पीजी की लड़की को उसके रूम मे चोदा

मेरा नाम गौतम है और मैं एक बहुत ही सीधा साधारण सा लड़का हूं। मैं कॉलेज में जाता हूं परंतु फिर भी मुझे किसी भी चीज का शौक नहीं है और मेरी उम्र बहुत ही कम है। उसके बावजूद भी मैं अपनी उम्र से बहुत बड़ा लगता हूं। मेरी उम्र 23 वर्ष है लेकिन मुझे फैशन की बिल्कुल भी समझ नहीं है और ना ही मैं ज्यादा किसी के संपर्क में रहता हूं। मैं अपने कॉलेज जाता हूं और उसके बाद सीधा अपने घर पर आ जाता हूं। यही मेरी दिनचर्या थी। परंतु मुझे कई बार लगता था कि शायद मुझे बदलना चाहिए। परंतु फिर भी मैं बदल नहीं पाया और मैं कोशिश तो बहुत करता था पर फिर भी ना जाने मैं खुद को क्यों नहीं बदल पा रहा था और मैं यह बात किसी को भी नहीं बताना चाहता था। मैं अपने आप में ही खोया हुआ रहता था। मेरे बाल भी बिखरे से रहते थे और मैं मोटा सा चश्मा लगाकर रखता था। मेरा शरीर भी बहुत ज्यादा मोटा हो गया था। मैं कई बार सोचता था कि मैं जिम ज्वाइन कर लूं। परंतु उसके बाद भी मैं जिम नहीं जा पा रहा था

मैं सोचता बहुत था परंतु वह चीज मैं अपने जीवन में कर नहीं पाता था। मुझे किताबें पढ़ने का बहुत ही शौक है और मैं बहुत ही किताबें पढ़ता हूं। जो भी किताब मुझे मिल जाती है मैं उसे पढ़ लिया करता हूं। मेरा बस एक ही शौक है और मैं किसी भी प्रकार के शौक नहीं करता। कॉलेज में ना तो मेरी कोई गर्लफ्रेंड थी और ना ही कोई अच्छा दोस्त है। कुछ लड़के थे जो मुझसे बात कर लिया करते थे परंतु अब वह भी मुझसे थोड़ी बहुत ही बात किया करते थे। जब उन्हें मुझसे कुछ काम होता था या फिर मुझे उनसे कुछ काम हुआ करता था। तभी बात होती थी। इससे ज्यादा हम लोगों के बीच में कोई भी संपर्क नहीं हुआ करता था। बचपन से ही मेरा कोई अच्छा दोस्त नहीं था और मैं अकेला ही रहता था। मेरे बड़े भैया हमेशा ही यह बात कहते रहते हैं कि तुम्हें किसी अच्छे लड़के से दोस्ती करनी चाहिए ताकि तुम भी उसके तौर तरीके सिख पाओ और अपने जीवन में थोड़ा बदलाव लाओ। परंतु मैं बिल्कुल भी ऐसा नहीं कर पा रहा था। यदि मैं कभी ऐसा सोचता भी तो मुझे कोई अच्छा लड़का नहीं मिलता था।</p>
<p>मेरी मम्मी ने एक दिन मेरे पापा और भैया से बात की, कि हम लोग घर में पी.जी खोल लेते हैं। हमारे घर पर बहुत ही जगह है। मेरे पिताजी ने कहा कि वह कौन देखेगा। मैं अभी अपनी नौकरी में जाता हूं और मेरे पास समय नहीं होता। मेरी मम्मी ने कहा कि मैं सब संभाल लूंगी और खाना बनाना होगा तो मैं खाना भी बना दिया करूंगी। तुम उसकी चिंता मत करो। मेरे पिताजी ने कहा ठीक है, तुम शुरु कर लो अगर तुम्हें लगता है तुम चला पाओगी तो तुम शुरू कर सकती हो। हमारी मम्मी ने पी.जी खोल लिया और हमारे पास कई कॉल आने लगे और कई लोग हमारे घर पर देखकर भी गए। एक दिन हमारे घर पर एक सुंदर सी लड़की आई। मैंने जैसे ही उसे देखा तो मुझे उसे देख कर बहुत ही अच्छा लग रहा था। वह किसी हीरोइन से कम नहीं लग रही थी। उसका नाम सौम्या था। जब उसने भी देखा तो वह कहने लगी ठीक है। मैं यहां पर रह लूंगी। मेरी मम्मी ने भी उसे जानकारी ली और कहा कि तुम क्या करती हो। तो वह कहने लगी कि मैं स्कूल में पढ़ाती हूं। मेरी मम्मी ने कहा ठीक है यह तो बहुत ही अच्छी बात है। अब वह हमारे घर पर रहने लगी और हमारे साथ ही वह खाना खाया करते थे।</p>
<p>धीरे-धीरे कुछ और लड़कियां भी हमारे घर पर आने लगी लेकिन मुझे सौम्या बहुत ही पसंद थी और मुझे ऐसा लगता था कि मुझे उससे बात करनी चाहिए थी लेकिन मैं उससे बात नहीं कर पाता। जब भी वह मेरी तरफ देखती तो मैं शरमा जाता था और अपनी नजरें झुका लेता लेकिन वह हमेशा ही मेरी मम्मी से पूछती थी क्या गौतम बात नहीं करता है। मेरी मम्मी कहती की वह थोड़ा कम बात किया करता है। अब सौम्या जब भी घर पर होती तो उसके पास समय होता तब वह मेरे पास बैठने के लिए आ जाती। परंतु मैं फिर भी उससे बात नहीं किया करता था और वह मुझसे पूछने लगती थी कि तुम क्या कर रहे हो। मैं उसे बताता कि मैं कॉलेज कर रहा हूं। अब वह भी मुझसे बहुत बात करती थी और मुझे भी धीरे-धीरे