शिप्रा सेक्स बॉम्ब की चुदाई

हाय मैं शैलेश हूँ और मैं कोई भी मौका नही छोड़ता सेक्स का, मैं एक ठीक-ठाक दिखने वाला लड़का हूँ और मेरे लॅंड की लंबाई 6.5″ है, ये कहानी 100% सच है और अगर आपको ये कहानी अछि लगे तो मैल करना मत भूलना “[email protected]” पर और अगर कोई नागपुर गर्ल चाहे मेरे साथ सीक्रेट गंदी बाते और इंटिमेट रीलेशन रख सकती है और मैं हर बात को सीक्रेट रखूँगा, दोस्तो मेरा खास निवेदन है की प्लीज़ मुझे लड़की शेर करने के बारे मे कोई मैल ना करे, क्योंकि मैं इस तरहा के मैल को इग्नोर कर देता हूँ, बिना टाइम वेस्ट किए स्टोरी पर आते है, मैं एक स्टूडेंट हूँ लक्ष्मी नगर देल्ही मे और मेरी क्लास मे एक लड़की थी जिसका नाम शिप्रा है, वो बहुत सेक्सी है बड़ी चुचियाँ और बड़ी सी गोल गॅंड, क़यामत थी वो जिससे हम मदर डेरी बोलते क्योकि उसकी चुचियों का साइज़ 36 सी और गॅंड 34 का था और वेस्ट 30, मेरी उससे नोट्स के बहाने इंट्रोडक्षन हो गई और अगल बगल रोज़ बैठने लगे तो फ्रेंडशिप हो गयी और नंबर एक्सचेंज भी, व्ट्सॅप पर एक दिन चॅट चल रही थी तो मैने जान कर उससे किस वाली स्माइली भेजी तो उसने भी किस बॅक कर दिया.

फिर मैने कॉल किया उसे और बोला स्माइली से काम नही चलेगा, तो उसने बोला ठीक है असली मे दे दूँगी चूमि और फिर हमने पूरी रात फोन पे सेक्स टॉक करी, हम दोनो ने नेक्स्ट डे क्लास बंक करके पीछे गार्डेन मे बहोत स्मूचेस किए और मैने उसकी चुचियाँ भी प्रेस किए, क्योकि मैं बहोत स्ट्रेट फॉर्वर्ड लड़का हूँ तो मैने शिप्रा को पहले ही बोल दिया नेक्स्ट डे की मैं सिर्फ़ मज़े के लिए रिलेशन्षिप रखना चाहता हूँ और मैं कई लड़कियों के साथ इंटिमेट होता हूँ और डीप्ली अटॅच नही होता तो ध्यान रखना पर उसने मुझे शॉक दे दिया, उसने कहा मेरी चुचियाँ और गॅंड ऐसे ही इतने बड़े नही है मैं भी काफियों से रीलेशन रख चुकी हूँ और मैं समझ गया की ये भी कोई कम नही है अपनी ही केटेगरी मे आती है, फिर क्या था अगले दिन हमने उसके रूम पे सेक्स करने का प्लॅन बनाया जहा वो अपनी फ्रेंड्स के साथ रूम शेर करती थी, क्योकि वो अंबाला से थी, मैने कॉंडम का पॅक लिया और सुबह उसके घर पहुचा तो जाते ही देखा वो वही थी, मैं उसके फ्लॅट मे एंटर हुआ तो देखा की वो अकेली है उसकी फ्रेंड्स शायद अपने काम पर चली गई थी और फिर मैने उसे किस करना स्टार्ट कर दिय

मैने उसे बहोत स्मूच किया और वो बहोत वाइल्ड हो गयी और काफ़ी सेक्सी लुक्स देने लगी, मैने उसकी ट्राउज़र और पैंटी भी खोल दी और पूरी बॉडी को आछे से स्मूच करने लगा, ऐसा करने से मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा था, फिर मैने उसके निपल्स और चुचियों को बहोत चूसा जोकि बहोत सॉफ्ट थी, उसके बच्चे काफ़ी खुश नसीब होगे जो उन्हे इतना सॉफ्टी मिल्क टॅंकर मिलेगा रोज़ दूध पीने के लिए, फिर मैने उसे उल्टा लेटा कर उसकी गॅंड पर थप्पड़ मारने लगा उसे रंडी और कुत्ति बुलाने लगा और उसे वो काफ़ी एंजॉय कर रही थी, वो काफ़ी ओपन थी और बोल्ड भी जिससे उसके साथ सेक्स करने मे बहोत मज़ा आ रहा था, फिर वो भी मेरी पैंट उतार कर मेरा लॅंड चूसने लगी जो ऑलरेडी हार्ड था, क्योकि मैने उसकी सॉफ्ट चुचियों को चूसा जो की थी, उसने बहोत ही मज़े से मेरा लॅंड चूसा, मेरे लॅंड को पूरा लोलीपोप की तरह चूस कर मुझे अपना पानी छोड़ने पे मज़बूर कर दिया, क्योकि वो पूरी ट्रेंड थी चुदाई मे, फिर मैने सारा माल उसके फेस पे छोड़ दिया और उसकी चुत को अपना नेक्स्ट टारगेट बना कर उसे चाटने लगा, उसकी चुत के फ्रॅग्नेन्स बहोत ही मदहोश करने वाली थी, कस्तूरी से भी अछी फ्रॅग्नेन्स थी जो किसी भी लड़के को अट्रॅक्ट कर सकती थी.

