बड़े चूचों वाली स्टूडेंट की चुदाई

मेरा नाम सन्दीप सिंह है. मैं भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले का रहने वाला हूं। मेरी हाइट करीब 5.7 फीट है। मैं सदैव व्यायाम करता हूं। जिससे मेरा शरीर बिल्कुल फिट है। मेरे लंड का साईज करीब 7 इंच लम्बा और करीब 2.5 इंच मोटा है। हमारी ज्वाइंट फैमिली है.

मैं सन् 2012 से ही इस साइट का नियमित पाठक हूं। अन्तर्वसना के बारे में मुझे तब पता चला जब मैं ट्रेनिंग ले रहा था। ट्रेनिंग के दौरान मेरी मुलाकत एक व्यक्ति से हुई जो हमारे साथ ही ट्रेनिंग ले रहा था। वह राजस्थान के किसी जिले का रहने वाला था। आज मैं सेंट्रल गवर्नमेंट में एम्प्लोई हूं और अच्छी पोस्ट पर काम कर रहा हूं.

यूं तो मेरी जिन्दगी में बहुत से ऐसे वाकये हुए हैं जो मैं आप लोगों के साथ साझा करना चाहता हूँ लेकिन शुरूआत सबसे दिलचस्प किस्से के साथ करते हैं. यह किस्सा उस वक्त का है जब मैं इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी होने के बाद कॉलेज में गया था. चूंकि मैं अपनी कॉलेज की फीस और पढ़ाई का खर्च खुद ही उठाना चाहता था इसलिए मैंने एक स्कूल में टीचर की जॉब भी कर ली थी.

वह स्कूल बाहरवीं कक्षा तक था, मगर मुझे पढ़ाने के लिए नवीं और दसवीं कक्षाएं दी गईं. मुझे स्कूल में गणित और विज्ञान पढ़ाना था. शुरूआत में तो बड़ा ही अजीब लगता था और शर्म-सी भी आती थी. इसलिए मैं थोड़ा घबराता था. क्लास खत्म होने के बाद मैं ऑफिस में आकर बैठ जाता था.

स्कूल में हफ्ता भर आराम से निकल जाता था. फिर वीकेंड पर मेरी कॉलेज की क्लास होती थी. इस तरह से मैं काफी व्यस्त रहने लगा था. समय जल्दी से निकल रहा था और कब मुझे स्कूल में पढ़ाते हुए दो महीने बीत गये, कुछ पता ही नहीं चला.

तीन महीने बाद सर्दियां शुरू हो गईं. मीठी-मीठी ठंड लगने लगी थी. सुबह-शाम स्वेटर पहनना पड़ता था. मगर दिन में गर्मी लगती थी तो उसको निकालने का दिल भी कर जाता था.

स्कूल में एक लड़की थी जिसका नाम प्रिया था. वह अक्सर मेरी तरफ देखती रहती थी मगर मैंने कभी उस पर ध्यान नहीं दिया था. चूंकि मैं देखने में अच्छा था और मेरी बॉडी भी काफी फिट थी इसलिए लड़कियां जल्दी ही मुझे पसंद कर लेती थीं.

मगर प्रिया में मेरी कोई रूचि नहीं थी. उसकी फीगर तो अच्छी थी लेकिन वह देखने में अच्छी नहीं लगती थी. मैंने धीरे-धीरे उसकी तरफ ध्यान देना शुरू किया. वह मुझसे बात करने के बहाने खोजती रहती थी. कभी साइंस का कोई सवाल लेकर आ जाती थी तो कभी मैथ्स का. कई बार तो वो एक ही सवाल को दो बार ले आती थी जिससे मुझे उसकी चोरी के बारे में पता लगने लगा था कि यह जान-बूझकर ऐसा करती है. मगर फिर भी मैं उसकी तरफ कोई ऐसा भाव नहीं रखता था जिससे उसको लगे कि मैं भी उसमें रूचि रखता हूं.

उसने मुझ पर लाइन मारने की बहुत कोशिश की लेकिन मैं उसको इग्नोर कर देता था. ऐसा भी नहीं था कि मुझे लड़कियों में कोई रूचि ही नहीं थी मगर प्रिया जैसी लड़कियों की तरफ मैं कम ही ध्यान देता था.

फिर एक दिन प्रिया स्कूल के लॉन में बैठी हुई लंच कर रही थी. मैं भी स्टाफ रूम से लंच करके बाहर पानी की टंकी के पास हाथ धोने के लिए जा रहा था.
मेरी नजर प्रिया पर पड़ गई. उसके साथ दो-तीन लड़कियां और भी बैठी हुई थीं. वे सब की सब आपस में खिल-खिलाकर हंस रही थी. मेरा ध्यान उनकी तरफ गया. मैंने देखा कि एक लड़की उनमें बहुत खूबसूरत थी. उसको देख कर ऐसा लग रहा था जैसे खेत में खरपतवार के बीच में कोई सूरजमुखी का फूल खिला हुआ है. हंसती हुई बहुत ही प्यारी लग रही थी.

नजर उसकी छाती पर गई तो आसमानी रंग के नीले सूट में उसकी चूचिचों के उभार भी काफी सुडौल व गोल लग रहे थे. उन पर उसने सफेद रंग का दुपट्टा डाला हुआ था जो उसके गले पर वी-शेप बनाता हुआ उसके चूचों पर होता हुआ नीचे की तरफ नुकीला होकर उसके पेट तक पहुंच रहा था. रेशमी से बाल थे उसके जो धूप में चमक रहे थे. लाल होंठ और गोरे गाल. एक बार उस पर नजर गई तो बार-बार जाने लगी.

उस दिन पहली बार मुझे स्कूल में कोई लड़की पसंद आई थी और मेरे मन में कुछ-कुछ होने लगा था. मगर मैं टीचर था इसलिए इस तरह की बातें नहीं कर सकता था. उस दिन मैं हाथ धोकर वापस आकर स्टाफ रूम में आ बैठा.

अगले दिन लंच के टाइम में फिर प्रिया के साथ मैंने उसी लड़की को बैठे हुए देखा. अब प्रिया मुझे काम की स्टूडेंट लगने लगी थी. मगर अभी तक ये पता नहीं था कि प्रिया की उस लड़की से बात होती है या नहीं. अगर होती है तो वो दोनों कितनी अच्छी दोस्त हैं इस बारे में मुझे कुछ खास अंदाजा नहीं था.

मगर उस दिन के बाद से लंच के समय मैं जान-बूझकर बाहर निकलता था. हफ्ते भर में मुझे पता लग गया कि वो प्रिया की सहेलियों में से एक है. अब प्रिया की तरफ मैंने ध्यान देना शुरू कर दिया क्योंकि प्रिया ही एक ऐसी लड़की थी जो मेरी बात उससे करवा सकती थी. इसलिए प्रिया को घास डालना शुरू कर दिया मैंने और जल्दी ही उसके नतीजे भी दिखाई देने लगे.

अब जब भी मैं लंच टाइम में बाहर जाता तो वो खूबसूरत लड़की भी एक बार नज़र भर कर मेरी तरफ देख कर नज़र फेर लेती थी. दिल पर कटारी चल जाती थी उसकी मुस्कान से. अब रात को उसके ख्याल आने शुरू हो गये थे और एक दिन मैंने उसके बारे में सोच कर मुट्ठ भी मार डाली.

जैसे-जैसे दिन गुजर रहे थे उसकी तरफ मेरा आकर्षण बढ़ता ही जा रहा था. इधर प्रिया भी समझ चुकी थी कि मैं उसकी दोस्त को पसंद करता हूँ. इसलिए पहले प्रिया को अपने झांसे में लेना जरूरी था.

एक दिन ऐसे ही छुट्टी के वक्त मैंने प्रिया से पूछ लिया कि वह लंच में किनके साथ बैठी रहती है तो उसने बताया कि वह बाहरवीं कक्षा की लड़कियों के साथ लंच करती है.

फिर मैंने बहाने से उन सब का नाम पूछा तो पता चला उस खूबसूरत सी लड़की का नाम मनमीता (बदला हुआ) था. वह बाहरवीं कक्षा की ही छात्रा थी और प्रिया से उसकी अच्छी पटती थी. अब अगला टारगेट मनमीता तक पहुंचना हो गया था. मगर इसके लिए प्रिया की मदद की जरूरत थी. प्रिया भी मेरे दिल की बात जान चुकी थी. इसलिए जब मैं प्रिया से मनमीता के बारे में बात करता था तो उसके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान फैल जाती थी.

फिर मैंने प्रिया से कहा- अगर तुम परीक्षा में अच्छे नम्बर लाना चाहती हो तो मेरे पास तुम्हारे लिए एक अच्छा उपाय है.
चूंकि प्रिया मैथ्स में बहुत कमजोर थी इसलिए उसको लालच आ गया और वो पूछ बैठी- मुझे क्या करना होगा सर?
मैंने कहा- अगर तुम मनमीता से मेरी बात करवा दो तो मैं तुम्हें मैथ्स में आसानी से पास करवा सकता हूँ.
प्रिया बोली- आपका काम हो जायेगा.

उसका जवाब सुनकर मन कर रहा था कि प्रिया के चूचे दबा दूं लेकिन वो अभी छोटी थी और मुझे उसमें कोई रूचि भी नहीं थी इसलिए मैं मन ही मन खुश होकर रह गया. मेरा आधा काम हो गया था.
अब बाकी का आधा काम प्रिया को करना था जिसके लिये वो पूरी तरह से तैयार थी क्योंकि मैं उसको शुरू से ही नोटिस करता आ रहा था कि यह लड़की बहुत तेज है. मुझे पूरा यकीन था कि प्रिया मेरा टांका मनमीता के साथ फिट करवा देगी.

फिर एक दिन शाम को जब मैं लेटा हुआ था तो मेरे फोन पर एक अन्जान नम्बर से कॉल आया.
मैंने हैलो किया तो वहाँ से आवाज आई- सर, मैं मनमीता बोल रही हूँ, प्रिया की सहेली.
मनमीता नाम सुनते ही मेरे मन में लड्डू से फूट पड़े और मैंने फटाक से उठ कर दरवाजा बंद कर लिया और उससे बात करने लगा. उसकी आवाज बहुत ही प्यारी थी.

उस दिन उससे बात होने के बाद फिर तो रोज ही उससे बात होने लगी. रात को घंटों तक हम बातें करते रहते थे. वो फोन पर बात करती रहती थी और मैं दरवाजा बंद करके रजाई के अंदर लंड को सहलाता रहता था.
अब उसको चोदने के लिए इंतजार करना मुश्किल हो रहा था.

बातें होते-होते मनमीता मुझसे काफी खुल गई थी. अब बस उसकी चुदाई के लिए मुहूर्त निकलना बाकी रह गया था. एक दिन वो पल भी आ गया. स्कूल में एक्सट्रा क्लास लगने लगी थी और कमजोर बच्चों को अलग से टाइम देने के लिए कहा गया था. सिर्फ मैथ्स की क्लास लगती थी.
क्लास में तीन-चार बच्चे ही थे जिनको एक्सट्रा क्लास देनी होती थी.

उस दिन क्लास शुरू होते ही प्रिया मेरे पास आई और उसने अपनी नोटबुक में एक सवाल लिखा हुआ था. सवाल समझाते हुए मैंने देखा कि उसने किताब में एक पर्ची मेरे पास छोड़ दी थी.
बाकी बच्चों से नजर बचाकर मैंने पर्ची खोलकर पढ़ी जिसमें लिखा हुआ था- मनमीता आपका इंतजार ऊपर वाली मंजिल में कर रही है.

मेरे दिल धक् से रह गया. मैंने प्रिया की तरफ देखा तो वो मुस्करा रही थी. मैंने बच्चों से कहा- तुम लोग दिए गये सवालों को मेरे बताए अनुसार हल करने की कोशिश करो, मैं थोड़ी देर में आता हूँ.

मैं जल्दी से ऊपर वाली मंजिल पर गया तो वहां आखिरी कोने वाले कमरे के दरवाजे पर मनमीता खड़ी हुई मेरा इंतजार कर रही थी. मैं नजर बचाते हुए उसके पास पहुंचा और अंदर साइड में होकर मैंने उससे पूछा- क्या बात है? आज तुम यहां कैसे रुकी हुई हो?