उसके साथ बात करना अच्छा लगने लगा। अब हम दोनों के बीच में बहुत बातें हुआ करती थी। उसे मुझसे बात करना बहुत अच्छा लगता था और मुझे भी बहुत ही अच्छा लगता था उससे बात करना। सौम्या से मेरी अब दोस्ती हो चुकी थी और वह मुझे हमेशा कहती थी कि तुम लड़कों की तरह रहा करो। ऐसे अंकल की तरह बनकर रहोगे तो तुम्हें कोई लड़की पसंद कैसे करेगी। मैं उसे कहता था कि मैं लड़कियों में ज्यादा इंटरेस्ट नहीं रखता। पर वह मुझे कहने लगी कि तुम्हें बदलना तो पड़ेगा ही। अपने लिए तो तुम थोड़ा बदलाव ला ही सकते हो। मैंने उसे कहा कि बात तो सही है पर मैं बदलना नहीं चाहता। वह मुझे कहने लगी कि तुम्हें अपनी जिंदगी में बदलाव तो लाना ही पड़ेगा। मैंने उससे कहा कि मैं कैसे बदलूंगा। वह कहने लगी कि तुम उसकी चिंता मत करो। मैं तुम्हारा हुलिया पूरा बदल कर रख दूंगी।</p>
<p>वह मुझे एक लड़के के पास ले गई उसका नाम सुरेश था। वह बहुत ही ज्यादा स्मार्ट और उसकी बहुत ही अच्छी पर्सनैलिटी थी। जब मैं उससे मिला तो मुझे उससे मिलकर बहुत ही खुशी हुई। वह सौम्या का बॉयफ्रेंड था। मुझे सुरेश ने पूरी तरीके से बदल कर रख दिया और मैं अपने आप को पहचान भी नहीं पा रहा था। अब मैंने जिम भी ज्वाइन कर लिया। और धीरे-धीरे मैं पतला भी होता चला गया और मैं बहुत ही स्वीट हो गया था। मेरे घर वाले भी बहुत ज्यादा खुश हुए। वो कहने लगे कि तुम इतना ज्यादा कैसे बदल गये। मैंने बताया कि यह सब सौम्या ने किया है। उस की बदौलत ही मैं इतना फिट हो पाया हूं। अब हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे और मै अक्सर उसके कमरे में ही रहता था। और वह मुझसे बहुत ही बात किया करती थी और जब उसके पास टाइम होता तो वह मेरे रूम में आ जाती और मुझसे बहुत देर तक बात किया करती थी। जब भी उसे लेट हो जाती थी तो वह मुझे फोन कर दिया करती थी। मैं अपने घर में बता दिया करता था। अब धीरे-धीरे मुझे सौम्या से बहुत लगाव होने लगा और मैं उसकी तरफ आकर्षित हो रहा था। मुझे भी ऐसा लग रहा था कि मुझे सौम्या से प्यार होने लगा है। क्योंकि सौम्या थी ही इतनी सुंदर और वह दिल की भी बहुत ही अच्छी थी। वह मेरा बहुत ही ध्यान रखा करती थी।</p>
<p>मैं एक दिन सौम्या के कमरे में बैठा हुआ था तो मेरे हाथ में उसकी पैंटी लग गई और मैं उसे सुघने लगा। जब मै उसकी पैंटी सूघ रहा था तो वह सामने आ गई। वह कहने लगी तुम यह क्या कर रहे हो मैंने उसे कहा कि तुम्हारी पैंटी को सूघ रहा हूं। वह जैसे ही मेरे पास आई तो मैंने उसे तुरंत ही अपने नीचे लेटा दिया और उसे किस करने लगा। मैं उसे बहुत अच्छे से किस कर रहा था वह भी अब मुझे किस करने लगी। मैंने उसके सारे कपड़े खोल दिया और जब उसका नंगा बदन मेरे सामने था तो मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था। मैंने उसकी योनि को थोड़ी देर तक चाटा और कुछ देर मैंने उसके स्तनों का रसपान किया। मैंने उसकी योनि के अंदर जैसे ही अपने मोटे लंड को डाला तो वह उछल पड़ी और मैं उसे बड़ी ही तेजी से चोदना लगा। मैं उसे इतनी तेज झटके दिए जा रहा था कि उसका बदन हिल रहा था और मैं उसके स्तनों का रसपान किया जा रहा था। वह पूरे मजे में आ गई और मैंने उसे बड़ी तेजी से धक्के देना शुरू कर दिया। मैं उसे इतनी तेज तेज धक्के दे रहा था कि उसे भी अब मज़ा आने लगा वह मेरा पूरा साथ देती। वह मुझे कहती कि तुमने मेरी चूत मार कर बहुत ही अच्छा किया क्योंकि इसे कई दिनों से सुरेश ने नहीं मारा था। अब मैंने और भी तेजी से उसे चोदना शुरू कर दिया। मैंने उसे इतनी तेज तेज धक्के मारे कि उसकी चूत से बड़ी तेज गर्मी निकलने लगी और मेरे लंड से बड़ी तेज गर्मी निकल रही थी और उसी गर्मी के बीच में मेरा वीर्य उसकी योनि में जा गिरा।

नींद में अपनी साली की चूत फाड़ दी