क्योकि शिप्रा पहले ही गरम थी तो उसकी चुत टपाक रही थी और मैने अपनी जीभ और फिंगर से उसे गरम कर दिया जिससे वो एग्ज़ाइटेड होकर आ अया उहह बसस्स चोदो मुझे मोन करने लगी, फिर अपना अमृत रस छोड़ने लगी और मैं अपनी जीभ से सारा माल चट कर गया, उसकी आँखो मे वो रंडी वाली लुक देख कर बहोत अछा लग रहा था जो मेरे लॅंड को अपनी चुत फाड़ने के लिए ज़ोर ज़ोर से पुकार रही थी, फिर मैने देर नही की और मैने चॉकॅलेट फ्लेवर कॉंडम निकाला और उसने वो मेरे लॅंड पे लगाया और हम एक दूसरे के अंदर थे और मैने उसे मिशनरी, कॉवगिरल और डॉगी स्टाइल मे चोदा और उससे मेरा कॉंडम वाला लॅंड सक करवाया जिसमे उसकी चुत का रस और कॉंडम का फ्लेवर था, मैने भी उसकी चुत को चाट कर सॉफ किया और फिर हम दोनो साथ ही नहाने गये और एक दूसरे को बाथरूम मे चोदना स्टार्ट किया, फिर मैने स्ट्राबेर्री कॉंडम लिया और उसकी गॅंड मे खूब ओइल लागा कर उसकी वर्जिन गॅंड का उद्घाटन किया, उसे बहोत दर्द हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था इसलिए वो रोकने के लिए भी नही बोल रही थी, उसकी गॅंड को मारने मे बहोत मज़ा आया और मैने उसके चुतडो पे थप्पड़ मार-मार के पूरे लाल कर दिए और चार पाँच लव बाइट्स भी छोड़ दिए

फिर हम नहा कर रेडी हुए और उसने एक ब्लॅक ड्रेस पहनी विदाउट ब्रा, शाम को हम दोनो ख़ान मार्केट गये और पब मे काफ़ी दारू पी कर इंटिमेट डॅन्स किया, किस और प्रेस करते-करते डॅन्स कर रहे थे क्योकि बहोत कम लोग थे और काफ़ी डार्क एन्वाइरन्मेंट था, और फिर काफ़ी दीनो तक हम रोज़ सेक्स करते थे, एक दिन मेरी उससे बहेस हो गयी क्योकि वो काफ़ी रूड्ली बात करती थी तो फिर हमने सब कुछ बंद कर दिया बिकॉज़ मैं किसी का फालतू आटिट्यूड टॉलरेट नही करता, पर मैं अभी भी उसकी सेक्सी चुचियाँ और उसकी गॅंड को मिस करता हू, उसके साथ बिताया हर एक सेक्स मोमेंट कभी भूला नही जा सकता, मैने उसके साथ चुदाई का पूरा मज़ा लिया, अगर किसी भी फीमेल को सेक्स या सेक्स चॅट करनी है तो मुझे मैल करिए “
“inchudaimaza @gmail.com” पर, और नीचे दिए गये कॉमेंट सेक्षन मे मुझे बताइए की आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी. कहानी पढ़ने के बाद अपने विचार नीचे कॉमेंट्स मे ज़रूर लिखे, ताकि हम आपके लिए रोज़ और बेहतर कामुक कहानियाँ पेश कर सके – डीके

एक फूल दो काँटे



हेलो दोस्तो, केसे हो आप सब? मेरा नाम आशा है और आज मैं आपको अपनी एक कहानी बताने जा रही हूँ. पर कहानी बताने से पहले मैं आपको अपने बारे मे बताना चाहती हूँ. तो चलिए पहले अपने बारे मे ही शुरू कर लेते है.

मेरा नाम तो आप जान ही चुके हो और तो और अब काफ़ी कुछ जान भी जाओगे. मैं बहुत ही मस्त लड़की हूँ. मेरा फिगर बहुत ही कमाल का है. मैं एक काफ़ी हस्मुख टाइप की लड़की हूँ. मैं बहुत ही खुश रहती हूँ.

चलो ये सब तो चलता रहता है. मैं अब अपनी स्टोरी पर भी ले कर चलती हूँ. मैं बहुत ही खुश रहती हूँ और रहू भी क्यू ना आख़िरकार मैं हूँ ही इतनी स्मार्ट.

चलो अब ज़्यादा टाइम ना वेस्ट करते हुए आपको कहानी पर ले कर चलती हूँ. मैं तब स्कूल मे थी जब की मेरी ये कहानी है. उस समय मैं नयी नयी जवान हुई थी. और नयी जवान होने पर बहुत कुछ चैंजेस भी आ रहे थे.
मेरी ही क्लास मे एक लड़का है जिसका नाम मनीष है. वो बहुत ही स्मार्ट है और तो और मैं उसे काफ़ी ज़्यादा पसंद भी करती हूँ.मैं उसे काफ़ी देखती रहती हूँ और तो और बड़े ही प्यार से उससे बात करती हूँ.

और फिर ऐसे ही मैने उससे पहले फ्रेंडशिप करली और फिर मैं उसके साथ टाइम स्पेंड करने लग गई. मुझे उसके साथ क्लास मे टाइम स्पेंड करना बहुत ही अच्छा लगता था. और तो और उसे भी अब ये बहुत ही अच्छा लगता था. मैं बहुत ही खुश भी थी की वो भी मुझे अब पसंद करने लग गया है.

मैं अब उसके साथ क्लास मे ही लेटर के थ्रू बात किया करती थी. अपने प्यार का जिक्र किया करते थे और तो और फिर ऐसे ही सब कुछ किया करते थे. ऐसे ही चल रहा था की एक दिन उसने मुझे बाहर गार्डेन मे मिलने को काहा और फिर तब मैने सोचा की मिलने जाउ या ना जाउ.

क्योकि मुझे ये भी डर था की क्लास का कोई भी हमे एक साथ देख ना ले. फिर मैने हिम्मत करी की देखा जाएगा और फिर मूह पर रुमाल बाँध कर उससे मिलने चली गई. वाहा पहुच कर मेरी हिम्मत और खुल गई और फिर मैं उससे बात करने लग गई और उसके साथ ही घूमने लग गई.