मनमीता ने मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर हाथ फिराते हुए उसको सहला दिया और मेरे सीने से लिपट गई. मेरा लौड़ा तुरंत खड़ा हो गया और मैंने उसके होंठों को वहीं पर चूसना शुरू कर दिया. मैंने उसके दुपट्टे को उतार कर डेस्क पर डाल दिया और उसके सूट के ऊपर से उसके चूचों को दबाने लगा.

मैंने दरवाजा हल्का सा ढाल दिया ताकि किसी को बाहर से कुछ दिखाई न दे. उसको दीवार के सहारे लगाकर मैंने उसके चूचों को जोर से मसलते हुए उसके होंठों को चूस डाला और वह भी मेरे होंठों को वैसी ही बेरहमी से चूसने-काटने लगी.
मैं उसके शर्ट को निकालना चाहता था मगर स्कूल में उसको नंगी करने में खतरा था इसलिए उसके कमीज को उसके चूचों के ऊपर करके मैंने उसकी ब्रा को भी ऊपर सरका दिया.

उसके गोरे चूचे जिनके गुलाबी निप्पल थे, मैंने अपने मुंह में भर लिये. उसकी गांड को दबाते-सहलाते हुए मैं उसके चूचों को चूसने लगा. उसके चूचे ब्रा से नीचे बाहर आने के बाद काफी मोटे लग रहे थे.

मनमीता मेरे तने हुए लौड़े को मेरी पैंट के ऊपर से सहला रही थी. उसने मेरी पैंट की जिप खोल ली और मेरे लंड को अंडरवियर की इलास्टिक से बाहर निकालते हुए चेन से बाहर करके उसको अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी.

मेरा लौड़ा आग उगल रहा था और बिल्कुल गर्म हो गया था. उसके कोमल हाथों में जाकर बात मेरे लौड़े के काबू से बाहर हो गयी और मैंने उसकी सलवार को खोलकर नीचे गिरा दिया, घुटनों के बल मैं मनमीता की टांगों के बीच में बैठ गया.
मनमीता ने अपने कमीज को ऊपर उठा लिया. उसकी सफेद पैंटी के बीच में गीला सा धब्बा हो गया था. मैंने उसकी कमर से उसकी पैंटी को खींच कर नीचे करना शुरू किया और उसकी भूरे रंग के हल्के बालों वाली चूत मेरे आंखों के सामने बेपर्दा होने लगी. उसकी चूत के दर्शन भर से ही आंखें धन्य हो गईं. चिपकी हुई गुलाबी होंठों वाली चूत थी उसकी.

मैंने उसकी जांघों पर हाथ रख कर उनको थोड़ी चौड़ी सी फैलाते हुए उसकी कमसिन कोमल चूत पर मैंने अपने प्यासे होंठ रखे तो मनमीता ने मेरे बालों में हाथ फिरा कर अपने आनंदमयी अनुभव का इशारा दे दिया. मैंने उसकी टपकती चूत के अंदर अपनी गर्म जीभ डाली और मनमीता अपनी गांड को दीवार से सटाए हुए थोड़ी और नीचे की तरफ आकर टांगें फैलाने लगी ताकि मेरी जीभ उसकी चूत में अंदर तक चली जाये.

मैंने उसकी चूत में तेजी से जीभ को तीन-चार बार अंदर-बाहर किया तो वह अपने चूचों को मसलते हुए सिसकारने लगी. कमरा खाली था और उसकी आनंद भरी कामुक सिसकारी कमरे में गूंज उठी. स्स्स … सर … आइ लव यू … अम्म … स्स्स … इस्स्स …आह …

वो अपनी चूत को मेरे होंठों पर फेंकने लगी. मैं भी उसकी चुदाई के लिए अब पल भर का इंतजार नहीं कर पा रहा था. मैंने अपने लंड को नीचे बैठे हुए ही एक हाथ से हिलाया तो लंड ने जैसे कह दिया हो- बहनचोद! अब तो डाल दे मुझे इस माल के अंदर …
मैंने जीभ को मनमीता की चूत से बाहर निकाल कर उसको यहां-वहां से चूसा चाटा और मनमीता मुझे ऊपर उठाने लगी. मैं समझ गया अब यह भी लंड लेने के लिए मरी जा रही है.

मैंने उसकी चूत पर एक पप्पी दी और फिर उसको दीवार से सटा कर उसकी टांग को उठाते हुए उसकी चूत पर लंड को लगा दिया.

उसके हाथों को दीवार पर ऊपर दबाते हुए मैंने एक धक्का उसकी चूत में मारा और आधा लंड मनमीता की गीली चूत में गच्च से फंस गया.
“उम्म्ह… अहह… हय… याह…स्स्स … सर … दर्द हो रहा है!” वह कसमसाते हुए कहने लगी. मैंने उसके चूचों को कस कर दबाया और सहलाया तथा साथ ही उसके मुंह में अपनी जीभ डाल दी.

फिर दोबारा से एक धक्का मारा तो पूरा लंड उसकी चूत में जा फंसा. आह्ह … क्या चूत थी उसकी. उसके मोटे चूचे मेरी छाती से सट गये थे. मैं उसकी गर्दन को चूमने लगा और मेरी गांड दीवार की तरफ धक्के लगाती हुई उसकी चूत में लंड को अंदर-बाहर करने लगी.

दो मिनट बाद मनमीता के मुंह से कामुक सीत्कार फूटने लगे और वो मुझे बांहों में भर कर प्यार करने लगी. मेरा जोश हर पल उबलता हुआ मेरे लंड के धक्कों को उसकी चूत फाड़ने के लिए उकसा रहा था. उसकी चूत की चुदाई करते हुए मैं तो सातवें आसमान में उड़ने लगा. बीच-बीच में उसके मोटे चूचों को भी मसल देता था.

दो-तीन मिनट तक मैंने उसकी चूत को दीवार से सटा कर चोदा. फिर पास ही पड़ी मेज पर उसको लेटा लिया और उसकी एक टांग से सलवार को निकाल कर अपने हाथ में उसकी टांग को उठाकर फैला दिया. उसकी चूत मेज के किनारे पर थी. मैंने अपने चिकने हो चुके लंड को उसकी चूत पर लगाया और उसकी चूत में लंड को धकेलते हुए उसके ऊपर लेट कर उसके चूचों को पीने लगा.

मनमीता ने मुझे बांहों में जकड़ लिया और मैंने मेज के ऊपर ही उसकी चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिये. उसकी गोरी और मोटी चूचियों को दबाते हुए उसकी चूत में लंड के धक्के लगाते हुए जो आनंद आया मैं उसको कैसे बताऊं दोस्तो, ऐसी किस्मत बहुत कम लोगों की चमकती है जिनको ऐसी चूत नसीब होती है.
तेजी से उसकी चूत को चोदते हुए मैं उसके जिस्म को भोगने लगा, उसके चूचों को पीता और दबाता रहा. चर्र … चर्र … चूं … चूं की आवाज के साथ हमारे मुंह से दबे हुए सीत्कार कमरे में गूंजने लगे. हाय … आस्स् .. ओह्ह … उफ्फ … हम्म …. स्स्स … आह आह अह्ह … हय … !

उसकी गोरी, चिकनी, मखमली चूत को चोदते हुए इतना मजा आया कि पांच-सात मिनट में ही मेरे अंदर का जोश मेरे लंड के वीर्य में उबाल ले आया और मैंने उसकी चूत में वीर्य की पिचकारी मार दी. पूरा लंड उसकी चूत में खाली कर दिया. धीरे-धीरे मैं शांत हो गया और दो मिनट तक ऐसे ही उसको मेज पर लेटा कर उसके चूचों से चिपका रहा.

मनमीता की चूत मार कर सच में मजा आ गया था. इतना सुखद अनुभव मुझे कभी नहीं हुआ था. फिर हम दोनों अलग हुए और जल्दी से मैंने अपने अध-सोये लंड को अपने अंडरवियर में वापस से अंदर डाला और चेन बंद करके दरवाजे के बाहर झांका.

तब तक मनमीता ने भी अपने कपड़े ठीक कर लिये थे. कपड़े व्यवस्थित करने के बाद पहले मैं कमरे से बाहर गया. मैंने मनमीता को थोड़ी देर बाद में आने के लिए बोला था. वैसे तो स्कूल में कोई नहीं था मगर चपरासी तक की निगाह से बचने के लिए एहतियात बरतना जरूरी था.

जब मैं क्लास में पहुंचा तो प्रिया मेरी तरफ देख कर मुस्करा रही थी. मैंने छुट्टी में जाते हुए उसको थैंक्स बोला तो वो कहने लगी- सर … मेरे एग्जाम का ध्यान रखना!

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया के ज़रिये अपना प्यार देना न भूलें. अपनी जिन्दगी के कुछ और भी हसीन किस्से आपके साथ शेयर करने की अभिलाषा के साथ फिलहाल के लिए अलविदा कहना चाहता हूँ. धन्यवाद!

Sexy Renu – A sweet memory

Hi fans. I had been a regular reader of stories and always I wished to share my experience to all of you. Today I found time to share one of my rececnt experience.

I am Rahul I am 27 yrs old with a good physique. I recently got transferred to Mumbai and rented an apartment. I settled down and happened to meet my neighbour Renu. She was 29 yrs old and had a superb structure. She was 36 – 24 –38. I frequented to her home and very soon we became good friends. She was married and I hardly saw her husband in town. We spoke about everything under the sun but not about sex.

The incident happened one Sunday afternoon when I visited her place. She welcomed me and introduced myself to her niece Divya who was just 17 yrs.old. I had a chat with divya and she said she is going for a movie and said shall meet later and left for the movie. Renu said she has to wash the clothes and asked me to help myself. I asked her about her husband she replied as usual out of town. She was wearing a blue colour night gown and she was looking really sexy in that. I settled myself on the couch watching T.V. I didn’t have any intentions to fuck her but I knew she is not satisfied with her sex life and I wished I would satisfy her if she wanted me to.

Suddenly I heard he screaming from the bathroom for help. I rushed to the bathroom and found her lying on the floor. She had slipped and got herself hurted. I lifted her up and brought her to her bedroom and laid her on the bed. She said her ankle is paining a lot and started crying. I soothed her and asked her to relaz. I took some pain balm and started massaging her ankle.she felt good and after sometime she had a relief from the pain and thanked me and complimented on my massaging skill. As she tried to get up she felt pain in her back. I asked her whether she needs me to massage her over there she said she will be happy if I could. I thought that today I will satisfy her to the fullest. I slowly started massaging her shoulders and then her back. I felt a bulge in my trousers and my 8 inc d was getting harder and harder. I asked her if she needs and oil massage to which she readily agreed. I asked her to remove her gown to which she felt shy at first but later she removed the gown and Wow what a wonderful sight it was. She really had a sexy figure and she was lying in front of me only in bra and panties. At this site my dick grew to the fullest and I started to feel uncomfortable to keep it inside my trousers. I commented to her that she had a sexy figure, she gave a smile for that and thanked me. She lied on her stomach and I started massaging her. then there was silence and her breath was only heard. I understood that she is getting aroused. I slowly unbuttoned her bra and let I fall. She didn’t say anything and I got confident and knew she wants it from me. I reached to her armpits and down and cupped her boobs. And slowly caressed them she gave a soft moan.those were perfect shaped boobs with a silky feel. then I reached to her buttocks and slowly squeezed them she again moaned. I asked her permission to remove the panties for which she moaningly said yes as a bride says at her first night to her husband. I pulled down her panties and saw her voluptuous arse. I massaged her arse for a while and then kissed her buttocks to which she shivered with pleasure. I slowly started licking her inner thighs, she started to spread her legs. I dick was totally mad and wanted to jump out of my trousers. I removed my trousers and asked her to turn around.
she looked at my dick and said Wow this is double the size of my husband’s. I looked down and saw the most beautify pussy on earth. It was fully shaven and looked very cute. I kissed her on her lips and reached to her boobs. I swirled my tongue around her soft nipples and she moaned with pleasure. I sucked her boobs and licked it like eating an ice candy. I reached to her bellybutton and showered kisses on it. then I reached to her mount and she smelled really nice. I am a great pussy licker and started to lick her pussy. She shivered and started moaning with pleasure as someone is licking her pussy lips for the first time. She held my head and pressed between her legs. I pulled her pussy lips with my wet lips and slowly let is go and she moaned with pleasure and kept saying dear eat my pussy … eat my pussy ………Then I went on 69 position. She held my 8 inc cock and started sucking it, I reached to the heavens. I then started tongue fucking her. I inserted my tongue into her vagina and started making round circles inside with my tongue. She moaned with great pleasure and reached top of the world. ooooooh hhhhhhhhhhhhhhhh plllllllllllllllleeeeee fuck me dear I haven’t had sex since my first night pllllllllllleeeeeeeeeeeee come into me. My dick also badly needed her pussy. I inserted my dick into her vagina and started fucking her. at first with a slow pace and as my dick was inside her fully I started to increase my pace. She was enjoyed each pump of mine. then I asked to come in doggie position. I fucked her hard in doggie position and I was cupping her boobs and squeezing nipples which had turned hard as a rock. then she said she is about to come and even I was about to come. I pumped my whole cum into her sweet pussy and even she unloaded her. we slept on the bed for few minutes and later washed ourselves. She thanked me for giving such a wonderful time and asked me to lick her pussy once again as she liked me doing so. She came in 69 position and was lying over me I Started licking her pussy and she was sucking my cock.