मेरा नाम मोहित है और मैं एक फार्मासिस्ट हूं। मुझे जॉब करते हुए काफी समय हो चुका है लेकिन मैं अपनी जॉब से समय नहीं निकाल पाता हूं। फिर भी जब मुझे समय मिलता है तो मैं अपने बड़े भाई के साथ घूमने के लिए चला जाता हूं। उसकी और मेरी दोस्ती बहुत ही मजबूत है। हम दोनों एक साथ ही रहते हैं। क्योंकि वह सिर्फ मुझ से एक वर्ष ही बड़ा है और मेरी हर बात को वह बहुत ही अच्छे से समझता है। जिससे कि मैं भी उसके साथ एक दोस्त की तरीके से रहता हूं। हम जब भी शराब पीने बैठते हैं तो हम दोनों ढेर सारी बातें किया करते हैं। वह भी एक मेडिकल कंपनी में अकाउंट का काम संभालता है। वैसे तो हम दोनों को काफी कम समय मिल पाता है बैठने का लेकिन एक दिन हम दोनों ऐसे ही बैठे हुए थे और हम काफी सारी बातें कर रहे थे। तभी उस दिन उसने मुझे बताया कि मैंने अपने ऑफिस में एक गर्लफ्रेंड बना ली है

मैंने उसे बोला यह तो बहुत ही अच्छी बात है। मैंने जब उससे उसका नाम पूछा तो उसने मुझे उसका नाम बताया। उसका नाम कावेरी था और वह मुझे कह रहा था कि मैं उससे शादी करना चाहता हूं। इस बारे में घर पर बात करता हूं तो देखते हैं क्या वह लोग बोलेंगे। मैंने उसे कहा कि तुम इस बारे में घर में बात कर लो तो वह तुम्हारी शादी के लिए वह मान जाएंगे। अब वह मुझे एक बार कावेरी से मिलाने भी लेकर गए। वह बहुत ही सुंदर थी। मैं उससे मिलकर बहुत ही खुश हुआ और मैं कहने लगा कि तुम इससे शादी कर लो। ये तुम्हारे लायक है। यह बात सुनकर वह भी बहुत खुश हो गया और मैंने ही उसकी शादी की बात घर पर की। जिससे कि मेरे पिताजी भी बहुत खुश हुए और कहने लगे कि बेटा तुमने बहुत ही अच्छा फैसला लिया है और वह शादी के लिए तैयार हो गए।</p>
<p>जब हम लोग शादी के लिए तैयार हुए तो हमने बहुत ही धूमधाम से शादी की तैयारियां शुरू कर दी और हमने कार्ड भी छपवा दिए। हमने अपने सारे रिश्तेदारों को कार्ड बांटे थे ।क्योंकि यह हमारे घर में पहली ही शादी थी। इसलिए हम नहीं चाहते थे कि इसमें किसी भी तरीके से कोई कमी रह जाए। हम सभी लोग बहुत खुश थे। जिस दिन शादी थी उस दिन मैंने बहुत ज्यादा एंजॉय किया और भाभी की बहन के साथ हम लोगों ने बहुत ही मजाक मस्ती की। उसका नाम रुचि है और वह भी दिखने में बहुत सुंदर है और बहुत ही मजाकिया किस्म की लड़की है। मुझे वह बहुत ही अच्छी लगी। जिस तरीके से उसका व्यवहार और बात करने का तरीका था वह मुझे काफी पसंद आया। अब मेरे भाई की शादी भी हो चुकी थी और मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं भी अब शादी कर लूं लेकिन मैं अभी शादी के विचार में नहीं था। क्योंकि मुझे थोड़ा समय चाहिए था और मैं अपने काम में ऐसे ही बिजी रहा। धीरे धीरे समय बीतता चला गया। एक दिन मेरे भाई ने मुझे कहा कि हम लोग कावेरी के घर चलते हैं। क्योंकि उसकी मां हमें वहां पर बुला रही है। तो तुम भी मेरे साथ ही चलो। मैंने कहा कि ठीक है।</p>
<p>मैं ऑफिस से छुट्टी ले लेता हूं और तुम्हारे साथ चलता हूं। अब हम दोनों भाई अपनी भाभी के साथ उनके घर पर चले गए। कावेरी भाभी की मां बहुत ही अच्छी है। उन्होंने हमारी बहुत ही खातिरदारी की और हमें बहुत ही अच्छे से अपने घर पर रखा। तभी रुचि भी आ गई। वह पहले तो मेरे भैया से बात कर रही थी। फिर उसके बाद वह मुझसे भी काफी देर तक बात करने लगी। वह पूछने लगी आपका काम कैसा चल रहा है। मैंने उसे बताया कि बहुत ही अच्छा चल रहा है। अब हम दोनों बात करते-करते छत पर चले गए और सब लोग नीचे बैठे हुए थे। हम लोग काफी देर तक साथ में ही बात कर रहे थे। उसके बाद हम नीचे आए तो मेरे भैया भाभी, मैं और रुचि हम चारो साथ में बैठकर बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद मेरी भाभी अपनी माँ के साथ गयी। भाभी अपनी मां के साथ काम करने के लिए गयी और वह लोग रात के खाने की तैयारी करने लगे। रात को उन्होंने बहुत सारे व्यंजन बनाए थे और हमारी बहुत ही अच्छे से खातिरदारी की। हम लोगों ने बहुत ज्यादा खाना खा लिया था। मैं खाना खाने के बाद छत में भी टहलने चला गया और काफी देर तक छत में ही घूमता रहा। छत में बहुत ही अच्छी हवा चल रही थी। उसके बाद मैं छत में ही लेट गया और मेरी आंख पता नहीं कब लगी मैं वही सो चुका था। थोड़ी देर बाद जब मेरी आंख खुली तो मैने देखा मैं तो छत में ही सो रहा हूं और मुझे लगा कहीं वह लोग बुरा ना मान जाए तो मैं जल्दी से नीचे चला गया।</p>