ये एहसास होने के बाद मैने सोचा की अब सब कुछ जो होगा देखा जाएगा बस अब मनीष साथ टाइम स्पेंड करना है. फिर हम ऐसे ही मिलने लग गये. हम ऐसे काफ़ी बार मिले और तो और उसने एक बार भी मुझे ग़लत इंटेन्षन से कभी भी टच न्ही किया जो की उसका प्लस पॉइंट था.

पर मैं तो काफ़ी कुछ चाहती थी यानी की मैं उसके जिस्म को छूना चाहती थी और मैं चाहती थी की वो मेरे जिस्म को भी छुए. और तो और ऐसे ही फिर उसके दिल तक ये बात पहुच ही गई. कहते है ना की दिल की बात दिल ही जानता है तो ठीक वैसे ही मेरे साथ भी हुआ था.

और फिर उसने तभी मेरे होंठो को चूस लिया . मैं बहुत ही खुश हो गई और मैं भी उसके होंठो को चूसने लग गई. मै बहुत ही पागल हो रही थी की आख़िरकार ये क्या हो रहा है. और फिर उसने मेरे बूब्स को हाथो मे ले लिया और दबाने लग गया और ऐसे ही मैने भी हाथ अंदर डाल ही दिया.
फिर हम जब भी मिलते तो हाथो से ही कुछ ना कुछ कर लेते. फिर ऐसे ही हम एक दूसरे को ज़्यादा छेड़ने लग गये और फिर ऐसे ही उसने अपना पानी निकलना शुरू कर दिया और साथ ही साथ मेरा भी निकालने लग गया.

फिर एक दिन उसने मुझसे चुदने को काहा यानी की चूत मे लंड को लेना. ये सुन कर मैं घबरा गई क्योकि मैं ये सब न्ही कर सकती थी. और फिर मैं ऐसे ही उसको साल भर टालती रही. फिर मेरे घरवालो ने मेरा रिश्ता कही और सेट कर दिया और फिर जब ये बात मैने मनीष को बताई तो हम दोनो फुट फुट कर रोए.

फिर थोड़े ही दीनो बाद मेरी शादी हो गई. मेरे हज़्बेंड का खुद का काम था यानी की खुद की ही शॉप थी. मैं बहुत ही खुश रहा करती थी. उन्होने मेरे साथ चुदाई करके मुझे चुदकक्ड बना दिया था. और तो और मैं उसने बहुत प्यार करने लग गई.

पर मेरे लिए तो डबल डबल खुशिया थी. क्योकि मेरे पति तो मुझसे प्यार करते ही थे और दूसरी तरफ मनीष भी मुझसे काफ़ी प्यार करता था और अब तक करता आ रहा था. ये देख कर मैं काफ़ी खुश थी की मुझे दोनो की तरफ से बहुत ही प्यार मिलना है.

और फिर ऐसे ही थोड़ा टाइम निकल गया. मैं काफ़ी खुश भी थी और मैं आपको बता दू की मेरे पति लुधियाना, देल्ही की टूरिंग भी करते थे तो वो कभी कभी जाते थे और तब मैं घर पर अकेली राहा करती थी.

फिर एक दिन उनके जाने के बाद मैने मनीष को मिलने को काहा. पहले तो उसने मुझे मना ही कर दिया की मैं ये क्या कह रही हु. पर मनीष आ ही गया. हम एक रेस्तारेंट मे मिले. हमने काफ़ी देर तक अच्छी बात करी और फिर हम कुछ खाने पीने लग गये. फिर काफ़ी देर बाद उसने मुजसे कहा की कही और चलते है तो मुझे कुछ समझ ही न्ही आ रहा था की मैं काहा जाउ और काहा ना जाउ. फिर ज़्यादा दिमाग़ लगाने से अच्छा मैं खुद ही उसे अपने घर ले आई.

मैं और वो दोनो ही बहुत खुश थे. फिर घर आ कर उसने मुझे अपनी बाहो मे भर लिया. मैं उसे मना करने लग गई की मैं अब शादी शुदा हूँ. तो वो मुझे कहने लग गया की मैं तो तुम्हारा पहला आशिक़ हूँ और तुम मुझे अब भी मना करोगी.

मेरी तड़प को देखो ना. और फिर उसकी इस तड़प को देख कर मुझे भी लगा की अब हो ही जाना चाहिए. और फिर उसने मेरे कपड़ो को उतार दिया और मैने भी उसके कपड़े उतार दिए. मैने उसके लंड को हाथ मे ले लिया.

फिर तब मैने देखा की उसका लंड मेरे पति से भी मोटा है और काफ़ी बड़ा भी है. और फिर उसके बाद मैने उससे बाहो मे भर लिया और फिर ऐसे ही उसे प्यार करने लग गई. मैं उसे चूमने लगी और वो भी मुझे चूसने लग गया.

मैं पागलो की तरह उसको चूम रही थी और फिर मैने उसके होंठो को चूसना शुरू कर दिया. और फिर उसके बाद मैने उसके लंड को मूह मे भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गई. मुझे बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ राहा था और तो और वो मेरी चुत को चाटने लग गया.

मैं भी पागल हो रही थी और फिर ऐसे ही मैने भी उसको अपने उपर आने को काहा. और फिर वो मेरे उपर आ कर बैठ गया और मेरे बूब्स को चूसने लग गया. मैं तो पागल हो रही थी और तो और फिर मैने अपनी टाँगे को खोल दी और उसने लंड को मेरी चूत पर सेट किया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लग गया.

ये देख कर मैं पागल हो गई और ज़ोर ज़ोर से आहह आह करने लग गई और खुद को चुदवाने भी लग गई. मुझे बहुत ही मज़ा आ राहा था और तो और वो भी पागल हो राहा था और फिर ऐसे ही मुझे चोदने के बाद मैने उसके लंड पर अपना पानी निकाल दिया.