At this moment her niece divya entered the room and saw us in 69 position licking each other and both of us moaning in pleasure. Suddenly there was silence in the room. I then broke the silence saying hi Divya, don’t be embarrassed its all a part of life. She smiled back to me saying I also wish to be a part of life.

True or Fantasy Sex Stories

This one is for the matures. I have been reading lot of lusty stories…fucking mom, and sister and aunty and bhabhi and even maids…everyone at home….Come on guys, this is fantasy. Go out and fuck some Ash or Rani or Kareena and Preity and like…there are more out there than you can fuck or get fucked.
This is a story of some 20 yeas ago – lots of things happened for the first time for me. I was flying for the first time. I was young, pahlwan body, MBA degree in hand andwith a marketing Manager ’s job in Curacao, Caribbean island. I had been always dreaming to go out of Delhi and meet beautiful women, specially of south America, the salty and sultry kind. I wonder how after introducing kama sutra to the world and showing ancient Khajuraho, Indian subcontinent lost touch with oral sex which is now best learnt and experienced from Latinos.
My flight from Delhi to Amsterdam was all sleep after late dinner and 2 drinks – I woke up only a few minutes of landing in Amsterdam. My onward flight of 12 hours to Curacao was half empty and my seat was almost in the back of plane in center row of 4 seats. I was only passenger on that row and I was planning to stretch myself during the long flight. However that was not to be and that is how the phase of my excitement started. Just before closing doors, enters a woman with blonde-golden hair, about 5.7 straight up full body, with tropical shirt and white skirt about 40 or around, well toned and creamed. There was an air of elegance around her. She took the other end seat of my row, kept her hand bag overhead and gave me a courtesy smile. After the plane moved and first beverage was served, plane was steady in the air and seat belt sign went off, I felt relaxed and looked around me to see who was where and what was happening around me. Our glances again met casually and this time we both exchanged smiles….I could see her better and found her much older than me but surely well toned, full size breasts, smooth skin and attractive face cut. Stewardess came and offered drinks before serving dinner. She left a few small bottles of white wine in the center seat for both of us which was perhaps the ice-breaking opportunity. The beautiful woman asked me how was the wine and where was I traveling to and such general questions. Soon we were engaged in good conversation, talking about India and Holland and Curacao. We both moved closer, in the center seats from our aisle seats. She was native of Curacao with soft copper tone skin, married to a Dutch and running a small business near Amsterdam. Our dinner came and we continued talking and laughing while sipping thru our white wine. I had at least 4 glasses of white wine and I remembered we covered lots of topics and felt as if we knew each other for a long time. Wine had done its job and made me kind of free spirited. I did not how but I took her hand and kissed her and said you are very attractive. She looked at me for a few seconds and unexpectedly stamped a little kiss on my mouth. In a chain reaction, instantly I put my glass down and held her head gently and kissed her back with my hungry lips….THIS was my first ever kiss on lips to anyone and I surprised myself how well I did. I noted a little hesitation from her for a second or so but next moment she responded to kiss me full throttle, as if chewing and eating my mouth – it was wild, hottt and put me on fire…..after a few minutes of tongue wrestling and swallowing of saliva, she disengaged and got up saying come to the back of plane.
I followed her and we both slipped into a bath room. Every body was sleeping and no one I could see but even if there was, who the hell cared….once inside, no wasting of time…my immediate move was to grab her in my arms and pull her to my body tightly…man that felt lusty hot, animal sexxy……in next few seconds I put her blouse out, unhooked the bra and gave a wide look at her upright boobs with erect nipples the size of pencil eraser. Wow, a rare scene for me. My lauda already 90 degrees was going towards 120. Mind was out of control. I fondled her boobs, then squeezed and licked and sucked and cupped full flesh wonderful mounds with nipples on top. Surely, Yolanda had measured my desire and eagerness. She was equally charged with the prospect of getting fucked by a young energetic with full lauda power ready to reach the bottom of her love tunnel which was so creamy wet when I slid my hand down to her hairy pussy. A thick bush over the pussy has been my fetish. Fingering thru thick bushy hair gave me pleasure pangs before reaching clitoris. We both were doing overtime – kissing, pushing, pressing, squeezing, grabbing, fondling all over body – Her buttocks were another asset to her sensuous body. She looked in my eyes and slipped down to grab her prize catch. In the mirror everything was visible. My seven incher was full blooded and was proudly heads up like a red apple….a delight for hungry woman. Now some mind boggling thing happened when Yolanda went down and made my lund completely disappear into her mouth. This sent shivers and ripples throughout my body. My hands went thru her hair, holding her head and then I arched myself to reach her back and further down to grab her shapely ass cheeks and began squeezing the soft spongy flesh. Yoli continued showing her oral expertise on my member in a way I never imagined and put me on edge making my muscles bulge. I was about to explode and I stood straight to warn her amidst the height of my pleasure with soft moaning of her and my own, but but but no time for warnings….I EXPLODED with my unstoppable loads of precious liquid in her mouth. She knew she had transported me beyond 7th heaven and she clung to my body with my member still in her moist, and warm mouth,and squeezing my solid buttocks giving me extraordinary pleasure levels I had never known before. This heavenly situation continued longer than proverbial moments. I continued stroking into her warm, tight-lipped mouth as if penetrating her vagina-.in and out, in and out. My cock continued to be stubborn and would not bow or bent down. Seeing the lion still strong and willing, Yoli stood up and arched backward and took a good support from back wall, presented her pussy surrounded with golden hair, slightly showing her pink lips opening inviting and ready to swallow my cock inside her lubricated pussy.
And how to decline such an offer ? No way. I patted and fingered the opening which was creamy and moist, played with clitoris tenderly for a few seconds and then placed my red apple on the pussy lips. I was just about to give my inaugural push but Yoli beat me to it. I received a sudden strong pelvic push from my lover and lo three-fourth portion of my rod sank effortlessly into her pussy. Such a dramatic entry gave my cock extra vigor and stiffness after a major performance. I then grabbed her buttocks brought her closer and gave my cock a strong thrust to reach the bottom of the love tunnel. I pushed more and then something wonderful happened. I felt my red apple inside was wrapped tightly and was held tight, kind of locked-in position, It was so delightfully pleasurable that I let my member be anchored there for sometime to enjoy that ecstatic pleasure as much and as long as I could. After a few minutes I was able to pull out my cock and I started pumping it inside out, firstly at ease and then with more and more vigor and speed. Although space in bathroom was small, we both had bigger designs. Funny enough, with little acrobatic creativity I pulled her legs one by one over my shoulders, holding her weight with hands under her shapely buttocks, I eventually brought her beautiful, photogenic pussy in her flower bloom in full frontal view in front of me. This was also visible in the mirror as well which I know now how sexciting it can be to the woman seeing herself being penetrated. This position was such a winner that my boner dived inside her pussy to reach deepest of the depth. Fucking from this angle was so visibly satisfying that it brought our heat high and after several deep penetrations, I became ready to cum and unload again with full force. Yoli seemed so much engrossed in receiving all the thrusts and strokes and my chewing on her nipples all at one time with all my vigor that I could see her expression of reaching multi-orgasms – full with pleasure heights and ecstasy. She clinched her fingers on my waist, went into spasms, fully absorbing the pleasure like there was no tomorrow.-
Seeing her cumming, I could not hold myself any longer and shot my whole load into her pussy and continued pumping slowly, holding Yoli’s body tightly in my arms and taking turns on sucking on her nipples, kissing her sweet lips, clinching her buttocks and pulling her more closer and tighter ( it was pure bliss, pure pleasure – fuck one and fuck all situation) until my member showed signs of reverting to its original size.
We clung with each other for several minutes and then burst into sunken laughter. A sign of happy satisfaction. We unwound and cleaned ourselves. I moved out first and waited until she was done cleaning. We walked back to our row and sat down together, hand in hand, relaxed, smiling and giving each other small sweet kisses. We asked for more drinks and quietly sipped thru. Later, she lied down on the seats with her head in my lap where I had access to her face as well her lovely breasts adored with thick nipples which had by now become objects of my affection. I saw her face was glowing with satisfaction – may be this blissful physical satisfaction came to her today after a long time or she had found something in me she was looking for. For me, I knew my face was radiant too – because I was lucky to meet this beautiful, sensuous woman who walked me thru my initiation, giving me a ‘never before, pleasure.
I looked into her eyes and said ‘ meet me again in Curacao – let me be your student -teach me your techniques and I will experiment my art over you for perfection’.PREVIOUS PAGE

मैं बन गयी ऑफीस की रंडी

हेल्लो फ्रेंड्स,
मैं शेफाली आज आपके लिए एक बहुत ही मस्त कहानी ले कर आई हूँ. पर मेरी कहानी शुरू करने से पहले मैं आपको अपने बारे मे काफ़ी कुछ बताना चाहती हूँ. मैं बहुत ही सुंदर हूँ और मैं मॅरीड भी हूँ.

मैं बहुत ही सुंदर तो हूँ ही पर मेरे नैन नक्श उस्स से भी ज़्यादा सुंदर है.मैं आज अपनी लाइफ का बहुत ही अच्छा पार्ट बताने जा रही हूँ जो की मैं ज़िंदगी मे कभी भी भूल न्ही सकती हूँ.

चलो अब ज़्यादा समय ना लगाते हुए मैं आपको अपनी कहानी पर ले कर चलती हूँ. पर उससे पहले मैं आपको अपने फिगर के बारे कुछ बताना चाहती हूँ. मेरा फिगर बहुत ही कमाल का है. 32-28 -30 का है मेरा फिगर और बहुत ही कमाल का है .

ये बात आज से कुछ समय पहले की है. जब मैं नयी नयी बड़ी हुई थी यानी की मेरे उपर नयी नयी जवानी चड़ी थी तो कई लड़के मेरे उपर मरते थे. मैं बहुत ही पागल हुआ करती थी. क्योकि ये कीड़ा मेरे अंदर भी था की मैं किसी से बात करू और अपने दिल की बात बताकर खुद को चुदवा दू.

मैं पागलो की तरह लड़को से बात करने लग गई थी. मुझे ये सब बहुत ही अजीब लगता था पर साथ ही साथ मज़ा भी आया करता था.

बस फिर ऐसे ही टाइम बीतता चला गया. मैने स्कूल टाइम मे और ईवन तक कॉलेज टाइम मे भी बहुत ही सारे लड़को से बात करी और खूब मस्ती भी करी.

फिर ऐसे ही मेरे घरवालो ने मेरे बड़े होने पर मेरी शादी भी करदी. मैं अभी शादी करना न्ही चाहती थी पर फिर भी मुझे करनी पड़ी थी. मैं बहुत ही उदास भी थी की अभी से ही इतनी जल्दी मेरी शादी करदी.