<p>जब मैं नीचे गया तो सब लोग सो रखे थे और मैं जाकर एक कमरे में सो गया। मैंने वहां देखा था वहां पर कोई सो रखा था और उसने अपने ऊपर चादर ओढ़ी हुई थी इसलिए मुझे पता नहीं चल रहा था वहा कौन सो रखा है। मैंने सोचा नींद बहुत ज्यादा आ रही है तो यहीं सो जाता हूं और मैं ऐसे ही लेट गया अब मैं सोने लगा तो थोड़ी देर बाद मैंने उसे पकड़ना शुरू कर दिया। मेरे हाथों पर स्तन लग रहे थे मैंने देखा कि यह तो कोई लड़की है और मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा। जब मैं उसके स्तनों को दबाने लगा थोड़ी देर बाद जब उसने अपने मुंह से चादर हटाई तो मैंने देखा वहतो रुचि है और मैंने ऐसे ही उसे दबाना शुरु कर दिया। मैंने उसके स्तनों को बड़े अच्छे से दबाया और उसकी योनि को भी मैंने बड़ी तेजी से दबा दिया। जिससे कि उसकी उत्तेजना बढ़ गई अब उसने भी मुझे देख लिया और वह भी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो उठी थी। मैंने उसके होठों को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू किया मै उसे किस कर रहा था मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। जब मैं उसे किस करता जाता मुझे ऐसा लगता है कि उसके होंठ बहुत ही ज्यादा नरम और मुलायम थे। मैंने उसकी सलवार के अंदर से हाथ डालते हुए उसकी योनि को दबाना शुरु किया और ऐसे ही उसकी योनि के अंदर से पानी निकलने लगा। मैं अब उसकी चूत के अंदर उंगली डालने लगा मैंने उंगली को पूरा अंदर तक घुसा कर रख दिया और उसके मुंह से सिसकियां निकलने लगी। वह बड़ी तेजी से सिसकियां लेने लगी और मैं अपनी उंगलियों को अंदर बाहर करने लगा। उसकी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर निकलने लगा और मैंने भी उसके स्तनों को अपने हाथों से बहुत तेज दबाना शुरु कर दिया।</p>
<p>मैं इतनी तेजी से उसके स्तनों को दबा रहा था कि उसका शरीर पूरा गर्म हो चुका था और मैं उसके होठों को भी अपने होठों में ऐसे ही लिए जा रहा था। थोड़ी देर बाद उसकी उत्तेजना और अधिक हो गई तो वह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। मैंने तुरंत अपने लंड को उसके अंदर घुसेड़ दिया और उसकी सलवार को पूरा उतारते हुए फेंक दिया। मैंने जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो मुझे बहुत मजा आने लगा उसकी योनि बहुत ज्यादा टाइट और मुलायम थी। मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे मैं किसी कच्ची कली की जवानी के मजे ले रहा हूं। मैं ऐसे ही उसके दोनों पैरों को पकड़कर धक्के देने लगा और मैं उसके स्तनों को भी अपने मुंह में ले रहा था। मैंने उसके पेट में भी अपनी जीभ से चाटना शुरू किया और बड़ी देर तक मैं ऐसे ही उसे चाट रहा था। उसकी चूत से और तेज पानी निकलने लगा और मैं उसे और तीव्र गति से च जाता थोड़े समय बाद उसका झड़ गया और वह अपने पैर खोल कर ऐसे ही मेरे आगे लेटी रही लेकिन मैंने उसे छोड़ा नहीं और ऐसे ही बड़ी तीव्र गति से चोदे जा रहा था और उसके जीवन को सफल बना रहा था। मैंने इतनी तेज तेज झटके मारना शुरू किया कि उसके गले से आवाज निकलने लगी और वह अलग अलग तरह की आवाज निकालने लगी। अब मैंने उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया और दोनों को आपस में मिलाते हुए उसे चोदना शुरू किया। मैं इतनी तेजी से धक्के दे रहा था उसका शरीर बहुत ज्यादा गर्म हो गया था और उसकी गर्मी से मैं पसीना-पसीना होने लगा। उसने अपनी चूत को बहुत ज्यादा टाइट कर लिया और थोड़े समय में ही मेरा वीर्य गिर  गया मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर बड़ी तेजी से जा गिरा।

सौतेली मां के साथ बिस्तर पर संभोग