और फिर उसके बाद उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरी गांद को चोदने लग गया. मुझे बहुत ही ज़्यादा दर्द हो रहा था और काफ़ी देर तक चोदने के बाद उसने मेरी गांद मे ही पानी निकाल दिया और फिर थक कर लेट गया.

बस फिर उसके बाद मैने ऐसे ही उससे बहुत ही सारी बाते करी और फिर उसने मुझसे काहा की तुम अब भी मेरी ही रहोगी ना. तो मैने भी कह दिया की हाँ हाँ ज़रूर. और फिर ऐसे ही मैने उसको काहा की अब सब पहले जैसा होगा.

और फिर वो खुश हो कर वाहा से चला गया और फिर ऐसे ही मैं उसको मिलने लग गई. अब मुझे अपना प्यार और पति का प्यार दोनो का प्यार मिलने लग गया था.

आप सब को मेरी ये कहानी केसी लगी मुझे ज़रूर बताना



चलो कुछ नया ट्राइ करते है

हेलो दोस्तो, मैं आपका दोस्त राज फिर एक बार आपके लंड ओर चुतो को सलाम करके एक न्यू स्टोरी लेकर आया हूँ, उमीद करता हूँ की आपको मेरी और स्टोरीस की तरह ही पसंद आएगी.

बात आज से लगभग 2 साल पहले की है, मैं देल्ही मैं ही था ओर अपने सारे पुराने चक्कर छोड़ कर एक सिंपल लाइफ जीने की कोशिश कर रहा था.

मगर आपको तो पता है के मेरी ज़िंदगी मे, जब भी मैं कुछ बदलने की कोशिश करता हूँ कोई ना कोई घटना घट ही जाती है.

तो बात को ज़्यादा ना बढ़ाते हुए मैं घटना पर आता हूँ संडे का दिन था, मैं घर से घूमने के लिए घर से निकला ओर पुराने किले पर पहुच गया.

क्यों की ये ही एक जगह है देल्ही मे जहाँ पर हर तरह का प्यार देखने को मिल जाता है, तो मैं वहाँ पर लड़के लड़कियों को प्यार करते हुए देख रहा था, ओर अकेला टहल रहा था कोई लड़का किसी लड़की की बाहो मे बाहे डॉल कर बैठा था, या कोई किसी को किस कर रहा था.

मगर वहाँ पर एक लड़की थी जो एक पेड़ के नीचे अकेली बैठी थी ओर पेड़ को खोदकर कुछ लिख रही थी, लड़की ने पेड़ पर खोद कर एक दिल बना रखा था ओर उसमे अंजलि ओर विक्की लिखा था ओर दिल के नीचे आई हॅयेट यू विक्की लिखा था.

वो लड़की दिखने मे बहुत उदास लग रही थी ओर उसकी आँखों से कुछ आसू की बूंदे टपक रहीं थी. मैं थोडा दूर खड़ा होकर उसको देखने लगा, लड़की ने उस दिल को खोदना चालू कर दिया ओर दिल पर जो लव लिखा था उसको मिटा दिया ओर दिल मे तीर का निशान बना दिया ओर वो रोने लगी, मुझसे रहा नही गया ओर मैं उस लड़की के पास पहुच गया.

वो लड़की दिखने मे बहुत सुंदर थी, उसके लंबे लंबे बाल थे ओर गोल चेहरा, नीली आँखें, उँचे उठे हुए चुचे, कद 5 फिट का ओर पतली कमर थी दिखने मे लड़की किसी अच्छे घर की लग रही थी.

मैने उससे पूछा तुम रो क्यों रही हो?

उसने कोई जवाब नही दिया.

मैने फिर पूछा अंजलि तुम रो क्यों रही हो?

उसने कहा आपको मेरा नाम कैसे पता क्या हम एक दूसरे को जानते है?

मैने कहा, मैंने आपको रोते हुए देख कर पूछ लिया बस इंसानियत के नाते.

उसने कहा, क्या यहाँ पर रोने पर भी मनाई है क्या ओर आप कौन जो इंसानियत दिखा रहे हो.

वो लड़की खुद से बहुत उदास थी.

मैने कहा, तुम्तो बेकार मे ही खुद से गुस्सा हो तुम जिसके लिए आँसू बहा रही हो उसको तुम्हारी कोई फिकर नही है ओर वो किसी और से प्यार करता है.

वो लड़की मेरी बात सुनकर एक दम से चोंक गई ओर मुझसे पूछने लगी ये सब आप कैसे जानते हो?

मैने कहा, मैने बताया ना मैं सब जनता हू सब के बारे मैं, ये ही नही ओर ये भी की अभी तुम्हारे दिल मे क्या चल रहा है ओर तुम क्या करने की सोच रही हो (मैं लगातार अंधेरे मैं तीर छोड़ने लगा और मेरे सारे तीर निशाने पर लग रहे थे ओर लगते क्यों नही आपको तो पता है की मैं औरतों को बस मे करने मैं माहिर हूँ).

वो मेरी बात सुनकर रोने लगी ओर बोली जब आप इतना सब जानते हो तो कोई तो रास्ता होगा मेरी इस परेशानी का.

मैने कहा, रास्ते तो बहुत है लेकिन अभी नही तुम मेरा ये मोबाइल नंबर रख लो ओर घर जाकर मुझसे बात करना फिर मैं बता दूँगा क्या करना है.

उसको समझा कर मैं अपने घर आगया ओर वो अपने घर चली गई.

रात के 10 बजे मेरे फोन पर किसी का फोन आया दूसरी तरफ से लड़की की आवाज़ आरहि थी. मैने पूछा कौन बोल रहा है?

उसने कहा आप बताओ आपको तो सब पता है.