मेरे हज़्बेंड का नाम विशाल है और उनका इम्पोर्ट एक्सपोर्ट का काफ़ी बड़ा बिज़्नेस है. मैं अब अपने पति के साथ बिज़ी हो गई थी. शादी होते वक़्त तो बुरा लग रा था की आख़िर ये क्या हो गया पर बाद मे धीरे धीरे सब ठीक होता चला गया. मैं उनके साथ अब काफ़ी खुश रहने लगी थी.

पहले तो नयी नयी शादी मे रोज रात को अच्छे से चुदाई हुआ करती थी. मैं पागलो की तरह चुद्वाति थी. मैं तो बस चाहती थी की मेरा पति मुझे कच्चा ही चबा डाले और ऐसे ही करता रहे. मुझे अपने पति साथ सेक्स करने मे बहुत मज़ा आता था पर फिर कुछ टाइम बाद सेक्स अब बहुत ही कम होने लग गया.

क्योकि वो अब बिज़ी होने लग गये थे और मैं भी उनके साथ उनके ऑफीस मे काम संभालने लग गई थी. मैं बहुत ही खुश थी की मैं अपने पति के साथ उनके ऑफीस मे ही कुछ काम भी संभालूगी. उधर उन्होने मेरी एक सेक्रेटरी भी रख दी ताकि मुझे कोई दिक्कत ना हो.

फिर ऐसे ही चलता रहा और फिर उसके बाद उनका बाहर का भी टूर लगना शुरू हो गया. मैं ऐसे ही उनके आने का इंतेज़ार किया करने लग गई. पर अब धीरे- धीरे अब इंतेज़ार करना बहुत ही मुश्किल लगने लग गया था.

अब वो मुझे टाइम भी न्ही देते थे यानी की मैं चुदाई के लिए तड़पने लग गई थी. पर फिर भी मैं मूली या गाजर से काम निपटा लेती थी.फिर एक दिन ऐसे ही ऑफीस मे मेरी एक बहुत ही पुरानी फ्रेंड आ गई. जिसको देख कर मैं बहुत खुश हो गई और तो और बहुत ही पागलो की तरह बात करने लग गई.

हमारी बहुत ही अच्छी दोस्ती थी और तब मैने अपनी सेक्रेटरी को बुला कर उसे बियर ओर कुछ स्नॅक्स छुपा कर लाने को काहा और फिर हम बियर पीने लग गये. ऐसे ही काफ़ी पुरानी बाते भी बाहर आ गई और कुछ लड़को की बाते भी हो रही थी. जिससे की मेरी चुत भी तड़पने लग गई.

फिर थोड़ी देर बाद वो चली गई. पर उसके जाने के बाद मैं पागल हो गई थी. क्योकि मेरे उपर चुदाई का भूत सवार हो गया था. अब ऐसे ही फिर मैने बाहर के स्टाफ से दिनेश को बुलाया और उसको काहा की मेरे साथ पेग लगा ले. उसने पहले तो मना किया और मेरी बात सुन कर मान कर मेरे पास बैठ गया.

मैं बहुत ही खुश हो गई और फिर हम दोनो बाते करने लग गये और इसी बीच वो मेरी इच्छा को जान गया. मैं बहुत ही खुश थी और फिर उसके बाद तब बियर ख़तम हो गई तो उसने काहा की बाहर से पंकज को बुला लेते है.

फिर इतने मे वो आ गया और उसे काहा की बियर ले आ और फिर दिनेश ने मेरी पेंट उतार दी. हम दोनो पहले ही जोश मे आ गये थे और फिर धीरे धीरे करके हम दोनो नंगे हो गये. मैने उसके लंड को हाथो मे ले लिया और फिर उसके बाद उसे मूह मे ले कर चूसने लग गई.

मैं बहुत ही पागल हो रही थी और उसे तो बहुत ही मज़ा आरा था. मैं इसलिए पागल हो रही थी क्योकि मैं काफ़ी टाइम बाद लंड को अंदर लेने वाली थी. फिर मैने उससे काहा की चूत को चाट और फिर उसके चाटने के बाद मैने उसे लंड डालने को काहा तो उसने डाल दिया और मुझे चोदने लग गया.

इतने मे पीछे से पंकज भी आ गया और ये देख कर पहले वो हैरान रह गया और फिर उसने भी अपने कपड़े उतार डाले और लंड को मेरे हाथो पर दे डाला. मैं बहुत ही खुश हो गई और उसे चूसने लग गई.

फिर उधर दिनेश ने मेरी चूत मे अपना पानी छोड़ दिया और फिर उसके बाद मेरे पीछे पंकज आ गया और उसने मेरी गांड मे लंड दे डाला.मैं बहोट ही मज़े से चींख रही और टाइट गांड होने की वजह से उसका पानी गांड मे ही छूट गया और फिर दोनो मेरे उपर ही लेट गये

फिर उसके बाद ऐसे ही मैने उनके दोनो लंड को एक एक करके चूसा और खूब मज़ा भी लिया. मुझे दोनो के लंड को चूस कर बहुत ही मज़ा आ रा था और मन कर रहा था की अभी और चुद जाउ. पर अभी दोनो मे इतनी हिम्मत न्ही थी की मुझे और भी चोद डाले

फिर ऐसे ही मैने टाइम की तरफ देखा तो टाइम भी काफ़ी हो गया था और मैं उन दोनो से बहुत खुश भी थी. क्योकि उन्होने मेरी चूत की प्यास को कुछ कम किया था. इसी तरह अब जब भी मेरे पति टूर पर जाते तो मै उन्न दोनो से ज़रूर चुदति थी.

चलो कुछ नया ट्राइ करते है

हेलो दोस्तो, मैं आपका दोस्त राज फिर एक बार आपके लंड ओर चुतो को सलाम करके एक न्यू स्टोरी लेकर आया हूँ, उमीद करता हूँ की आपको मेरी और स्टोरीस की तरह ही पसंद आएगी.

बात आज से लगभग 2 साल पहले की है, मैं देल्ही मैं ही था ओर अपने सारे पुराने चक्कर छोड़ कर एक सिंपल लाइफ जीने की कोशिश कर रहा था.

मगर आपको तो पता है के मेरी ज़िंदगी मे, जब भी मैं कुछ बदलने की कोशिश करता हूँ कोई ना कोई घटना घट ही जाती है.

तो बात को ज़्यादा ना बढ़ाते हुए मैं घटना पर आता हूँ संडे का दिन था, मैं घर से घूमने के लिए घर से निकला ओर पुराने किले पर पहुच गया.

क्यों की ये ही एक जगह है देल्ही मे जहाँ पर हर तरह का प्यार देखने को मिल जाता है, तो मैं वहाँ पर लड़के लड़कियों को प्यार करते हुए देख रहा था, ओर अकेला टहल रहा था कोई लड़का किसी लड़की की बाहो मे बाहे डॉल कर बैठा था, या कोई किसी को किस कर रहा था.

मगर वहाँ पर एक लड़की थी जो एक पेड़ के नीचे अकेली बैठी थी ओर पेड़ को खोदकर कुछ लिख रही थी, लड़की ने पेड़ पर खोद कर एक दिल बना रखा था ओर उसमे अंजलि ओर विक्की लिखा था ओर दिल के नीचे आई हॅयेट यू विक्की लिखा था.

वो लड़की दिखने मे बहुत उदास लग रही थी ओर उसकी आँखों से कुछ आसू की बूंदे टपक रहीं थी. मैं थोडा दूर खड़ा होकर उसको देखने लगा, लड़की ने उस दिल को खोदना चालू कर दिया ओर दिल पर जो लव लिखा था उसको मिटा दिया ओर दिल मे तीर का निशान बना दिया ओर वो रोने लगी, मुझसे रहा नही गया ओर मैं उस लड़की के पास पहुच गया.

वो लड़की दिखने मे बहुत सुंदर थी, उसके लंबे लंबे बाल थे ओर गोल चेहरा, नीली आँखें, उँचे उठे हुए चुचे, कद 5 फिट का ओर पतली कमर थी दिखने मे लड़की किसी अच्छे घर की लग रही थी.

मैने उससे पूछा तुम रो क्यों रही हो?

उसने कोई जवाब नही दिया.

मैने फिर पूछा अंजलि तुम रो क्यों रही हो?

उसने कहा आपको मेरा नाम कैसे पता क्या हम एक दूसरे को जानते है?

मैने कहा, मैंने आपको रोते हुए देख कर पूछ लिया बस इंसानियत के नाते.

उसने कहा, क्या यहाँ पर रोने पर भी मनाई है क्या ओर आप कौन जो इंसानियत दिखा रहे हो.

वो लड़की खुद से बहुत उदास थी.

मैने कहा, तुम्तो बेकार मे ही खुद से गुस्सा हो तुम जिसके लिए आँसू बहा रही हो उसको तुम्हारी कोई फिकर नही है ओर वो किसी और से प्यार करता है.

वो लड़की मेरी बात सुनकर एक दम से चोंक गई ओर मुझसे पूछने लगी ये सब आप कैसे जानते हो?

मैने कहा, मैने बताया ना मैं सब जनता हू सब के बारे मैं, ये ही नही ओर ये भी की अभी तुम्हारे दिल मे क्या चल रहा है ओर तुम क्या करने की सोच रही हो (मैं लगातार अंधेरे मैं तीर छोड़ने लगा और मेरे सारे तीर निशाने पर लग रहे थे ओर लगते क्यों नही आपको तो पता है की मैं औरतों को बस मे करने मैं माहिर हूँ).

वो मेरी बात सुनकर रोने लगी ओर बोली जब आप इतना सब जानते हो तो कोई तो रास्ता होगा मेरी इस परेशानी का.

मैने कहा, रास्ते तो बहुत है लेकिन अभी नही तुम मेरा ये मोबाइल नंबर रख लो ओर घर जाकर मुझसे बात करना फिर मैं बता दूँगा क्या करना है.

उसको समझा कर मैं अपने घर आगया ओर वो अपने घर चली गई.

रात के 10 बजे मेरे फोन पर किसी का फोन आया दूसरी तरफ से लड़की की आवाज़ आरहि थी. मैने पूछा कौन बोल रहा है?

उसने कहा आप बताओ आपको तो सब पता है.

मैने कहा बोलो अंजलि कैसी हो?

उसने कहा, मैं तो वैसी ही हूँ लेकिन आपसे मिलकर मेरे दिल ओर दिमाग़ मे जंग हो गई है की आख़िर आप हो कौन?

मैने कहा, तुम चिंता मत करो बस ये सोचलो की मैं आपका एक शुभ चिंतक हूँ ओर मेरी जिसको भी ज़रूरत होती है, मैं उसके पास पहुच जाता हूँ.

अंजलि ने पूछा – आप का नाम क्या है?

मैने उसको बताया मेरा नाम राज है ओर अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मदत कर सकता हूँ.

अंजलि मेरी बातों को बड़े ध्यान से सुन रही थी ओर फिर उसने पूछा आप मेरी क्या मदत कर सकते हो.

मैने कहा मैं चाहूं तो तुमको वो हासिल हो जाएगा जो तुम पाना चाहती हो.

अंजलि ने कहा, वो कैसे?

मैने कहा, बस तुमको मुझ पर भरोसा करना पड़ेगा.

अंजलि ओर इसके लिए मुझे क्या करना होगा ओर कितना खर्चा होगा.

मैने अंजलि को बताया की इसके लिए कोई खर्चा नही होगा बस तुमको एक बार मुझसे मिलना होगा.

अंजलि ने कहा, मैं आप से मिलने तो नही आ सकती लेकिन आप चाहो तो मेरे घर पर आ सकते हो.

मैने कहा, ठीक है तुम मुझे अपने घर का पता बता दो मैं मंगलवार को तुम्हारे घर पर आ जाता हू.

अंजलि ने मुझे अपने घर का पता बता दिया.

ओर मैं मंगलवार को 11 बजे उसके घर पहुच गया अंजलि का घर बहुत बड़ा था ओर घर के बाहर 2 चोकीदार खड़े थे ओर आँगन मे स्वीमिंग पूल था ओर घर के अंदर हर चीज़ थी 3-4 नोकर यहाँ वहाँ घूम रहे थे दरवाज़े मे मुझसे पूछा किससे मिलना है तभी अंदर से आवाज़ आई आने दो इनको ये आवाज़ अंजलि की थी.