मेरा नाम अमित है और मैंने बारहवीं के एग्जाम दिए हैं। मेरे पिताजी एक बहुत ही पैसे वाले व्यक्ति हैं। उन्हें अपने पैसे का बहुत ज्यादा घमंड है। इसलिए वह कभी भी मुझसे अच्छे से बात नहीं करते और ना ही मेरी मां से। उन्होंने कभी भी मेरी माँ से अच्छे से बात नही की। जिसकी वजह से मेरी मां बहुत ही परेशान भी रहती थी और वह बहुत ज्यादा टेंशन भी लेती थी। मैं बचपन से ही उन्हें देखता आ रहा हूं वह बहुत ही ज्यादा टेंशन में रहती और मुझे कई बार उन्होंने कहा भी है कि मैं तुम्हारे पिताजी की वजह से मैं बहुत ही ज्यादा टेंशन लेती हूं। क्योंकि उनका बर्ताव बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। वह जहां भी जाते हैं वहीं पर झगड़ा कर लेते हैं। मेरे पिताजी ने मेरी माँ को पता नही कितने सालो से अपने घर भी नहीं जाने नहीं दिया और ना ही हमारा कोई भी रिश्तेदार अब हमारे घर पर आता है। बस कुछ गिने-चुने उनके दोस्त हैं जो हमारे घर पर आते हैं। मैं भी अपने किसी दोस्त को अपने घर पर नहीं बुलाता था। क्योंकि मुझे मेरे पिताजी का बर्ताव पता था। वह कभी भी किसी को भी डांट सकते थे। इसलिए मैंने कभी भी अपने दोस्तों को भी घर पर नहीं बुलाया। मैं कभी कभी अपने दोस्त के घर ही चला जाया करता था जब भी मेरा मन होता था। क्योंकि अब मैंने एग्जाम भी दे दिए थे और मैं खाली ही बैठा हुआ था। इसलिए मैं ज्यादातर अपने दोस्तों के पास ही चला जाता था और कभी अपने मां के पास ही रहता था।

मेरी एक बहन है जिसने लव मैरिज कर ली थी और उसने मेरे पिताजी के खिलाफ वह शादी की थी। इसलिए मेरे पिताजी ने कभी भी उसे घर पर आने नही दिया और ना ही उससे बात करते हैं। वह कभी कबार मुझे फोन कर के मेरे हाल चाल पूछ लिया करती है और कभी मेरी मां को भी फोन कर देती है लेकिन उसकी भी शादी के बाद घर आने की  हिम्मत नहीं होती थी। वह सिर्फ फोन पर ही बातें किया करती है। जब भी मेरे पिताजी घर पर होते है तो मैं अपने काम पर ही लगा रहता हूं लेकिन मैं उनसे बात ही नहीं करता था। जब बहुत ही ज्यादा जरूरत पड़ती तो ही मैं उनसे कुछ कहता हूं। एक दिन मेरी मां की तबीयत अचानक से बहुत ज्यादा खराब हो गई और वह मुझे कहने लगी कि मेरी तबीयत बहुत खराब है। मैंने यह बात अपने पिताजी को भी बताई की मां की तबीयत बहुत खराब हो गई है लेकिन उन्होंने फिर भी ध्यान नहीं दिया और बात को हल्के में ले लिया। उन्होंने कहा कि जाओ बगल वाले डॉक्टर को दिखाकर ले आओ लेकिन वहां तो कोई गंभीर समस्या हो चुकी थी। जब हम उन डॉक्टर के पास गए तो उन्होंने सिर्फ हमें दवाइयां दी और उसके आगे उन्होंने कुछ भी नहीं बताया।</p>
<p>ऐसे ही मेरी मां की तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ती चली गई। यह बात मैंने अपनी बहन को बताई तो उसने अपने पति से बात की और हम लोग उन्हें एक बड़े हॉस्पिटल में ले गए। मेरे जीजा ने ही सारा खर्चा उठाया। डॉक्टर ने बताया कि शायद वह कुछ ज्यादा ही टेंशन लेती है। इस वजह से उनकी तबीयत खराब होती जा रही है। मुझे तो यह बात पहले से ही पता थी कि मेरे पिताजी की वजह से उनकी तबीयत खराब हो रही है लेकिन मैं किसी के सामने बता नहीं सकता था और अब अचानक से उनकी तबीयत इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए और कुछ दिनों बाद मेरी माँ का देहांत हो गया लेकिन मेरे पिताजी को इस बात से कुछ भी फर्क नहीं पड़ा। मुझे इस बात का बहुत ही सदमा लगा था और मैंने कई दिनों तक किसी से अच्छे से बात भी नहीं की। मैं घर पर अपने कमरे पर ही बैठा रहता था लेकिन मेरे पिताजी को इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि मैं कितना दुखी हूं और मैं अंदर से कितना टूट चुका हूं। फिर ऐसे ही समय बीतता चला गया और मैं समय के साथ थोड़ा ठीक हो गया।</p>
<p>एक दिन मुझे पता चला कि मेरे पिता जी ने दूसरी शादी कर ली। मुझे इस बात का बहुत ही बुरा लगा लेकिन अभी मैं कुछ कर भी नहीं सकता था। उन्होंने अपनी उम्र से बहुत ही छोटी लड़की से शादी की। लड़की के घर वाले बहुत ही गरीब थे। इस वजह से उन्होंने उसकी शादी करवा दी। जब वह हमारे घर पर आयी तो उसने मुझे देखा और मुझसे मेरा नाम पूछने लगी। मैंने उसे अपना नाम बताया और मैंने भी उससे उसका नाम पूछा। उसका नाम पायल था और उसकी उम्र 32 वर्ष की थी। जब भी उसे टाइम मिलता तो वह मुझसे बात कर लिया करती और मुझे भी उससे बात कर के थोड़ा हल्का महसूस होता