मैने कहा बोलो अंजलि कैसी हो?

उसने कहा, मैं तो वैसी ही हूँ लेकिन आपसे मिलकर मेरे दिल ओर दिमाग़ मे जंग हो गई है की आख़िर आप हो कौन?

मैने कहा, तुम चिंता मत करो बस ये सोचलो की मैं आपका एक शुभ चिंतक हूँ ओर मेरी जिसको भी ज़रूरत होती है, मैं उसके पास पहुच जाता हूँ.

अंजलि ने पूछा – आप का नाम क्या है?

मैने उसको बताया मेरा नाम राज है ओर अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मदत कर सकता हूँ.

अंजलि मेरी बातों को बड़े ध्यान से सुन रही थी ओर फिर उसने पूछा आप मेरी क्या मदत कर सकते हो.

मैने कहा मैं चाहूं तो तुमको वो हासिल हो जाएगा जो तुम पाना चाहती हो.

अंजलि ने कहा, वो कैसे?

मैने कहा, बस तुमको मुझ पर भरोसा करना पड़ेगा.

अंजलि ओर इसके लिए मुझे क्या करना होगा ओर कितना खर्चा होगा.

मैने अंजलि को बताया की इसके लिए कोई खर्चा नही होगा बस तुमको एक बार मुझसे मिलना होगा.

अंजलि ने कहा, मैं आप से मिलने तो नही आ सकती लेकिन आप चाहो तो मेरे घर पर आ सकते हो.

मैने कहा, ठीक है तुम मुझे अपने घर का पता बता दो मैं मंगलवार को तुम्हारे घर पर आ जाता हू.

अंजलि ने मुझे अपने घर का पता बता दिया.

ओर मैं मंगलवार को 11 बजे उसके घर पहुच गया अंजलि का घर बहुत बड़ा था ओर घर के बाहर 2 चोकीदार खड़े थे ओर आँगन मे स्वीमिंग पूल था ओर घर के अंदर हर चीज़ थी 3-4 नोकर यहाँ वहाँ घूम रहे थे दरवाज़े मे मुझसे पूछा किससे मिलना है तभी अंदर से आवाज़ आई आने दो इनको ये आवाज़ अंजलि की थी.

मैं अंदर चला गया अंजलि मुझे अंदर एक कमरे मे ले गयी ये कमरा भी बहुत बड़ा था ओर कमरे मे बाथरूम भी अंदर ही था.

अंजलि ने मुझसे पूछा क्या लेंगे ठंडा या गरम.

मैने कहा कुछ नही.

फिर भी अंजलि ने के नोकर को इशारा कर दिया ओर वो मेरे लिए शरबत लेकर आ गया.

अंजलि ने मुझको बेड पर बिठा दिया और पूछा.

अब बताओ आप मेरे लिए क्या कर सकते हो ?

मैने कहा तुम्हारे मों बाप कहाँ है.

अंजलि ने कहा वो तो ज़्यादा तर विदेश मे ही रहते है ओर मैं ही बस यहा रहती हूँ, मैं विक्की से बहुत प्यार करती थी ओर उसको मेरी दौलत से प्यार था जब मुझे ये समझ मे आया तो मैने उसको पैसे देने बंद कर दिए ओर वो मुझे छोड़ कर चला गया.

मैने कहा, ये सब तो मुझे तुमको देख कर ही पता चल गया था तुम बेकार मैं ही आँसू बहा रही हो वो तुम्हारे लायक नही था.

अंजलि बोली लेकिन मैने उसको सच्चा प्यार किया है मैं उसको भूल नही पा रही हूँ, मैने आज तक जिससे भी प्यार किया है वो मुझे छोड़ कर चला जाता है ओर ये कह कर रोने लगी.

मैने कहा दो मिनिट के लिए मेरी बात सुनलो.

सब ठीक हो जाएगा ओर बस 2 मिनिट के लिए गेट लॉक कर दो.

अंजलि ने गेट लॉक कर दिया ओर मेरे पास आकर बैठ गई.

मैने अंजलि को मेरी आँखों मे देखने के लिए बोला वो मेरी आँखों मे देखने लगी ओर फिर मैने उसको आँख बंद करने को कहा और फिर उसको कहा आँख बंद करके गौर से देखो क्या दिख रहा है.

अंजलि ने कहा कुछ नही दिख रहा ओर आँख बंद करके क्या दिखेगा.

मैने अंजलि के सर पर हाथ रख कर कहा गौर से देखो कुछ दिख जाए गा.

ओर अंजलि को अपनी बातों से सम्मोहित करने लगा ओर अंजलि को जो मैं दिखाना चाह रहा था वही दिखने लगा, ओर अंजलि मुझसे बहुत प्रभावित होती जा रही थी.

फिर मैने अंजलि से कहा इस दुनिया मे सब कुछ तुम्हारा है और तुम सबकी हो और सब मेरा है और मैं सबका और तुम मुझ मे हो ओर मैं तुममे इसलिए खुद को मुझमे समा कर देखो.

अंजलि पूरी तरह से मुझसे प्रभावित हो गई.

और फिर इसी तरह से 2-3 दिन मैं हम एक दूसरे के अच्छे दोस्त बन गये. मैं पहले तो 2-3 दिन अपने घर से उसके घर गया.

मगर फिर जब कुछ नही हो पाया ओर अंजलि जीतने समय के लिए मेरे साथ रहती उसको बहुत अच्छा फील होता था मैं उसको मेडिटेट करवाने लगा.

एक दिन अंजलि बोली क्या तुम कुछ दिन के लिए मेरे घर पर रह सकते हो मैने भी हा कर दी.

उस दिन मैं अंजलि को फिर से सम्मोहित कर रहा था, तो मैने अंजलि से कहा की मैं चाहूं तो तुमको वो शक्ति मिल सकती है जिसे पाकर तुम दुनिया के हर इंसान को बस मे कर सकती हो लेकिन इसकी कीमत बहुत बड़ी है.

