादी की तैयारियां शुरू कर दी और हमने कार्ड भी छपवा दिए। हमने अपने सारे रिश्तेदारों को कार्ड बांटे थे ।क्योंकि यह हमारे घर में पहली ही शादी थी। इसलिए हम नहीं चाहते थे कि इसमें किसी भी तरीके से कोई कमी रह जाए। हम सभी लोग बहुत खुश थे। जिस दिन शादी थी उस दिन मैंने बहुत ज्यादा एंजॉय किया और भाभी की बहन के साथ हम लोगों ने बहुत ही मजाक मस्ती की। उसका नाम रुचि है और वह भी दिखने में बहुत सुंदर है और बहुत ही मजाकिया किस्म की लड़की है। मुझे वह बहुत ही अच्छी लगी। जिस तरीके से उसका व्यवहार और बात करने का तरीका था वह मुझे काफी पसंद आया। अब मेरे भाई की शादी भी हो चुकी थी और मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं भी अब शादी कर लूं लेकिन मैं अभी शादी के विचार में नहीं था। क्योंकि मुझे थोड़ा समय चाहिए था और मैं अपने काम में ऐसे ही बिजी रहा। धीरे धीरे समय बीतता चला गया। एक दिन मेरे भाई ने मुझे कहा कि हम लोग कावेरी के घर चलते हैं। क्योंकि उसकी मां हमें वहां पर बुला रही है। तो तुम भी मेरे साथ ही चलो। मैंने कहा कि ठीक है।</p>
<p>मैं ऑफिस से छुट्टी ले लेता हूं और तुम्हारे साथ चलता हूं। अब हम दोनों भाई अपनी भाभी के साथ उनके घर पर चले गए। कावेरी भाभी की मां बहुत ही अच्छी है। उन्होंने हमारी बहुत ही खातिरदारी की और हमें बहुत ही अच्छे से अपने घर पर रखा। तभी रुचि भी आ गई। वह पहले तो मेरे भैया से बात कर रही थी। फिर उसके बाद वह मुझसे भी काफी देर तक बात करने लगी। वह पूछने लगी आपका काम कैसा चल रहा है। मैंने उसे बताया कि बहुत ही अच्छा चल रहा है। अब हम दोनों बात करते-करते छत पर चले गए और सब लोग नीचे बैठे हुए थे। हम लोग काफी देर तक साथ में ही बात कर रहे थे। उसके बाद हम नीचे आए तो मेरे भैया भाभी, मैं और रुचि हम चारो साथ में बैठकर बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद मेरी भाभी अपनी माँ के साथ गयी। भाभी अपनी मां के साथ काम करने के लिए गयी और वह लोग रात के खाने की तैयारी करने लगे। रात को उन्होंने बहुत सारे व्यंजन बनाए थे और हमारी बहुत ही अच्छे से खातिरदारी की। हम लोगों ने बहुत ज्यादा खाना खा लिया था। मैं खाना खाने के बाद छत में भी टहलने चला गया और काफी देर तक छत में ही घूमता रहा। छत में बहुत ही अच्छी हवा चल रही थी। उसके बाद मैं छत में ही लेट गया और मेरी आंख पता नहीं कब लगी मैं वही सो चुका था। थोड़ी देर बाद जब मेरी आंख खुली तो मैने देखा मैं तो छत में ही सो रहा हूं और मुझे लगा कहीं वह लोग बुरा ना मान जाए तो मैं जल्दी से नीचे चला गया।</p>
<p>जब मैं नीचे गया तो सब लोग सो रखे थे और मैं जाकर एक कमरे में सो गया। मैंने वहां देखा था वहां पर कोई सो रखा था और उसने अपने ऊपर चादर ओढ़ी हुई थी इसलिए मुझे पता नहीं चल रहा था वहा कौन सो रखा है। मैंने सोचा नींद बहुत ज्यादा आ रही है तो यहीं सो जाता हूं और मैं ऐसे ही लेट गया अब मैं सोने लगा तो थोड़ी देर बाद मैंने उसे पकड़ना शुरू कर दिया। मेरे हाथों पर स्तन लग रहे थे मैंने देखा कि यह तो कोई लड़की है और मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा। जब मैं उसके स्तनों को दबाने लगा थोड़ी देर बाद जब उसने अपने मुंह से चादर हटाई तो मैंने देखा वहतो रुचि है और मैंने ऐसे ही उसे दबाना शुरु कर दिया। मैंने उसके स्तनों को बड़े अच्छे से दबाया और उसकी योनि को भी मैंने बड़ी तेजी से दबा दिया। जिससे कि उसकी उत्तेजना बढ़ गई अब उसने भी मुझे देख लिया और वह भी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो उठी थी। मैंने