था। क्योंकि मैं घर से बाहर भी नहीं जाता था और ज्यादा किसी से बात भी नहीं करता था। उसने मुझसे पूछा कि तुम्हारी मां का देहांत कैसे हुआ। मैंने उसे सारी बात बताई और जब उसने वह बात सुनी तो उसे भी बहुत बुरा लगा और वह कहने लगी कि तुम्हारे पिताजी ने बहुत ही गलत किया। वह यदि समय पर तुम्हारी मां का इलाज करा देते तो शायद वह ठीक हो सकती थी। मैंने उसे कहा कि यह बात तो मुझे भी पता है। यदि वह समय पर मेरी मां का इलाज करा देते तो मेरी माँ ठीक हो सकती थी। मैंने उनसे कहा की मैं इस बात के लिए कभी भी अपने पिताजी को माफ नहीं करने वाला हूं। उनका जिस तरीके से रवैया है वह बिल्कुल अच्छा नहीं है। कुछ दिनों बाद उनका यही रवैया पायल के साथ भी होने लगा और वह भी टेंशन में रहने लगी। मुझे उसे ऐसे देखकर बहुत ज्यादा बुरा लगता था लेकिन मैं भी मजबूर था। मैं पायल की मदत करने की सोचता भी था लेकिन मैं कुछ नही कर सकता था।</p>
<p>एक दिन मेरे पिताजी का झगड़ा पायल से हो गया और वह बहुत ज्यादा रोने लगी। रोते-रोते वह मेरे कमरे में ही आ गई और मेरे बगल में सो गई। मैं भी लेटा हुआ था वह बहुत ज्यादा रोने लगी और मुझसे लिपट गई। जैसे ही वह मुझसे लिपट कर रोने लगी तो उसके स्तनों मुझसे टकरा रहे थे और मेरा लंड खड़ा होने लगा। उसने भी यह सब देख लिया था और उसने तुरंत ही मेरे लंड को पकड़ लिया। अब वह उसे हिलाने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब वह मेरे लंड को हिला रही थी। मैंने उसके होठों को किस कर लिया अब मैं उसके पूरे शरीर को अपने हाथों से दबाने लगा। मैंने उसकी गांड को भी अपने हाथों से दबाया और उसके स्तनों को भी अपने हाथों से दबाने लगा। अब थोड़ी देर में वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई। मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और उसने भी मेरे कपड़ों को उतार दिया। मैंने जैसे ही उसके शरीर को देखा तो मैं दंग रह गया उसका शरीर बहुत ही ज्यादा मुलायम और नाजुक था। मुझे वह देखकर बहुत ही खुशी हो रही थी कि वह मेरी सौतेली मां है। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया और बहुत ही अच्छे से मैं उसकी चूत को चाट रहा था। उसका पानी निकल रहा था और मैंने वह भी अच्छे से चाट लिया। मैंने उसके स्तनों को भी अपने मुंह में कुछ देर तक चूसना शुरू किया और ऐसे ही चूसता रहा। मैंने उसके पूरे शरीर को अपनी जीभ से अच्छे से चाट लिया था।</p>
<p>अब उसकी ठरक बहुत बढ़ गई मैंने अपने लंड को निकालते हुए उसकी योनि में डाल दिया। जैसे ही मैंने उसकी योनि में डाला तो वह बड़ी तेज चिखने लगी और मै ऐसे ही धक्के मारता था। मैंने उसे इतने तेज झटके मारे कि मुझे कहने लगी कि तुम्हारे अंदर तो कुछ ज्यादा ही गुस्सा मुझे दिखाई दे रहा है। मैंने उसे छोड़ा नहीं मैं उसे ऐसे ही कसकर पकड़ कर चोदा जाता। उसके गले से बड़ी तेज आवाज निकलने लगी और वह बहुत तेजी से चिल्ला रही थी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब वह इस तरीके से मादक आवज निकाल रही थी मुझे भी अच्छा लगता। मुझे ऐसा लग रहा था मानो मेरी इच्छा पूरी हो गई होगी । मैंने पहली बार किसी को चोदा था और वह भी इतनी मस्त माल को मैं वैसे ही धक्के दिए जा रहा था वह अब भी बड़ी तेज चिल्ला रही थी। मैंने उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया और उसके चूतड़ों पर बहुत तेजी से झटके मारता तो वह लाल हो गए थे। उसका शरीर गर्म होने लगा था उसी गर्मी के बीच में ना जाने कब उसकी योनि में मेरा माल जा गिरा और मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए थोड़ी देर ऐसा ही लेटा रहा। वह मेरे लंड को दोबारा से चूसने लगी उसने इतने अच्छे से मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लिया कि मेरा मल ना जाने कब गिर गया मुझे मालूम भी नहीं पड़ा। हम दोनों बात करते-करते पता नहीं कब सो गए उसके बाद से तो मैंने उससे पता नहीं कितनी बार चोदा होगा।

कमसिन बदन मेरे इंतजार मे था