मैं अंदर चला गया अंजलि मुझे अंदर एक कमरे मे ले गयी ये कमरा भी बहुत बड़ा था ओर कमरे मे बाथरूम भी अंदर ही था.

अंजलि ने मुझसे पूछा क्या लेंगे ठंडा या गरम.

मैने कहा कुछ नही.

फिर भी अंजलि ने के नोकर को इशारा कर दिया ओर वो मेरे लिए शरबत लेकर आ गया.

अंजलि ने मुझको बेड पर बिठा दिया और पूछा.

अब बताओ आप मेरे लिए क्या कर सकते हो ?

मैने कहा तुम्हारे मों बाप कहाँ है.

अंजलि ने कहा वो तो ज़्यादा तर विदेश मे ही रहते है ओर मैं ही बस यहा रहती हूँ, मैं विक्की से बहुत प्यार करती थी ओर उसको मेरी दौलत से प्यार था जब मुझे ये समझ मे आया तो मैने उसको पैसे देने बंद कर दिए ओर वो मुझे छोड़ कर चला गया.

मैने कहा, ये सब तो मुझे तुमको देख कर ही पता चल गया था तुम बेकार मैं ही आँसू बहा रही हो वो तुम्हारे लायक नही था.

अंजलि बोली लेकिन मैने उसको सच्चा प्यार किया है मैं उसको भूल नही पा रही हूँ, मैने आज तक जिससे भी प्यार किया है वो मुझे छोड़ कर चला जाता है ओर ये कह कर रोने लगी.

मैने कहा दो मिनिट के लिए मेरी बात सुनलो.

सब ठीक हो जाएगा ओर बस 2 मिनिट के लिए गेट लॉक कर दो.

अंजलि ने गेट लॉक कर दिया ओर मेरे पास आकर बैठ गई.

मैने अंजलि को मेरी आँखों मे देखने के लिए बोला वो मेरी आँखों मे देखने लगी ओर फिर मैने उसको आँख बंद करने को कहा और फिर उसको कहा आँख बंद करके गौर से देखो क्या दिख रहा है.

अंजलि ने कहा कुछ नही दिख रहा ओर आँख बंद करके क्या दिखेगा.

मैने अंजलि के सर पर हाथ रख कर कहा गौर से देखो कुछ दिख जाए गा.

ओर अंजलि को अपनी बातों से सम्मोहित करने लगा ओर अंजलि को जो मैं दिखाना चाह रहा था वही दिखने लगा, ओर अंजलि मुझसे बहुत प्रभावित होती जा रही थी.

फिर मैने अंजलि से कहा इस दुनिया मे सब कुछ तुम्हारा है और तुम सबकी हो और सब मेरा है और मैं सबका और तुम मुझ मे हो ओर मैं तुममे इसलिए खुद को मुझमे समा कर देखो.

अंजलि पूरी तरह से मुझसे प्रभावित हो गई.

और फिर इसी तरह से 2-3 दिन मैं हम एक दूसरे के अच्छे दोस्त बन गये. मैं पहले तो 2-3 दिन अपने घर से उसके घर गया.

मगर फिर जब कुछ नही हो पाया ओर अंजलि जीतने समय के लिए मेरे साथ रहती उसको बहुत अच्छा फील होता था मैं उसको मेडिटेट करवाने लगा.

एक दिन अंजलि बोली क्या तुम कुछ दिन के लिए मेरे घर पर रह सकते हो मैने भी हा कर दी.

उस दिन मैं अंजलि को फिर से सम्मोहित कर रहा था, तो मैने अंजलि से कहा की मैं चाहूं तो तुमको वो शक्ति मिल सकती है जिसे पाकर तुम दुनिया के हर इंसान को बस मे कर सकती हो लेकिन इसकी कीमत बहुत बड़ी है.

अंजलि ने कहा, मैं हर कीमत अदा कर दूँगी ओर वो अपने ड्रोवर मैं से 2000 के नोट की गॅडी उठा कर ले आई.

मैने कहा, ये कीमत इस दुनिया के लिए है भगवान की दुनिया मैं तो इसकी कोई कीमत नही है इसके लिए तुमको उस हालत मैं बैठना होगा जिस हालत मे इंसान इस दुनिया मे आता है.

पहले तो वो थोड़ा रुकी गई लेकिन फिर उसने अपने सारे कपड़े उतार कर एक तरफ रख दिए. फिर मैने अंजलि को आँख बंद कर के बैठने के लिए बोल दिया.

अंजलि के आँख बंद करते ही मैने गेट बंद करके अपने सारे कपड़े उतार कर कमरे की लाइट भी बंद कर दी. अंजलि के पास आकर बैठ गया ओर धूप जला दी धूप की खुसबु पूरे कमरे मैं फैल चुकी थी.

मैने अंजलि से कहा की अब तुम तैयार हो.

अंजलि ने कहा मैं तैयार हूँ मुझे क्या करना है.

मैने कहा, ये तो तुमको अब पता चल जाएगा जब मैं अपने उपर उस शक्ति को बुलाउन्गा ओर तुमको मुझसे उस शक्ति को ग्रहण करना है.

अंजलि ने कहा ठीक है.

मैं अंजलि के सामने आँख बंद करके बैठ गया ओर तरह तरह की आवाज़ निकाल कर अंजलि के हाथ पकड़ कर हिलते हुए एक दम से संत हो गया.

फिर आवाज़ को भारी करके अंजलि को हाथ पकड़ कर अपनी तरफ बुलाने लगा, जैसे जैसे अंजलि मेरी तरफ बढ़ रही थी मेरा लंड खड़ा होता जा रहा था धीरे धीरे अंजलि मेरे बिल्कुल करीब आ गयी और मेरे पैर अंजलि के पैरों से चिपकने लगे.

मैने अंजलि को और आगे आने के लिए बोला ओर वो और आगे आ गई और अब मैने अंजलि के दोनो पैरों को अपनी कमर के दोनो तरफ कर दिया.

अब अंजलि की मुलायम सी चुत मेरे लंड से लगने लगी और मेरा सीना अंजलि के सिने से चिपक ने लगा.

मैने अंजलि से कहा आज तुमको मुझमे समाना है ओर मैं तुझमे समा कर तुमको शक्ति दे दूँगा.

मैने अंजलि को थोड़ा सा उठा कर कुछ बड़बड़ाते हुए अपना लंड अंजलि की चुत पर सेट कर दिया ओर अंजलि को धीरे धीरे बैठने के लिए बोला.

अंजलि जैसे जैसे मेरी गोद मे बैठ रही थी मेरा लंड अंजलि की चुत मे घुसता जा रहा था. फिर धीरे धीरे मेरा पूरा का पूरा लंड अंजलि की चूत मैं समा चुका था, लेकिन उसने एक बार भी उः आहह नही की मेरा इतना लंबा ओर मोटा लंड भी वो इतनी आसानी से ले चुकी थी इससे ये तो पता चलगया था की अब तक वो चुद गई थी.

फिर मैने अंजलि को एक नाम बता दिया ओर कहा इस नाम को लेकर उपर नीचे होती रहो.

पहले तो अंजलि धीरे धीरे उपर नीचे हो रही थी, लेकिन जैसे जैसे उसको मज़ा आने लगा उसकी उपर नीचे होने की क्रिया तेज हो गई ओर वो तेज तेज उपर नीचे होने लगी ओर सिसकिया भरने लगी ओर मेरे लंड पर कूदने लगी, जैसे बहुत दीनो के बाद लंड मिला हो.

फिर मैने अपना एक हाथ अंजलि की छोटी छोटी चुचियों पर रख दिया. अंजलि की चुचि किसी अनार के आकर की ओर सख़्त थी.

मैने धीरे धीरे उसके स्तन को सहलाना शुरू कर दिया ओर फिर मैने अपने होठ अंजलि के होठों पर रख दिए.

फिर अंजलि को बाहों मे भर कर उसको उठा कर बेड पर लिटा कर, अब मैने अंजलि की चुत पर अपने लंड की बरसात चालू कर दी ओर मैं तेज तेज धक्के देने लगा.

फिर बीच मे अपना लंड अंजलि की चुत से निकल कर मैं अंजलि की चुत पर आ गया ओर अपने होठ अंजलि की मुलायम ओर मखमली चुत पर रख दिए.

अंजलि की चुत इतनी मुलायम ओर मखन की तरह चिकनी थी के जैसे अभी तक किसी ने उसको चोदा ना हो. लेकिन मेरे लंड को इतनी आसानी से लेने के कारण मैं खुद सोच मे पड़ गया था की ये चुदि है या नही आख़िर बात क्या है मै इसका पता लगा कर रहूँगा.

मैं अंजलि की चुत को छत छत कर सॉफ कर रहा था ओर उसके चुत को भी अपनी जीभ से छेड़ रहा था. अंजलि की चुत की फांकों ने मुझसे अंजलि की चुत की आप बीती मुझे बता दी थी की अंजलि को अभी तक किसी ने नही चोदा था.

ये तो अंजलि ने कुछ नया ट्राइ करने के चक्कर मे अपनी चुत का सत्या-नास कर दिया था, मैं बड़े मज़े से अंजलि की गुलाबी चूत को चूस रहा था ओर अंजलि बेड पर किसी नागिन की तरह बलखा रही थी.

फिर मैं अंजलि की चुत को चाटते हुए उपर बढ़ने लगा. फिर अंजलि के दोनो चुचियो का रस निचोड़ निचोड़ कर पीने लगा और अपने लंड को अंजलि की चुत मे फिर से रख दिया ओर अब अंजलि भी गांद उठा उठा कर धक्के लगाने लगी.

मैं यू ही अंजलि को चोदता रहा ओर फिर 1 घंटे बाद मेरे लंड ने बहुत सारा गाढ़ा क्रीम अंजलि की चुत मे छोड़ दिया.

अंजलि अब तक ना जाने कितनी बार झाड़ चुकी थी ओर अब वो बिल्कुल शांत्त पड़ गई थी. मैं अंजलि के उपर पूरा नंगा लेटा हुआ था ओर फिर बेहोशी का नाटक करके एक तरफ़ पड़ गया.


मेरी चचेरी बहन पूनम का प्यार

हेलो दोस्तो मेरा नाम सागर है. मैं आज अपनी ज़िंदगी का एक सच आप सब के लिए ले कर आया हूँ. ये मेरी एक अधूरी लव स्टोरी है, जिसमे मैने अपनी जान से सिर्फ़ एक बार सेक्स किया और हम दोनो हमेशा के लिए एक दूसरे के हो गये.

मुझे पूरी उमीद है की आपको मेरी ये कहानी पढ़ने मे बहुत मज़ा आएगा. तो चलिए फिर कहानी को जल्दी से शुरू करते है.

ये बात आज से दो साल पहले की है, जहाँ से ये सब शुरू हुआ था. मैं बचपन से अपनी गर्मियो की छुटटी अपने चाचा के घर मनाने जाता था. मुझे वाहा सच मे बहुत मज़ा आता था. उनकी एक बेटी थी, उसका नाम पूनम था. जब मैं उसके घर आता था 

तो वो मुझे देख कर खुश हो जाती थी.

हम दोनो बचपन से ही बहुत बनती थी. पूनम मुझसे 2 साल बड़ी थी, वो बचपन से ही बहुत सुंदर और क्यूट थी. खैर धीरे धीरे हम बड़े होने लग गये. मुझे सेक्स के बारे मे कुछ भी न्ही पता था. पर मुझे ये पता था की सेक्स लड़का और लड़की के बीच मे होता है

जब मैं 21 साल का हुआ और पूनम 23 साल की हुई. तो वो किसी परी से कम न्ही थी, वो सच मे काफ़ी खूबसूरत बन गई थी. उसे देख कर मैं सोचता था की काश ये मेरी गर्ल फ्रेंड होती तो मैं इसे सच मे बहुत प्यार करता. उसके बूब्स अब मोटे हो गये थे, जो बाहर की ओर निकले रहते थे.

उसके पतले पतले गुलाबी होंठ अब और भी सेक्सी रस्स से भर गये थे. उसके होंठो को देखते ही मूह मे पानी आ जाता था और उसके होंठो का रस्स पीने का मन होता था. उसकी पतली कमर ना जाने कैसे उसके गोल गोल और मोटी गांड
संभाल रही थी.