उसके होठों को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू किया मै उसे किस कर रहा था मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। जब मैं उसे किस करता जाता मुझे ऐसा लगता है कि उसके होंठ बहुत ही ज्यादा नरम और मुलायम थे। मैंने उसकी सलवार के अंदर से हाथ डालते हुए उसकी योनि को दबाना शुरु किया और ऐसे ही उसकी योनि के अंदर से पानी निकलने लगा। मैं अब उसकी चूत के अंदर उंगली डालने लगा मैंने उंगली को पूरा अंदर तक घुसा कर रख दिया और उसके मुंह से सिसकियां निकलने लगी। वह बड़ी तेजी से सिसकियां लेने लगी और मैं अपनी उंगलियों को अंदर बाहर करने लगा। उसकी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर निकलने लगा और मैंने भी उसके स्तनों को अपने हाथों से बहुत तेज दबाना शुरु कर दिया।</p>
<p>मैं इतनी तेजी से उसके स्तनों को दबा रहा था कि उसका शरीर पूरा गर्म हो चुका था और मैं उसके होठों को भी अपने होठों में ऐसे ही लिए जा रहा था। थोड़ी देर बाद उसकी उत्तेजना और अधिक हो गई तो वह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। मैंने तुरंत अपने लंड को उसके अंदर घुसेड़ दिया और उसकी सलवार को पूरा उतारते हुए फेंक दिया। मैंने जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो मुझे बहुत मजा आने लगा उसकी योनि बहुत ज्यादा टाइट और मुलायम थी। मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे मैं किसी कच्ची कली की जवानी के मजे ले रहा हूं। मैं ऐसे ही उसके दोनों पैरों को पकड़कर धक्के देने लगा और मैं उसके स्तनों को भी अपने मुंह में ले रहा था। मैंने उसके पेट में भी अपनी जीभ से चाटना शुरू किया और बड़ी देर तक मैं ऐसे ही उसे चाट रहा था। उसकी चूत से और तेज पानी निकलने लगा और मैं उसे और तीव्र गति से च जाता थोड़े समय बाद उसका झड़ गया और वह अपने पैर खोल कर ऐसे ही मेरे आगे लेटी रही लेकिन मैंने उसे छोड़ा नहीं और ऐसे ही बड़ी तीव्र गति से चोदे जा रहा था और उसके जीवन को सफल बना रहा था। मैंने इतनी तेज तेज झटके मारना शुरू किया कि उसके गले से आवाज निकलने लगी और वह अलग अलग तरह की आवाज निकालने लगी। अब मैंने उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया और दोनों को आपस में मिलाते हुए उसे चोदना शुरू किया। मैं इतनी तेजी से धक्के दे रहा था उसका शरीर बहुत ज्यादा गर्म हो गया था और उसकी गर्मी से मैं पसीना-पसीना होने लगा। उसने अपनी चूत को बहुत ज्यादा टाइट कर लिया और थोड़े समय में ही मेरा वीर्य गिर  गया मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर बड़ी तेजी से जा गिरा।

कॉलेज की मैडम को पटा के चोदा मैडम

<p>मेरी सैक्स स्टोरी पढने वाले सभी लोगों को हवस भरा सलाम | मैं बहुत ही हवसी इंसान हूँ और मुझे लगता है मैं सिर्फ चुदाई करने के लिए दुनिया में आया हूँ | मेरा नाम है राहुल पाण्डेय और मैं अभी एम.बी.ए. कर रहा हूँ | मैं 6 फीट लम्बा हूँ और मैं जिम भी जाता हूँ तो मेरी बॉडी अच्छी है | मेरा बचपन से ही चुदाई में रुझान रहा है और पहली बार मैंने 11वीं अपनी पड़ोस कि एक लड़की को चोदा था | ये कहानी तब कि जब मैंने एम.बी.ए. ज्वाइन किया था और कॉलेज की ही एक मैडम को उसके ही घर में बजाया था |</p>