अंजलि ने कहा, मैं हर कीमत अदा कर दूँगी ओर वो अपने ड्रोवर मैं से 2000 के नोट की गॅडी उठा कर ले आई.

मैने कहा, ये कीमत इस दुनिया के लिए है भगवान की दुनिया मैं तो इसकी कोई कीमत नही है इसके लिए तुमको उस हालत मैं बैठना होगा जिस हालत मे इंसान इस दुनिया मे आता है.

पहले तो वो थोड़ा रुकी गई लेकिन फिर उसने अपने सारे कपड़े उतार कर एक तरफ रख दिए. फिर मैने अंजलि को आँख बंद कर के बैठने के लिए बोल दिया.

अंजलि के आँख बंद करते ही मैने गेट बंद करके अपने सारे कपड़े उतार कर कमरे की लाइट भी बंद कर दी. अंजलि के पास आकर बैठ गया ओर धूप जला दी धूप की खुसबु पूरे कमरे मैं फैल चुकी थी.

मैने अंजलि से कहा की अब तुम तैयार हो.

अंजलि ने कहा मैं तैयार हूँ मुझे क्या करना है.

मैने कहा, ये तो तुमको अब पता चल जाएगा जब मैं अपने उपर उस शक्ति को बुलाउन्गा ओर तुमको मुझसे उस शक्ति को ग्रहण करना है.

अंजलि ने कहा ठीक है.

मैं अंजलि के सामने आँख बंद करके बैठ गया ओर तरह तरह की आवाज़ निकाल कर अंजलि के हाथ पकड़ कर हिलते हुए एक दम से संत हो गया.

फिर आवाज़ को भारी करके अंजलि को हाथ पकड़ कर अपनी तरफ बुलाने लगा, जैसे जैसे अंजलि मेरी तरफ बढ़ रही थी मेरा लंड खड़ा होता जा रहा था धीरे धीरे अंजलि मेरे बिल्कुल करीब आ गयी और मेरे पैर अंजलि के पैरों से चिपकने लगे.

मैने अंजलि को और आगे आने के लिए बोला ओर वो और आगे आ गई और अब मैने अंजलि के दोनो पैरों को अपनी कमर के दोनो तरफ कर दिया.

अब अंजलि की मुलायम सी चुत मेरे लंड से लगने लगी और मेरा सीना अंजलि के सिने से चिपक ने लगा.

मैने अंजलि से कहा आज तुमको मुझमे समाना है ओर मैं तुझमे समा कर तुमको शक्ति दे दूँगा.

मैने अंजलि को थोड़ा सा उठा कर कुछ बड़बड़ाते हुए अपना लंड अंजलि की चुत पर सेट कर दिया ओर अंजलि को धीरे धीरे बैठने के लिए बोला.

अंजलि जैसे जैसे मेरी गोद मे बैठ रही थी मेरा लंड अंजलि की चुत मे घुसता जा रहा था. फिर धीरे धीरे मेरा पूरा का पूरा लंड अंजलि की चूत मैं समा चुका था, लेकिन उसने एक बार भी उः आहह नही की मेरा इतना लंबा ओर मोटा लंड भी वो इतनी आसानी से ले चुकी थी इससे ये तो पता चलगया था की अब तक वो चुद गई थी.

फिर मैने अंजलि को एक नाम बता दिया ओर कहा इस नाम को लेकर उपर नीचे होती रहो.

पहले तो अंजलि धीरे धीरे उपर नीचे हो रही थी, लेकिन जैसे जैसे उसको मज़ा आने लगा उसकी उपर नीचे होने की क्रिया तेज हो गई ओर वो तेज तेज उपर नीचे होने लगी ओर सिसकिया भरने लगी ओर मेरे लंड पर कूदने लगी, जैसे बहुत दीनो के बाद लंड मिला हो.

फिर मैने अपना एक हाथ अंजलि की छोटी छोटी चुचियों पर रख दिया. अंजलि की चुचि किसी अनार के आकर की ओर सख़्त थी.

मैने धीरे धीरे उसके स्तन को सहलाना शुरू कर दिया ओर फिर मैने अपने होठ अंजलि के होठों पर रख दिए.

फिर अंजलि को बाहों मे भर कर उसको उठा कर बेड पर लिटा कर, अब मैने अंजलि की चुत पर अपने लंड की बरसात चालू कर दी ओर मैं तेज तेज धक्के देने लगा.

फिर बीच मे अपना लंड अंजलि की चुत से निकल कर मैं अंजलि की चुत पर आ गया ओर अपने होठ अंजलि की मुलायम ओर मखमली चुत पर रख दिए.

अंजलि की चुत इतनी मुलायम ओर मखन की तरह चिकनी थी के जैसे अभी तक किसी ने उसको चोदा ना हो. लेकिन मेरे लंड को इतनी आसानी से लेने के कारण मैं खुद सोच मे पड़ गया था की ये चुदि है या नही आख़िर बात क्या है मै इसका पता लगा कर रहूँगा.

मैं अंजलि की चुत को छत छत कर सॉफ कर रहा था ओर उसके चुत को भी अपनी जीभ से छेड़ रहा था. अंजलि की चुत की फांकों ने मुझसे अंजलि की चुत की आप बीती मुझे बता दी थी की अंजलि को अभी तक किसी ने नही चोदा था.

ये तो अंजलि ने कुछ नया ट्राइ करने के चक्कर मे अपनी चुत का सत्या-नास कर दिया था, मैं बड़े मज़े से अंजलि की गुलाबी चूत को चूस रहा था ओर अंजलि बेड पर किसी नागिन की तरह बलखा रही थी.