मेरा नाम राजेश है मैं अहमदाबाद का रहने वाला हूं। मेरी अमदाबाद में शॉप है। यह शॉप पहले से मेरे पिताजी देखते थे लेकिन जब से उन्होंने दुकान में आना कम किया है तब से मैंने ही काम शुरू कर दिया। वह मुझे कहने लगे कि बेटा अब तुम्हे ही आगे काम संभालना है और इस काम में तुम जितना मेहनत करोगे उतना ज्यादा अच्छा है। मैंने काफी सालों की मेहनत से इस दुकान को अच्छा चलाया है। मेरी दुकान पर जितने भी कस्टमर आते थे मैं उनके साथ बड़े अच्छे से व्यवहार करता हूं और वह लोग हमेशा ही मुझ से सामान खरीद कर लेकर जाते हैं। मेरे पिताजी के भी काफी पुराने कस्टमर हैं वह भी मेरे पास ही आते हैं। मैं हर साल घूमने का प्लान बनाता हूं और इस बार मैं सोचने लगा कि क्यों ना अपने मम्मी पापा को भी साथ में ले जाया जाए। मैंने अपनी पत्नी सीमा से बात की और कहा कि मैं सोच रहा हूं इस बार मम्मी पापा को भी अपने साथ घूमने के लिए ले जाया जाए। वह कहने लगी ठीक है यदि आप ऐसा कोई प्लान बना रहे हैं तो वह लोग भी हमारे साथ चलेंगे तो उन्हें भी बहुत खुशी होगी।</p>

<p>मेरी पत्नी पूछने लगी लेकिन हम लोग घूमने कहां जाएंगे? मैंने उसे कहा हम लोग केरला जाने वाले हैं। मैंने सुना है कि वहां पर काफी अच्छा है और अभी कुछ दिनों पहले दिनेश का परिवार भी वहां गया था। दिनेश मेरे मामा का लड़का है। मैंने भी सारी तैयारियां कर ली थी और मेरी पत्नी तो लगातार दिनेश की पत्नी से संपर्क में थी और वह उससे पूछ रही थी आप लोग कहां कहां घूमने गए थे? मेरी पत्नी ने तो सारा नक्शा ही अपने दिमाग में बना लिया और वह मुझे कहने लगी कि हम लोग यहां घूमने जाएंगे। मैंने रीमा से कहा कि तुम सब्र रखो हमें वहां पहुंचने तो दो। तुमने तो लगता है हमें घर बैठे ही सारा केरला घुमा दिया। हम लोग फ्लाइट से जाने वाले थे और जिस दिन हम लोग घर से निकले उस दिन हम सब लोग बहुत ही एक्साइटेड थे। मैं तो इस बात से खुश था कि मेरे साथ मेरे मम्मी पापा भी आ रहे हैं। मेरे पापा मम्मी पहली बार ही फ्लाइट में बैठ रहे थे इसलिए उन्हें थोड़ा डर लग रहा था परंतु मैंने उन्हें कहा कि आप डरिए मत ऐसा कुछ भी नहीं होगा और जब वह फ्लाइट में बैठे तो उन्हें बहुत अच्छा लग रहा था। उसी फ्लाइट में एक लड़की थी। उसने चश्मे पहने हुए थे। वह बार बार मेरी तरफ घूर कर देख रही थी। जब मैं अपनी सीट में बैठ गया तो वह मुझसे पूछने लगी क्या यह आपके मम्मी पापा हैं? मैंने उसे कहा हां यह मेरे मम्मी पापा हैं।</p>
<p>वह कहने लगी आप अपने माता पिता का कितना ध्यान रखते हैं। आजकल कोई अपने माता पिता का इतना ध्यान नहीं रखता। मैंने उससे कहा क्यों तुम ऐसा क्यों कह रही हो? वह कहने लगी मैं एक सामाजिक संस्था से जुड़ी हूं और वहां पर मैं बुजुर्गों की सेवा करती हूं। वहां पर कई ऐसे बुजुर्ग लोग आते हैं जिनको कि उनके बच्चे घर से निकाल देते हैं। मैंने उससे पूछा तुम कहां रहती हो? वह कहने लगी मैं यही अहमदाबाद में रहती हूं लेकिन अक्सर मैं काम के सिलसिले में इधर-उधर जाती रहती हूं। उसने मुझसे हाथ मिलाया और अपना नाम बताया। उसका नाम रोहिणी है। रोहणी मुझे जाने लगी आप कहां जा रहे हैं? मैंने उसे कहा मैं केरला जा रहा हूं। वह कहने लगी मैं भी कुछ दिनों के लिए वहीं पर हूं। हम लोग वहां पर एक सेमिनार करवाने वाले हैं। मैंने कहा चलो यह तो अच्छी बात है। अगर तुम्हें समय मिले तो तुम मुझे मिलना। मैंने उसे अपने दुकान का विजिटिंग कार्ड दे दिया। वह कार्ड देखते ही मुझे कहने लगी क्या आप कि ज्वेलरी की शॉप है? मैंने उसे कहा हां मेरी ज्वेलरी की शॉप है। कभी तुम आना जब तुम्हें समय मिले। वह कहने लगी जरूर क्यों नहीं। मैं पक्का आऊंगी और अब हम लोग पहुंच चुके थे। मैं जिस होटल में रुका था वहां का स्टाफ बहुत ही अच्छा था और वहां के मैनेजर से तो मेरी दोस्ती ही हो गई थी। मुझे कोई भी छोटी मोटी चीज की जरूरत होती तो मैं उससे ही पूछ लेता और वह मेरी मदद कर देता। हम लोगों ने केरला में काफी इंजॉय किया। एक दिन मेरे फोन पर रोहणी का फोन आया। वह कहने लगी सर यदि आपके पास वक्त हो तो आप हमारे सेमिनार में आ जाइए। मैंने सोचा मैं तो यहां घूमने आया हूं मैं उसके सेमिनार में जाकर क्या करूंगा लेकिन उसने मुझे बुला ही लिया।</p>