<p>जब मैंने अपना कॉलेज ज्वाइन किया था एम.बी.ए. के लिए और मेरी क्लासें लगने लगी थी | दो महीने बाद हमारी क्लास में एक मैडम आई और कहा कि अब आपकी क्लास मैं लूंगी | फिर मैडम ने कहा कि मेरा नाम है रुबीना | मैं तो बस मैडम को ही देखे जा रहा था क्योंकि मैडम बहुत अच्छी लग रही थी | मुझे तो मैडम को देखते ही प्यार हो गया था | फिर मैडम ने पढ़ना शुरू कर दिया और मैं बैठे बैठे मैडम के साथ चुदाई के बारे में सोचने लगा | फिर कुछ दिन बाद मैंने मैडम से बोला कि मैडम मुझे कुछ समझना है तो आपके पास अगर टाइम हो तो मुझे समझा दीजिये | तो मैडम ने बोला ठीक है लंच के बाद आ जाना मैं फ्री रहूंगी तब | तो मैं लंच के बाद मैडम के पास गया और मैडम मुझे पढ़ाने लगी | मैं तो बैठ के मैडम को पास से देखना चाहता था इसलिए गया था | मैडम कि आँखें हलकी सी ब्राउन रंग की थी और उनके लिप्स बहुत ही जूसी थे |</p>
<p>फिर मैडम उठ के बाहर गई तो मैंने मैडम की गांड देखी कसम से दोस्तों बहुत मस्त गांड थी और चलते समय ऊपर नीचे हो रही थी | लेकिन मैडम की चाल देख के मैं समझ गया था कि मैडम पहले भी चुद चुकी है | फिर कुछ दिनों बाद मुझे पता चला कि मैडम का बॉयफ्रेंड है | मुझे बहुत बुरा लगा लेकिन मैंने सोचा कि मुझे क्या, किसी और पे कोशिश करते है | फिर एक बार मैं फ़ोन पे दोस्त से बात कर रहा था तो मुझे पता चला कि मैं सट्टे में पैसे हार गया हूँ तो मैंने अपना मोबाइल पटक दिया | वो मोबाइल सस्ता वाला था न और ये सब करते हुए मुझे रुबीना मैडम ने देख लिया | मैं वहीँ पर अपना सिर पकड़ के बैठा था तो मैडम मेरे पास आई और कहा कि क्या हुआ गर्लफ्रेंड ने छोड़ दिया क्या ? तो मैंने गुस्से से ऊपर देखा तो रुबीना मैडम को देख के मेरे मन में आया कि मैडम की सहानुभूति पाने का ये अच्छा मौका है | तो मैं मैडम से लिपट गया और झूटमूट में रोने लगा | मैडम ने मेरे सिर पर हाँथ फिरते हुए कहा कि कोई बात नहीं तो मैंने मैडम को और ज़ोर से जकड लिया और फूट-फूट के रोने लगा |</p>



<p>फिर कुछ दिन में मैडम और मेरी अच्छी बातें चलने लगीं तो मैंने पूछा कि मैडम आपका तो एक बॉयफ्रेंड है आपकी ज़िन्दगी तो मस्त चल रही है | तो मैडम ने बोला कि किसने बताया कि मेरा बॉयफ्रेंड है ? तो मैंने बोला मैंने किसी से सुना था | तो मैडम बोली, हाँ था तो एक | तो मैंने पूछा, था ? तो मैडम बोली उसने मुझे धोखा दिया उसका किसी और लड़की से भी अफेयर चल रहा था | तो मैंने कहा कि कितना कमीना और बदनसीब था वो जिसके हाँथ से आप जैसी लड़की निकल गई | तो मैडम मेरी तरफ देखने लगी तो मैंने सोचा कि मौका है चौका मार दो | तो मैंने कहा कि मैं आपको बहुत दिनों से कुछ कहना चाहता हूँ | तो मैडम ने कहा हाँ बोलो तो मैंने बोलो पहले आप वादा करो कि बुरा नहीं मानोगी और मुझसे बात करना बंद नहीं करोगी | तो मैडम ने कहा अच्छा ठीक है बोलो तो मैंने कहा आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, आई लव यू | तो मैडम ने कहा मैंने ऐसा कुछ सोचा नहीं तुम्हारे बारे में और हम अच्छे दोस्त हैं | तो मैंने कहा कोई बात नहीं मैडम मैं पहले भी अकेला था, आज भी अकेला हूँ और आगे भी अकेला ही रहूँगा और अपनी आँखों मलते हुए वहां से चला गया |</p>

<p>फिर मैंने एक हफ्ते तक मैडम से बात नहीं करी तो मैडम ने मुझे फ़ोन किया और कहा कि तुम मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो ? मुझे तुमसे बात करना अच्छा लगता है और शायद मैं भी तुमसे | तो मैंने कहा क्या तुमसे ? तो मैडम बोली यस आई लव यू | तो मैं ख़ुशी से झूम उठा और फ़ोन पर बातें करने  के बाद नाचने लगा | फिर हम लोग ऐसे ही मिलते थे और बातें करते थे और कभी कभी किस भी कर लेते थे | फिर हमारी सैक्स की बातें शुरू हो गई और हम रात रात भर सैक्स की बातें करते रहते थे | मैंने मैडम से पूछा था कि आप कितनी बार चुदी हो तो मैडम ने कहा 4 बार | तो मैडम ने मुझसे पूछा कि तुमने कभी किसी को चोदा है तो मैंने कहा नहीं बस अपना ही हिलाता रहता हूँ अपने हाँथ से जबकि मैं 9 लड़कियां चोद चुका था |</p>