फिर मैं अंजलि की चुत को चाटते हुए उपर बढ़ने लगा. फिर अंजलि के दोनो चुचियो का रस निचोड़ निचोड़ कर पीने लगा और अपने लंड को अंजलि की चुत मे फिर से रख दिया ओर अब अंजलि भी गांद उठा उठा कर धक्के लगाने लगी.

मैं यू ही अंजलि को चोदता रहा ओर फिर 1 घंटे बाद मेरे लंड ने बहुत सारा गाढ़ा क्रीम अंजलि की चुत मे छोड़ दिया.

अंजलि अब तक ना जाने कितनी बार झाड़ चुकी थी ओर अब वो बिल्कुल शांत्त पड़ गई थी. मैं अंजलि के उपर पूरा नंगा लेटा हुआ था ओर फिर बेहोशी का नाटक करके एक तरफ़ पड़ गया.


बड़ा लंड गया बहन की चूत के अन्दर

<p>हेल्लो मेरे दोस्तों क्या भौंक रहा है आपका लंड आजकल | सब बढ़िया चल ही रहा होगा और नहीं भी चले तो अपना क्या अपना तो लंड हमेशा पिचकारी ही चलाता रहता है | दोस्तों मेरा नाम है संपू और मैं भत्ता मोहल्ले में रहता हूँ जहाँ पे ईट बनायीं जाती हैं | ये एरिया बड़ा ही ख़राब हैं क्यूंकि यहाँ पर आसामाजिक तत्व हमेशा बैठे रहते है और दारु गांजा चलता रहता है | इनको देख कर लगता है इनकी गांड में सरिया डाल दूँ गरमा गरम पर साला कर नहीं सकता क्यूंकि इन लोगों का बजन चलता है पूरे एरिया में | अगर मैंने इनसे कुछ कहा तो मेरी गांड तोड़ देंगे और मेरे घरवालों को भी परेशान करेंगे | दोस्तों ये था मेरे बारे में और मैं कहा रहता हूँ उसके बारे में | अब मैं अपने घर के बारे में आपको कुछ बता देता हूँ | तो दोस्तों मैं अकेला नहीं हूँ मेरी एक बड़ी बहन है और मम्मी पापा हैं घर में | मेरे पापा सरकारी नौकरी करते हैं और हम दोनों पढ़ाई करते हैं और मम्मी घर संभालती हैं | हम बड़े ही सभ्य लोग हैं और किसी से कोई मतलब नहीं रखते और जहाँ हम रह रहे हैं वहां कोई मतलब रखने लायक है भी नहीं |</p>
<p>पर लोग हमसे जलते हैं और क्यूंकि वहां कोई हमारे जैसा नहीं है | सिर्फ दो तीन घर हैं वहां और हमारा घर सबसे बड़ा है | मैंने पापा से कहा था कहीं अच्छी जगह घर लेते हैं भले ही पैसे लग जाए ज्यादा | पर मेरा बाप सरकारी नौकरी पर होते हुए भी सस्ती चीज़ें देखता है | कभी कभी तो गुस्सा आती है मुझे | मुझे गुस्सा इसलिए भी आती है क्यूंकि मेरी बहन बहुत जवान है और उसका फिगर भी बड़ा सेक्सी है और सारे लड़के मोह्हले के उसको देखते हैं और गंदे गंदे कमेंट करते हैं | मैंने एक बार पुलिस को फोन लगा दिया था और दो लड़कों की गांड टूट गयी थी | तबसे कुछ शांत है पर यहाँ के बड़े गुंडे पुलिस से भी नहीं डरते और मेरी बहन को पटाने के चक्कर में लगे रहते हैं | वो तो भला हो मेरी बहन इतनी समझदार है कि उसे इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता और वो सब अच्छे से समझती है | वैसे मेरी बहन है बड़ी धांसू क्यूंकि उसकी गांड और दूध जो भी देखले फ़िदा हो जाए | मैंने ऐसा इसलिए कहा क्यूंकि मैं देख चुका हूँ |</p>

<p>मैंने अपनी बहन को चोदने के बारे में कभी नहीं सोचा पर मैं उसके बारे में सोचके मुट्ठ मारता हूँ रोज़ | जब वो नहाने जाती है तो मैं चुपके से किचन की खिड़की के पास चढ़ जाता हूँ और उसको नंगा अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लेता हूँ | मुझे उसकी चूत देखने का मौका नहीं मिला क्यूंकि उसकी चूत पे बहुत बाल हैं | ऐसा करना गलत है पर जिस दिन से मैं भाई बहन में चुदाई वाली ब्लू फिल्म देखी है उस दिन से मैं अपनी बहन का दीवाना बन गया हूँ और बस वो ही मेरे दिल और दिमाग में छाई रहती है | मेरी बहन को इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है और मैं नहीं चाहता कि उसको पता चले | हाँ पर मैं एक चीज़ से अपना काम चला लेता था वो है मेरी बहन की ब्रा पेंटी | मैं रोज़ उसके कमरे में जाता और उसकी पहनी हुयी ब्रा पेंटी को सूंघ के उसके दूध और चूत की खुशबू को सूंघ के अपना मुट्ठ निकालता | कभी कभी तो मैं उसके ब्रा में और पेंटी में ही अपना मुट्ठ भर देता था |</p>