जब पूनम चलती थी तो उसकी गांड मटकती हुई बहुत सुंदर लगती थी. मन करता था भी दोनो च्छूतड़ो को अपने हाथो मे ले कर उन दोनो को मसल दू.. कयि बार तो ऐसा लगता था, बस अभी साली को घोड़ी बना कर इसकी गांड मे अपना लंड घुसा दू.

पर खैर मैं ऐसा सोच ही सकता था, क्योकि उसके घर पर उसे ही चोदना काफ़ी रिस्क से भरा हुआ था. फिर कुछ टाइम मेरे घर पर हमने मम्मी पापा की सालगिरा के लिए एक फंक्षन रखा. उस फंक्षन की तयारि के लिए पूनम दो दिन पहले ही आ गई.

उसको देख कर मैं खुशी से पागल हो गया. वो सच मे बहुत खूबसूरत लग रही थी. मैने तभी उसका हाथ पकड़ा और उसे सीधा अपने रूम मे ले गया. हम दोनो के बारे सब को पता था, की मैं और पूनम बचपन से ही एक दूसरे के अच्छे दोस्त है.

इसलिए किसी कोई शक न्ही हुआ, मैने अंदर आते ही डोर को अंदर से बंद कर लिया. फिर मैने उसे बेड पर बिठाया और खुद भी उसके साथ बैठ गया. फिर हम दोनो बातें करने लग गये. फिर मैने हिम्मत करके उससे पूछा.

मैं – पूनम अब तो तुम इतनी बड़ी हो गई हो, तुमने कोई अपना दोस्त बनाया या न्ही ?

पूनम – न्ही अभी तक कोई न्ही बनाया, पर तू आज ये सवाल मुझसे क्यू पूछ रहा है. मुझे तेरे इरादे ठीक न्ही लग रहे है.

मैं – क्या करूँ पूनम मैं तुम्हे बहुत पसंद करता हूँ. पर मुझे तुम ये बता दो की मैं तुम्हे पसंद हूँ या न्ही ?

पूनम ने मुझे जवाब दिया, वो मुझे आँख मार के जाने लगी. मैने उसका हाथ प्कड़ा और फिर से वो ही सवाल पूनम से पूछे.

पूनम – सागर आज तुम मुझसे ये क्यो पूछ रहे हो. मुझे तो कुछ समझ न्ही आ राहा है.

मैं – प्लीज़ तुम बता दो ना.

पूनम – अरे बुद्धु तुम मुझे अच्छे लगते हो इसलिए तो मैं तुमसे बात करना पसंद करती हूँ.

ये सुनते ही मैं खुश हो गया, और तभी मैने उसे आई लव यू काहा और उसके गोरे गाल पर एक किस कर दी. फिर हम दोनो रूम से बाहर आ गये, और फिर हम दोनो अपने अपने कामो मे लग गये.

शाम हम दोनो थोड़े फ्री से हुए, मैने दूर से ही उसे अपने रूम मे जाने का इशारा किया. पूनम थोड़ी देर बाद इधर उधर देख कर मेरे रूम मे चली गई. फिर मैने अपने होंठ उसके होंठो पर रखे और ज़ोर ज़ोर से उसके होंठो को मैं चूसने लग गया.

उसके होंठो का रस्स पीने मे सच मे मुझे बहुत मज़ा आरा था. मुझे ऐसा लग रहा था, मानो मैं कोई गुलाब चूस रहा हूँ. करीब 10 मिनिट तक हम दोनो एक दूसरे के होंठो को चूस्ते रहे और फिर उसने मुझे पीछे को धक्का दिया और मुझे दूर करके रूम से निकल कर भाग गई.

कसम उसके होंठो को चूस कर मेरी प्यास बुझ गई थी. मुझे उसके होंठो को चूसने का मन फिर से करने लग गया था. अगले दिन फिर शाम को सब लोग बाहर फंक्षन मे गये थे. घर पर मैं, पूनम और कुछ और लोग थे.

मैने फिर से उसे मेरे रूम मे जाने को कहा, पूनम थोड़ी देर मे मेरे रूम मे आ गई. उसके आते ही मैने उसे अपनी बाहों मे भर लिया और उसे ज़ोर ज़ोर से इधर उधर चूमने और चाटने लग गया. इस बार वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.
मैने मौका देख कर अपना एक हाथ उसके बूब्स पर रखा जिससे वो सिहर उठी. उसने मेरा हाथ हटाने की कोशिश करी, पर मैं अब काहा मानने वाला था, इसलिए मैने उसका हाथ को दूर करके उसके दोनो बूब्स को पकड़ कर मसलने लग गया.

पूनम पागल सी होने लग गई और बोली – हा सागर मसल दो मेरे राजा ये तुम्हारे आहह आहह उ मम्मी आहह मस्लो और ज़ोर से मसल दो प्लीज़.

उसकी हालत देख कर मैं भी गरम हो गया और मैने उसका कुर्ता उपर किया और अपना हाथ अंदर करके उसके बूब्स बाहर निकाल दिए. मैने अपना मूह उसके बूब्स पर रखा और ज़ोर ज़ोर से उसके बूब्स को चूसने लग गया. उसके बूब्स सच मे काफ़ी सॉफ्ट थे.

मैं उसके बूब्स चूसने मे मस्त था, और पूनम मुझसे अपने बूब्स चुसवाने मे मस्त हो रही थी. तभी मुझे उसकी मम्मी यानी मेरी चाची की आवाज़ आई. उनकी आवाज़ सुनते ही मैने एक दम से पूनम को छोड़ दिया और अपनी अलमारी मे कुछ समान देखने का बहाना करने लग गया.

पूनम ने भी अपने कपड़े ठीक किए और वाहा से वो चली गई. अब हम दोनो मे पूरी आग लगी हुई थी. अब ये आग ज़रूर सेक्स करने से ही शांत होनी थी. खैर मैं भी अब फंक्षन मे जाने के लिए तयार होने लग गया. मैं अच्छे से तयार हो कर बाहर आया.

पर जब मैने पूनम को देखा तो उसे देखता ही रह गया, वो किसी कयामत से कम न्ही लग रही थी. उसने पटियाला पंजाबी ब्लॅक सूट डाला हुआ था. उपर और कमर से सूट एक दम टाइट था. जिस वजह से उसके मोटे मोटे बूब्स और कमर बहुत ही मस्त लग रही थी.

मुझे तो सच मे उसको देख कर मज़ा ही आ गया. मेरी आँख उस पर ही थी, फिर किचन मे गई. मैं भी झट से उसके पीछे भाग कर किचन मे चला गया. किचन मे उसके और मेरे सिवा और कोई न्ही था.

मैने तभी उसे दीवार से लगा कर उसे अपनी बाहों मे भर लिया. फिर मैने बिना कुछ बोले ही उसके होंठो को अपने होंठो मे लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गया. उसके होंठ का रस्स था की ख़तम होने का नाम ही न्ही लेरा था. फिर हम दोनो अलग हुए और फंक्षन मे चले गये.

रात को जब सब वापिस सोने के लिए जा रहे थे, तो मैने पूनम को अपने साथ सोने के लिए काहा पर उसने और उसकी मम्मी ने मेरे साथ सोने से मना कर दिया. मेरा दिल सा टूट गया, मैं अपने रूम मे चला गया. पर मुझे उस रात नींद न्ही आ रही थी.

आँखो मे पूनम का चेहरा और उसके नंगे बूब्स घूम रहे थे. मुझे लग रहा था की आज की रात शायद मुझे जाग कर ही काटनी होगी. खैर मुझे नींद न्ही आ रही थी, पर फिर भी मैं सोने की कोशिश कर रहा था. करीब 30 मिनिट बाद मुझे मेरे रूम का दरवाजा खुलता हुआ महसूस हुआ.

मैं उठा तो देखा मेरे रूम मे पूनम नाइटी डॉल कर आ रही थी. मैने उसे देखते ही बेड से उछल कर उसके पास गया. और मैने डोर को अंदर से बंद किया और उसे अपनी बाहों मे भर लिया, तभी पूनम बोली.

पूनम – सागर आई लव यू मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ. ना जाने अब मैं कैसे तुम्हारे बिना जीऊंगी. तुमने मुझे 2 दीनो मे जीतना प्यार दिया है, शायद कभी मैने इतना प्यार पाया हो. इसलिए आज से मैं तुमने अपना सब कुछ दे रही हूँ.

मैं – आई लव यू सो मच मेरी पूनम. मैं वादा करता हूँ मैं भी जिंदगी भर तुम्हारा ही रहूँगा,

पूनम – मेरी जान हम दोनो के पास आज रात ही है. सागर तुमने आज रात मेरे साथ जो करना है वो कर लो. क्योकि मैं कल सुबह ही यहाँ से जाने वाली हू.

ये कहते ही उसने मेरे होंठो को चूसने लग गई. और ज़ोर ज़ोर से मेरे होंठो को अपने होंठो से दबा दबा कर चूस रही थी. उसके बाद मैने भी उसे अपनी बाहों मे अच्छे से पकड़ लिया और खूब अच्छे से उसके बूब्स को मसलने लग गया.

मेरे दोनो हाथ उसके पूरे जिस्म पर घूम रहे थे. मैने महसूस किया की पूनम बहुत गरम हो रही है. इसलिए मैने उसे अपनी गोद मे उठाया और उसे बेड पर गिरा दिया. फिर मैं उसके उपर आया और उसके होंठो और उसकी गर्रदन को चूसने लग गया.

मैने धीरे धीरे उसकी नाइटी उसके जिस्म से अलग कर दी. अब वो मेरे सामने पिंक ब्रा और पिंक पेंटी मे थी. सच मे साली क्या कयामत लग रही थी. उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया.

मैने जल्दी से ही उसकी ब्रा और पेंटी भी जल्दी से उतार दी. अब वो मेरे सामने एक दम नंगी थी. मैने उसके नंगे बूब्स को देख कर पागल हो गया, मैने उसके बूब्स पर टूट पड़ा. फिर मैने उसके बूब्स को चूस्ते हुए उसके चिकने पेट पर आ गया.

मैं उसके पेट को अपनी जीब से चाटता हुआ नीचे उसकी चूत पर आ गया. उसकी चुत मे से पहले से ही रस्स टपक टपक कर नीचे गिर रहा था. मैने अपनी जीब से उसकी चूत को अच्छे से चाट चाट कर सॉफ कर दिया. फिर मैने अपनी जीब उसकी चुत मे डाली और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत को अपनी जीब से ही चोद्ने लग गया.

देखते ही देखते उसने मेरी जीब पर अपनी चूत का पानी एक बार और निकाल दिया. फिर मैने उसकी चूत का सारा पानी पिया और उसकी छूट को चाट चाट कर सॉफ कर दिया. अब मैने महसूस किया की पूनम ने मेरा लंड अपने हाथ मे पकड़ लिया.

मैं खड़ा हुआ और पूनम ने मुझे पूरा नंगा कर दिया. उसने मेरा लंड देखा और वो डर सी गई. पर जब मैने उसे समझाया तो उसने मेरा लंड अपने मूह मे ले लिया. उसे मेरा लंड पसंद आया और वो ज़ोर ज़ोर से मेरे लंड को चूसने लग गई. वो मेरे लंड को अच्छे से चूस रही थी.

फिर मैने उसकी दोनो टाँगे खोली और अपना लंड उसकी चुत पर लगा कर उसकी चूत को अपने लंड से मसलने लग गया. जब वो थोड़ी सी मस्त हुई, तभी मैने अपना लंड उसकी चूत मे डॉल दिया. दर्द के मारे वो चिल्लाने लगी, पर तभी मैने उसके मूह पर अपना हाथ रख दिया.

थोड़ी देर मे वो शांत हुई और मैने फिर एक और धक्के से अपना पूरा लंड उसकी चूत मे उतार दिया. मैने नीचे देखा तो उसकी चुत मे से खून निकल रहा था. जिसे देख कर मैं जोश मे आया और मैने फुल स्पीड मे चुदाई शुरू कर दी. हम दोनो का पानी एक साथ उसकी चूत मे ही निकल गया.