<p>मैंने अपनी पत्नी से कहा कि तुम मम्मी-पापा का ध्यान रखना मैं कुछ समय बाद आता हूं। यह कहते हुए मैं जब रोहिणी के बताए पते पर पहुंचा तो वहां पर वह सेमिनार करवा रही थी और उसके साथ में काफी लोग भी थे। जब सेमिनार खत्म हुआ तो मैंने उसे कहा तुम तो बड़ी ही समझदार हो और तुमने जिस गर्मजोशी से आगे से बोलना शुरू किया मुझे बहुत अच्छा लगा। वह कहने लगी आप भी हमारे साथ जुड़ जाइए। मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हें अहमदाबाद में मिलूंगा और उसके बाद मैं इस बारे में तुमसे बात करूंगा। मैंने उसे कहा यदि आज तुम फ्री हो तो शाम को तुम हमारे साथ ही डिनर पर आ जाओ। वह कहने लगी ठीक है मैं शाम को आ जाऊंगी लेकिन मेरे पास कोई कन्वेंस नहीं है। मैंने उसे कहा मैं तुम्हें लेने के लिए शाम के वक्त आ जाऊंगा। उसने मुझे अपने होटल का एड्रेस दे दिया था शाम के वक्त जब मैं उसके होटल में गया तो मैं उसके रूम में पहुंच गया। जैसे ही मैं उसके रूम में पहुंचा तो वहां पर मुझे कोई दिखाई नहीं दे रहा था।</p>
<p>मैं रूम में ही बैठा था जैसे ही रोहणी बाथरूम से बाहर निकली तो वह पैंटी और ब्रा में थी उसने पिंक कलर की पैंटी ब्रा पहनी थी जिसमे उसका बदन बडा ही अच्छा लग रहा था। उसके बदन को देखकर मेरा लंड एकदम तन कर खड़ा हो गया मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाया शायद वह भी मुझे देखकर डर गई थी और वह अपनी जगह पर ही खड़ी हो गई उसका बदन गिला था। मैंने जब उसकी कमर पर अपने हाथ को रखा तो मेरा लंड और भी ज्यादा बड़ा होने लगा। मैंने उसके नरम होंठों को जब चूसना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा मैं उसके होठों को बड़े अच्छे से चूस रहा था और मेरा लंड भी एकदम तन कर खड़ा हो गया। मैंने उसकी पैंटी और ब्रा को उतार दिया। जब मैंने उसके स्तनों को अपने हाथों से दबाया तो वह पूरी तरीके से गर्म हो गई और मैंने उसके स्तनों को काफी देर तक चूसा। जब मैंने उसकी योनि को चाटना शुरू किया तो उसे मजा आ गया मैं उसे उठाते हुए बिस्तर पर ले गया और मैंने उसे लेटा दिया। मैंने उसके स्तनों पर अपने लंड को रगडना शुरू कर दिया। जब उसने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ते हुए अपने मुंह के अंदर लिया तो मुझे और भी ज्यादा मजा आ गया। वह मेरे लंड को सकिंग करने लगी और बड़े अच्छे से चूस रही थी जब वह अपने गले तक मेरे लंड को लेती तो मुझे और भी ज्यादा मजा आ जाता मैंने भी उसके गले तक अपने लंड को डालना शुरू कर दिया था। जब मैंने उसकी योनि पर अपने लंड को लगाया तो मचलने लगी। मैंने उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया मैंने भी धीरे धीरे अपने लंड को उसकी योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया। जब मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो मुझे बहुत ही अच्छा महसूस होने लगा और उसे भी मजा आ गया उसके चेहरे पर एक अलग ही खुशी के भाव थे। वह मुझे कह रही थी बस अब तो आप मुझे पेलते रहो मैंने भी बड़ी तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिए। उसकी योनि इतनी ज्यादा टाइम थी कि मुझे उसे चोदने में बड़ा मजा आता। मैंने उसकी लंबी टांगों को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और बड़ी तेजी से उसकी चूत मारी। मैंने जब अपनी जीभ उसके स्तनों पर लगाई तो मुझे बहुत मजा आ गया मैंने उसे बड़ी तेजी से पेलना शुरू कर दिया। मैं उसे पूरे जोश में चोद रहा था और वह भी अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी। वह मुझे कहने लगी आप ऐसे ही मुझे धक्के देते रहो। मैंने उसकी चूत का भोसड़ा बना कर रख दिया था जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने रोहणी के मुंह पर अपने लंड को लगा दिया। उसने मेरे लंड को अपने मुंह से चूसना शुरू कर दिया और जैसे ही मेरा वीर्य उसके मुंह के अंदर गिरा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ।</p>