<p>मेरी बहन को ये सब पता नहीं था पर एक दिन सब घर में थे और मेरी बहन दूकान गयी थी कुछ सामान लेने के लिए और वही गंदे लड़के वहां खड़े थे | उन्होंने कहा अरे जानेमन हमसे चुदवा लो और कितना रुकोगी | मैंने देख लिया और मैं जाने लगा उसके पास तो उसने कुछ ऐसा कह दिया जिसकी मुझे उम्मीद नहीं थी | उसने कहा मेरे भाई का लंड 10 इंच का है अगर इतना बड़ा है तो बताओ यही चुदवा लूंगी | तो एक लड़के ने कहा भाई का लंड लेगी क्या ? मेरी बहन ने कहा क्यूँ तुझ जैसे रंडी के बच्चे का लंड लेने से अच्छा है अपने सगे भाई का लंड अपनी चूत में ले लूँ | इतना कहकर वो आगे बढ़ गयी और मेरी छाती चौड़ी हो गयी और मन में लगा वाह अगर मेरी बहन सच में मेरा लंड लेले तो कितना मज़ा आ जाए | मैं ऐसा ही सोच रहा था और मेरी बहन घर आ गयी और मैं उसे देख कर मुस्कुरा रहा था | हम सब ने खाना खाया और वो बस मुझे ही देख रही थी और मैं उसे देख कर मुस्कुरा रहा था और वो भी हल्का सा मुस्कुरा रही थी |</p>

<p>मुझे बड़ा अजीब लग रहा था जब वो ऐसा कर रही थी क्यूंकि मेरे मन में तो उसकी चुदाई घूम रही थी | जब हमने खाना खा लिया और अपने अपने कमरे में चले गए तब वो मेरे कमरे में आई और उसने कहा संपू सुन तो मैंने कहा हाँ क्या हुआ बोल ना ? उसने कहा चल मेरे साथ मेरे कमरे में तुझसे कुछ बात करनी है | मैंने कहा हाँ चल और मैं उसके कमरे में चला गया | उसने मेरे सामने अपनी ब्रा और पेंटी रखी और कहने लगी यार देख मेरे कमरे में ना शायद कोई चूहा घुस गया मेरे सारे कपडे ख़राब कर रहा है | मैंने मन में सोचा अब मैं इसको कैसे बताऊँ कि वो चूहा मैं ही हूँ | पर उसकी ब्रा पेंटी देखते वक़्त मेरा लंड खड़ा हो गया था | अब वो नीचे झुकने लगी तो उसके दूध की नाली और पूरा ब्रा साफ नज़र आने लगा मुझे | फिर वो पलट के नीचे घुसी और पूछा कुछ दिखा क्या ? मैंने कहा हाँ मेरा मतलब नहीं अभी कुछ नहीं दिखा | मुझे उसकी गांड की नाली भी साफ दिख रही थी जो कि बिलकुल गोरी और चिकनी थी |</p>

<p>मेरा लंड ऐसा खड़ा हो जैसे सरिये को गरम कर दिया हो | फिर वो उठी और मेरे पास आई और कहा अच्छा तुझे नहीं दिखा क्या तो मैंने कहा नहीं | उसने मेरा लंड हलके से पकड़ा और मुझसे चिपकते हुए बोली यही तो है वो चूहा | मैंने कहा क्या मतलब तो उसने बताया जब तू मुझे नहाते हुए देख सकता है तो मैं तुझे मुट्ठ मारते हुए नहीं देख सकती क्या ? मैंने कहा मतलब तूने जो उन लडको से कहा वो सच था | उसने कहा हाँ मुझे तेरा ही 10 इंच का लंड लेना है अपनी चूत में और इतना बोलते हुए मेरे लोअर को उतार दिया | वो मेरे लंड को ऊपर नीचे करते हुए उससे खेलने लगी और अपने कपडे भी उतारने लगी | वो बस ब्रा पेंटी में मेरे सामने खड़ी थी और उसका चिकना बदन मुझे तरसा रहा था | फिर उसने मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया और और चूसने लगी | मैंने भी उसके बदन को सहलाने लगा और उसके दूध को दबाने लगा | वो जोर से मेरा लंड चूसने लगी और उसके दूध मैं मस्त दबाने लगा | उसके दूध मेरे हाथों में नहीं समां रहे थे इतने बड़े थे |</p>

<p>फिर उसने अपनी ब्रा को खोल दिया और मैंने उसके निप्पल को चूसने लगा और धीरे धीरे मैंने उसकी पेंटी को भी उतार दिया | उसके बाद मैं उसकी चूत में ऊँगली करने लगा और वो सिस्कारियां लेने लगी | हम दोनों अब ६९ पोजीशन में आ गए थे | वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं उसकी चूत को चाट रहा था | मैंने उसकी चूत को खोला और देखा तो वो एकदम गीली और गुलाबी थी | मैंने उसकी चूत को तब तक चाटा जब तक उसने पूरा माल मेरे मुंह में नहीं बार और मैंने भी अपना मुट्ठ उसके मुंह में भर दिया | फिर हम एक दुसरे से चिपक गए और मैंने उसके दूध को फिर से पीना शुरू कर दिया और मेरे लंड को सहलाने लगी और मैं उसकी गांड में ऊँगली कर रहा था | वो आआह्हह्हह ऊऊउह ऊऊउम्म्म्म आआह्हह्हह ऊऊउह ऊऊउम्म्म्म कर रही थी | उसके बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मैंने अपने लंड को उसकी गीली चूत पे टिका दिया और एक धक्का मारा तो पूरा पंड उसकी चूत में | वो पागल हो गयी और कहने लगी निकाल |</p>

<p>पर मैं धीरे धीरे चोदने लगा | उसने बिस्तर को कस के पकड़ लिया और थोड़ी देर बाद मस्त हो गयी और आआह्हह्हह ऊऊउह ऊऊउम्म्म्म आआह्हह्हह ऊऊउह ऊऊउम्म्म्म करते हुए मेरा चुदाई में साथ देने लगी | करीब आधे घंटे तक मैंने उसकी चूत मारी और पूरी चादर पे ख़ून था | उसके बाद मैंने उसके गांड के छेद को भी चोदा और पूरा मुट्ठ उसकी गांड के अन्दर भर दिया | वो मेरे लिए नए नए कंडोम लाती है और रोज़ मुझसे चुद्वाती है और मैं सच में बहनचोद बन गया हूँ |</p>