उस रात मैने उसे 4 बजे तक जम कर 4 बार चोदा. फिर अगले दिन वो अपने घर चली गई. उस दिन के बाद हम दोनो दिन रात फोन पर बातें करने लग गये. पर 7 महीने बाद उसका मुझे फोन आया, वो फोन पर रो रही थी.
उसने मुझे खा की उसकी शादी तय हो गई है. मैं बहुत उदास हो गया, मैं उसकी शादी मे गया और उसे अपनी आँखो के सामने किसी और की होते हुए देखा.

पर आज भी मुझे उसकी बहुत याद आती है. आज मैं एक दम अकेला हूँ, मैने अभी तक उससे एक बार भी कॉंटॅक्ट करने की कोशिश न्ही करी. मुझे उमीद है आपको मेरी कहानी पसंद आई होगी.

तो चलिए जल्दी ही मिलता हूँ, अपनी एक और नयी कहानी के साथ. तब तक के लिए गुड बाइ टेक केयर.

जीजू का बड़ा लंड

दीदी घोड़ी बनी हुई थी और जीजू पीछे से उसकी गाँड चोद रहे थे। मुझे सिरहन सी उठने लगी। जीजू ने अब दीदी के बोबे मसलने चालू कर दिये थे… मेरे हाथ स्वत: ही मेरे स्तनों पर आ गये… मेरे चेहरे पर पसीना आने लगा… जीजू को दीदी की चुदाई करते पहली बार देखा तो मेरी चूत भी गीली होने लगी थी। इतने में जीजू झड़ने लगे… उसके वीर्य की पिचकारी दीदी के सुन्दर गोल गोल चूतड़ों पर पड़ रही थी…मैं दबे पाँव वहाँ से हट गई और नीचे की सीढ़ियां उतर गई। मेरी साँसें चढ़ी हुई थीं। धड़कनें भी बढ़ी हुई थीं। दिल के धड़कने की आवाज़ कानों तक आ रही थी।मैं बिस्तर पर आकर लेट गई… पर नींद ही नही आ रही थी। मुझे रह-रह कर चुदाई के सीन याद आ रहे थे। मैं बेचैन हो उठी और अपनी चूत में ऊँगली घुसा दी… और ज़ोर-ज़ोर से अन्दर घुमाने लगी। कुछ ही देर में मैं झड़ गई।

दिल कुछ शान्त हुआ। सुबह मैं उठी तो जीजू दरवाजा खटखटा रहे थे। मैं तुरन्त उठी और कहा,” दरवाजा खुला है…।” जीजू चाय ले कर अन्दर आ गये। उनके हाथ में दो प्याले थे। वो वहीं कुर्सी खींच कर बैठ गये। “मजा आया क्या…?” मैं उछल पड़ी… क्या जीजू ने कल रात को देख लिया था “जी क्या… किसमें… मैं समझी नहीं…?” मैं घबरा गई “वो बाद में… आज तुम्हारी दीदी को दो दिन के लिए भोपाल हेड-क्वार्टर जाना है… अब आपको घर सँभालना है…” “हम लड़कियाँ यही तो करती हैं ना… फिर और क्या-क्या सँभालना पड़ेगा…?” मैंने जीजू पर कटाक्ष किया। “बस यही है और मैं हूँ… सँभाल लेगी क्या…?” जीजू भी दुहरी मार वाला मज़ाक कर रहे थे

“जीजू… मजाक अच्छा करते हो…!” मैंने अपनी चाय पी कर प्याला मेज़ पर रख दिया। मैंने उठने के लिए बिस्तर पर से जैसे ही पाँव उठाए, मेरी स्कर्ट ऊपर उठ गई और मेरी नंगी चूत उन्हें नज़र आ गई। मैंने जान-बूझ कर जीजू को एक झटका दे दिया। मुझे लगा कि आज ही इसकी ज़रूरत है। जीजू एकटक मुझे देखने लगे… मुझे एक नज़र में पता चल गया कि मेरा जादू चल गया। मैंने कहा,”जीजू… मुझे ऐसे क्या देख रहे हो…;“कुछ नही… सवेरे-सवेरे अच्छी चीजों के दर्शन करना शुभ होता है…!” मैन तुरंत जीजू का इशारा समझ गई… और मन ही मन मुस्कुरा उठी।;“आपने सवेरे-सवेरे किसके दर्शन किये थे?” मैंने अंजान बनते हुए पूछा… लगा कि थोड़ी कोशिश से काम बन जायेगा। पर मुझे क्या पता था कि कोशिश तो जीजू खुद ही कर रहे थे।दीदी दफ्तर से आकर दौरे पर जाने की तैयारी करने लगी… डिनर जल्दी ही कर लिया… फिर जीजू दीदी को छोड़ने स्टेशन चले गये। मैंने अपनी टाईट जीन्स पहन ली और मेक अप कर लिया। जीजू के आते ही मैंने झील के किनारे घूमने की फ़रमाईश कर दी। वो फ़िर से कार में बैठ गये… मैं भी उनके साथ वाली सीट पर बैठ गई। जीजू मेरे साथ बहुत खुश लग रहे थे। कार उन्होंने उसी दुकान पर रोकी, जहाँ हम रोज़ कोल्ड-ड्रिंक लेते थे। आज कोल्ड-ड्रिंक जीजू ने कार में ही मंगा ली। “हाँ तो मैं कह रहा था कि मजा आया था क्या?” मुझे अब तो यकीन हो गया था कि जीजू ने मुझे रात को देख लिया था। “हां… मुझे बहुत मज़ा आया था…” मैंने प्रतिक्रिया जानने के लिए तीर मारा… जीजू ने तिरछी निगाहों से देखा… और हँस पड़े – “अच्छा… फिर क्या किया…“आप बताओ कि अच्छा लगने के बाद क्या करते हैं…” जीजू का हाथ धीरे धीरे सरकता हुआ मेरे हाथों पर आ गया। मैंने कुछ नही कहा… लगा कि बात बन रही है। “मैं बताऊँगा तो कहोगी कि अच्छा लगने के बाद आईस-क्रीम खाते हैं…” और हँस पड़े और मेरा हाथ पकड़ लिया। मैं जीजू को तिरछी नजरों से घूरती रही कि ये आगे क्या करेंगे। मैंने भी हाथ दबा कर इज़हार का इशारा किया।हम दोनों मुस्कुरा पड़े। आँखों आँखों में हम दोनों सब समझ गये थे… पर एक झिझक अभी बाकी थी। हम घर वापस आ गये।&>जीजू अपने कमरे में जा चुके थे… मैं निराश हो गई… सब मज़ाक में ही रह गया। मैं अनमने मन से बिस्तर पर लेट गई। रोज की तरह आज भी मैंने बिना पैन्टी के एक छोटी सी स्कर्ट पहन रखी थी… मैंने करवट ली और पता नही कब नींद आ गई… रात को अचानक मेरी नींद खुल गई… जीजू हौले से मेरे बोबे सहला रहे थे… मैं रोमांचित हो उठी… मन ने कहा… हाय! काम अपने आप ही बन गया… मैं चुपचाप अनजान बन कर लेटी रही… जीजू ने मेरी स्कर्ट ऊंची कर दी और नीचे से नंगी कर दिया। पंखे की हवा मेरे चूतड़ों पर लग रही थी। जीजू के हाथ मेरे चिकने चूतड़ों पर फ़िसलने लगे… जीजू धीरे से मेरी पीठ से चिपक कर लेट गये… उनका लण्ड खड़ा था… उसका स्पर्श मेरी चूतड़ों की दरार पर लग रहा था… उसके सुपाड़े का चिकनापन मुझे बड़ा प्यारा लग रहा था। उसने मेरे बोबे जोर से पकड़ लिए और लण्ड मेरी गाँड पर दबा दिया। मैंने लण्ड को गाँड ढीली कर के रास्ता दे दिया… और सुपाड़ा एक झटके में छेद के अन्दर था।
जीजू… हाय रे… मार दी ना… मेरी पिछाड़ी को…” मेरे मुख से सिसकारी निकल पड़ी। उसका लण्ड गाँड़ की गहराईयों में मेरी सिसकारियों के साथ उतरता ही जा रहा था। “रीता… जो बात तुझमें है… तेरी दीदी में नहीं है…” जीजू ने आह भरते हुए कहा। लण्ड एक बार बाहर निकल कर फिर से अन्दर घुसा जा रहा था। हल्का सा दर्द हो रहा था। पर पहले भी मैं गाँड चुदवा चुकी थी। अब जीजू ने अपनी ऊँगली मेरी चूत में घुसा दी थी… और दाने के साथ मेरी चूत को भी मसल रहे थे… मैं आनन्द से सराबोर हो गई। मेरी मन की इच्छा पूरी हो रही थी… जीजू पर दिल था… और मुझे अब जीजू ही चोद रहे थे। “मत बोलो जीजू बस चोदे जाओ… हाय कितना चिकना सुपाड़ा है… चोद दो आपकी साली की गाँड को…” मैं बेशर्मी पर उतर आई थी…उसका मोटा लण्ड तेजी से मेरी गाँड में उतराता जा रहा था… अब जीजू ने बिना लण्ड बाहर निकाले मुझे उल्टी लेटा कर मेरी भारी चूतड़ों पर सवार हो गये। और हाथों के बल पर शरीर को ऊँचा उठा लिया और अपना लण्ड मेरी गाँड पर तेजी से मारने लगे… उनका ये फ्री-स्टाईल चोदना मुझे बहुत भाया। राजू… मेरी चूत का भी तो ख्याल करो… या बस मेरी गाँड ही मारोगे…” मैंने जीजू को घर के नाम से बुलाया। “रीता… मेरी तो शुरू से ही तुम्हारी गाँड पर नजर थी… इतनी प्यारी गाँड… उभरी हुई और इतनी गहरी… हाय मेरी जान…”जीजू ने लण्ड बाहर निकाल लिया और चूत को अपना निशाना बनाया… “जान… चूत तैयार है ना… लो… ये गया… हाय इतनी चिकनी और गीली…” और उसका लण्ड पीछे से ही मेरी चूत में घुस पड़ा… एक तेज मीठी सी टीस चूत में उठी… चूत की दीवारों पर रगड़ से मेरे मुख से आनन्द की सीत्कार निकल गई “हाय रे… जीजू मर गई… मज़ा आ गया… और करो…।” जीजू का लण्ड गाँड मारने से बहुत ही कड़ा हो रहा था… जीजू के चूतड़ खूब उछल-उछल कर मेरी चूत चोद रहे थे। मेरी चूचियाँ भी बहुत कठोर हो गईं थीं।मैंने जीजू से कहा,”जीजू… मेरी चूचियाँ जोर से मसलो ना… खींच डालो…!” जीजू तो चूचियाँ पहले से ही पकड़े हुए थे… पर हौले-हौले से दबा रहे थे… मेरे कहते ही उन्हें तो मज़ा आ गया… जीजू ने मेरी दोनो चूचियाँ मसल के, रगड़ के चोदना शुरू कर दिया। मेरी दोनों चूतड़ों की गोलाईयाँ उसके पेडू से टकरा रहीं थीं… लण्ड चूत में गहराई तक जा रहा था… घोड़े की तरह उसके चूतड़ धक्के मार-मार कर मुझे चोद रहे थे।मेरे पूरे बदन में मीठी-मीठी लहरें उठ रहीं थीं… मैं अपनी आँखों को बन्द करके चुदाई का भरपूर आनन्द ले रही थी। मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी… जीजू के भी चोदने से लग रहा था कि मंज़िल अब दूर नहीं है। उसकी तेजी और आहें तेज होती जा रही थी… उसने मेरी चूचक जोर से खींचने चालू कर दिये थे… मैं भी अब चरमसीमा पर पहुँच रही थी। मेरी चूत ने जवाब देना शुरू कर दिया था… मेरे शरीर में रह-रह कर झड़ने जैसी मिठास आने लगी थी। अब मैं अपने आप को रोक ना सकी और अपनी चूत और ऊपर दी… बस उसके दो भरपूर लण्ड के झटके पड़े कि चूत बोल उठी कि बस बस… हो गया।“जीजूऽऽऽऽऽ बस…बस… मेरा माल निकला… मै गई… आऽऽऽऽऽऽईऽऽऽऽऽअऽअऽऽऽआ…” मैंने ज़ोर लगा कर अपनी चूचियाँ उससे छुड़ा ली… और बिस्तर पर अपना सर रख लिया… और झड़ने का मज़ा लेने लगी… उसका लण्ड भी आखिरी झटके लगा रहा था। फिर…… आह्… उसका कसाव मेरे शरीर पर बढ़ता गया और उन्होंने अपना लण्ड बाहर खींच लिया। झड़ने के बाद मुझे चोट लगने लगी थी… थोड़ी राहत मिली… अचानक मेरे चूतड़ और मेरी पीठ उसके लण्ड की फ़ुहारों से भीग उठी… जीजू झड़ने लगे थे… रह-रह कर कभी पीठ पर वीर्य की पिचकारी पड़ रही थी और अब मेरे चूतड़ों पर पड़ रही थी। जीजू लण्ड को मसल-मसल कर अपना पूरा वीर्य निकाल रहे थे।जब पूरा वीर्य निकल गया तो जीजू ने पास पड़ा तौलिया उठाया और मेरी पीठ को पौंछने लगे…”रीता… तुमने तो आज मुझे मस्त कर दिया” जीजू ने मेरे चेहरे को किस करते हुए कहा… मैं चुदने की खुशी में कुछ नहीं बोली… पर धन्यवाद के रूप में उन्हें फिर से बिस्तर पर खींच लिया… मुझे अभी और चुदना था… इतनी जल्दी कैसे छोड़ देती… दो तीन दौर तो पूरा करती… सो जीजू के ऊपर चढ़ गई… जीजू को लगा कि पूरी रात मज़े करेंगे… जीजू अपना प्यार का इकरार करने लगे… “मेरी रानी… तुम प्यारी हो… मैं तो तुम पर मर मिटा हूँ… जी भर कर चुदवा लो… अब तो मैं तुम्हारा ही हूँ…” और दुगुने जोश से उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में कस लिया… मैं आज तो रात-भर स्वर्ग की सैर करने वाली थी…