<p>कुछ दिन बाद मैडम का बर्थडे था तो हम दोनों ने सोचा कि चलो पहले कहीं खाना खायेंगे फिर कोई फिल्म देखने चलेंगे | फिर मैडम के बर्थडे के दिन मैं मैडम को लेने गया | तो मैडम ने काली साड़ी पहनी हुई थी और बहुत ही सुन्दर लग रही थी मेरा तो मन कर रहा था कि यहीं चोद दूँ | फिर मैडम मेरे पास आई और पूछा कि कैसी लग रही हूँ तो मैंने मजाक में बोला बिलकुल बैटमैन | तो मैडम हसने लगी और कहा तुम भी न और फिर हम लोग खाना खाने चले गए | खाने के बाद हम फिल्म देखने गए और किनारे वाली सीट लेके बैठ गए | फिल्म इंटरवल तक तो हमने कुछ नहीं किया लेकिन उसके बाद हम दोनों किस करने लगे और फिर मैडम ने मेरा लंड पर हाँथ रखके उसको मसलने लगी | मैं भी मैडम के दूध दबा रहा था और थोड़ी देर में ही फिल्म ख़त्म हो गई और हम घर के लिए निकल गए | मै मैडम को घर छोड़ा और निकल गया तो मुझे रास्ते में मैडम का फ़ोन आया और मैडम ने कहा क्या तुम मेरे घर आ सकते हो मेरे घर पर कोई नहीं है ? मैंने फ़ौरन गाड़ी मोड़ी और मैडम के घर पहुँच गया और जैसे ही मैडम ने दरवाज़ा खोला तो मैडम मुझे अन्दर खीच लिया और मैंने देखा कि मैडम सिर्फ बिकिनी में खड़ी है | मैडम कि नीली बिकिनी बहुत ही गज़ब कि लग रही थी और मेरे से कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने मैडम के दूध पकडे और मैडम को किस करने लग गया | मैडम भी बहुत मज़े से मेरा साथ दे रही थी और मेरे पैन्ट के ऊपर से मेरे लंड को सहला रही थी | फिर मैडम नीचे झुकी और मेरी पैन्ट की ज़िप खोली और मेरी चड्डी नीचे करके मेरा लंड चूसने लगी | मैडम मेरे लंड को बहुत मज़े से चूस रही थी और चाट भी रही | फिर मैडम ने मेरी पैन्ट भी उतार दी और मेरी गोटियाँ भी चूसने लगी | मुझे तो बड़ा ही मज़ा आ रहा था और मैं आअह्ह्ह्ह ऊउह्ह्ह य्येह्ह्ह्ह करे जा रहा था |</p>

<p>फिर मैंने मैडम को उठाया और मैडम को किस करते हुए मैडम कि बिकिनी खोल दी और बिस्तर पर लिटा दिया | फिर मैंने मैडम की पैंटी को किनारे किया और मैडम की चूत में ऊँगली करने लगा | मैडम य्य्याह्ह्हा य्य्याह्ह्ह्ह ऊऊम्म्म्म कर रही थी | फिर मैंने पैंटी भी उतार दी और मैडम की चूत निहारने लगा | चूत बिलकुल साफ़ थी एक भी बाल नहीं था और हलकी सी काली थी | फिर मैंने चूत में अपनी जीभ लगाई और जीभ को अन्दर तक डालने लगा | मैंने 10 मिनिट तक मैडम की चूत चाटी और फिर चूत के सामने अपना लंड करके खड़ा हो गया | मैंने जैसे ही अपना लंड मैडम की चूत में घुसाया तो मैडम ने अपनी गांड उठा ली और ज़ोर की आवाज़ करी ईस्स्स्स स्सस्सस्सस | फिर मैं चूत में धीरे धीरे लंड आगे पीछे करने लगा | फिर थोड़ी देर में मुझे लगा कि मैडम को अब मज़ा आने लगा है तो मैंने अपनी रफ़्तार बड़ा दी और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा | वो सिसकियाँ लिए जा रही थी और मैं चोदे जा रहा था | फिर मैडम उठी और मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे लंड पे बैठ कर चुदने लगी | थोड़ी देर की चुदाई के बाद मैंने अपना लंड निकाला और मैडम के चेहरे पे अपना सारा माल गिरा दिया | फिर मैडम अन्दर गई और मुंह धोके आई और हम किस करने लगे | फिर मैंने मैडम से कहा मैडम आपकी चूत तो बहुत मस्त है तो मैडम ने कहा अब से मैडम नहीं सिर्फ रूबी और हम फिर किस करने लग गए | ऐसी ही मैंने कई बार मैडम के साथ चुदाई करी एक बार को कॉलेज में भी करी लेकिन वो सब बाद में |</p>