बड़ी मुश्किल है लंड मुंह के अंदर

<p>मेरा नाम सुनील है और मैं कोलकाता का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 30 वर्ष है और मेरा एक साड़ी का कारोबारी है। मेरा साड़ी का बहुत बड़ा काम है और मैं उसे अन्य शहरों में भी भेजता हूं। मेरे पास लोग साड़ियां लेने के लिए आते हैं क्योंकि मैं बहुत कम दामों पर साड़ियां देता हूं। इसलिए मेरी डिमांड बहुत है और मेरा काम भी अच्छा चलता है। एक दिन मेरा दोस्त मनोज मेरी दुकान पर आया और जब वह मेरी दुकान पर आया तो मैंने उसे कहा कि तुम मुझे बहुत समय बाद मिल रहे हो। वह कहने लगा कि मुझे समय ही नहीं मिल पाता है। इसलिए मैं तुम्हारे पास नहीं आ पाता हूं। मैंने उसे पूछा आज तुम मेरी दुकान पर कैसे आ गये। वह कहने लगा कि मैं तुम्हारे पास कुछ साड़ियां लेने के लिए आया था। मैंने उससे पूछा कि तुम किसके लिए साड़ी ले रहे हो, तुम्हारी तो अभी शादी भी नहीं हुई है। वह कहने लगा कि मेरी बहन ने एक एन.जी.ओ खोला है और वह विदेश से आकर गरीब लोगों की मदद कर रही है। वह उन्हें पढ़ाती भी है और अपना एनजीओ भी चलाती है। यदि किसी की स्थिति ठीक नहीं है तो वह उनकी आर्थिक रूप से भी मदत करती है। या फिर उन्हें कुछ ना कुछ सामान दे दिया करती है। मैंने उसे कहा की ये तो बहुत ही अच्छी बात है। लगता है मुझे भी तुम्हारी बहन के साथ जुड़ना पड़ेगा। क्योंकि मैं भी कई दिनों से कुछ ऐसा ही करने की सोच रहा था। अपने काम में कुछ ज्यादा ही बिजी हो गया हूं इस वजह से मुझे अपने लिए भी समय नहीं मिल पा रहा है और मैं कुछ नया भी करना चाह रहा था, जिससे की गरीब लोगों की मदद कर सकूं। मनोज ने मुझसे कहा कि फिर तुम मेरी बहन से संपर्क कर लेना। वह तुम्हारी मदद जरूर करेगी। मैंने उसे कहा कि मुझे उससे मिलने का समय तो नहीं मिल पाएगा लेकिन तुम उसे मेरी दुकान पर भेज देना।</p>
<p>मैंने मनोज से उसकी बहन का नाम पूछ लिया। उसका नाम रितिका है। मैंने मनोज को साड़ियां दे दी और उसे उन साड़ियों के पैसे नहीं लिए। क्योंकि मैंने कहा है जब तुम्हारी बहन इतना अच्छा काम कर रही है तो थोड़ा बहुत मदद तो मैं भी अपनी तरफ से भी दे सकता हूं। वह मुझसे बहुत खुश हुआ और कहने लगा कि यह तो तुमने बहुत ही अच्छा काम किया है। इस बारे में मैं अपनी बहन को अवश्य बताऊंगा। मनोज ने इस बारे में अपनी बहन से बात की थी। वह बहुत ही खुश हुई और कहने लगी कि यह तो बहुत ही अच्छी बात है और एक दिन मनोज और रितिका मेरी दुकान में आ गए। जब रितिका मुझसे मिली तो वह कहने लगी कि तुमने बहुत ही अच्छा काम किया है। भैया ने मुझे तुम्हारे बारे में बताया कि तुमने उन्हें साड़ियां फ्री में दी है और उसके बदले उनसे एक भी रुपया नहीं लिया। मैं जब रितिका से उसके एन.जी.ओ  के बारे में पूछा तो उसने बताया कि मैं गरीब लोगों की मदद कर रही हूं और मैं जब से विदेश से पढ़ाई करके लौटी हूं तो तब से मैं गरीब लोगों की मदद कर रही हूं। इसलिए मैंने इस बारे में अपने घर में बात की तो मेरे घरवालों ने मुझे बहुत ही सपोर्ट किया और उन्होंने मेरा बहुत ज्यादा साथ दिया। मैं रितिका से बहुत ज्यादा प्रभावित था और मैंने उससे पूछा कि तुमने कहीं पर ऑफिस लिया है। वह कहने लगी कि हां मैंने इसके लिए बकायदा एक ऑफिस लिया हुआ है और वही से मैं कर रही हूं। मेरे साथ में कई लोग जुड़ चुके हैं और यदि तुम्हें भी अच्छा लगे तो तुम मेरे साथ जुड़ जाना और तुम किसी भी प्रकार से हमारी मदद कर सको तो यह हमारे लिए बहुत ही अच्छा होगा। अब मैं रितिका के ऑफिस में चला गया। जब उसने मुझे देखा तो वह बहुत खुश हुई और कहने लगी कि आज तुम हमारे ऑफिस में आ गए हो तो हमारे लिए खुशी की बात है और जब मैं उनके साथ गया तो वह लोग स्कूल में प्रोग्राम करवा रहे थे। वहां पर उन्होंने गरीब बच्चों को कुछ पैसे भी दिए थे। मुझे उनके साथ काम करके बहुत अच्छा लगा। मैंने रितिका को कुछ पैसे दे दिए और उसे कहा कि तुम इसे गरीब बच्चों की पढ़ाई में डोनेट कर देना। वह बहुत ही खुश हुई और कहने लगी कि तुम एक अच्छे व्यक्ति हो। जल्द ही सब लोग इस तरीके से अपनी जिम्मेदारियां लेते तो कितना अच्छा होगा। रितिका और मैं अक्सर एनजीओ के सिलसिले में मिल जाया करते थे और ना जाने हम दोनों के बीच में कब नजदीकियां बढ़ती चली गई पता ही नहीं चला। वह भी अक्सर मेरी दुकान में आ जाया करती थी और मैं भी उससे मिल लिया करता था। अब हम दोनों बहुत बातें करने लगे और जब मुझे समय मिलता तो मैं रितिका के साथ घूमने भी चला जाता था।</p>



<p>मुझे नहीं पता था कि हम दोनों के बीच इतनी नजदीकियां बढ़ जाएगी और रितिका मेरे इतने करीब आ जाएगी। वह मेरे अब कुछ ही ज्यादा ही करीब आ चुकी थी और मुझे उसके साथ रहना बहुत ही अच्छा लगता था। एक बार मैं उसके ऑफिस में गया तो उस दिन उसके ऑफिस में कोई भी नहीं था। मैं उसके बगल में ही बैठा हुआ था और जब मैं उसके बगल में था तो मैंने उसके पैरों को सहलाना शुरू कर दिया। वह भी पूरी उत्तेजना में आ गई और उसने तुरंत ही मेरे होठों को अपने होठों में लेकर किस करना शुरू कर दिया। वह इतने अच्छे से मेरे होठों को चूस रही थी कि मेरा शरीर अब गर्म होने लगा और मेरे अंदर की उत्तेजना जागने लगी थी। मुझे बड़ा ही अच्छा लगता जब मैं उसके होठों को किस कर रहा था और रितिका भी मुझे किस कर रही थी। जैसे ही मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरु किया तो वह पूरे मूड में आ गई और अब मैंने उसके कपड़े खोल दिए। जब मैंने उसके स्तन देखे तो वह बहुत ही ज्यादा बडे थे। मुझे उन्हें देखकर बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में समा लिया और उन्हें अच्छे से चूसने लगा। उसकी योनि से भी गिला निकलने लगा था और मैंने जैसे ही उसकी योनि में उंगली लगाई तो वह पूरी गीली हो चुकी थी। मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए उसके ऑफिस में रखे सोफे के ऊपर उसे लेटा दिया। मैने उसकी योनि में जब अपना लंड डाला तो उसकी सील टूट गई। मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि वह सील पैक होगी लेकिन अब मैं उसे बड़ी तेजी से चोद रहा था।</p>

<p>वह मेरा पूरा साथ दे रही थी उसकी योनि से बहुत तेजी से खून निकल रहा था। वह मेरा पूरा साथ दे रही थी मैंने उसे इतनी तीव्रता से चोदना शुरू किया कि उसका शरीर पूरा गर्म होने लगा। वह मुझे कहने लगी कि अब मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है तुम्हारा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा है। उसने अपने दोनों पैरों को और भी चौड़ा कर लिया। मैंने उसे अब बडी तीव्रता से धक्के देने शुरू कर दिया। मैंने उसे इतनी तेज तेज झटके  दिए कि उसका शरीर पूरा हिल रहा था मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था। वह भी पूरे मजे ले रही थी जब उसका झड़ गया तो वह शांत लेटी रही और उसने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर रखा था। मैं उसे अभी भी उतनी ही तेजी से धक्के दे रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने उसे अपने ऊपर बैठा दिया और जब वह मेरे लंड के ऊपर बैठी तो मैं उसे बड़ी तेजी से झटके देने लगा। मैने उसके स्तन मुंह में ले लिए। अब वह पूरी उत्तेजना में आ गई और वह भी अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे करने लगी। उसे बहुत ही मजा आ रहा था जब वह अपने चूतडो को ऊपर नीचे करती जा रही थी। मैंने उसकी गांड को अपने हाथों से पकड़ रखा था और उसे धक्के दिए जा रहा था। उसे मैं इतनी तेजी से धक्के देते जिससे उसका शरीफ पूरा गरम होने लगा और वह भी मजे में आने लगी। अब वह भी बड़ी तेजी से अपने चूतडो को ऊपर नीचे कर रही थी और मैं उसके स्तनों को अपने मुंह में ले रहा था। उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और इतनी तेज तेज वह अपने चूतडो को ऊपर नीचे कर रही थी कि मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था। मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मैंने तुरंत ही अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह के अंदर डाल दिया। उसने मेरे लंड को अपने गले तक उतारते हुए उसे बहुत ही अच्छे से सकिंग करने लगी। वह इतने अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी मेरा वीर्य उसके मुंह में ही गिर गया।</p>